ईश्वरीय दूत और अनुसरण
 

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ईश्वर ने मनुष्य को परिपूर्णता की ओर ले जाने की जो व्यवस्था की थी और जिसके अतंर्गत उसने दूत भेजे और उन्होंने कल्याण व परिपूर्णता के साधनों से मनुष्य को अवगत कराया तो
यदि सारे मनुष्य उन साधनों और ईश्वर की इस कृपा से लाभान्वित होते तो निश्चित रूप से स्वर्ग धरती पर उतर आता अर्थात यह पूरा संसार पवित्रता का
उदाहरण होता और भ्रष्टाचार व पाप तथा बुराई का कहीं कोई चिन्ह नहीं होता किंतु हम देखते हैं कि
बहुत से लोग न तो अपनी बुद्धि की सुनते हैं और न ही ईश्वरीय दूतों के संदेशों पर ध्यान देते हैं और इसीलिए बुराईयों में डूब जाते हैं अब
यदि ईश्वर कोई ऐसी व्यवस्था करता जिससे पूरे संसार में कोई बुराई न कर पाता तो फिर मनुष्य से चयन का अधिकार छिन जाता जिसके बाद फिर स्वर्ग व नर्क की पूरी
व्यवस्था अर्थहीन हो जाती। अर्थात यदि ईश्वर अपनी शक्ति से इस संसार से बुराई मिटा देता तो फिर चयन शक्ति के
स्वामी मनुष्य को इस संसार में भेजने और उसकी परीक्षा लेकर उसे दंड या पुरस्कार देने की पूरी ईश्वरीय व्यवस्था ही चरमरा जाती।
इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि मनुष्य में अवज्ञा व पाप में रूचि का मुख्य कारण वास्तव में उसके भीतर चयन शक्ति की उपस्थिति है।
यद्यपि ईश्वर का मूल उद्देश्य यह नहीं था बल्कि उसका मूल उद्देश्य मनुष्य की परिपूर्णता है किंतु चूंकि मूल उद्देश्य की पूर्ति के लिए मनुष्य के पास अधिकार व चयन शक्ति का होना आवश्यक है
इसलिए इस अधिकार व चयन शक्ति के ग़लत प्रयोग द्वारा मनुष्यों का विनाश व पतन संभव है
ईश्वर चाहता है कि सारे लोग सत्यवादी व भले हों किंतु सच्चाई का रास्ता उन्होंने स्वंय चुना हो और किसी दूसरी शक्ति ने उन्हें इस पर विवश न किया हो।
क्योंकि यदि दूसरी शक्ति उन्हें इस पर विवश करेगी तो फिर उनकी भूमिका का कोई महत्व नहीं रहेगा।
ईश्वरीय दूतों के संदर्भ में एक शंका यह भी की जाती है कि इस बात के दृष्टिगत कि ईश्वर यह चाहता है कि
मनुष्य अधिक से अधिक उच्च श्रेणी व परिपूर्णता तक पहुंचे तो क्या यह उचित नहीं था कि ईश्वर अपने दूतों द्वारा मनुष्य को इस प्रकृति में छुपे हज़ारों रहस्यों से
अवगत करा देता जिससे मानव समाज की प्रगति की गति तेज़ होती। अर्थात जब ईश्वरीय दूतों को प्रकृति के समस्त रहस्यों का ज्ञान था तो
उन्होंने मानव जीवन को सरल बनाने वाले इन साधनों के आविष्कार में मनुष्य की सहायता क्यों नहीं की। आज मनुष्य जिस प्रकार के आधुनिक साधनों से लाभ उठा रहा है
वह साधन ईश्वरीय दूतों के काल में क्यों नहीं थे? क्योंकि ईश्वरीय दूतों ने इन साधनों के आविष्कार में मनुष्य की सहायता नहीं की और क्यों इस प्रकार के रहस्यों से पर्दा नहीं उठाया क्योंकि
यदि वह ऐसा करते तो मनुष्य के जीवन को सुविधाजनक बनाने वाले आधुनिक साधनों से इतने वर्षों तक मानव समाज वंचित न रहता।
यह अत्यधिक महत्वपूर्ण शंका है इस शंका और इसके उत्तर पर अगले कार्यक्रम में विस्तार से चर्चा करेंगे।