दुआए जौशन कबीर

मख़्सूस 22 रमज़ान को पढ़ी जाने वाली 

1-20 21-40 41-60 61-80 81-100

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

(1) ऐ माबूद, मैं तुझ से तेरे नाम के वास्ते से सवाल करता हूँ, ऐ अल्लाह, ऐ बख़्शने वाले ऐ मेहरबान ऐ करम वाले ऐ ठहरने वाले ऐ बड़ाई वाले। ऐ सबसे पहले ऐ इल्म वाले ऐ बुर्दबार, ऐ हिकमत वाले - तू पाक है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, फ़रयाद सुन, फ़रयाद सुन, हमें आग से निजात दे ऐ परवरदिगार

 

﴿۱﴾اَللّٰھُمَّ إِنِّی أَسْئَلُکَ بِاسْمِکَ یَا اللهُ، یَا رَحْمنُ، یَا رَحِیمُ، یَا کَرِیمُ، یَا مُقِیمُ یَا عَظِیمُ یَا قَدِیمُ یَا عَلِیمُ یَا حَلِیمُ یَا حَکِیمُ سُبْحانَکَ یَا لاَ إِلہَ إِلاَّ أَنْتَ، الْغَوْثَ الْغَوْثَ خَلِّصْنا مِنَ النَّارِ یَا رَبِّ

 

(2) ऐ सरदारों के सरदार, दुआयेँ क़बूल करने वाले, ऐ दरजात बुलंद करने वाले ऐ नेकियों में मदद देने वाले, ऐ गुनाहों के बख़्शने वाले ऐ हाजात पूरी करने वाले, ऐ तौबा क़बूल करने वाले, ऐ आवाज़ों के सुनने वाले, ऐ छुपी चीज़ों के जानने वाले, ऐ दूर करने वाले, 

 

﴿۲﴾ یَا سَیِّدَ السَّاداتِ یَا مُجِیبَ الدَّعَواتِ، یَا رَافِعَ الدَّرَجَاتِ یَا وَ لِیَّ الْحَسَناتِ، یَا غَافِرَ الْخَطِیئاتِ، یَا مُعْطِیَ الْمَسْأَلاتِ، یَا قابِلَ التَّوْباتِ، یَا سَامِعَ الْاَصْواتِ، یَا عَالِمَ الْخَفِیِّاتِ،یَا دَافِعَ الْبَلِیِّاتِ

 

(3) ऐ बख़्शने वालों में बेहतर, ऐ फ़तह करने वालों में बेहतर, ऐ मदद करने वालों में बेहतर, ऐ हाकिमों में बेहतर, ऐ रिज़्क देने वालों में बेहतर, ऐ वारिसों में बेहतर, ऐ तारीफ़ करने वालों में बेहतर, ऐ ज़िकर करने वालों में बेहतर, ऐ मेज़बानों में बेहतर, ऐ एहसान करने वालों में बेहतर,

 

﴿۳﴾ یَا خَیْرَ الْغافِرِینَ، یَا خَیْرَ الْفاتِحِینَ، یَا خَیْرَ النَّاصِرِینَ یَا خَیْرَ الْحَاکِمِینَ یَا خَیْرَ الرَّازِقِینَ یَا خَیْرَ الْوَارِثِینَ یَا خَیْرَ الْحَامِدِینَ، یَا خَیْرَ الذَّاکِرِینَ یَا خَیْرَ الْمُنْزِلِینَ، یَا خَیْرَ الْمُحْسِنِینَ،

 

(4) ऐ वोह जिस के लिए इज़्ज़त और जमाल है, ऐ वोह जिस के लिए क़ुदरत व कमाल है, ऐ वोह जिस के लिए मुल्क और जलाल है, ऐ वोह जो बड़ाई वाला बुलन्दतर है, ऐ भरे बादलों  करने वाले, ऐ वह जो बहुत ज़्यादा कुव्वतों वाला है, ऐ वह जो तेज़ तर हिसाब करने वाला है, ऐ वोह जो सख़्त अज़ाब देने वाला है, ऐ वह जिसके यहाँ बेहतरीन सवाब है, ऐ वोह जिसके पास लौहे महफ़ूज़ है

 

﴿۴﴾ یَا مَنْ لَہُ الْعِزَّةُ وَالْجَمالُ، یَا مَنْ لَہُ الْقُدْرَةُ وَالْکَمالُ، یَا مَنْ لَہُ الْمُلْکُ وَالْجَلالُ، یَا مَنْ ھُوَ الْکَبِیرُ الْمُتَعالِ، یَا مُنْشِیَ السَّحابِ الثِّقالِ، یَا مَنْ ھُوَ شَدِیدُ الْمِحالِ،یَامَنْ ھُوَ سَرِیعُ الْحِسابِ، یَا مَنْ ھُوَ شَدِیدُ الْعِقابِ، یَا مَنْ عِنْدَھُ حُسْنُ الثَّوابِ، یَا مَنْ عِنْدَھُ أُمُّ الْکِتابِ

 

(5) ऐ माबूद! तुझ से सवाल करता हूँ तेरे नाम के वास्ते से, ऐ मोहब्बत वाले वाले, ऐ एहसान करने वाले,ऐ बदला देने वाले, ऐ दलील रौशन, ऐ साहिबे सल्तनत, ऐ राज़ी होने वाले, ऐ बख़्शने वाले, ऐ पाकीज़गी वाले, ऐ मदद करने वाले, ऐ साहिबे एहसान व ब्यान

 

﴿۵﴾اَللّٰھُمَّ إِنِّی أَسْأَلُکَ بِاسْمِکَ یَا حَنَّانُ، یَا مَنَّانُ، یَا دَیَّانُ، یَا بُرْہانُ، یَا سُلْطانُ،یَا رِضْوانُ،یَا غُفْرانُ، یَا سُبْحانُ،یَا مُسْتَعانُ،یَا ذَا الْمَنِّ وَالْبَیانِ

 

(6) ऐ वह जिसकी अज़मत के आगे सब चीज़ें झुकी हुई हैं,ऐ वह जिसकी क़ुदरत के सामने हर शै सर नगुं हैं, ऐ वह जिसकी बड़ाई के सामने हर चीज़ पस्त हैं, ऐ वोह जिसके ख़ौफ़ से हर चीज़ दबी हुई है, ऐ वोह जिसके डर से चीज़ फ़रमाबरदार बनी हुई है, ऐ वह जिसके ख़ौफ़ से पहाड़ फट जाते हैं, ऐ वोह जिसके हुक्म से आसमान खड़े हैं, वोह जिसके इज़न से ज़मीने ठहरी हुई हैं, ऐ वोह की कड़कती बिजली जिसकी तस्बीह करती है, ऐ वोह जो अपने ज़ेरे हुकूमत लोगों पर ज़ुल्म नहीं करता 

 

﴿۶﴾ یَا مَنْ تَواضَعَ کُلُّ شَیْءٍ لِعَظَمَتِہِ، یَا مَنِ اسْتَسْلَمَ کُلُّ شَیْءٍ لِقُدْرَتِہِ، یَا مَنْ ذَلَّ کُلُّ شَیْءٍ لِعِزَّتِہِ، یَا مَنْ خَضَعَ کُلُّ شَیْءٍ لِھَیْبَتِہِ، یَا مَنِ انْقادَ کُلُّ شَیْءٍ مِنْ خَشْیَتِہِ، یَا مَنْ تَشَقَّقَتِ الْجِبالُ مِنْ مَخافَتِہِ، یَا مَنْ قامَتِ السَّمَاوَاتُ بِأَمْرِھِ یَا مَنِ اسْتَقَرَّتِ الْاَرَضُونَ بِإِذْنِہِ، یَا مَنْ یُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِھِ، یَامَنْ لاَ یَعْتَدِی عَلی أَھْلِ مَمْلَکَتِہِ

 

(7) ऐ गुनाहों के बख्शने वाले, ऐ बलाएँ दूर करने वाले, ऐ उम्मीदों के आख़िरी मुक़ाम, ऐ बहुत अताओं वाले,ऐ तोहफ़े अता करने वाले, ऐ मख़लूक़ को रिज़्क़ देने वाले, ऐ तमन्नायें पूरी करने  वाले,ऐ शिकायतें सुनने वाले, ऐ मख़लूक़ को ज़िन्दा  ,ऐ क़ैदियों को आज़ाद करने वाले 

 

﴿۷﴾ یَا غافِرَ الْخَطایا یَا کاشِفَ الْبَلایا یَا مُنْتَھَی الرَّجایَا یَا مُجْزِلَ الْعَطایَا،یَا واھِبَ الْھَدایَا، یَا رازِقَ الْبَرایا، یَا قَاضِیَ الْمَنایا، یَا سَامِعَ الشَّکَایا،یَا بَاعِثَ الْبَرایا یَا مُطْلِقَ  الَاُساری

 

(8) ऐ तारीफ़ और सीना  करने वाले, ऐ फ़ख़र व ख़ूबी वाले, ऐ बुज़ुर्गी व बुलंदी वाले, ऐ अहद  वफ़ा वाले, माफ़ी देने वाले, ऐ राज़ी होने वाले, ऐ अता व बख़्शिश करने वाले, ऐ फ़ैसले और इंसाफ़ वाले, ऐ इज़्ज़त और बक़ा वाले, ऐ सख़ावत वाले, ऐ रहमतों और नेमतों वाले 

 

﴿۸﴾ یَا ذَا الْحَمْدِ وَالثَّناءِ، یَا ذَا الْفَخْرِ وَالْبَہاءِ، یَا ذَا الْمَجْدِ وَالسَّناءِ، یَا ذَا الْعَھْدِوَالْوَفاءِ، یَا ذَا الْعَفْوِ وَالرِّضاءِ، یَا ذَا الْمَنِّ وَالْعَطَاءِ، یَا ذَا الْفَصْلِ وَالْقَضاءِ، یَا ذَا الْعِزِّ وَالْبَقاءِ، یَا ذَا الْجُودِ وَالسَّخاءِ، یَا ذَا الاَْلاَءِ وَالنَّعْمَاءِ

 

(9) ऐ माबूद! मैं तुझ से सवाल करता हूँ तेरे नाम के वास्ते से, ऐ रोकने वाले ऐ हटाने वाले, ऐ बुलंद करने वाले ऐ  बनाने वाले, ऐ नफ़ा वाले, ऐ सुनने वाले ऐ जमा करने वाले, ऐ शिफ़ाअत करने वाले ऐ कुशादगी वाले, ऐ वुसअत देने वाले 

 

﴿۹﴾ اَللّٰھُمَّ إِنِّی أَسْأَ لُکَ بِاسْمِکَ یَا مانِعُ، یَا دافِعُ، یَا رافِعُ، یَا صانِعُ، یَا نافِعُ، یَا سامِعُ، یَا جامِعُ، یَا شافِعُ، یَا واسِعُ، یَا مُوسِعُ

 

(10) ऐ हर मौज़ू के सानी, ऐ हर मख़लूक़ के ख़ालिक़, ऐ हर रिज़्क़ पाने वाले के राज़िक़ ऐ हर ममलूक के मालिक, ऐ हर दुखी का दुःख दूर करने वाले,  ऐ हर पाये और बेसहारा के मददगार ऐ हर बुराई पर पर्दा डालने वाले, ऐ हर रांदेगाह पनाहगाह, सख़्ती वक़्त मेरी परेशानी मिटाने वाले, ऐ हर रहम किये गए पर रहम करने वाले, ऐ मुसीबत में मेरी उम्मीदगाह 

 

﴿۱۰﴾ یَا صانِعَ کُلِّ مَصْنُوعٍ، یَا خالِقَ کُلِّ مَخْلُوقٍ یَا رازِقَ کُلِّ مَرْزُوقٍ یَا مالِکَ کُلِّ مَمْلُوکٍ یَا کَاشِفَ کُلِّ مَکْرُوبٍ یَا فَارِجَ کُلِّ مَھْمُومٍ، یَا رَاحِمَ کُلِّ مَرْحُومٍ، یَا نَاصِرَ کُلِّ مَخْذُولٍ،یَا سَاتِرَ کُلِّ مَعْیُوبٍ، یَا مَلْجَأَ کُلِّ مَطْرُودٍ

 

(11) ऐ वहशत के वक़्त मेरे हमदम, ऐ मेरी तन्हाई में मर्रे साथी, ऐ नेमत में मेरी किफ़ालत करने वाले, ऐ दुःख दर्द में मेरे मददगार, ऐ हैरत के वक़्त मेरे रहनुमा, औ मोहताजी के वक़्त मेरे सरमाया, ऐ बेक़रारी के वक़्त मेरी पनाहगाह ऐ फ़रयाद के वक़्त मेरे मददगार 

 

﴿۱۱﴾ یَا عُدَّتِی عِنْدَ شِدَّتِی، یَا رَجَائِی عِنْدَ مُصِیبَتِی، یَا مُؤْ نِسِی عِنْدَ وَحْشَتِی، یَا صَاحِبِی عِنْدَ غُرْبَتِی، یَا وَ لِیِّی عِنْدَ نِعْمَتِی، یَا غِیاثِی عِنْد کُرْبَتِی، یَا دَلِیلِی عِنْدَ حَیْرَتِی، یَا غَنائِی عِنْدَ افْتِقارِی، یَا مَلْجَیِی عِنْدَ اضْطِرارِی، یَا مُعِینِی عِنْدَ مَفْزَعِی 

 

(12) ऐ हर ऐब के जानने वाले, ऐ गुनाहों के बख़्शने वाले, ऐ ऐबों को छुपाने वाले, ऐ मुसीबतों को दूर करने वाले, ऐ दिलों को पलटने वाले, ऐ दिलों के मआ'लिज, ऐ दिलों को रौशन करने वाले, ऐ दिलों के हमदम,, ऐ ग़मों की गिरोह खोलने वाले, ऐ ग़मों को दूर  करने वाले

 

﴿۱۲﴾ یَا عَلاَّمَ الْغُیُوبِ یَا غَفَّارَ الذُّنُوبِ یَا سَتَّارَ الْعُیُوبِ یَا کَاشِفَ الْکُرُوبِ یَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ یَا طَبِیبَ الْقُلُوبِ یَا مُنَوِّرَ الْقُلُوبِ یَا أَنِیسَ الْقُلُوبِ، یَا مُفَرِّجَ الْھُمُومِ، یَا مُنَفِّسَ الْغُمُومِ

 

(13) ऐ माबूद! मैं तुझ से सवाल करता हूँ तेरे नाम के वास्ते, ऐ जलाल वाले, ऐ जमाल वाले, ऐ कारसाज़, ऐ  सरपरस्त, ऐ रहनुमा, ऐ क़बूल करने वाले, ऐ रवाँ करने वाले 

 

﴿۱۳﴾ اَللّٰھُمَّ إِنِّی أَسْأَ لُکَ بِاسْمِکَ یَا جَلِیلُ، یَا جَمِیلُ، یَا وَکِیلُ، یَا کَفِیلُ، یَا دَلِیلُ، یَا قَبِیلُ، یَا مُدِیلُ، یَا مُنِیلُ، یَا مُقِیلُ، یَا مُحِیلُ

 

(14) ऐ बख्शने वाले, ऐ माफ़ करने वाले, ऐ जगह देने वाले, ऐ सगरदानों के रहनुमां ऐ पुकारने वालों की मदद करने वाले, ऐ फ़रयादीयों की फ़रयाद को पहुँचने वाले, ऐ पनाह तलब करने वालों की पनाह, ऐ डरने वालों को ढारस, ऐ मोमिनों के मददगार, ऐ बेचारों पर रहम करने वाले, ऐ गुनहगारों की पनाह, ऐ खताकारों के बख़्शने वाले, ऐ बे'क़रारों की दुआ कबूल करने वाले 

 

﴿۱۴﴾ یَا دَلِیلَ الْمُتَحَیِّرِینَ، یَا غِیاثَ الْمُسْتَغِیثِینَ، یَا صَرِیخَ الْمُسْتَصْرِخِینَ، یَا جارَ الْمُسْتَجِیرِینَ، یَا أَمانَ الْخَائِفِینَ، یَا عَوْنَ الْمُؤْمِنِینَ، یَا رَاحِمَ الْمَساکِینَ، یَا مَلْجَأَ الْعَاصِینَ، یَا غافِرَ الْمُذْنِبِینَ یَا مُجِیبَ دَعْوَةِ الْمُضْطَرِّینَ

 

(15) ऐ साहिबे ज़ुदो एहसान, ऐ साहिबे  फ़ज़्ल व मिन्नत, ऐ साहिबे अमन व अमान, ऐ तहारत व पाकीज़गी वाले, ऐ हिकमत व ब्यान वाले, ऐ रहमत व रज़ा वाले, औ हुज्जत और रौशन दलील वाले, ऐ अज़मत व सुलतान वाले, ऐ मेहरबानी करने और मदद देने वाले, ऐ माफ़ी देने और बख़्शने वाले 

 

﴿۱۵﴾ یَا ذَا الْجُودِ وَالْاِحْسانِ یَا ذَا الْفَضْلِ وَالْاِمْتِنانِ یَا ذَا الْاَمْنِ وَالْاَمانِ یَا ذَا الْقُدْسِ وَالسُّبْحانِ یَا ذَا الْحِکْمَةِ وَالْبَیانِ یَا ذَا الرَّحْمَةِ وَالرِّضْوانِ یَا ذَا الْحُجَّةِ وَالْبُرْہانِ یَا ذَا الْعَظَمَةِ وَالسُّلْطَانِ یَا ذَا الرَّأْفَةِ وَالْمُسْتَعانِ یَا ذَا الْعَفْوِ وَالْغُفْرانِ

 

(16) ऐ वोह जो हर चीज़ का परवरदिगार है, ऐ वोह जो हर शै का माबूद है, ऐ वोह जो हर चीज़ का ख़ालिक़ है, ऐ वोह जो हर चीज़ का बनाने वाले है, ऐ वोह जो हर शै से पहले था, ऐ वोह जो हर शै के बाद बाक़ी रहेगा जब हर चीज़ फ़ना हो जायेगी,ऐ वोह जो हर चीज़ से बुलंद है, ऐ वोह जो हर चीज़ का जानने वाला है, ऐ वोह जो हर चीज़ पर क़ादिर है,

 

﴿۱۶﴾یَا مَنْ ھُوَ رَبُّ کُلِّ شَیْءٍ یَا مَنْ ھُوَ إِلہُ کُلِّ شَیْءٍ یَا مَنْ ھُوَ خالِقُ کُلِّ شَیْءٍ یَا مَنْ ھُوَ صَانِعُ کُلِّ شَیْءٍ، یَا مَنْ ھُوَ قَبْلَ کُلِّ شَیْءٍ ، یَا مَنْ ھُوَ بَعْدَ کُلِّ شَیْءٍ، یَا مَنْ ھُوَ فَوْقَ کُلِّ شَیْءٍ، یَا مَنْ ھُوَ عَالِمٌ بِکُلِّ شَیْءٍ  یَا مَنْ ھُوَ قادِرٌ عَلَی کُلِّ شَیْءٍ یَا مَنْ ھُوَ یَبْقی وَیَفْنی کُلُّ شَیْءٍ

 

(17) ऐ माबूद! मैं तुझ से सवाल करता हूँ तेरे नाम के वास्ते से, ऐ अमन देने वाले, ऐ निगहबान, ऐ कायनात बनाने वाले, ऐ तलक़ीन करने वाले, ऐ ज़ाहिर करने वाले, ऐ आसान करने वाले, ऐ क़ुदरत देने वाले, ऐ ज़ीनत देने वाले, ऐ एलान करने वाले, ऐ बाँटने वाले,

 

﴿۱۷﴾اَللّٰھُمَّ إِنِّی أَسْأَ لُکَ بِاسْمِکَ یَا مُوْمِنُ، یَا مُھَیْمِنُ، یَا مُکَوِّنُ، یَا مُلَقِّنُ، یَا مُبَیِّنُ، یَا مُھَوِّنُ، یَا مُمَکِّنُ، یَا مُزَیِّنُ،یَا یَا مُعْلِنُ، یَا مُقَسِّمُ

 

(18) ऐ वोह जो अपने इक़्तेदार मे पायेदार है, ऐ वोह जो अपनी सल्तनत में क़दीम है, ऐ वोह जो अपनी शान में बलन्दतर है, ऐ वोह जो अपने बन्दों पर मेहरबान है, ऐ वोह जो हर चीज़ का जान्ने वाला है, ऐ वोह जो नाफ़रमान से नरमी करने वाला है, ऐ वोह जो उम्मीदवार पर करम करने वाला है, ऐ वोह जो अपनी सिनत में हिकमत वाला है, ऐ वोह जो अपनी हिकमत में बारीकबीन है, ऐ वोह जिसका एहसान क़दीम है, 

 

﴿۱۸﴾ یَا مَنْ ھُوَ فِی مُلْکِہِ مُقِیمٌ،یَا مَنْ ھُوَ فِی سُلْطانِہِ قَدِیمٌ یَا مَنْ ھُو فِی جَلالِہِ عَظِیمٌ یَا مَنْ ھُوَ عَلَی عِبادِھِ رَحِیمٌ یَا مَنْ ھُوَ بِکُلِّ شَیْءٍ عَلِیمٌ یَا مَنْ ھُوَ بِمَنْ عَصاھُ حَلِیمٌ یَا مَنْ  ھُوَ بِمَنْ رَجاھُ کَرِیمٌ یَا مَنْ ھُوَ فِی صُنْعِہِ حَکِیمٌ، یَا مَنْ ھُوَ فِی حِکْمَتِہِ لَطِیفٌ، یَا مَنْ ھُوَ فِی لُطْفِہِ  قَدِیمٌ

 

(19) ऐ वोह जिससे इसके फ़ज़ल की उम्मीद की जाती है, ऐ वोह जिससे बख़्शिश का सवाल किया जाता है, ऐ वोह जिससे भलाई की आस है, ऐ वोह जिसके अदल से ख़ौफ़ आता है, ऐ वोह जिसकी हुकूमत हमेशा रहेगी, ऐ वोह जिसकी सल्तनत हमेशा रहेगी, ऐ वोह जिसकी सल्तनत के सिवा कोई सल्तनत नहीं, ऐ वोह जिसकी रहमत हर चीज़ को घेरे हुए है, ऐ वोह जिसकी रहमत इसकी ग़ज़ब से आगे है, ऐ वोह  जिसका इल्म हर चीज़ पर हावी है, ऐ वोह की जिस जैसा कोई नहीं है

 

﴿۱۹﴾ یَا مَنْ لاَ یُرْجی إِلاَّ فَضْلُہُ، یَا مَنْ لاَ یُسْأَلُ إِلاَّ عَفْوُھُ، یَا مَنْ لاَ یُنْظَرُ إِلاَّ بِرُّھُ،یَا مَنْ لاَ یُخافُ إِلاَّ عَدْلُہُ، یَا مَنْ لاَ یَدُومُ إِلاَّ مُلْکُہُ، یَا مَنْ لاَ سُلْطانَ إِلاَّ سُلْطانُہُ، یَا مَنْ وَسِعَتْ کُلَّ شَیْءٍ رَحْمَتُہُ،یَا مَنْ سَبَقَتْ رَحْمَتُہُ غَضَبَہُ یَا مَنْ أَحاطَ بِکُلِّ شَیْءٍ عِلْمُہُ، یَا مَنْ لَیْسَ أَحَدٌ مِثْلُہُ

 

(20) ऐ अंदेशे हटा देने वाले, ऐ ग़म दूर करने वाले ऐ गुनाह माफ़ करने वाले, ऐ तौबा क़बूल करने वाले, ऐ मख़लूक़ात के ख़ालिक़, ऐ वायदे में सच्चे, ऐ अहद पूरा करने वाले, ऐ राज़ के जानने वाले, ऐ दाने को चीरने वाले, ऐ लोगों के राज़िक़

 

﴿۲۰﴾ یَا فارِجَ الْھَمِّ، یَا کَاشِفَ الْغَمِّ، یَا غَافِرَ الذَّنْبِ، یَا قَابِلَ التَّوْبِ، یَا خَالِقَ الْخَلْقِ، یَا صَادِقَ الْوَعْدِ یَا مُوفِیَ الْعَھْدِ، یَا عَالِمَ السِّرِّ، یَا فَالِقَ الْحَبِّ، یَا رَازِقَ الْاَنامِ ۔

1-20 21-40 41-60 61-80 81-100

नमाज़ के बाद की ताकीबात (दुआ) 

ताकीबात मुश्तरका

दुआ-नमाज़ फ़ज्र के बाद

दुआ-नमाज़ ज़ोहर के बाद

दुआ-नमाज़ असर के बाद

दुआ-नमाज़ मग़रिब के बाद

दुआ-नमाज़ ईशा के बाद

रोज़ाना की दुआ व ज़यारत 

जुमा

सनीचर 

ईतवार सोमवार मंगल बुध जुमेरात

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
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ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

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