रमज़ान में वाजिब नमाज़ों के बाद रोज़ाना पढ़ने की दुआ﴿

   नीचे लिखी हुई दुआओं क़ो रमज़ान महीने में अपनी हर वाजिब नमाज़ के बाद रोज़ाना पढ़ें Pdf 2 कॉलम

             a. अल्लाहुम्मा अद'ख़िल अला    b. अल्लाहुम्मा अर'ज़ुकनी हज'जा      c. या अलीयु या अज़ीम     d. दुआए हज

Pdf 3 कॉलम | नजफ़ अरबी फौंट

a) अल्लाहुम्मा अद'ख़िल अला  اللّهُمَّ أَدْخِلْ عَلَى

 

शेख़ अल-कफ़'अमी ने अल-मिस्बाह और अल-बलद-अल-आमीन में फ़रमाया है की, "पवित्र पैग़म्बर (स:अ:व:व) ने कहा है की जो शख्स रमज़ान के महीने में रोज़ाना अपनी वाजिब नमाज़ के बाद ईन दुआओं क़ो पढ़ेगा, उसके सारे गुनाह क़यामत तक के लिये माफ़ किये  जायेंगे" : रियल     Mp3 A    Mp3 B   यू टयूब

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ
ऐ माबूद! क़ब्रों में दफ़न लोगों क़ो शादमानी अता फ़रमा,    

अल्लाहुम्मा अद्खिल अला अहलिल क़ुबू'रिस सुरूर ,

اللّهُمَّ أَدْخِلْ عَلَى أَهْلِ الْقُبُورِ السُّرُورَ،

ऐ माबूद हर मोहताज क़ो गनि बना दे, 

अल्लाहुम्मा अग़'नि कुल्ला फ़क़ीर,

اللّهُمَّ أَغْنِ كُلَّ فَقِيرٍ،

ऐ माबूद! हर भूके क़ो शिकं सेर कर दे,

अल्लाहुम्मा अश्बिया-कुल्ला जा-ई-ईन

اللّهُمَّ أَشْبِعْ كُلَّ جَائِعٍ،

ऐ माबूद! हर नंगे क़ो लिबास पहना दे,

अल्लाहुम्मा अक्सू कुल्ला उर्यान ,

اللّهُمَّ اكْسُ كُلَّ عُرْيَانٍ،

ऐ माबूद! हर मकरूज़ का क़र्ज़ अता कर दे,

अल्लाहुम'मक़-ज़ि दय्ना कुल्ली मदीन,

اللّهُمَّ اقْضِ دَيْنَ كُلِّ مَدِينٍ،

ऐ माबूद! हर मुसीबत ज़दा क़ो आसूदगी अता फ़रमा,

अल्लाहुम्मा फ़र'रिज अन कुल्ली मक'रूब ,

اللّهُمَّ فَرِّجْ عَنْ كُلِّ مَكْرُوبٍ،

ऐ माबूद! हर मुसाफिर क़ो वतन वापस ला, 

अल्लाहुम्मा रुद'दा कुल्ला ग़रीब,

اللّهُمَّ رُدَّ كُلَّ غَرِيبٍ،

ऐ माबूद! हर क़ैदी क़ो रिहाई बख्श दे,

अल्लाहुम्मा फुक'का कुल्ला असीर,

اللّهُمَّ فُكَّ كُلَّ أَسِيرٍ،

ऐ माबूद! मुसलमानों के अमूर से हर बिगाड़ की इस्लाह फ़मा दे,

अल्लाहुम्मा असलिह कुल्ला फ़ासी'दिन मिन उमूरिल मुस्लिमीन,

اللّهُمَّ أَصْلِحْ كُلَّ فَاسِدٍ مِنْ أُمُورِ الْمُسْلِمِينَ،

ऐ माबूद! हर मरीज़ क़ो शिफ़ा ता फ़रमा,

अल्लाहुम'मश-फ़ि कुल्ला मरीज़,

اللّهُمَّ اشْفِ كُلَّ مَرِيضٍ،

ऐ माबूद! अपनी सर्वात से हमारी मोहताजी खत्म कर दे,

अल्लाहुम्मा सूद'दा फ़क़'रना बी-ग़ी'नाका,

اللّهُمَّ سُدَّ فَقْرَنَا بِغِنَاكَ،

ऐ माबूद! हमारी बद-हाली क़ो ख़ुश'हाली में बदल दे,

अल्लाहुम्मा गै'ईर सू-अ हालीना बी-हुस्नी हालिका,

اللّهُمَّ غَيِّرْ سُوءَ حَالِنَا بِحُسْنِ حَالِكَ،

ऐ माबूद! हमें अपने क़र्ज़ अता करने की तौफीक़ दे, और मोहताजी से बचा ले, 

अल्लाहुम'मक़-ज़ि अन'नद दय्ना व अग़'नीना मिनल फ़क्र

اللّهُمَّ اقْضِ عَنَّا الدَّيْنَ وَأَغْنِنَا مِنَ الْفَقْرِ،

बेशक तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है!

इन्नका अला कुल्ली शय-ईन क़दीर

إنَّكَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

b) अल्लाहुम्मा अर'ज़ुकनी हज'जा  اللّهُمَّ ارْزُقْنِي حَجَّ  

सैय्यद इब्ने तावूस ब्यान करते हैं की,"ईमाम अल-सादीक़ (अ:स) और ईमाम अल-काज़िम (अ:स) ने रमज़ान में ईस दुआ क़ो हर वाजिब नमाज़ के बाद पढ़ने की ताकीद फ़रमाई है   ".     Mp3   यू टयूब

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

ऐ माबूद! ईस साल में और हर साल में मुझे अपने हुरमत वाले घर (काबा) के हज की तौफीक़ अता फ़रमा, जब तक तू मुझे ज़िंदा रखे, अपनी तरफ़ से आसानी, आराम और रिज्क़ में बढ़ोतरी अता फ़रमा, मुझे ईन बुज़ुर्गी वाले मुक़ामात और मुक़द्दस वा पाकीज़ा मज़ारों के और अपने नबी-ए-करीम (स:अ:व:व) के सब्ज़ गुम्बद की ज़्यारत करने से मरहूम न रख, तेरी रहमत हो इनपर और इनकी आल पर और दुन्या वा आख़ेरत से मुताल्लिक मेरी तमाम हाजात पूरी फ़रमा दे! ऐ माबूद! मै तुझ से सवाल करता हूँ की शबे क़द्र में तू जो यक़ीनी तौर पर तय फ़रमाता और जो मोहकम फ़ैसले करता है, की जिन में किसी क़िस्म की भी तब्दीली वा पलट नही होती इनमे मेरा नाम अपने मोहतरम घर (काबा) का हज करने वालों में लिख दे की जिनका हज तुझे मंज़ूर है और इनकी स'ई मकबूल है, इनके गुनाह बख्शे गए और इनकी खताएं मिटा दी गयीं हैं और अपनी रहमत में मेरी उमर तुलानी, मेरी रोज़ी वा रिज्क़ कुशादा फ़रमा और मुझे हर अमानत और हर क़र्ज़ अदा करने की तौफीक़ दे, ऐसा ही हो ऐ जहानों के पालने वाले!     

अल्लाहुम'मर ज़ुक'नी हअजजा बयतिकल हराम

اللّهُمَّ ارْزُقْنِي حَجَّ بَيْتِكَ الْحَرَام

फ़ी आमी हाज़ा व फ़ी कुल्ली आम

فِي عَامِي هذَا وَفِي كُلِّ عَامٍ

मा अब'कै'तनी फ़ी युस्रिन मिनका व आफियतिन व सा-अति रिज़'कीन

 

مَا أَبْقَيْتَنِي فِي يُسْرٍ مِنْكَ وَعَافِيَةٍ وَسَعَةِ رِزْقٍ،

व ला तुखील'नी मिन तिल्कल मवा'क़ी'फ़िल करीमाती

وَلا تُخْلِنِي مِنْ تِلْكَ الْمَوَاقِفِ الْكَرِيمَةِ،

वल मशाही'दिश शरीफाह

وَالْمَشَاهِدِ الشَّرِيفَةِ،

ज़ियारती क़बरी नबी'यिका सलावातुका अलय्ही

وَزِيَارَةِ قَبْرِ نَبِيِّكَ صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِ وَآلِهِ،

व आलीही व फ़ी जमी-इ हवा-इजिद दुन्या वल आखीरह फ़कुन ली

وَفِي جَمِيعِ حَوَائِجِ الدُّنْيَا وَالأخِرَةِ فَكُنْ لِي

अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका फ़ीमा ताक़'ज़ी व तुक़द'दिरू

اللّهُمَّ إنِّي أَسْأَلُكَ فِي مَا تَقْضِي وَتُقَدِّرُ

मिनल अम्रिल महतुमी फ़ी लैलातिल कदरी

مِنْ الأمْرِ الْمَحْتُومِ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ

मिनल क़ज़ा' 'इल लज़ी ला युरद'दू व ला युबद'दलु

مِنَ الْقَضَاءِ الَّذِي لا يُرَدُّ وَلا يُبَدَّلُ

अन यक'तुबनी मिन हुज'जाजी बयतिकल हरामिल

أَنْ تَكْتُبَنِي مِنْ حُجَّاجِ بَيْتِكَ الْحَرَامِ

अल मब्रूरी हज्जू'हुमुल

الْمَبْرُورِ حَجُّهُمُ،

अल मश्कूरी सा-युहुमुल

الْمَشْكُورِ سَعْيُهُمُ،

अल मग़'फूरी ज़ुनूबू'हुमुल

الْمَغْفُورِ ذُنُوبُهُمُ،

अल मुकफ़'फ्री अन्हुम सय्यी-आतुहुम

الْمُكَفَّرِ عَنْهُمْ سَيِّئَاتُهُمْ،

वज-अल फ़ीमा ताक़'ज़ी व तुक़द'दिरू

وَاجْعَلْ فِي مَا تَقْضِي وَتُقَدِّرُ

अन तुतीला उमरी

أَنْ تُطِيلَ عُمْرَي

व तुवस'सिया अलय्या रिज़्की

وَتُوَسِّعَ عَلَيَّ رِزْقِي،

व तू-अद'दिया अन्नी अमानती व दयनी

وَتُؤَدِّيَ عَنِّي أَمَانَتِي وَدَيْنِي،

आमीन या रब्बल आलामीन

آمِين رَبَّ الْعَالَمِينَ.

c) या अलीयु या अज़ीम  يَا عَلِيُّ يَا عَظِيمُ،  Mp3

 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ
ऐ बुलंद्तर, ऐ बुज़ुर्गी वाले, या अलिय्यु या अज़ीम

يَا عَلِيُّ يَا عَظِيمُ،

ऐ बख्शने वाले, ऐ मेहरबान,  या ग़फूरू या रहीम

يَا غَفُورُ يَا رَحِيمُ،

तू ही बड़ाई वाला परवरदिगार है,  अंतर रब्बुल अजीमुल

 أَنْتَ الرَّبُّ الْعَظِيمُ

के जिस के जैसी कोई चीज़ नहीं है लज़ी लाय्सा कमिस'लिही शय-उन

الَّذِي لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ

और वो सुनने देखने वाला है व हुवस समी-उल बसीर

وَهُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ،

और यह वो महीना है जिसे तुने बुज़ुर्गी दी इज़्ज़त अता की,  व हाज़ा शरून अज़'ज़म'तहु व कर'रम'तहु وَهذَا شَهْرٌ عَظَّمْتَهُ وَكَرَّمْتَهُ
बुलंदी बख्शी और सभी महीनों पर फ़ज़ीलत इनायत की है, व शर'रफ़'तहु व फ़जज़ल'तहु अलाश शुहूर

وَشَرَّفْتَهُ وَفَضَّلْتَهُ عَلَى الشُّهُورِ،

और यह वो महीना है जिसके रोज़े तुने मुझ पर फ़र्ज़ किये हैं  व हुवाश शरुल लज़ी फ़राज़ता सिया'महू अलय्या

وَهُوَ الشَّهْرُ الَّذِي فَرَضْتَ صِيَامَهُ عَلَيَّ،

और वो माहे मुबारक रमज़ान है की जिस में तुने क़ुरान उतारा है, व शहरू रम'ज़ानल लज़ी अन्ज़लता फ़ीहिल क़ुर-आना

وَهُوَ شَهْرُ رَمَضَانَ الَّذِي أَنْزَلْتَ فِيهِ الْقُرْآنَ

जो लोगों के लिये रहबर है, इसमें हिदायत की दलीलें और हक़ वा बातिल की तफरीक है, हुदन लिन नासी व बय्यी'नातिम मिनल हुदा वल फुर'क़ान

هُدَىً لِلنَّاسِ وَبَيِّنَاتٍ مِنَ الْهُدَى وَالْفُرْقَانِ

तुने ईस महीने में शबे क़द्र रखी व जा-अलता फ़ीही लै'लतिल कद्र

وَجَعَلْتَ فِيهِ لَيْلَةَ الْقَدْرِ

और इसे हज़ार महीनों से बेहतर क़रार दिया, व जा-अल्तहा खै'रन मिन अल्फ़ी शहर

وَجَعَلْتَهَا خَيْراً مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ،

 बस ऐ एहसान करने वाले तुझ पर एहसान नहीं किया जा सकता,  फ़ा-या ज़ल मन्नी वला यु'मन्नू अलयका,

فَيَا ذَا الْمَنِّ وَلا يُمَنُّ عَلَيْكَ

तू एहसान फ़रमा मुझ पर, मेरी गर्दन आग से छुडा कर इनके साथ जिस पर तुने एहसान किया मुन्ना अलय्या बी-फ़काकी रक़ा'बती मिनन नार फ़ी'मन ता'मुन्नू अलय्ही

مُنَّ عَلَيَّ بِفَكَاكِ رَقَبَتِي مِنَ النَّارِ فِي مَنْ تَمُنُّ عَلَيْهِ

और मुझे दाखिले जन्नत फ़रमा, व अद'खिलनिल जन्नता

وَأَدْخِلْنِي الْجَنَّةَ

अपनी रहमत से ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले! बी-रहमतिका या अर'हमर राहिमीन

بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ.

d) दुआए हज   حَجَّ     Mp3

यह दुआ, दुआए अल-हज्ज कहलाती है! सैय्यद इब्ने तावूस ने किताब अल-इक़बाल में फ़रमाया है की ईमाम अल-सादीक़ (अ:स) रमज़ान में अपनी मगरिब की नमाज़ के बाद रोज़ाना यह दुआ पढ़ा करते थे! इसके अलावा भी शेख़ अल-कफ़'अमी ने अपनी किताब 'अल-बलद'अल-आमीन' में रमज़ान महीने में रोज़ाना ईस दुआ क़ो पढ़ने की ताकीद की है, ख़ासकर पहली रमज़ान क़ो

अल-कुल'लियानी ने किताब अल-काफ़ी में अबू बसीर से रिवायत की है की ईमाम अल-सादीक़ (अ:स) रमज़ान में यह दुआ पढ़ा करते थे! :

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ
ऐ माबूद मै तेरे ही ज़रिये तुझ से अपनी हाजत तलब करता हूँ अल्लाहुम्मा इन्नी बिका व मिनका अतलुबु हा'जती

اللّهُمَّ إنِّي بِكَ وَمِنْكَ أَطْلُبُ حَاجَتِي،

जो कोई लोगों  से तलबे हाजत करता है,   व मंत अलाबा हा'जतन इलन नास

وَمَنْ طَلَبَ حَاجَةً إلَى النَّاسِ

क्या करे बस मै तेरे सिवा किसी से तलबे हजात नहीं करता, फ़ा-इन्नी ला अतलुबु हा'जती इल्ला मिनका

فَإنِّي لا أَطْلُبُ حَاجَتِي إلا مِنْكَ

तू यकता है तेरा कोई साथी नहीं, वहदका ला शरीका लका

وَحْدَكَ لا شَرِيكَ لَكَ،

और सवाल करता हूँ तुझ से ब'वास्ता तेरी अता व मेहरबानी के,  व अस-अलुका बी-फ़जलिका व रिज़'वानिका

وَأَسْأَلُكَ بِفَضْلِكَ وَرِضْوَانِكَ

यह की रहमत नाज़िल फ़रमा हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) और इनके अहलेबैत पर,  अन तू'सल्ली अला मुहम्मदीन व अहली बय्तिही

أَنْ تُصَلِّيَ عَلَى مُحَمَّدٍ وَأَهْلِ بَيْتِهِ

और मेरे लिये इसी साल में अपने मोहतरम घर काबा पहुँचने का वसीला बना दे  व अन तज-अला ली फ़ी आमी हाज़ा इला बयतिकल हराम सबीलन

وَأَنْ تَجْعَلَ لِي فِي عَامِي هذَا إلَى بَيْتِكَ الْحَرَامِ سَبِيلاً

वहाँ मुझे हज नसीब कर, जो दुरुस्त मकबूल पाकीज़ा  हज'जतन मबरू'रतन मुताक़ब'बलातन ज़ाकि'यतन ख़ाली'सतन लका

حِجَّةً مَبْرُورَةً مُتَقَبَّلَةً زَاكِيةً خَالِصَةً لَكَ

और ख़ास तेरे ही लिये हो  तक़र'रुबिहा अयनी

تَقَرُّ بِهَا عَيْنِي،

इससे मेरी आँखें ठंडी कर और मेरे दर्जे बुलंद फ़रमा, व तरफ़ा-उ बिहा दराजाती

وَتَرْفَعُ بِهَا دَرَجَتِي،

मुझे तौफीक़ दे की हया से आँखें नीची रखूँ, व तर'ज़ुक़नी अन अग़'हुज़ज़ अ बसअरी

وَتَرْزُقَنِي أَنْ أَغُضَّ بَصَرِي،

अपनी शर्मगाह की हिफ़ाज़त करूँ  व अन अहफ़ज़ा फ़र्जी

وَأَنْ أَحْفَظَ فَرْجِي،

और तेरी हराम'करदा हर चीज़ से बच के रहूँ,  व अन अकुफ़'फ़ा बिहा अन जमी-इ म्हारी'मिका

وَأَنْ أَكُفَّ بِهَا عَنْ جَمِيعِ مَحَارِمِكَ

यहाँ तक की मेरे नज़दीक तेरी फ़रमा'बरदारी और तेरे खौफ़ से अज़ीज़तर कोई चीज़ ना हो, हत्ता ला यकूना शय-उन असर इंदी मिन ता-अतिका व खश'यतिका

حَتَّى لا يَكُونَ شَيْءٌ آثَرَ عِنْدِي مِنْ طَاعَتِكَ وَخَشْيَتِكَ

जिस चीज़ क़ो तू पसंद करता है इसपर अमल करूँ, वल अमली बीमा अहबब्ता

وَالْعَمَلِ بِمَا أَحْبَبْتَ،

और जिसे तुने नापसंद किया और इससे रोका है इसे छोड़ दूँ वत'तर्की लीमा करिहता व नहयता अन्हु

وَالتَّرْكِ لِمَا كَرِهْتَ وَنَهَيْتَ عَنْهُ،

और यह ईस तरह हो की ईस में आसानी फ़रावानी वा तंदुरुस्ती हो, और इसके बाद जो भी नेमत तू मुझे अता करे वज-अल ज़ालिका फ़ी युस्रिन व यसारिन व आफ़ि'यतिन व मा अन-अमता बिही अलय्या

وَاجْعَلْ ذلِكَ فِي يُسْرٍ وَيَسَارٍ وَعَافِيَةٍ وَمَا أَنْعَمْتَ بِهِ عَلَيَّ،

और तुझ से सवाली हूँ की मेरी मौत क़ो ऐसा क़रार दे गोया मै तेरी राह में  व अस'अलुका अन तज-अला वफ़ा'ती क़त्लन फ़ी सबीलिका

وَأَسْأَلُكَ أَنْ تَجْعَلَ وَفَاتِي قَتْلاً فِي سَبِيلِكَ

तेरे नबी के झंडे तले क़त्ल हुआ, तहता रा'यति नबी'यिका मा-अ औलिया-इका

تَحْتَ رَايَةِ نَبِيِّكَ مَعَ أَوْلِيَائِكَ،

तेरे  दोस्तों के हमराह और सवाल करता हूँ मुझे तौफीक़ दे के मै तेरे और तेरे नबी के दुश्मनों क़ो क़त्ल करूँ व अस'अलुका अन ताक़'तुला बी आ-दा-इका व आ-दा-अ रसूलिका

وَأَسْأَلُكَ أَنْ تَقْتُلَ بِي أَعْدَاءَكَ وَأَعْدَاءَ رَسُولِكَ،

और सवाल करता हूँ की तू अपनी मख्लूक़ में से जिस की ख्वारी से चाहे मुझे इज़्ज़त दे  अस-अलुका अन तुक्री'मणी बी-हवानी मन शिया-ता मिन ख़ल'क़िका

وَأَسْأَلُكَ أَنْ تُكْرِمَنِي بِهَوَانِ مَنْ شِئْتَ مِنْ خَلْقِكَ

लेकिन अपने प्यारों में से किसी की इज़्ज़त के मुकाबिल मुझे ज़लील ना फ़रमा! व ला तुहिन'नी बी-करामाती अहदीन मिन औलिया-इका

وَلا تُهِنِّي بِكَرَامَةِ أَحَدٍ مِنْ أَوْلِيَائِكَ.

ऐ माबूद! हज़रत रसूल (स:अ:व:व) के साथ मेरा राबता क़ायेम फ़रमा, काफ़ी है अल्लाहुम'मज-अल ली मा-अर रसूली सबीला

اللّهُمَّ اجْعَلْ لِي مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلاً،

मेरे लिये अल्लाह जो अल्लाह चाहे वोही होगा!  हस्बियल'लाहू माशा-अल्लाह

حَسْبِيَ اللّهُ، مَا شَاءَ اللّهُ.

 

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