रमज़ान का चाँद देखने की दुआ﴿

1. रमज़ान का चाँद ज़रूर देखें, बल्कि बाज़ उलमाओं ने तो रमज़ान का चाँद देखना वाजिब क़रार  दिया है

2. जब रमज़ान का चाँद देखें तो इसकी तरफ इशारा न करें बल्कि क़िब्ला रुख़ होकर हाथों को बुलंद करें और चाँद से मुख़ातिब हो कर यह कहें 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

मेरा और तेरा परवरदिगार अल्लाह है जो तमाम जहानों का परवरदिगार है! ऐ माबूद, इस चाँद को हमारे लिए अमन व अमान और सलामती व तस्लीम के साथ तुलु कर 

और पसंदीदा चीज़ों की तरफ़ जल्दी करने का ज़रिया बना दे! ऐ माबूद, इस महीने में हम पर ख़ैर व बरकत नाज़िल फ़रमा और हमें ख़ैर व भलाई से हमकिनार कर दे 

इस महीने में हम से नुक़सान तकलीफ़ मुसीबत और आज़माईश को दूर रख    

 

رَبِّی وَرَبُّکَ اللهُ رَبُّ الْعالَمِینَ اَللّٰھُمَّ أَھِلَّہُ عَلَیْنا بِالْاَمْنِ وَالْاِیمانِ وَالسَّلامَةِ وَالْاِسْلامِ وَ

الْمُسارَعَةِ إِلی مَا تُحِبُّ وَتَرْضی۔اَللّٰھُمَّ بارِکْ لَنا فِی شَھْرِنا ہذَا، وَارْزُقْنا خَیْرَھُ وَعَوْنَہُ،وَاصْرِفْ

عَنَّا ضُرَّھُ وَشَرَّھُ وَبَلائَہُ وَفِتْنَتَہُ ۔

3. रिवायत है की जब रसूल अल्लाह (स:अ:व:व) रमज़ान का चाँद देखते तो क़िब्ला रुख होकर यह फरमाते थे Mp3 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

ऐ माबूद, इस चाँद को हमारे लिए अमन व अमान और सेहत व सलामती के साथ तुलु कर और इस माह को हमारे लिए बेहतरीन आसाइश, बीमारियों से 

बचाओ, नमाज़ रोज़े और नफ़िली इबादत बजा लाने और कुरआन की तिलावत करने में मददगार

बना दे ऐ माबूद, हमें माहे रमज़ान में सलामत रख और यह पूरा महीना 

नसीब फ़रमा, हमें तंदरुस्त रख जब तक माहे रमज़ान गुज़र न जाए और तूने इसमें हमें माफ़ किया हो, बख़्श दिया हो और हम पर मेहरबानी फ़रमाई हो 
 

اَللّٰھُمَّ أَھِلَّہُ عَلَیْنا بِالْاَمْنِ وَالْاِیمانِ وَالسَّلامَةِ وَالْاِسْلامِ وَالْعافِیَةِ الْمُجَلَّلَةِ وَدِفاعِ الْاَسْقامِ وَالْعَوْنِ

عَلَی الصَّلاةِ وَالصِّیامِ وَالْقِیامِ وَتِلاوَةِ الْقُرْآنِ ۔ اَللّٰھُمَّ سَلِّمْنا لِشَھْرِ رَمَضانَ، وَتَسَلَّمْہُ مِنّا، وَ

سَلِّمْنا فِیہِ حَتَّی یَنْقَضِیَ عَنَّا شَھْرُ رَمَضانَ وَقَدْ عَفَوْتَ عَنَّا وَغَفَرْتَ لَنا وَرَحِمْتَنا ۔

ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ:स) से मनकुल है की रमज़ान का चाँद देखने के वक़्त यह दुआ पढ़ें : Mp3

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

ऐ माबूद, माहे रमज़ान आ गया और तूने हम पर इसके रोज़े फ़र्ज़ किये हैं, तूने इसमें क़ुरआन उतारा की जिसमें लोगों के लिए हिदायत की दलीलें और हक़ व बातिल का फ़र्क़ है, माबूद, रोज़े रखने में हमारी मदद फ़रमा और इन्हें क़बूल कर 

हमें इस माह में तंदरुस्त रख, इस से मुस्तफीद कर, इस पुरे महीने में हमें आसानी नसीब फ़रमा और आसाइश दे, बेशक तू हर चीज़ पर 

क़ुदरत रखता है ऐ बड़े रहम वाले ऐ मेहरबान
 

اَللّٰھُمَّ قَدْ حَضَرَ شَھْرُ رَمَضانَ وَقَدِ افْتَرضْتَ عَلَیْنا صِیامَہُ،

وَأَ نْزَلْتَ فِیہِ الْقُرْآنَ ھُدیً لِلنّاسِ وَبَیِّناتٍ مِنَ الْھُدی وَالْفُرْقانِ ۔ اَللّٰھُمَّ أَعِنَّا عَلَی صِیامِہِ،

وَتَقَبَّلْہُ مِنّا وَسَلِّمْنا فِیہِ، وَسَلِّمْنا مِنْہُ، وَسَلِّمْہُ لَنا فِی یُسْرٍ مِنْکَ وَعافِیَةٍ، إِنَّکَ عَلَی کُلِّ

شَیْءٍ قَدِیرٌ، یَا رَحْمنُ یَا رَحِیمُ ۔

4. रमज़ान अल'मुबारक का नया चाँद देखते वक़्त सहीफ़ए कामेला की 44वीं दुआ पढ़े!

सैय्यद इब्न ताऊस  ने रिवायत की है की ईमाम सज्जाद (अ:स) जा रहे थे की रमज़ान के चाँद पर नज़र पड़ी तो आप रुक गए और आप ने यह कहा : Mp3

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

ऐ फ़रमाबरदार मख़लूक़ जल्द तर हरकत करने वाले, मुकर्रिरा मंज़िलों में गर्दिश करने वाले, तदबीर के आसमान में अपना असर  दिखाने वाले 

मैं इस ज़ात ईमान रखता हूँ जिस ने तुझे तारीकी में रौशनी की और तुझ से मद्धिम चीज़ों को वाज़े किया और तुझे अपनी हुक्मरानी की 

निशानी क़रार दिया और अपने इक़्तेदार की अलामतों में से एक अलामत बनाया है, पस तुझ से वक़्त की हद मुक़र्रर की  उरूज व ज़वाल 

तुलु व ग़ुरूब  रौशनी व तारीकी की हालतें क़रार दी, की तू इनमें से हर हाल में इसका फ़रमा-बरदार और इसके इरादे पर जल्द अमल 

करने वाला है, वोह पाक है अजीब काम वाला जो इसने तेरे बारे में किया और तुझे बड़ी बारीक बीनी के साथ बनाया 

इसने तुझे नए महीने के कलीद नए अमर का आग़ाज़ क़रार दिया, पस सवाल करता हूँ अल्लाह से जो मेरा और तेरा रब, मेरा और तेरा ख़ालिक़, मेरा और तेरा अंदाज़ा ठहराने 

वाला और मुझे और तुझे सूरत देने वाला है, की मोहम्मद व आले मोहम्मद  पर रहमत नाज़िल फ़रमाये और यह की तुझे बा'बरकत चाँद बनाये की जिस की बरकत को ज़माना ख़तम न कर सके 

ऐसी पाकीज़गी अता करे जिसे गुनाह आलूदा न करें, तुझे ऐसा चाँद बनाएँ जो बालाओं से मबर हो जिसमें बुराइयों से बचाव हो वह चाँद जिस में अछाई हो बुराई 

न हो जिसमें नफ़ा हासिल हो नुक़सान न हो जिसमें आसानी हो तंगी न आये जिसमें भलाई हो बुराई न हो, तुझे वह चाँद बनाये की जिस में आराम व सहूलत, नेमत व 

एहसान, सलामती और तस्लीम हासिल रहे! ऐ माबूद! मोहम्मद व आले मोहम्मद पर रहमत फ़रमा और क़रार दे हमें पसंदीदा लोगों में जिन पर यह चाँद तुलु हुआ और पाकीज़ा लोगों 

में जिन्होंने इसे देखा और नेक लोगों में जो इसमें तेरी इबादत करेंगे, ऐ माबूद! तौफ़ीक़ दे हमें इस चाँद में इबादत करने और तौबा करने और तौबा 

करने की और इसमें हमें गुनाहों और बुराइयों से बचा और नेमतों पर शुकर अदा करने की हिम्मत दे, इस माह में हिफाज़त की ज़िरहें पहना दे और हमारा यह महीना 

बंदगी में कमाल हासिल करने में गुज़ार और एहसान फ़रमा, बेशक तू एहसान करने वाला और तारीफ़ वाला है और ख़ुदा मोहम्मद व इनकी आल (अ:स) पर रहमत फ़रमाये  पाकीज़ा तर 

हैं और इस माह में फ़रमा, इस अम्र में जिसका हुक्म तूने दिया है यानि इबादत हम पर फ़र्ज़ की है और इसे क़बूल फ़रमा बेशक तू हर मेहरबान से ज़्यादा मेहरबान 

और हर रहम वाले से बड़ा रहम वाला है, ऐसा ही है ऐ जहानों के परवरदिगार    

 

أَیُّھَا الْخَلْقُ الْمُطِیعُ، الدَّائِبُ السَّرِیعُ، الْمُتَرَدِّدُ فِی مَنازِلِ التَّقْدِیرِ، الْمُتَصَرِّفُ فِی فَلَکِ التَّدْبِیرِ

آمَنْتُ بِمَنْ نَوَّرَ بِکَ الظُّلَمَ وَأَوْضَحَ بِکَ الْبُھَمَ وَجَعَلَکَ آیَةً مِنْ آیاتِ مُلْکِہِ وَعَلامَةً مِنْ

عَلاماتِ سُلْطانِہِ فَحَدَّ بِکَ الزَّمانَ وَامْتَھَنَکَ بِالْکَمالِ وَالنُّقْصانِ وَالطُّلُوعِ وَالْاُ فُولِ وَالْاِنارَةِ

وَالْکُسُوفِ فِی کُلِّ ذلِکَ أَ نْتَ لَہُ مُطِیعٌ، وَ إِلی إِرادَتِہِ سَرِیعٌ، سُبْحانَہُ مَا أَعْجَبَ مَا دَ بَّرَ

مِنْ أَمْرِکَ وَأَ لْطَفَ مَا صَنَعَ فِی شَأْنِکَ جَعَلَکَ مِفْتاحَ شَھْرٍ حادِثٍ لاََِمْرٍ حادِثٍ فَأَسْأَلُ

اللهَ رَبِّی وَرَبَّکَ وَخالِقِی وَخالِقَکَ وَمُقَدِّرِی وَمُقَدِّرَکَ، وَمُصَوِّرِی وَمُصَوِّرَکَ أَنْ یُصَلِّیَ

عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ، وَأَنْ یَجْعَلَکَ ھِلالَ بَرَکَةٍ لاَ تَمْحَقُھَا الْاَیَّامُ، وَطَہارَةٍ لاَ تُدَنِّسُھَا

الْاَثامُ، ھِلالَ أَمْنٍ مِنَ الاَْفاتِ،وَسَلامَةٍ مِنَ السَّیِّئاتِ ھِلالَ سَعْدٍ لاَ نَحْسَ فِیہِ وَیُمْنٍ لاَ نَکَدَ

مَعَہُ وَیُسْرٍ لاَ یُمازِجُہُ عُسْرٌ وَخیْرٍ لاَ یَشُوبُہُ شَرٌّ ھِلالَ أَمْنٍ وَإِیمانٍ وَ نِعْمَةٍ وَ إِحْسانٍ وَسَلامَةٍ وَ

إِسْلامٍ اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ وَاجْعَلْنا مِنْ أَرْضیٰ مَنْ طَلَعَ عَلَیْہِ وَأَزْکی مَنْ

نَظَرَ إِلَیْہِ، وَأَسْعَدَ مَنْ تَعَبَّدَ لَکَ فِیہِ، وَوَفِّقْنَا اَللّٰھُمَّ فِیہِ لِلطَّاعَةِ وَالتَّوْبَةِ ، وَاعْصِمْنا فِیہِ مِنَ الْاَثامِ

وَالْحَوْبَةِ، وَأَوْزِعْنا فِیہِ شُکْرَ النِّعْمَةِ،وَأَلْبِسْنا فِیہِ جُنَنَ الْعافِیَةِ، وَأَ تْمِمْ عَلَیْنا بِاسْتِکْمالِ طاعَتِکَ

فِیہِ الْمِنَّةَ،إِنَّکَ أَ نْتَ الْمَنّانُ الْحَمِیدُ، وَصَلَّی اللهُ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ الطَّیِّبِینَ، وَاجْعَلْ لَنا فِیہِ

عَوْناً مِنْکَ عَلَی مَا نَدَ بْتَنا إِلَیْہِ مِنْ مُفْتَرَضِ طاعَتِکَ وَتَقَبَّلْہا إِنَّکَ الْاَکْرَمُ مِنْ کُلِّ کَرِیمٍ

وَالْاَرْحَمُ مِنْ کُلِّ رَحِیمٍ، آمِینَ آمِینَ رَبَّ الْعالَمِینَ ۔

नमाज़ के बाद की ताकीबात (दुआ) 

ताकीबात मुश्तरका

दुआ-नमाज़ फ़ज्र के बाद

दुआ-नमाज़ ज़ोहर के बाद

दुआ-नमाज़ असर के बाद

दुआ-नमाज़ मग़रिब के बाद

दुआ-नमाज़ ईशा के बाद

रोज़ाना की दुआ व ज़यारत 

जुमा

सनीचर 

ईतवार सोमवार मंगल बुध जुमेरात

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

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