रमज़ान'उल मुबारक में रोज़ाना हज़रत मोहम्मद(स:अ:व:व)पर सलवात पढ़ें

 

उलमाओं का फ़रमान है की माहे रमज़ान में हुज़ूर (स:अ:व;व) पर रोज़ाना यह सलवात पढ़ें

 MP3

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते दरूद भेजते हैं नबीए पाक पर तो ऐ वो लोगो जो ईमान लाये हो तुम भी इनपर दरूद भेजो और सलाम जो सलाम का हक़ हैहाज़िर हूँ

 

ऐ परवरदिगार तेरे सामने और तू सआदत का मालिक और पाक तर है ऐ माबूद, मोहम्मद और आले मोहम्मद पर दरूद भेज और मोहम्मद और आले मोहम्मद पर बरकत नाज़िल फ़रमा जैसा की तूने जनाबे इब्राहीम पर और आले इब्राहीम पर दरूद भेजा और बरकत नाज़िल की, 

 

बेशक तू तारीफ़ और बुज़ुर्गी वाला है, ऐ अल्लाह मोहम्मद और आले मोहम्मद पर सलाम भेज जैसा की तूने आलमीन में हज़रत नूह पर सलाम भेजा,

 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद और आले मोहम्मद पर एहसान फ़रमा जैसा की तूने मूसा व हारून पर एहसान फ़रमाया,

 

ऐ अल्लाह मोहम्मद और आले मोहम्मद पर दरूद भेज जैसा की तूने हमें उस से मुशर्रफ़ किया,

 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद और आले मोहम्मद पर दरूद भेज जैसा की तूने हमें इनके ज़रिये हिदायत दी,

 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद और आले मोहम्मद पर दरूद भेज और आँ-हज़रत को मुक़ामे महमूद पर सरफ़राज़ फ़रमा की इनसे पहले पिछले इनपर रश्क करने लग जाएँ!

 

मोहम्मद और इनकी आल पर सलाम हो जब तक सूरज का तुलु व ग़रूब हो,

 

मोहम्मद और इनकी आल पर सलाम हो जब तक आँख झपकती या खुलती रहे,

 

मोहम्मद और इनकी आल पर सलाम हो जब तक सलाम किया जाता रहे,

 

मोहम्मद और इनकी आल पर सलाम हो जब तक फ़रिश्ते अल्लाह की तस्बीह व तक़्दीस रहें,

 

मोहम्मद और इनकी आल पर सलाम हो अव्वलीन में, और

 

मोहम्मद और इनकी आल पर सलाम हो आख़ेरीन में और

 

मोहम्मद और इनकी आल पर सलाम हो दुन्या व आख़ेरत में!

 

ऐ अल्लाह! ऐ हुरमत वाले शहर मक्का के रब, ऐ रुक्न व मुक़ाम के रब, और ऐ हल व हराम के रब, अपने नबी मोहम्मद के हुज़ूर हमारा सलाम पहुंचा दे,

 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद को ताबिश, ताज़गी, शादमानी, बुज़ुर्गवारी, फ़ज़ीलत, वसीला, बुलंदी, मर्तबा, इज़्ज़त बरतरी और क़यामत  हुज़ूर शिफ़ाअत करने का हक़ अता फ़रमा, इस से ज़्यादा जो तने मख्लूक़ में से किसी को दिया, और अता फ़रमा मोहम्मद को इस से फ़ौक़ियत (बढ़तरी), जो भलाई तूने मख्लूक़ को दी है आँ-हज़रत को कई गुना ज़्यादा दे जिसे बजुज़ तेरे कोई शुमार न कर सके,

 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद और आले मोहम्मद पर दरूद भेज पाकतर पाकीज़ातर उम्दा बेहतरीन और ज़्यादा इस से जो अगले पिछले लोगों में किसी पर भेजा और अपनी मख्लूक़ में से किसी पर भेजा है,

 

ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले,

 

ऐ अल्लाह! अमीरुल हज़रत अली (अ:स) पर रहमत फ़रमा इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी रख और इनके क़त्ल में शरीक पर दो चंद अज़ाब नाज़िल कर,

 

ऐ अल्लाह! अपने नबी की दुख्तर फ़ातमा (स:अ) पर रहमत फ़रमा के आं-हज़रत और इनकी आल (अ:स) पर सलाम हो, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी रख, और इनपर ज़ुल्म करने वाले के अज़ाब को दो चंद कर दे और लानत कर जिस ने फ़ात्मा (स:अ) के बारे में तेरे नबी को सताया,

 

ऐ अल्लाह! हसन (अ:स) व हुसैन (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के दो ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने इनका ख़ून बहाने में शिरकत की इनका अज़ाब दो चंद कर दे! 

 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद बिन अली (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने ज़ुल्म किया इनका अज़ाब दो चंद कर दे!

 

ऐ अल्लाह! जाफ़र बिन मोहम्मद (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने ज़ुल्म किया इनका अज़ाब दो चंद कर दे!

 

ऐ अल्लाह! मूसा बिन जाफ़र (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने ज़ुल्म किया इनका अज़ाब दो चंद कर दे!  

 

ऐ अल्लाह! अली बिन मूसा (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने जिन्होंने इनका ख़ून बहाने में शिरकत की इनका अज़ाब दो चंद कर दे!

 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद बिन अली (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने ज़ुल्म किया इनका अज़ाब दो चंद कर दे!

 

ऐ अल्लाह! अली बिन मोहम्मद (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने ज़ुल्म किया इनका अज़ाब दो चंद कर दे!

 

ऐ अल्लाह! हसन बिन अली (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो मुसलमानों के ईमाम (अ:स) हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और जिन्होंने ज़ुल्म किया इनका अज़ाब दो चंद कर दे!     

 

ऐ अल्लाह! इनके बाद जानशीन पर रहमत फ़रमा जो मुसलामानों के ईमाम हैं, इनके दोस्त से दोस्ती रख और इनके दुश्मनों से दुश्मनी कर और इनके ज़हूर में जल्दी फ़रमा!

 

ऐ अल्लाह! जनाबे क़ासिम (अ:स) व जनाबे ताहीर (अ:स) पर रहमत फ़रमा जो तेरे नबी के बेटे हैं 

 

ऐ अल्लाह! रुक़ैय्या (स:अ) पर रहमत फ़रमा जो तेरे नबी की लेपालक बेटी हैं और लानत कर इसपर जिसने इनके बारे में तेरे नबी को सताया

 

ऐ अल्लाह! अपने नबी की औलाद पर रहमत फ़रमा 

 

ऐ अल्लाह! अपने नबी के पीछे इनके अहलेबैत (अ:स) का मददगार बन 

 

ऐ अल्लाह! इन्हें ज़मीन में मुक़्तदर बना 

 

ऐ अल्लाह! हमें हक़ के बारे में इनके खुले छुपे हामियों मददगारों और नासिरों में से क़रार दे 

 

ऐ अल्लाह! इनसे दुश्मनी करने इनको तन्हा छोड़ने और इनका ख़ून बहाने का बदला ले, हमारी इनकी और हर मोमिन व मोमीना की मदद फ़रमा, हर एक ना फ़रमान सरकश और हर हैवान की अज़ीयत पर की तेरे क़ब्ज़ा ए क़ुदरत में है, बेशक तू है सख़्त अज़ाब वाला बड़े दबाओ वाला!

 

इन'नल-लाहा व मलाई-कतोहू युसल लूना अलन नबी, या अय्योहल लज़ीना आ-मनु सल्लू अलैही व सल्लिमु तस्लीमा 

 

लब्बैका या रब्बी व सा-दईका व सुब्हानका, अल्लाहुम्मा सल्ली अला मोहम्मदिन व आले मोहम्मद व बारीक अला मोहम्मदिन व आले मोहम्मद कमा सल-लैता व बा-रक्ता अला इब्राहीमा इन-नका हमीदुन मजीद,

 

अल्लाहुम्मा अरहम मोहम्मदीन व आले मोहम्मद कमा रहीमता इब्राहीमा व आले इब्राहीमा इन-नका हमीदुन मजीद,

 

अल्लाहुम्मा सल्लिम अला मोहम्मदीन व आले मोहम्मद कमा सल्लमता अला नुहीन फ़ी-अल आलामीन,

 

अल्लाहुम्मा अम्नुन अला मोहम्मदीन व आले मोहम्मदीन कमा मनन्ता अला मूसा व हारुना,

 

अल्लाहुम्मा सल्ली अला मोहम्मदिन व आले मोहम्मद कमा शर्रफ-तना बीही,

 

अल्लाहुम्मा सल्ली अला मोहम्मदिन व आले मोहम्मद कमा हादैतना बीही,

 

अल्लाहुम्मा सल्ली अला मोहम्मदिन व आले मोहम्मद अब-अस-हो मुक़ामन महमूदा यग़-बितोहू बीही अल-अव्वालूना व अल-आखेरूना अला मोहम्मदीन व आलेही,

 

अस्सलामो कल-लामा तला-अत शम्सो औ ग़रब-तो, अला मोहम्मदीन व आलेही,

 

अस्सलामो कुल-लमा तरा-फ़त ऐनो औ बरा-क़त अला मोहम्मदिन व आलेही,

 

अस्सलामो कुल-लमा ज़ूकिरा, अस्सलामो अला मोहम्मदिन व आलेही, अस्सलामो कल-लामा सब्बेहल लाहो मलाकून औ क़द-दा'सहु,

 

अस्सलामो अला मोहम्मदीन व आलेही फ़ी अल-अव्वालीना, व अस्सलामो अला मोहम्मदीन व आलेही फ़ी अल'आख़ेरीना, व

 

अस्सलामो अला मोहम्मदीन व आलेही फ़ीद दुन्या वल आख़ेरह,

 

अल्लहुमा रब्बाल बलाद अल्हराम व रब्बर रुकने वल मुक़ाम, व रब्बल हिल्ले वल हराम, अब-लगों मुहम्मदन नबीयेका अन्नस सलाम,

 

अल्लाहुम्मा आ-अते मोहम्मदन मिनल बहाए वन नज़राते वस सरूरे वल करामतें वल ग़िबतते वल वसीलते वल मन्ज़ेलते वल मक़ामे वस शरफ़े वर रिफ़अते वश शफ़ाअते इनदका यौमल क़यामते अफ़ज़ला मा तुअ-तेइ अहदन मिन ख़लक़ेका व आ-अते मोहम्मदन फ़ौक़ा मा तोअती अल-ख़लाएक़ा मीनल ख़ैरे अज़आ-फ़न कसीरतन ला युहसीहा ग़एरुका,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन व आले मोहम्मद अत-यबा व अतहरा व अज़्की वा अनमि व अफ्ज़ला मा सल-लैता अला अहदीन मीनल अव्वलीन वल आख़ेरीन व अला अहदीन मीन ख़लक़ेका या अर-हमर राहेमीन,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला अलीयिन अमीरल मोमेनीना व वाले मन वाला हो व आदे मन आदा हो व ज़ायफ़ल अज़ाबा अला मन शरेका फ़ी दमेही,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला फ़ातेमता बिन्ते नबीयेका मोहम्मदीन अलैहे व आलेही,

 

अस्सलामो व वाले मन वालाहा व आदे मन आदाहा, व ज़ायफ़ल अज़ाबा अला मन ज़लमाहा, व ला-अन मन आ ज़ी नबीयेका फ़ीहा,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला अल-हसने वल हुसैने इमामियल मुसलेमीन व वाले मन वाला हुमा, व आदे मन आदा हुमा व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन शरिका फ़ी दिमाए हिमा,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला अली इबनिल हुसैन ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन ज़ला मोहु,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मद इबने अलीयिन ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन ज़ला मोहु,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला जाफ़र इबने मोहम्मद ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन ज़ला मोहु, 

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मूसा इबने जाफ़र ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन शरेका फ़ी दामेही,
 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला अली इबने मूसा ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन शरेका फ़ी दामेही,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मद इबने अली ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन ज़ला मोहु,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला अल हसन इबने अली ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व ज़ाइफ़ल अज़ाबा अला मन ज़ला मोहु,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला अल ख़लाफ़े मीन बा-देहीम ईमामल मुस्लेमीन व वाले मीन वालाहो, व आदे मीन आदाहो, व अज्जिल फ़राजाहो,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला अल क़ासिमे वत ताहिरे अबनई नबीयेका,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला रुक़ैय्या बिन्ते नबीयेका वल ला-अन मन अज़ी नबीयेका फ़ीहा,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला उम्मे कुलसुम बिन्ते नबीयेका वल ला-अन मन अज़ी नबीयेका फ़ीहा,

 

अल्लाहुम्मा सल्ले अला ज़ुर्रीयते नबीयेका,

 

अल्लाहुम्मा अख़लुफ़ नबीयेका फ़ी अहलेबैतेही,

 

अल्लाहुम्मा मक्कीन लहुम फ़ी अल-अर्ज़े,

 

अल्लाहुम्मा अज-अलना मीन अददेहिम व मददेहिम व अन्सारेहिम अलल हक़्क़े फ़िस सिर्रे वल अलानीयते,

 

अल्लाहुम्मा अतलुब बेज़ाह लेहीम व वितरेहिम व दिमाएहिम व कुफ़्फ़ा अन-ना व अन्हुम व अन कुल्ले मोमेनीन व मोमेनातिन बा-असा कुल्ले बाग़इन व तागीन व कुल्ले दाब बतिन अन्ता आखिज़ बेनासी यतेहा इन नका अशद दो बा असन व अशद दो तनकीलन

 

إِنَّ اللهَ وَمَلائِکَتَہُ یُصَلُّونَ عَلَی النَّبِیِّ یَا أَ یُّھَا الَّذِینَ آمَنُوا صَلُّوا عَلَیْہِ وَسَلِّمُوا تَسْلِیماً،

لَبَّیْکَ یَا رَبِّ وَسَعْدَیْکَ وَسُبْحانَکَ اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ وَبارِکْ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ کَما صَلَّیْتَ وَبارَکْتَ عَلَی إِبْراھِیمَ وَآلِ إِبْراھِیمَ إِنَّکَ حَمِیدٌ مَجِیدٌ

اَللّٰھُمَّ ارْحَمْ مُحَمَّداً وَآلَ مُحَمَّدٍ کَما رَحِمْتَ إِبْراھِیمَ وَآلَ إِبْراھِیمَ إِنَّکَ حَمِیدٌ مَجِیدٌ

اَللّٰھُمَّ سَلِّمْ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ کَما سَلَّمْتَ عَلَی نُوحٍ فِی الْعالَمِینَ

اَللّٰھُمَّ امْنُنْ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ کَما مَنَنْتَ عَلَی مُوسی وَہارُونَ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ کَما شَرَّفْتَنا بِہِ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ کَما ھَدَیْتَنا بِہِ ۔

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ وَابْعَثْہُ مَقاماً مَحْمُوداً یَغْبِطُہُ بِہِ الْاَوَّلُونَ وَالاَْخِرُونَ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ

اَلسَّلاَمُ کُلَّما طَلَعَتْ شَمْسٌ أَوْ غَرَبَتْ، عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ  

اَلسَّلاَمُ کُلَّما طَرَفَتْ عَیْنٌ أَوْ بَرَقَتْ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ

اَلسَّلاَمُ کُلَّما ذُکِرَ اَلسَّلاَمُ، عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ اَلسَّلاَمُ کُلَّما سَبَّحَ اللهَ مَلَکٌ أَوْ قَدَّسَہُ،

اَلسَّلاَمُ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ فِی الْاَوَّلِینَ، وَاَلسَّلاَمُ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ فِی الاَْخِرِینَ، وَاَلسَّلاَمُ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِہِ فِی الدُّنْیا وَالاَْخِرَةِ۔

اَللّٰھُمَّ رَبَّ الْبَلَدِ الْحَرامِ، وَرَبَّ الرُّکْنِ وَالْمَقامِ، وَرَبَّ الْحِلِّ وَالْحَرامِ أَبْلِغْ مُحَمَّداً نَبِیَّکَ عَنَّا السَّلامَ ۔

اَللّٰھُمَّ أَعْطِ مُحَمَّداً مِنَ الْبَہاءِ وَالنَّضْرَةِ وَالسُّرُورِ وَالْکَرامَةِ وَ الْغِبْطَةِ وَالْوَسِیلَةِ وَالْمَنْزِلَةِ وَالْمَقامِ وَالشَّرَفِ وَالرِّفْعَةِ وَالشَّفاعَةِ عِنْدَکَ یَوْمَ الْقِیامَةِ أَفْضَلَ ما تُعْطِی أَحَداً مِنْ خَلْقِکَ، وَأَعْطِ مُحَمَّداً فَوْقَ مَا تُعْطِی الْخَلائِقَ مِنَ الْخَیْرِ أَضْعافاً کَثِیرَةً لاَ یُحْصِیہا غَیْرُکَ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ أَطْیَبَ وَأَطْھَرَ وَأَزْکی وَأَ نْمی وَأَ فْضَلَ مَا صَلَّیْتَ عَلَی أَحَدٍ مِنَ الْاَوَّلِینَ وَالاَْخِرِینَ وَعَلَی أَحَدٍ مِنْ خَلْقِکَ یَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِینَ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی عَلِیٍّ أَمِیرِ الْمُؤْمِنِینَ وَوالِ مَنْ والاھُ وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ شَرِکَ فِی دَمِہِ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی فاطِمَةَ بِنْتِ نَبِیِّکَ مُحَمَّدٍ عَلَیْہِ وَآلِہِ اَلسَّلاَمُ وَوالِ مَنْ وَالاہا، وَعادِ مَنْ عَادَاھَا، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ ظَلَمَہا، وَالْعَنْ مَنْ آذی نَبِیَّکَ فِیہا ۔

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی الْحَسَنِ وَالْحُسَیْنِ إِمامَیِ الْمُسْلِمِینَ، وَوالِ مَنْ وَالاھُما، وَعادِ مَنْ عَاداھُما، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ شَرِکَ فِی دِمائِھِما ۔

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی عَلِیِّ بْنِ الْحُسَیْنِ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ،وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ ظَلَمَہُ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدِ بْنِ عَلِیٍّ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ ظَلَمَہُ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ، وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ ظَلَمَہُ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُوسَی بْنِ جَعْفَرٍ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ، وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ شَرِکَ فِی دَمِہِ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی عَلِیِّ بْنِ مُوسی  إِمامِ الْمُسْلِمِینَ، وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ شَرِکَ فِی دَمِہِ ۔

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدِ بْنِ عَلِیٍّ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ، وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ ظَلَمَہُ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی عَلِیِّ بْنِ مُحَمَّدٍ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ، وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ ظَلَمَہُ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی الْحَسَنِ بْنِ عَلِیٍّ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ، وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَضاعِفِ الْعَذابَ عَلَی مَنْ ظَلَمَہُ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی الْخَلَفِ مِنْ بَعْدِھِ إِمامِ الْمُسْلِمِینَ وَوالِ مَنْ والاھُ، وَعادِ مَنْ عاداھُ، وَعَجِّلْ فَرَجَہُ

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی الْقاسِمِ وَالطَّاھِرِ ابْنَیْ نَبِیِّکَ

 اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی رُقَیَّةَ بِنْتِ نَبِیِّکَ وَالْعَنْ مَنْ آذی نَبِیَّکَ فِیہا۔

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی أُمِّ کُلْثُومَ بِنْتِ نَبِیِّکَ، وَالْعَنْ مَنْ آذی نَبِیَّکَ فِیہا ۔

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی ذُرِّیَّةِ نَبِیِّکَ۔اَللّٰھُمَّ اخْلُفْ نَبِیَّکَ فِی أَھْلِ بَیْتِہِ

اَللّٰھُمَّ مَکِّنْ لَھُمْ فِی الْاَرْضِ اَللّٰھُمَّ اجْعَلْنا  مِنْ عَدَدِھِمْ وَمَدَدِھِمْ وَأَنْصارِھِمْ عَلَی الْحَقِّ فِی السِّرِّ وَالْعَلانِیَةِ

اَللّٰھُمَّ اطْلُبْ بِذَحْلِھِمْ وَوِتْرِھِمْ وَدِمائِھِمْ وَکُفَّ عَنّا وَعَنْھُمْ وَعَنْ کُلِّ مُؤْمِنٍ وَمُؤْمِنَةٍ بَأْسَ کُلِّ باغٍ وَطاغٍ وَکُلِّ دابَّةٍ أَنْتَ آخِذٌبِناصِیَتِہا إِنَّکَ أَشَدُّ بَأْساً وَأَشَدُّ تَنْکِیلاً ۔

सैय्यद इबने ताऊस ने फ़रमाया की फिर यह कहें

ऐ मुसीबत में मेरे सरमायादार

ऐ सख्ती में  मेरे साथी,

ऐ मेरी नेमत के निगहबान,

ऐ मेरी चाहत के मरकज़,

तू मेरे ऐबों को छुपाने वाला,

खौफ में ढारस देने वाला, और

खतायें माफ़ करने वाला,

पस मेरी ग़लतियाँ माफ़ कर दे ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले

या उद दती फ़ी कुरबती, 

व साहेबी फ़ी शीद'दती 

व या वलीयी फ़ी नेमती 

व या ग़ा यती फ़ी रग़बती अन्तस सातेरो औरती 

व अल मोमिनो राउ अती

व अल मुक़ीलों अशरती 

फ़ा अग़ फ़िरली ख़तियती 

या अरहमर राहेमीन 

یَا عُدَّتِی فِی کُرْبَتِی،

وَیَا صاحِبِی فِی شِدَّتِی، وَیَا وَ لِیِّی فِی نِعْمَتِی ، وَیَا غایَتِی فِی رَغْبَتِی، أَ نْتَ السَّاتِرُ عَوْرَتِی،

وَالْمُؤْمِنُ رَوْعَتِی، وَالْمُقِیلُ عَثْرَتِی، فَاغْفِرْ لِی خَطِیئَتِی یَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِینَ ۔

इसके बाद यह कहें

ऐ माबूद! में तुझे पुकारता हूँ परेशानी में की ऐ तेरे सिवा कोई दूर नहीं कर सकता, रहमत के लिए की जो तुझी से मिलती है और दुख में की इसे सिवाए तेरे कोई हटा नहीं सकता और ख्वाहिश के लिए की वह तू ही पूरा करता है और हाजत के लिए की उसे तू ही रवा फ़रमाता है

 

ऐ अल्लाह! जैसे तूने अपनी शान व करम से मुझे इजाज़त दी है की  मै तुझ करूँ और माँगूँ और तू ने पानी याद से मुझ पर रहमत फ़रमाई पस इसी तरह ऐ मेरे सरदार अपनी मेहरबानी से मेरी तालाब की हुई हाजत पूरी फ़रमा, जिन चीज़ों की उम्मीद करता हूँ वो मुझे अता कर दे अउ हर इस चीज़ से निजात दे जिस से तेरी पनाह मांगी है! अगर मै इस लायक़ नहीं की मुझ पर तेरी रहमत हो तो भी तेरी रहमत इसकी अहल है की मुझ तक पहुंचे और मुझे घेर ले और अगर मै इस लायक़ नहीं की मेरी दुआ क़बूल हो तो भी तू  फ़ज़ल करने का अहल है, और तेरी रहमत पर हर चीज़ पर छाई हुई है पास ज़रूर है की तेरी रहमत मुझे घेर ले 

 

ऐ माबूद! ऐ मेहरबान! मैं तेरी ज़ाते करीम के वास्ते से सवाली हूँ की मोहम्मद (स:अ:व:व)पर रहमत नाज़िल कर और उनके अहलेबैत (अ:स) पर रहमत नाज़िल कर और यह की मेरी परेशानी दूर कर दे, मेरा दुःख और ग़म हटा दे ब-वास्ता अपनी रहमत के मुझ पर रहम कर और अपने फ़ज़ल से मुझे रोज़ी दे! बेशक तू दुआ का सुनने वाला क़रीब से जवाब देने वाला है!     

 
 

اَللّٰھُمَّ إِنِّی أَدْعُوکَ لِھَمٍّ لاَ یُفَرِّجُہُ غَیْرُکَ، وَ لِرَحْمَةٍ لاَ تُنالُ إِلاَّ بِکَ، وَلِکَرْبٍ لاَ یَکْشِفُہُ إِلاَّ

أَ نْتَ، وَ لِرَغْبَةٍ لاَ تُبْلَغُ إِلاَّ بِکَ، وَ لِحاجَةٍ لاَ یَقْضِیہا إِلاَّ أَ نْتَ اَللّٰھُمَّ فَکَما کانَ مِنْ شَأْنِکَ

مَا أَذِنْتَ لِی بِہِ مِنْ مَسْأَلَتِکَ، وَرَحِمْتَنِی بِہِ مِنْ ذِکْرِکَ فَلْیَکُنْ مِنْ شَأْنِکَ سَیِّدِی الْاِجابَةُ لِی 

فِیما دَعَوْتُکَ وَعَوائِدُ الْاِفْضالِ فِیما رَجَوْتُکَ وَالنَّجاةُ مِمَّا فَزِعْتُ إِلَیْکَ فِیہِ فَإِنْ لَمْ أَکُنْ

أَھْلاً أَنْ أَبْلُغَ رَحْمَتَکَ فَإِنَّ رَحْمَتَکَ أَھْلٌ أَنْ تَبْلُغَنِی وَتَسَعَنِی، وَ إِنْ لَمْ أَکُنْ لِلْاِجابَةِ أَھْلاً

فَأَ نْتَ أَھْلُ الْفَضْلِ، وَرَحْمَتُکَ وَسِعَتْ کُلَّ شَیْءٍ، فَلْتَسَعْنِی رَحْمَتُکَ یَا إِلھِی یَا کَرِیمُ

أَسْأَ لُکَ بِوَجْھِکَ الْکَرِیمِ أَنْ تُصَلِّیَ عَلَی مُحَمَّدٍ وَأَھْلِ بَیْتِہِ وَأَنْ تُفَرِّجَ ھَمِّی وَتَکْشِفَ کَرْبِی 

وَغَمِّی، وَتَرْحَمَنِی بِرَحْمَتِکَ، وَتَرْزُقَنِی مِنْ فَضْلِکَ، إِنَّکَ سَمِیعُ الدُّعاءِ قَرِیبٌ مُجِیبٌ

नमाज़ के बाद की ताकीबात (दुआ) 

ताकीबात मुश्तरका

दुआ-नमाज़ फ़ज्र के बाद

दुआ-नमाज़ ज़ोहर के बाद

दुआ-नमाज़ असर के बाद

दुआ-नमाज़ मग़रिब के बाद

दुआ-नमाज़ ईशा के बाद

रोज़ाना की दुआ व ज़यारत 

जुमा

सनीचर 

ईतवार सोमवार मंगल बुध जुमेरात

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

कृपया अपना सुझाव  भेजें

ये साईट कॉपी राईट नहीं है !