हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) की नमाज़﴿

सैय्यद इबने ताऊस (अल्लाह उनपर रहम करे) ने मातेबर रावियों के सिलसले से रिवायत किया है की ब्यान किया है की जब ईमाम रज़ा (अ:स) से नमाज़े जाफर तैय्यार के बारे में दरयाफ़्त किया गया तो ईमाम रज़ा (अ:स) ने पुछा "क्या तुम नमाज़े रसूल अल्लाह के बारे में जानते हो?" शायद रसूल अल्लाह ने कभी भी नमाज़े जाफ़र तैय्यार नहीं पढ़ी और न ही हज़रत जाफ़र तैय्यार ने कभी नमाज़े रसूल अल्लाह पढ़ी! जब ईमाम (अ:स) से नमाज़े रसूल अल्लाह को पढ़ने के तरीक़े के बारे में पुछा गया तो ईमाम (अ:स) ने कहा, 

 

"  यह 2 रकअत नमाज़ है, जिसकी पहली रकअत में सूरह फ़ातिहा (अल-हम्द) के बाद सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लना)  (सुरः न० 97) 15 बार पढ़ें फिर रुकू में जाएँ और सुभान के बाद  15 बार सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लना) पढ़ें, इसके बाद रुकू से सीधा खड़ा होकर 15 बार सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लना) पढ़ें, फिर पहला सजदा करें और सजदे में सुभान के बाद 15 बार सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लना) पढ़ें, फिर सजदे से उठ कर बैठ जाएँ और 15 बार सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लना) पढ़ें, फिर दूसरा सजदा करें और  सजदे में सुभान के बाद 15 बार सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लना) पढ़ें, फिर सजदे से उठ कर बैठ जाएँ और 15 बार सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लना) पढ़ें, फिर खड़े होकर दूसरी रकअत भी इसी तरह से पढ़ें!

 

जब आपकी नमाज़ पूरी हो जायेगी तो अल्लाह आपके सारे गुनाहों से पाक कर देगा और सारी दुआएं भी पूरी करेगा! 

 

इस नमाज़ के सलाम के बाद यह दुआ पढ़ें :   Mp3

 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत रहम वाला और मेहरबान है 

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम 

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيم

खुदा के सिवाए कोई माबूद नहीं 

 

जो हमारे और हमारे गुज़रे हुए आबाओ अजदाद का रब है 

 

खुदा के सिवाए कोई माबूद नहीं  
 

जो यकता माबूद है और हम इसके फ़रमाबरदार हैं 

 

खुदा के सिवाए कोई माबूद नहीं  
 

हम इसकी इबादत करते हैं  
 

हम इसके दीन के साथ मुख़लिस हैं 

 

अगरचेह मुशरिकों को नागवार गुज़रे 

 

खुदा के सिवाए कोई माबूद नहीं  

 

जो यकता है यकता है यकता है 

 

इसने अपना वादा पूरा किया 

 

अपने बन्दे की मदद फ़रमाई 

 

और इसके लश्कर को ग़ालिब किया 

 

और अकेले ही कई गिरोहों को शिकस्त दी  

 

और वोह हर चीज़ पर अख्तयार रखता है 

 

ऐ माबूद! तू आसमानों और ज़मीनों और जो

 

कुछ इनमें है  

 

इसे मुनव्वर करने वाला है 

 

बस हम्द तेरे लिए ही है 

 

और आसमानों और ज़मीन 

 

और जो कुछ इनमें है  

 

तू इसे क़ायम रखने वाला है 

 

तो हम्द तेरे लिए ही है  

 

तू हक़ है 

 

और तेरा वादा हक़ है 

 

और तेरा क़ौल हक़ है 

 

और तेरा अमल हक़ है  

 

जन्नत हक़ है 

 

और जहन्नम हक़ है 

 

ऐ माबूद! मैं तेरा दिलदादह हूँ 

 

तुझ पर ईमान रखता हूँ 

 

तुझ पर भरोसा करता हूँ 

 

तेरी मदद से दुश्मन से मुक़ाबला करता हूँ 

 

और तुझ से फ़ैसला चाहता हूँ 

 

ऐ मेरे रब  ऐ मेरे रब  ऐ मेरे रब 

 

अगले पिछले गुनाहों को माफ़ कर दे 

 

चाहे वो मैंने छिपाये हों या ज़ाहिरन किया हो 

 

तू ही मेरा माबूद है की तेरे सिवा कोई माबूद नहीं 

 

मोहम्मद और आले मोहम्मद पर रहमत नाज़िल फ़रमा 

 

मेरी तौबा क़बूल कर ले 

 

बेशक तू तौबा क़बूल करने वाला मेहरबान है 

 

 

ला इलाहा इलल लाहो

रब-बना व रब्बू आबा इनल अव्वलीन

ला इलाहा इलल लाहो

इलाहन वाहिदन व नहनू लहू मुस्लिमीन

ला इलाहा इलल लाहो

ला ना-बुदू इल्ला अय्याहो

मुख़लिसीना लहुद दीना

व लौ करिहल मुशरेकून

ला इलाहा इलल लाहो

वह-दोहु वह-दोहु वह-दोहु

अन्जज़ा वा-दोहु

व नसअरा अब्दोहू

व अल-अज़ ज़ा जुणदोहू

व हज़ामल अह-ज़बा वहदोहू

फ़लाहुल मुल्को व लाहुल हम्दो

व हुवा अला कुल्ले शैईन क़दीर

अल्ला हुम्मा अंता नुरिस समावाते व अल-अर्श व मन फ़ी हीना

फ़-लकल हम्दो

व अंता क़य्या-मुस समावाते व अल-अर्ज़े व मन फ़ी हिनना 

फ़-लकल हम्दो  

व अन्तल हक़्क़ो

व वादुकल हक़्क़ुन

व क़ौलोका हक़्क़ुन

व इन्जाजुका हक़्क़ुन

व जन-नतो  हक़्क़ुन

 

व अन-नारो हक़्क़ुन 

 

अल्लहुमा लका असलमतो 

 

व बिका आ-मन्तो 

 

व इलैका तवक-कलतो 

 

व बिका ख़ा-समतो 

 

व इलैका हा-कमतो 

 

या रब्बी  या रब्बी  या रब्बी  

 

इग़ फ़िरली-इ मा क़द्दमतो व अख़ ख़रतो

 

व असरर तो व आ-अ लनतो 

अंता इलाही ला इलाहा अंता 

सल्ले अला मोहम्मदिन व आले मोहम्मदिन

वग-फ़िर-ली

व-अरहमनी

व व तुब अलैय्या

इन-नका अंतत तव्वाबुर रहीम  

لاَ إِلٰهَ إِلاَّ ٱللَّهُ

رَبُّنَا وَرَبُّ آبَائِنَا ٱلاوَّلِينَ

لاَ إِلٰهَ إِلاَّ ٱللَّهُ

إِلٰهاً وَاحِداً وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ

لاَ إِلٰهَ إِلاَّ ٱللَّهُ

لاَ نَعْبُدُ إِلاَّ إِيَّاهُ

مُخْلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ

وَلَوْ كَرِهَ ٱلْمُشْرِكُونَ

لاَ إِلٰهَ إِلاَّ ٱللَّهُ

وَحْدَهُ وَحْدَهُ وَحْدَهُ

انْجَزَ وَعْدَهُ

وَنَصَرَ عَبْدَهُ

وَاعَزَّ جُنْدَهُ

وَهَزَمَ ٱلاحْزَابَ وَحْدَهُ

فَلَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ

وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَديرٌ

اَللَّهُمَّ انْتَ نُورُ ٱلسَّمَاوَاتِ وَٱلارْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ

فَلَكَ ٱلْحَمْدُ

وَانْتَ قَيَّامُ ٱلسَّمَاوَاتِ وَٱلارْضِ وَمَنْ فيهِنَّ

فَلَكَ ٱلْحَمْدُ

وَانْتَ ٱلْحَقُّ

وَوَعْدُكَ ٱلْحَقُّ

وَقَوْلُكَ حَقٌّ

وِإِنْجَازُكَ حَقٌّ

وَٱلْجَنَّةُ حَقٌّ

وَٱلنَّارُ حَقٌّ

اَللَّهُمَّ لَكَ اسْلَمْتُ

وَبِكَ آمَنْتُ

وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ

وَبِكَ خَاصَمْتُ

وَإِلَيْكَ حَاكَمْتُ

يَا رَبِّ يَا رَبِّ يَا ربِّ

إِغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَاخَّرْتُ

وَاسْرَرْتُ وَاعْلَنْتُ

انْتَ إِلٰهِي لاَ إِلٰهَ إِلاَّ انْتَ

صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ

وَٱغْفِرْ لِي

وَٱرْحَمْنِي

وَتُبْ عَلَيَّ

إِنَّكَ انْتَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

दुसरे मासूमीन (अ:स) की नमाज़ें

नमाज़ -  हज़रत अली इबने अबी तालिब (अ:स) नमाज़ -  हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स:अ) नमाज़ -  हज़रत ईमाम हसन (अ:स)
 नमाज़ -  हज़रत ईमाम हुसैन (अ:स)  नमाज़ -  हज़रत ईमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ:स)  नमाज़ -  हज़रत ईमाम मोहम्मद बाक़र (अ:स)
नमाज़ -  हज़रत ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ:स) नमाज़ -  हज़रत ईमाम मूसा काज़िम (अ:स) नमाज़ -  हज़रत ईमाम अली रज़ा (अ:स)
नमाज़ -  हज़रत ईमाम मोहम्मद तक़ी (अ:स) 

नमाज़ - हज़रत ईमाम अली नक़ी (अ:स)

नमाज़ -  हज़रत ईमाम हसन अस्करी (अ:स)
नमाज़ -  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
 

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