सैय्यदा फातिमा की हर महीने के तीसरे दिन में तस्बीह व तक़दीस﴿

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शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन  आले मोहम्मद.

   

اَللّٰہُمَّ بِعِلْمِکَ الْغَیْبِ وَ قُدْرَتِکَ عَلٰی الْخَلْقِ، اَحْیِنی ما عَلِمْتَ الْحَیَاۃَ خَیْرًا لِی، وَ تَوفَّنی اِذَا کَانَتِ الْوَفَاۃُ خَیْرًا لِی۔

اَللّٰہُمَّ اِنِّیْ اَسْأَلُکَ کَلِمَۃَ الْاِخْلاَصِ، وَ خَشْیَتَکَ فِی الرِّضَا وَ الْغَضَبِ، وَ الْقَصْدَ فِی الْغِنٰی وَ الْفَقْرِ۔

وَ اَسْاَلُکَ نَعِیْمًا لاَ یَنْفَدُ، وَ اَسْاَلُکَ قُرَّۃَ عَیْنٍ لاَ تَنْقَطِعُ، وَ اَسْاَلُکَ الرِّضَا بِالْقَضَائِ، وَ اَسْاَلُکَ بَرْدَ الْعَیْشِ بَعْدَ الْمَوْتِ، وَ اَسْاَلُکَ النَّظَرَ اِلٰی وَجْہِکَ، وَ الشَّوْقِ اِلٰی لِقَائِکَ مِنْ غَیْرِ ضَرَّائٍ مُضِرَّۃٍ وَلاَ فِتْنَۃٍ مُظْلِمَۃٍ۔

اَللّٰہُمَّ زَیِّنَّا بِزِیْنَۃِ الْاِیْمَانِ، وَاجْعَلْنَا ہُدَاۃً مَہْدیِّیْنَ، یَا رَبَّ الْعَالَمِیْنَ

 

अल्ला हुम्मा सल्ले अला मुहम्मद व आले मुहम्मद

 

मुहर्रम 

सफ़र 

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