नमाज़े तहज्जुद / सलात अल'लैल / नमाज़े शब﴿

 नमाज़े शब् की MP3 दुआएँ सुने     पार्ट-1   पार्ट-2   पार्ट-3   पार्ट-4   पार्ट-5   पार्ट-6   पार्ट-7   पार्ट-8    पार्ट-9 

सलात अल'लैल  (नमाज़े शब्(al-islam.org)  अल-मुबीन pdf PDF अल'हुज्जत (दुआ समेत ) PPT
Pdf एकेडेमी    E-reader Pdf तहज्जुद -मुश्तर्कह ताक़ॆबात iPhone Appln new
Mp3 

नमाज़ तहज्जुद के फ़ायेदे NEW

  विडियो
और किसी वक़्त रात में तहज्जुद पढ़ा करो जो तेरे लिए बेहतर चीज़ है, करीब है की तेरा रब मक़ाम महमूद में पहुंचा दे - अल'क़ुरान 17:19

व मिनल लैल फ़'तहज्जुद बही नाफ़िलतल लका असा अन यब'अस्का रब्बका मक़ामम महमूदा

وَمِنَ اللَّيْلِ فَتَهَجَّدْ بِهِ نَافِلَةً لَّكَ عَسَىٰ أَن يَبْعَثَكَ رَبُّكَ مَقَامًا مَّحْمُودًا

तहज्जुद का वक़्त : तहज्जुद की नमाज़ का वक़्त आधी रात से (मग़रिब और फजर की नमाज़ के ठीक बीच का वक़्त) फजर की  का वक़्त है!    लेकिन इस नमाज़ को इशा की नमाज़ के बाद किसी भी वक़्त पढ़ा जा सकता है हालांकि यह बेहतर है की इस को  रात के आखरी वक़्त यानी फजर के नमाज़ के क़ब्ल पढ़ा जाए! अगर मोमिन को आधी रात से फजर के बीच का वक़्त वक़्त मुमकिन नहीं हो तो इसे सुबह या दिन के किसी वक़्त भी पढ़ा जा सकता है लेकिन इस सूरत में क़ज़ा की नियत से पढ़ा जाए बजाये इसके की इसे आधी रात से पहले या इशा के बाद पढ़ा जाए!      क़ज़ा नमाज़ तहज्जुद के फ़ज़ीलत की तफसील यहाँ पढ़ें   

नमाज़ तहज्जुद से पहले की दुआएँ

इस नमाज़  का अव्वल वक़्त आधी रात से शुरू होता है और सुबह सादिक़ के तुलु होने से जितना नज़दीक हो बेहतर है ! अयातुल्लाह सीस्तानी के मुताबिक सलात अल'लैल का वक़्त आधी रात से फ़जर की नमाज़ के क़ब्ल तक होता है जब्कि इसे फजर की नमाज़ के क़ब्ल पढने की फजीलत है, लेकिन अगर किसी शख्स को इस वक़्त में इस नमाज़ को बजा लाने में परेशानी है तो इसे आधी रात से पहले भी पढ़ सकता है 

नमाज़ तहज्जुद पढने का तरीक़ा 

यह नमाज़ 11 रक्'अतों की होती है 

पहले 8 रक्'अत नमाज़ 2-2 रक्'अत करके बजा लाये जिसकी नियत :"नमाज़ नवाफ़ी'लतुल लैल" की होगी, यह नमाज़ फजर की नमाज़ की तरह पढ़ी जायेगी 

इसके बाद अगर वक़्त हो तो ताकीबात बाद नाफ़ेलह पढ़ें  

इसके बाद 2 रक्'अत नमाज़ "सलात शफ़ा" की नियत से पढ़े, यह नमाज़ भी फजर की नमाज़ की तरह पढ़ी जायेगी 

इसके बाद गर वक़्त हो "ताकीबात बाद नमाज़ शफ़ा" पढ़े, अगर मुमकिन न हो तो तो यह दुआ ज़रूर पढ़े :

इलाही तेरे हुज़ूर इस रात हाजतमन्द अपनी हाजात पेश करते हैं  इलाही 'अर'रज़ा लका हाज़ल लैल अल' मुता' अर-राज़ुन

إِلھِی تَعَرَّضَ لَکَ فِی ھذ اللَّیْلِ الْمُتَعَرِّضُونَ

इसके बाद 1 रक्'अत नमाज़ ब नियत "सलात वित्र" पढ़ें - सलात वित्र में कानूत को रुकू से पहले पढ़ा जाता है 

इस नमाज़ को पढ़ने की तफ़सील इस तरह है :

नियत ब-नमाज़े वित्र करें और तक्बीरतुल एहराम (अल्लाहो अकबर) के बाद सुरह हमद पढ़ें फिर 3 मर्तबा सुरह इख्लास पढ़ें फिर 1 मर्तबा सुरह फलक पढ़ें फिर 1 मर्तबा सुरह अल'नास पढ़ें! अगर आखरी की 2 सुरह याद नहीं हो तो 3 मर्तबा सुरह इख्लास (क़ुल हुवल लाहो अहद) का पढ़ना भी काफी है

फिर तकबीर (अल्लाहो अकबर) कह कर क़नूत के लिए हाथ बुलंद करें और यह दुआ पढ़ें :

(मुस्तहब है की इंसान नमाज़े वित्र के क़ुनूत में खुदा के खौफ़ और इसके अज़ाब के दर से गिरया करे या रोने की शकल बनाए और मोमिन भाइयों के लिए दुआ मांगे! मुस्तहब की 40 मोमिनों के नाम ले कर दुआ मांगे क्योंकि जो शख्स 40 मोमिनों के लिए दुआ माँगता है इसकी दुआ यक़ीनन कबूल होती है - फिर जो दुआ चाहे मांगे)                                                                                                                     MP3Part 8

 

ला इलाहा इलल'लाहो अल'हलीमो अल'करीमो 

لآ اِلَهَ اِلاَّ اللّهُ الْحَلِيْمُ الْكَرِيْمُ

 

ला इलाहा इलल'लाहो अल'अलियों अल'अज़ीमो 

لآ اِلَهَ اِلاَّ اللّهُ الْعَلِيُّ الْعَظِيْمُ

 

सुबहान'अल्लाहे रब्बिस समावाते सब्बे' 

سُبْحَانَ اللّهِ رَبِّ السَّمَاوَاتِ السَّبْعِ

 

व रब्बिल अर्ज़ीना अल्स'सब्बी'

وَ رَبِّ الاَرْضِيْنَ السَّبْعِ

 

वमा फ़ी'हिन्ना वमा बैना हुन्ना 

وَ مَا فِيْهِنَّ وَ مَا بَيْنَهُنَّ وَ

 

व रब्बी अल'अर्शी अल'अज़ीम 

رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيْمِ

  व अल'हम्दो लिल्लाहे रब्बी अल'आलामीन

وَ الْحَمْدُ لِلّهِ رَبِّ الْعَالَمِيْنَ

कनूत की दूसरी मखसूस दुआएँ - दुआ रसूल अकरम (स:अ:व:व), दुआ ईमाम अली (अ:स), दुआ ईमाम जैन अल'आबेदीन (अ:स) वगैरह और कनूत में सिर्फ 3 बार "सुबहान अल्लाह" (खुदा पाक है) कहना भी काफ़ी है
आप अपने दाहिने हाथ में तस्बीह रखें और बायाँ हाथ बुलंद रखते हुए क़ुनूत भी पढ़ सकते हैं, इसके बाद आप 40 मुर्दों को बख्शें - अगर तादाद बढ़ भी जाए तो कोई हर्ज नहीं है! उलमा की लिस्ट के लिए यहाँ क्लिक करें - उलमा लिस्ट 
   अल्लाहुम्मा अग़'फ़िर्लि मुर्दे का नाम लें 

اَللّهُمَّ اغْفِرْ ل...مردے کا نام لیں 

फिर बायाँ हाथ इसी तरह रखते हुए क़ुनूत की हालत में 70 मर्तबा इस तरह इस्तग'फ़ार करें "
अपने रब अल्लाह से बख्शीश चाहता हूँ और तौबा करता हूँ  अस्तग'फ़िर अल्लाहा रबी व आतूब इलैहे  

اَسْتَغْفِرُ اللّهَ رَبِّي وَ اَتُوْبُ اِلَيْه

फिर इसी तरह 7 मर्तबा इस दुआ को पढ़े 
जहन्नुम से तेरी पनाह लेने वाला यहाँ खड़ा है 

हाज़ा मक़ामो अल'आयज़ी बिका मिनन'नार  

هذَا مَقَامُ الْعَآئِذِ بِكَ مِنَ النَّار

फिर इसी तरह हाथ उठाये हुए 300 बार कहें (ईमाम जैन'अल-आबेदीन [अ:स] नमाज़े तहज्जुद के वित्र में 300 मर्तबा कहा करते थे) 
माफ़ी देमाफ़ी दे  अल'अफ़ु …. अल'अफ़ु

اَلْعَفْو...اَلْعَفْو

फिर 1 मर्तबा कहें

ऐ रब मुझे बख्श दे मुझ पर रहम कर और मेरी तौबा क़बूल फरमा, बेशक तू बड़ा तौबा कुबूल करने वाला माफ़ करने वाला मेहरबान है! 

रब अग़'फ़िरली अर'हम्नी तुब अलैय्या इन्नका अन्ता अल'तव्वाबो अल'गफूरों आर'रहीम

رَبِّ اغْفِرْ لِی وَارْحَمْنِی تُبْ عَلَیَّ إِنَّکَ أَنْتَ التَّوَّابُ الْغَفُورُ لرَّحِیمُ

नमाज़े वित्र की दूसरी दुआएँ 

फिर सजदे में जाएँ और नमाज़े वित्र को पूरा करें और सलाम के तस्बीह फ़ातिमा ज़हरा (स:अ) पढ़ें और फिर कहें 

हमद है सुबह के रब के लिए, हमद है सुबह को ज़ाहिर करने वाले के लिए 

अलहम्दो ले'रब अल्स'सबाह, अलहम्दो ले'फ़ालिक़ अल्स'सबाह

الْحَمْدُ لِرَب الصَّباحِ الْحَمْدُ لِفالِق الْاِصْباحِ

इसके बाद 3 मर्तबा कहें :

पाक है मेरा रब जो बादशाह पाक तर ग़ालिब है हिकमत वाला  सुब्हाना रब्बी'अल मलेकिल कुद'दुस अल'अज़ीज़ अल'हकीम  

سُبْحانَ رَبِّیَ الْمَلِکِ الْقُدُّوس الْعَزِیزِ الْحَکِیمِ

फिर कहे 

ऐ ज़िन्दा ऐ पाइन्दा ऐ नेक ऐ मेहरबान ऐ बे' नेयाज़, ऐ सखी मुझे वोह तिजारत नसीब कर जो फ़ज़ीलत में बढ़ी हुई हो, रिज़्क में वुस'अत लाने वाली और अंजाम कार मेरे लिए बेहतर हो क्योंकि वोह भलाई नहीं जिस का अंजाम अच्छा नहीं हो 

या हैय्यो, या क़य्युमो या बर्रो या रहीमो या गनीयो या करीमो आर'ज़ूक्नी मिनल-तीजा-रते आ'ज़मोहा फ़ज्लन व औ'सा'अहा रिज़'क़न व खै'रहा ली आ'क़े-बतन'इन्नाहो ला खैरा फ़ीमा ला आक़ेबत लहू

یَا حَیُّ یَا قَیُّومُ یَا بَرُّ یَا رَحِیمُ یَا غَنِیُّ یَا کَرِیمُ ارْزُقْنِی مِنَ التِّجارَةِ  اَعْظَمُھَا فَضْلاًو َأَوْسَعَہا رِزْقاً وَخَیْرَہا لِی عاقِبَةً فَإِنَّہُ لاَ خَیْرَ فِیما لاَ عاقِبَةَ لَہُ

मुनासिब है इसके बाद दुआए हज़ीन पढ़े
फिर सजदे में जाए और मर्तबा कहे 
पाक व पाकीज़ा है फ़रिश्तों और रूह का परवरदिगार 

सुब्बुहुन क़ुददुसो रब अल'मला'इकतो वर'रूहो

سُبُّوح قُدُّوسٌ رَبُّ الْمَلائِکَة وَالرُّوح 

अब बैठ कर आयत अल'कुर्सी पढ़े, फिर सजदे में जाए और 5 मर्तबा कहे 

पाक व पाकीज़ा है फ़रिश्तों और रूह का परवरदिगार 

सुब्बुहुन क़ुददुसो रब अल'मला'इकतो वर'रूहों

سُبُّوح قُدُّوسٌ رَبُّ الْمَلائِکَة وَالرُّوح 

अगर वक़्त हो तो पढ़े : इसके बाद नमाज़े फ़जर के नाफ़ेलाह के लिए खड़ा हो जाए, नाफेलाह फ़जर 2 रक्'अत नमाज़ है जिसकी पहली रक्'अत में सुरह अल'हम्द के बाद सुरह अल'काफेरून  और दूसरी रक्'अत में अल'हम्द के बाद सुरह तौहीद पढ़े ! नमाज़ का सलाम देने के बाद पहलु के बल रु-ब-रु क़िब्लह होकर यूँ लेट जाए जैसे मैय्यत को कब्र में लिटाया जाता है, बस अपना दायाँ गाल अपने दायें हाथ पर रखे और यह पढ़े :

मैं वा'बस्तह हुआ हूँ ख़ुदा की मज़बूत ज़ंजीर से जो टूटने वाली नहीं है और थामे हुए ख़ुदा की मोहकम'तर रस्सी और ख़ुदा की पनाह लेता हूँ अरब व अजम के बदकारों के शर से और ख़ुदा की पनाह लेता हूँ जिन व इन्स के बदकारों के शर से 

अस'तम'सकतो ब'उर्वती अल्लाहे अल'वुस्क़ा अल'लती ला अन'फ़िसामा लहा व आ'तासम'तो बे'हबल अल्लाहे अल'मतीन व आ'उज़ो बिल्लाहे मिन शर्रे फ़'सक़'तेह अल'जिन्ने वल'नास  

اسْتَمْسَکْتُ بِعُرْوَةِ اللهِ الْوُثْقیٰ الَّتِی لاَ انْفِصامَ لَہا وَاعْتَصَمْتُ بِحَبْلِ اللهِ الْمَتِینِ وَأَعُوذُ بِاللهِ مِنْ شَرِّ فَسَقَةِ الْعَرَبِ وَالْعَجَمِ وَأَعُوذُ بِاللهِ مِنْ شَرِّ فَسَقَةِ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ۔

फिर 3 मर्तबा कहे : 

 पाक है सुबह का परवरदिगार जो सुबह को वुजूद में लाता है 

सुब्हाना रब्बी अल'सबाह फ़ालिक़ अल'सबाह  

سُبْحَاَنَ رَبِّ الصَّباحِ فالِق الْاِصْباحِ۔

इसके बाद सुरह आले-इमरान की वोह 5 आयतें पढ़े जिन का शुरू यह है "इन्ना फ़ी ख़ल'के समावाते अल'अर्ज़" !

बाद मैं बैठ कर तस्बीह हज़रात ज़हरा (स:अ) पढ़े! किताब "मन ला यह'ज़रल फ़क़ीह" में रिवायत है हुई है की जो शख्स सुबह के नाफेलह और फ़रीज़ा के दरम्यान "मोहम्मद और आले मोहम्मद (अ:स)" पर 100 मर्तबा दरूद भेजे तो अल्लाह इसे जहन्नुम की तपिश से महफ़ूज़ रखेगा और जो शख्स 100 मर्तबा कहे 

 पाक है मेरा अज़ीम रब और मैं इसकी हमद करता हूँ ! मैं अपने अल्लाह से माफ़ी माँगता और युबा करता हूँ 

सुब्हाना रब्बियल अज़ीम व बे'हम्देह असतग'फ़िर अल्लहा रबी व अतुबो इलैहे

سُبْحانَ رَبِّیَ الْعَظِیْمِ وَبِحَمْدِہ اَسْتَغْفِرُاللهَ رَبِّیْ وَاَتُوْبُ اِلَیْہِ

तो हक़'ताला इसके लिए जन्नत में एक घर बनाएगा! जो शख्स 21 मर्तबा सुरह तौहीद पढ़ेगा तो अल्लाह इसके लिए भी जन्नत में एक घर बनाएगा और अगर 40 मर्तबा सुरह तौहीद पढ़ेगा तो खुदाए त'आला इसे बख्श देगा! बेहतर है की नमाज़ शब्  यानी नमाज़े तहज्जुद के बाद सहीफ़ा कामेलह की 32वीं  दुआ पढ़े जिसकी शुरुआत कुछ इस तरह से होती है : 

 अल्लाह! ऐ दायेमी व अब्दी बादशाही वाले 

अल्लाहुम्मा या ज़ा'अल-मुल्के अल-मुता-अब'बदे बिल-खुलुदे

اَللّٰھُمَّ َیا ذَاالْمُلْک ِ الْمُتَأَبِّدِ بِالْخُلُودِ

फिर सज्दा-ए-शुक्र बजा लाये और बेहतर है की इसमें मोमिन भाइयों के लिए दुआ करे और इसी हालत में सजदा में "अल्लाहुम्मा रब्बिल फजर…… "  (ऐ माबूद, ऐ फ़जर के रब….) से शुरू होने वाली दुआ पढ़े जो सज्दा-ए-शुक्र के ब्यान में ज़िक्र हो चुकी है! मु'अल्लिफ़ को अपने मोमिन भाइयों से बहुत उम्मीद है की वोह हालत-ए-सजदा में इसके लिए भी दुआ करेंगे क्योंकि इसे इनकी दुआओं की सख्त ज़रुरत है, और खुदा वन्द आलम ही सब को तौफ़ॆक़ देने वाला है!  

दुसरे अहम् लिंक्स देखें

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

कृपया अपना सुझाव  भेजें

ये साईट कॉपी राईट नहीं है !