ज़्यारत वारिसा﴿

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अल्लाहो अकबर ला इलाहा इल्ला'अल्लाह 

खुद बुज़ुर्गतर है अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं 

 

बस ख़ुदाए 'आला की हम्द सीना करता जाए, रसूल अल्लाह (:::) और ईमाम हुसैन (:) पर दरूद सलाम पढता हुआ चले, ईमाम हुसैन (:) के क़ातिलों पर लानत भेजे और  बेज़ारी ज़ाहिर करे जिन्होंने मोहम्मद (:::) आले मोहम्मद (:) पर ज़ुल्म की इब्तेदा की, जब हरम शरीफ़ के दरवाज़े पर पहुँचे तो यह कल्मात कहे :    

 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है   

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अररहीम

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ

सलाम हो आप पर जनाबे आदम सफ़ी'अल्लाह के वारिस, सलाम हो आप पर जनाबे नूह नबी'अल्लाह के वारिससलाम हो आपपर जनाबे इब्राहीम ख़लील'अल्लाह के वारिससलाम हो आपपर जनाबे मूसा कलीम'अल्लाह के वारिस, सलाम हो आपपर जनाबे ईसा रूह'अल्लाह के वारिस, सलाम हो आप पर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा हबीबे ख़ुदा के वारिससलाम हो आप पर हज़रत अमीरुल मोमिनीन  ख़ुदा के वारिस, सलाम हो आप पर फ़रज़न्द हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा के, सलाम हो आप पर फ़रज़न्द हज़रत अलीए मुर्तज़ा के, सलाम हो आप पर फ़रज़न्द ख़दीजतुल कुबरा के, सलाम हो आप पर  शहीद जिस के ख़ून का तालिब ख़ुदा है  फ़रज़न्द भी ऐसे ही शहीद के जिस के ख़ून का तालिब ख़ुदा है, और जो मुसीबत का सबब हुआ और मुसीबत ज़दा हुआ! मैं गवाही देता हूँ की बेशक आप  क़ायम की  और आप ने ज़कात दी, और नेक बातों का हुक्म दिया और बुरी बातों से मना किया, और मर्ज़ीए ख़ुदा और इसके रसूल पर चले की आप शहीद किये गए, बस लानत करे ख़ुदा इस गिरोह पर जिस ने आपके क़त्ल होने को सुना और इस पर राज़ी रहा! आक़ा मेरे, अब्दुल्लाहुल हुसैन (:) मैं गवाही देता हूँ की बेशक आप एक ही नूर थे पुश्त'हाय बुज़ुर्ग में और हमहाइए पाक पाकीज़ा में, नहीं छुआ आपको निजासत जाहिलियत के और पहनाया इसने आपको अपना स्याह लिबास, मैं गवाही देता हूँ यक़ीनन आप दीन के सतून और इरकॉन मोमिनीन हैं और गवाही देता हूँ की बेशक आप ऐसे ईमाम हैं जो की नेक परहेज़गार और राज़ी रज़ाए ख़ुदा और पाकीज़ा हादी और हिदायत याफ़्ता हैं और मैं गवाही देता हूँ की बे'तहक़ीक़ के जो अईम्मा मासूमीन (:) हैं आपकी ज़ुर्रियात में ओज कलमा परहेज़गारी हैं, निशान'हाए हिदायत हैं और रिसाँ मज़बूत हैं और हुज्जत ख़ुदा हैं अहले दुन्या पर और मैं गवाह करता हूँ अल्लाह को और इसके मलाईका को, और इसके अम्बिया को और इसके रसूलों को इस बात पर की मैं ईमान लाया हूँ और यक़ीन करने वाला हूँ की आप हज़रात की रज'अत होगी, दीन के तरीकों से और अपने अमली के ख़ात्मे से, क़ल्ब मेरा आपके क़ल्ब से मेल रखने वाला है, और मेरा अमर आपके अमर के ताबे है, सल्वाते खुदा हो आप हज़रात पर और आप हज़रात के रूहों पर जसदों पर, और जिस्मों पर, और आप हज़रात के हाज़िर और ग़ायब पर और ज़ाहिर और बातिन पर, मेरे माँ -बाप आप पर फ़िदा हों फ़रज़न्द रसूले खुदा अबु अब्दुल्लाहुल हुसैन (:), बे'तहक़ीक़ बहुत बुलंद हो गई मुसीबत बला और जलील हुई मुसीबत आपकी,हम लोगों पर तमाम अहले आसमान और ज़मीन पर, बस लानत करे ख़ुदा इस गिरोह पर जिन्होंने रखा घोड़ों पर और लेजाम चढ़ाये और आमादा हुए आपके क़त्ल पर, मेरे आक़ा अब्दुल्लाहुल हुसैन (:) क़सद किया है मैंने आपके हरम का और आया हूँ मैं आपके शहादतगाह पर, सवाल करता हूँ मैं ख़ुदा से आपकी इस शान का वास्ता देकर जो ख़ुदा  नज़दीक है और इस मुक़ाम का वास्ता देकर जो ख़ुदा नज़र में यह की सलवात भेजे मोहम्मद (:::) आले मोहम्मद (:) पर और यह की गरदाने मुझ को आप हज़रात के साथ दुन्या आख़ेरत में                          

 

 

 

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ وَلِيِّ ٱللَّهِ وَحَبِيبِهِ اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ خَلِيلِ ٱللَّهِ وَنَجِيبِهِ اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ صَفِيِّ ٱللَّهِ وَٱبْنِ صَفِيِّهِ اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلْحُسَيْنِ ٱلْمَظْلُومِ ٱلشَّهِيدِ اَلسَّلاَمُ علىٰ اسِيرِ ٱلْكُرُبَاتِ وَقَتِيلِ ٱلْعَبَرَاتِ اَللَّهُمَّ إِِنِّي اشْهَدُ انَّهُ وَلِيُّكَ وَٱبْنُ وَلِيِّكَ وَصَفِيُّكَ وَٱبْنُ صَفِيِّكَ ٱلْفَائِزُ بِكَرَامَتِكَ اكْرَمْتَهُ بِٱلشَّهَادَةِ وَحَبَوْتَهُ بِٱلسَّعَادَةِ وَٱجْتَبَيْتَهُ بِطِيبِ ٱلْوِلاَدَةِ وَجَعَلْتَهُ سَيِّداً مِنَ ٱلسَّادَةِ وَقَائِداً مِنَ ٱلْقَادَةِ وَذَائِداً مِنْ ٱلذَّادَةِ وَاعْطَيْتَهُ مَوَارِيثَ ٱلانْبِيَاءِ وَجَعَلْتَهُ حُجَّةً عَلَىٰ خَلْقِكَ مِنَ ٱلاوْصِيَاءِ فَاعْذَرَ فِي ٱلدُّعَاءِ وَمَنَحَ ٱلنُّصْحَ وَبَذَلَ مُهْجَتَهُ فِيكَ لِيَسْتَنْقِذَ عِبَادَكَ مِنَ ٱلْجَهَالَةِ وَحَيْرَةِ ٱلضَّلاَلَةِ  وَقَدْ تَوَازَرَ عَلَيْهِ مَنْ غَرَّتْهُ ٱلدُّنْيَا وَبَاعَ حَظَّهُ بِٱلارْذَلِ ٱلادْنَىٰ وَشَرَىٰ آخِرَتَهُ بِٱلثَّمَنِ ٱلاوْكَسِ وَتَغَطْرَسَ وَتَرَدَّىٰ فِي هَوَاهُ وَاسْخَطَكَ وَاسْخَطَ نَبِيَّكَ وَاطَاعَ مِنْ عِبَادِكَ اهْلَ ٱلشِّقَاقِ وَٱلنِّفَاقِ وَحَمَلَةَ ٱلاوْزَارِ ٱلْمُسْتَوْجِبِينَ ٱلنَّارَ فَجَاهَدَهُمْ فِيكَ صَابِراً مُحْتَسِباً حَتَّىٰ سُفِكَ فِي طَاعَتِكَ دَمُهُ وَٱسْتُبِيحَ حَرِيـمُهُ اَللَّهُمَّ فَٱلْعَنْهُمْ لَعْناً وَبيلاًَ وَعَذِّبْهُمْ عَذَاباً الِيماً اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا بْنَ رَسُولِ ٱللَّهِ اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا بْنَ سَيِّدِ ٱلاوْصِيَاءِ اشْهَدُ انَّكَ امِينُ ٱللَّهِ وَٱبْنُ امِينِهِ عِشْتَ سَعيدا ًوَمَضَيْتَ حَمِيداً وَمُتَّ فَقِيداً مَظْلُوماً شَهِيداً وَاشْهَدُ انَّ ٱللَّهَ مُنْجِزٌ مَا وَعَدَكَ وَمُهْلِكٌ مَنْ خَذَلَكَ وَمُعَذِّبٌ مَنْ قَتَلَكَ وَاشْهَدُ انَّكَ وَفَيْتَ بِعَهْدِ ٱللَّهِ وَجَاهَدْتَ فِي سَبِيلِهِ حَتَّىٰ اتَاكَ ٱلْيَقِينُ فَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ قَتَلَكَ وَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ ظَلَمَكَ وَلَعَنَ ٱللَّهُ امَّةً سَمِعَتْ بِذٰلِكَ  فَرَضِيَتْ بِهِ  اَللَّهُمَّ إِِنِّي اشْهِدُكَ انِّي وَلِيٌّ لِمَنْ وَالاَهُ وَعَدُوٌّ لِمَنْ عَادَاهُ بِابِي انْتَ وَامِّي يَا بْنَ رَسُولِ ٱللَّهِ اشْهَدُ انَّكَ كُنْتَ نُوراً فِي ٱلاصْلاَبِ ٱلشَّامِخَةِ وَٱلارْحَامِ ٱلْمُطَهَّرَةِ لَمْ تُنَجِّسْكَ ٱلْجَاهِلِيَّةُ بِانْجَاسِهَا وَلَمْ تُلْبِسْكَ ٱلْمُدْلَهِمَّاتُ مِنْ ثِيَابِهَا  وَاشْهَدُ انَّكَ مِنْ دَعَائِمِ ٱلدِّينِ وَارْكَانِ ٱلْمُسْلِمِينَ وَمَعْقِلِ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَاشْهَدُ انَّكَ ٱلإِمَامُ ٱلْبَرُّ ٱلتَّقِيُّ ٱلرَّضِيُّ ٱلزَّكِيُّ ٱلْهَادِي ٱلْمَهْدِيُّ وَاشْهَدُ انَّ ٱلائِمَّةَ مِنْ وُلْدِكَ كَلِمَةُ ٱلتَّقْوَىٰ وَاعْلاَمُ ٱلْهُدَىٰ وَٱلْعُرْوَةُ ٱلْوُثْقَىٰ وَٱلْحُجَّةُ علىٰ اهْلِ ٱلدُّنْيَا وَاشْهَدُ انِّي بِكُمْ مُؤْمِنٌ وَبِإِِيَابِكُمْ مُوقِنٌ بِشَرَايِعِ دِينِي وَخَوَاتِيمِ عَمَلِي وَقَلْبِي لِقَلْبِكُمْ سِلْمٌ وَامْرِي لاِمْرِكُمْ مُتَّبِعٌ وَنُصْرَتِي لَكُمْ مُعَدَّةٌ حَتَّىٰ يَاذَنَ اللَّهُ لَكُمْ فَمَعَكُمْ مَعَكُمْ لاََ مَعَ عَدُوِّكُمْ صَلَوَاتُ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَعَلَىٰ ارْوَاحِكُمْ وَاجْسَادِكُمْ وَشَاهِدِكُمْ وَغَائِبِكُمْ وَظَاهِرِكُمْ وَبَاطِنِكُمْ آمِينَ رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ

ज़्यारत हज़रत अली अकबर अलैही सलाम 

   

اَلسَّلاَمُ عَلَیْکَ یَا بْنَ رَسُوْلِ اللّٰہِ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکَ یَابْنَ نَبِیِّ اللّٰہِ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکَ یَابْنَ اَمِیْرِ الْمُؤْمِنِیْنَ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکَ یَابْنَ الْحُسَیْنِ الشَّہِیْدِ  اَلسَّلاَمُ عَلَیْکَ اَیُّہَا الشَّہِیْدُ وَابْنُ الشَّہِیْدِ السَّلاَمُ عَلَیْکَ اَیُّہَا الْمَظْلُوْمُ وَابْنُ الْمَظْلُوْمِ  لَعَنَ اللّٰہُ اُمَّۃً قَتَلَتْکَ وَ لَعَنَ اللّٰہُ اُمَّۃً ظَلَمَتْکَ وَ لَعَنَ اللّٰہُ اُمَّۃً سَمِعَتْ بِذَالِکَ فَرَضِیَتِ بِہٖ.

ज़्यारत शोहदाए कर्बला (:)

   

السَّلاَمُ عَلَیْکُمْ یَا اَوْلِیآءَ اللّٰہِ وَ اَحِبَّائَہٗ اَلسَّلاَمُ عَلَيْکُمْ یَا اَصْفِیَاءَ اللّٰہِ اَوِدَّائَہٗ  اَلسَّلاَمُ عَلَیْکُمْ یَا اَنْصَارَ دِیْنِ اللّٰہ ِ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکُمْ یَا اَنْصَارَ رَسُوْلِ اللّٰہِ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکُمْ یَا اَنْصَارَ اَمِیْرِ الْمُؤْمِنِیْنَ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکُمْ یَا اَنْصَارَ فَاطِمَۃَ سَیِّدَۃِ نِسَاءِ الْعٰلَمِیْنَ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکُمْ یَا اَنْصَارَ اَبِیْ مُحَمَّدِنِ الْحَسَنِ ابْنِ عَلِیِّ نِ الزَّکِیِّ النَّاصِحِ اَلسَّلاَمُ عَلَیْکُمْ یَا اَنْصَارَ اَبِیْ عَبْدِ اللّٰہِبِاَبِیْ اَنْتُمْ وَ اُمِّیْ طِبْتُمْ وَطَابَتِ الْاَرْضُ الَّتِیْ فِیْہَا دُفِنْتُمْ  وَ فُزْتُمْ فَوْزاً عَظِیْماً فَیَا لَیْتَنِیْ کُنْتُ مَعَکُمْ فَاَفُوْزَ مَعَکُمْ.

ज़्यारत हज़रत अबुल फ़ज़्लील अब्बास (:)

   

اَلسَّلاَمُ عَلَیْکَ یَابْنَ اَمِیْرِ الْمُؤْمِنِیْن اَلسَّلاَمُ عَلَیْکَ اَیُّہَا الْعَبْدُ الصَّالِحُ الْمُطِیْعُ لِلّٰہِ وَ لِرَسُوْلِہٖ اَشْہَدُ اَنَّکَ قَدْ جَاہَدْتَ وَ نَصَحْتَ وَ صَبَرْتَ حَتّٰی اَتٰیکَ الْیَقِیْنُ لَعْنَ اﷲُ الظَّالِمِیِن لَکُمْ مِنَ الْاَوَّلِیْنَ وَالْآخِرِیْنَ وَ اَلْحِقْہُمْ بِدَرَکِ الْجَحِیْمِ.

इसके बाद ज़्यारत इमाम अली रज़ा (:) और फिर ज़्यारत इमाम अल'मेहदी (:: ) पढ़ें

     
 
     
 
     
 
     
 
     
     
     

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