ज़्यारत - आले यासीन﴿

बहुत से अफ़राद जो अल्लाह त'आला को दोस्त रखते थे और इसके अहकाम पर सिद्क़ दिल से अमल करते थे इस ज़्यारत के वसीले से बार बार इमामे-ज़मान अलैहिस सलाम की बारगाह में पहुँच कर ज़्यारत का शरफ़ हासिल कर चुके हैं! लिहाज़ा  इमामे-ज़मान अलैहिस सलाम के साथ मुलाक़ात के लिए पहली शर्त यह है की पाक व पाकीज़ा रूह, तक़वा और ख़ुलूस के साथ इस वुजूदे मुक़द्दस के सामने जाए और इस ज़्यारत को पढ़े जैसा की आप (अ:स) ने खुद फ़रमाया की जब तुम लोग हमें वसीला बना कर अल्लाह त'आला की तरफ़ या हमारी तरफ़ मुतावज्जेह होना चाहो तो ज़्यारत को इस तरह पढ़ो जैसा की अल्लाह त'आला ने फ़रमाया है - सलामुन अला आले यासीन

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है   

 

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम 

 

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ

 

सलाम हो आले यासीन (आले - मुहम्मद स:अ:व) पर,  

سَلاَمٌ عَلَىٰ آلِ يـٰس.

सलाम हो आप पर ऐ अल्लाह के दा'यी और इसकी आयतों के मज़हर,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا دَاعِيَ ٱللَّهِ وَرَبَّانِيَّ آيَاتِهِ

सलाम हो आप पर ऐ बाबे ईलाही और इसकी दीन की हिफ़ाज़त करने वाले,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا بَابَ ٱللَّهِ وَدَيَّانَ دِينِهِ

सलाम हो आप पर ऐ अल्लाह के ख़लीफ़ा और इसके हक़ के मददगार,   

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا خَلِيفَةَ ٱللَّهِ وَنَاصِرَ حَقِّهِ

सलाम हो आप पर  ऐ अल्लाह की हुज्जत और मक़सदे इलाही की तरफ़ रहनुमाई  करने वाले,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا حُجَّةَ ٱللَّهِ وَدَلِيلَ إِِرَادَتِهِ

सलाम हो आप पर ऐ किताबे ख़ुदा की तिलावत करने वाले और इसके तर्जुमान,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا تَالِيَ كِتَابِ ٱللَّهِ وَتَرْجُمَانَهُ

सलाम हो आप पर रात की तमाम साअतों में और दिन के तमाम एतराफ़ में,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ فِي آنَاءِ لَيْلِكَ وَاطْرَافِ نَهَارِكَ

सलाम हो आप पर ऐ अल्लाह के ज़मीन में उसके नुमाइंदा,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا بَقِيَّةَ ٱللَّهِ فِي ارْضِهِ

सलाम हो आप पर ऐ अहद व पैमाने अल्लाह (मुक़ामे इमामत व ख़िलाफ़त)  अपने मख्लूक़ से इस अहद को लिया और मुहकम क़रार दिया!  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مِيثَاقَ ٱللَّهِ ٱلَّذِي اخَذَهُ وَوَكَّدَهُ

सलाम हो आप पर  ऐ अल्लाह के वादा जिसकी इसने ज़मानत ली,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَعْدَ ٱللَّهِ ٱلَّذِي ضَمِنَهُ

सलाम हो आप पर ऐ बुलंदशुदा परचमे अदल फैलाने वाले  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ ايُّهَا ٱلْعَلَمُ ٱلْمَنْصُوبُ

और अलमे मुस्तहकम और पनाह्गाहे मख़लूक़  

وَٱلْعِلْمُ ٱلْمَصْبُوبُ

और रहमत जो वसी-अ हो  

وَٱلْغَوْثُ وَٱلرَّحْمَةُ ٱلْوَاسِعَةُ

और वो वादा जो झूठा नहीं,  

وَعْداً غَيْرَ مَكْذُوبٍ

सलाम हो आप पर जब आप क़याम करेंगे,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تَقوُمُ

सलाम हो आप पर जबकि आप मुंतज़िर बैठे रहें (पर्दा-ए-ग़ैब) में,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تَقْعُدُ

सलाम हो आप पर जब आप क़िर'अत व तफ़्सीर करते हैं,   

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تَقْرَا وَتُبَيِّنُ

सलाम हो आप पर जब नमाज़ में मशग़ूल हों और क़ुनूत पढ़ते हैं,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تُصَلِّي وَتَقْنُتُ

सलाम हो आप पर जबकि आप रुकू व सजदा करते हैं,   

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تَرْكَعُ وَتَسْجُدُ

सलाम हो आप पर जब आप तहलील व तकबीर कहते हैं,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تُهَلِّلُ وَتُكَبِّرُ

सलाम हो आप पर जब आप अपने परवरदिगार की हम्द करते हैं,और मग़फ़ेरत तलब करते हैं,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تَحْمَدُ وَتَسْتَغْفِرُ

सलाम हो आप पर जबकि आप पर हर सुबह व शाम,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ حِينَ تُصْبِحُ وَتُمْسِي

सलाम हो आप पर हर रात में जब वो तारीक हो जाए  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ فِي ٱللَّيْلِ إِِذَا يَغْشَىٰ

और हर दिन में जब वो रौशन हो जाए,  

وَٱلنَّهَارِ إِِذَا تَجَلَّىٰ

सलाम हो आप पर ऐ ईमामे महफ़ूज़,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ ايُّهَا ٱلإِمَامُ ٱلْمَامُونُ

सलाम हो आप पर ऐ वो जो तमाम आलम पर मुक़दम सबकी आरज़ू हैं,  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ ايُّهَا ٱلْمُقَدَّمُ ٱلْمَامُولُ

सलाम हो आप पर - हर तरफ़ से सलाम  

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ بِجَوَامِعِ ٱلسَّلاَمِ

 मैं आपको गवाह बनाता हूँ,ऐ मेरे आक़ा  

اشْهِدُكَ يَا مَوْلاَيَ

मैं गवाही देता हूँ,नहीं है कोई माबूद सिवाए अल्लाह के  

انِّي اشْهَدُ انْ لاََ إِِلٰهَ إِِلاَّ ٱللَّهُ

जो यकता है, इसका कोई शरीक नहीं है,  

وَحْدَهُ لاََ شَرِيكَ لَهُ

और मुहम्मद (स:अ:व)  इसके बन्दे और रसूल हैं,  

وَانَّ مُحَمَّداً عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ

कोई हबीब नहीं है सिवाए इनके और इनके अहलेबैत (अ:स) के,  

لاََ حَبِيبَ إِِلاَّ هُوَ وَاهْلُهُ

और मैं आपको गवाही बनाता हूँ ऐ मेरे मौला  

وَاشْهِدُكَ يَا مَوْلاَيَ

 बेशक अली (अ:स)अमीर हैं मोमिनों के और इसकी हुज्जत हैं,  

انَّ عَلِيّاً امِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ حُجَّتُهُ

और हसन (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَٱلْحَسَنَ حُجَّتُهُ
और हुसैन (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَٱلْحُسَيْنَ حُجَّتُهُ
और अली इबनिल हुसैन अल-ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,    وَعَلِيَّ بْنَ ٱلْحُسَيْنِ حُجَّتُهُ
और मुहम्मद बिन अली अल बाक़िर (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَمُحَمَّدَ بْنَ عَلِيٍّ حُجَّتُهُ
और जाफ़र बिन मुहम्मद अल सादिक़ (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,    وَجَعْفَرَ بْنَ مُحَمَّدٍ حُجَّتُهُ
और मूसा बिन जाफर अल काज़िम (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَموُسَىٰ بْنَ جَعْفَرٍ حُجَّتُهُ
और अली बिन मूसा अल रज़ा (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَعَلِيَّ بْنَ مُوسَىٰ حُجَّتُهُ
और मुहम्मद बिन अली अल तक़ी (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَمُحَمَّدَ بْنَ عَلِيٍّ حُجَّتُهُ
और अली बिन मुहम्मद अल नक़ी (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَعَلِيَّ بْنَ مُحَمَّدٍ حُجَّتُهُ
और हसन बिन अली अल अस्करी (अ:स) इसकी हुज्जत हैं,   وَٱلْحَسَنَ بْنَ عَلِيٍّ حُجَّتُهُ
और मैं गवाही देता हूँ आप अल्लाह के हुज्जत हैं,   وَاشْهَدُ انَّكَ حُجَّةُ ٱللَّهِ
आप अव्वल व आख़िर हैं   انْتُمُ ٱلاوَّلُ وَٱلآخِرُ
 और बेशक आपकी रज'अत (वापसी) हक़ है,   وَانَّ رَجْعَتَكُمْ حَقٌّ لاََ رَيْبَ فِيهَا
 इसमें कोई शक नहीं है, जिस दिन नहीं फ़ायदा देगा किसी शख्स को ईमान लाना   يَوْمَ لاََ يَنْفَعُ نَفْساً إِيـمَانُهَا
जबकि इसके पहले ईमान न लाया हो,   لَمْ تَكُنْ آمَنَتْ مِنْ قَبْلُ
या ना कमाया हो ईमान में रह कर कोई ख़ैर (नेकी)   اوْ كَسَبَتْ فِي إِيـمَانِهَا خَيْراً
और यह की बेशक मौत हक़ है   وَانَّ ٱلْمَوْتَ حَقٌّ
और बेशक मुनकिर व नकीर हक़ हैं,   وَانَّ نَاكِراً وَنَكيراً حَقٌّ
और मैं गवाही देता हूँ हशर व नशर हक़ हैं,   وَاشْهَدُ انَّ ٱلنَّشْرَ حَقٌّ
और मबऊस होना हक़ है,   وَٱلْبَعَثَ حَقٌّ
और बेशक सेरात से गुज़रना हक़ है   وَانَّ ٱلصِّرَاطَ حَقٌّ
और एहतसाब होना हक़ है   وَٱلْمِرْصَادَ حَقٌّ
और मीज़ान हक़ है,   وَٱلْمِيزَانَ حَقٌّ
और हशर हक़ है,   وَٱلْحَشْرَ حَقٌّ
और हिसाब व किताब हक़ है ,   وَٱلْحِسَابَ حَقٌّ
और जन्नत व जहन्नुम हक़ है    وَٱلْجَنَّةَ وَٱلنَّارَ حَقٌّ
और वादा और धमकी इन दोनों का हक़ है!   وَٱلْوَعْدَ وَٱلْوَعِيدَ بِهِمَا حَقٌّ
ऐ मेरे मौला वो बदबख़्त है जिस ने आपसे मुख़ालफ़त की   يَا مَوْلاَيَ شَقِيَ مَنْ خَالَفَكُمْ
और नेकबख़्त है जिसने आपकी इताअत की,   وَسَعِدَ مَنْ اطَاعَكُمْ
आप गवाह हो जाएँ इस पर की मैंने आपको गवाह बनाया,   فَٱشْهَدْ عَلَىٰ مَا اشْهَدْتُكَ عَلَيْهِ
मैं दोस्तदार हूँ आपका   وَانَا وَلِيٌّ لَكَ
और बेज़ार हूँ आपके दुश्मनों से,   بَرِيءٌ مِنْ عَدُوِّكَ
बस हक़ वो है जिस से आप राज़ी हों   فَٱلْحَقُّ مَا رَضِيتُمُوهُ
और बातिल वो है जिस से आप नाराज़ हुए,   وَٱلْبَاطِلُ مَا اسْخَطْتُمُوهُ
और नेकी वो है जिसका आप हुक्म दें   وَٱلْمَعْرُوفُ مَا امَرْتُمْ بِهِ
और बुराई वो है जिस से आप मना करें,   وَٱلْمُنْكَرُ مَا نَهَيْتُمْ عَنْهُ
बस मैं दिल से ईमान रखता हूँ अल्लाह पर,   فَنَفْسِي مُؤْمِنَةٌ بِٱللَّهِ
वो अकेला है, नहीं है कोई इसका शरीक    وَحْدَهُ لاََ شَريكَ لَهُ
और इसके रसूल (स:अ:व) पर और अमीरुल मोमिनीन (अ:स) पर   وَبِرَسُولِهِ وَبِامِيرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
और आप पर ऐ मेरे आक़ा! आपके अव्वल और आपके आख़िर पर,   وَبِكُمْ يَا مَوْلاَيَ اوَّلِكُمْ وَآخِرِكُمْ
और (मेरी) नुसरत हाज़िर है आपके लिए,   وَنُصْرَتِي مُعَدَّةٌ لَكُمْ
और मेरी मुहब्बत ख़ालिस है आपके लिए,   وَمَوَدَّتِي خَالِصَةٌ لَكُمْ
क़ुबूल फ़रमा,  क़ुबूल फ़रमा    آمِينَ آمِينَ

ज़्यारत के बाद की दुआ 

     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     

दुसरे अहम् लिंक्स देखें

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

कृपया अपना सुझाव  भेजें

ये साईट कॉपी राईट नहीं है !