दुआ - उल - अ'दीला

अ'दीला मौत से मुराद, मौत के वक़्त हक़ से बातिल की तरफ़ फिर जाना है, यानी जाँ-कुनी (मौत) के वक़्त शैतान शक में डाल कर गुमराह कर देता है और यू इंसान ईमान छोड़ बैठता है!यही वजह है की दुआओं में ऐसे सूरते हाल से पनाह तलब की गयी है! फ़ख़रुल मोहक़'क़े'क़ीन ने फ़रमाया के जो मौत के वक़्त ईस ख़तरे से महफूज़ रहना चाहता है इसे ईमान और उसूले दीन की दलीलें ज़ेहन में रखना चाहिए और फिर इनको बतौर अमानत ख़ुदा की बारगाह में पेश कर देना चाहिए ताकि मौत की घड़ी में यह अमानत इसे वापस मिल जाए! यह दुआ ईमान की हिफ़ाज़त करती है! सभी मोमिन क़ो चाहिए की शैतान क़ो सूर रखने के लिये ईस दुआ की बराबर तिलावत करें ताकि ईमान पक्का और मज़बूत रहे और ख़ैर का दामन हाथ से न छूटे! मरने के आखरी वक़्त में ईस दुआ की तिलावत ज़रूर करें, गर यह मुमकिन न हो तो किसी और क़ो कहें की ईस दुआ की तिलावत बुलंद आवाज़ में करे, ताकि मरने वाले के ज़ेहन में शैतान कोई शक न डाल सके, अपनों क़ो छोड़ने के ग़म में उदासी न हो, क्योंकि यह सारी शैतानी ताक़त शक और गुमराही पैदा करती है ताकि मरने वाला अपने ईमान पर न मर कर शक, गुमराही और उदासी की मौत मरे!

बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम

ख़ुदा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है!

 

ख़ुदा गवाह है की सिवाए इसके कोई माबूद नहीं, नीज़ मलाइका और बा-इन्साफ़ साहिबे ईल्म भी ईस पर गवाही दे रहे हैं की सिवाए इसके कोई माबूद नहीं जो साहिबे इज़्ज़त  हिकमत वाला है, यक़ीनन ख़ुदा का पसंदीदा दीन इस्लाम ही है और मै जो एक ना-तवां गुनाहगार ख़ताकार हाजतमंद और बे-मायाह बन्दा हूँ मै अपने मून'ईम, ख़ालिक़, राज़िक़ और अपने करम फ़रमा ख़ुदा की गवाही देता हूँ, जैसे इसने अपने ज़ात की गवाही दी है, नीज़ मलाइका और साहिबे ईल्म बन्दों ने भी इसकी गवाही दी है की सिवाए इसके कोई माबूद नहीं जो नेमत एहसान व करम और अता का मालिक है और वो हमेशा साहिबे क़ुदरत और दा'इमी साहिबे ईल्म, जिंदा, यकताऔर हमेशगी वाला मौजूद है, सुनने वाला, देखने वाला, इरादे वाला, ना-पसंद करने वालापालने वाला, बे'नेयाज़ है और वो ईन सिफ़ात का सही हक़दार है और वो दीगर सिफ़ात का भी मालिक है जो बहुत बड़ी सिफ़ात हैं की क़ुदरत और क़ुव्वत के वजूद में आने से क़ब्ल वो साहिबे क़ुव्वत था, और वो साहिबे ईल्म था, ईल्म और दलील की ईजाद से पहले वो मुस्तक़िल सुलतान था, जब न कोई मालिक था और न कोई मालवो ला'ज़वाल पाकीज़ा था, हर हर हाल में की ईस का वजूद क़ब्ल से क़ब्ल और अज़्लों के अज़ल से है और इसकी बक़ा बाद से बाद है की जिसमे न तब्दीली है न ज़वाल, वो अव्वल व आख़िर से बे'नेयाज़ और ज़ाहिर व बातिन में बे]परवाह है, इसके फ़ैसले में ज़ुल्म नहीं, और इसकी मर्जी में ताराफ्दारी नहीं, इसकी तकदीर में सितम नहीं और इसकी हुकूमत से फ़रार मुमकिन नहीं, इसका क़हर आये तो कोई पनाह नहीं, और वो अज़ाब करे तो निजात नहींइसकी रहमत ग़ज़ब से पहले है, जिसे वो तलब करे वो फ़रार नहीं कर सकता, ईस ने फ़रीजों में अज़दाद दूर कर दें और तौफीक़ देने में अदना व आला में बराबरी रखी है, हुकुम करदा बातों पर अमल क़ो मुमकिन और गुनाह से बचने का रास्ता आसान कर दिया है, ईस ने वुस'अत व ताक़त से कमतर फ़रीज़े आयद किये हैं, पाक है वो जिसका करम कितना वाज़े और शान कितनी बुलंद है, पाक है वो जिसका नाम कितना उम्दा और एहसान कितना बड़ा है, इसने अपने अदल की तशरीह के लिये अंबिया (अ:स) भेजे और अपने फज़ल व करम की इज़हार की ख़ातिर औसिया क़ो मामूर फ़रमाया और हमें नबियों के सरदार, वलियों में बेहतर बरगुज़ेदों में सब से अफ़ज़ल और पाक्बाज़ों में सबसे बुलंद हज़रत मुहम्मद (स:अ:व:व) की उम्मत में क़रार दिया, हम इनपर ईमान लाये और इनके पैग़ाम पर और क़ुर'आन पर जो इनपर नाज़िल हुआ और इनके जा-नशीन पर जिसे इन्होंने यौमे ग़दीर मुक़र्रर किया और अपनी ज़बान से फ़रमाया के यह हैं अली (अ:स) जो मेरा वसी है और मै गवाही देता हूँ की हज़रत रसूल (स:अ:व:व) के बाद नेकोकार ईमाम (अ:स) और बेहतरीन जानशीन हैं जिन में अली (अ:स) ही काफिरों क़ो  खत्म करने वाले हैं, और इनके बाद इनकी औलाद के सरदार हसन (अ:स) बिन अली (अ:स) फिर इनके भाई नवासये रसूल (स:अ:व:व), अल्लाह की रज़ाओं के तलबगार हुसैन (अ:स) हैं, फिर अली (अ:स) बिन अल-हुसैन (अ:स), फिर मुहम्मद बाक़र (अ:स), फिर जाफ़र अल-सादीक़ (अ:स) फिर मुसा काज़िम (अ:स) फिर अली रज़ा (अ:स) फिर मुहम्मद तक़ी (अ:स) हैं इनके बाद अली नक़ी (अ:स) हैं फिर हसन अस्करी अज़-ज़की (अ:स) हैं फिर हज़रत हुज्जत ख़लफ़ क़ाएम अल-मुन्तज़र मेहदी (अ:स) उम्मीद'गाहे ख़ल्क़ हैं, जिनकी बक़ा से दिनया क़ायेम है और इनकी बरकत से मख्लूक़ क़ो रोज़ी मिलती है और इनके वजूद से ज़मीन व आसमान खड़े हैं, और इनके ज़रिये अल्लाह ताला ज़मीन क़ो अदलो-इंसाफ़ से भर देगाजबकि वो ज़ुल्मो जौर से भर चुकी होगी, मै गवाही देता हूँ की ईन आ'ईम्मा के अक़वाले हुज्जत, इनपर अमल करना वाजिब और इनकी पैरवी फ़र्ज़ है और इन्से मोहब्बत रखना ज़रूरी व लाज़िम है, इनकी अता'अत बाइसे निजात और इन्से मुखाल्फ़त तबाही है और वो सब के सब अहले जन्नत के सरदार हैं, क़यामत में शफ़ा'अत करने वाले और यक़ीनी तौर पर अहले ज़मीन के ईमाम (अ:स) हैं, वो पसंदीदा औसिया में से अफ़ज़ल हैं, और मै गवाही देता हूँ की मौत हक़ है, क़ब्र में सवाल व जवाब हक़ हैं, और दुबारा उठना हक़ हैक़यामत में हाज़री हक़ है, सेरात से गुज़रना हक़ है, मीज़ाने अमल हक़ है, हिसाब हक़ हैऔर किताब हक़ हैइसी तरह जन्नत हक़ हैऔर जहन्नम हक़ है, नीज़ क़यामत आने वाली है, इसमें कोई शक नहीं और अल्लाह इन्हें ज़रूर उठाएगा जो क़ब्रों में हैं! ऐ माबूद! तेरा फज़ल मेरा सहाराऔर तेरी रहमत व बख्शीश मेरी उम्मीद है मेरा कोई ऐसा अमल नहीं जिस से मै जन्नत का हक़दार बनू और न ईबादत है के जो तेरी खुशनूदी का बाईस हो सिवाए इसके के मै तेरी तौहीद और अदल पर एताक़ाद रखता हूँ और तेरे फ़ज़ल व एहसान की उम्मीद रखता हूँ और तेरे हुज़ूर तेरे नबी (स:अ:व:व) और इनकी आल (अ:स) की शफ़ा'अत लाया हूँ जो तेरे महबूब हैं और तू सबसे ज़्यादा करम करने वाला और सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है और हमारे नबी मुहम्मद (स:अ:व:व)  पर ख़ुदा की रहमत हो जो पाको पाकीज़ा हैं और इनपर सलाम हो, सलामे ख़ास ज़्यादा बहुत ज़्यादा और इन्हें कोई ताक़त व क़ुव्वत मगर वो जो बुलंद व बरतर ख़ुदा से मिलती है! ऐ माबूद! सबसे ज़्यादा रहम करने वाले बेशक मै अपना यह अक़ीदा और दीन में साबित क़दमी तेरे सुपुर्द करता हूँ और तू बेहतरीन अमानतदार है और तुने हमें अमानतों की हिफ़ाज़त का हुक्म दिया है, हमें अपनी रहमत से मेरा यह अक़ीदा ब'वक़ते मर्ग मुझे याद दिला देना! वास्ता तुझे तेरी रहमत का ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले! 

 ऐ माबूद! वक़ते मर्ग ईस अक़ीदे से हटने से मै तेरी पनाह तलब करता हूँ!

                   

بسم الله الرحمن الرحيم

 

 

दुआ - उल - अ'दीला

 

ईमान पर से भटकने से बचने की दुआ.

 

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिलाहिर रहमानिर रहीम

﴿شَهِدَ ٱللَّهُ انَّهُ لاَ إِلٰهَ إِلاَّ هُوَ

शाहिदा अल्लाहु अन्नाहू ला इलाहा इल्ला हुवा

وَٱلْمَلائِكَةُ وَاولُوٱ ٱلْعِلْمِ

वल मला'इ-कतु व उलू अल-इल्मी

قَائِماً بِالْقِسْطِ

क़ा'इमन बिल क़ीस्ती

لاَ إِلٰهَ إِلاَّ هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

ला इलाहा इल्ला हुवा अल-अज़ीज़ो अल-हकीमो

إِنَّ ٱلدِّينَ عِنْدَ ٱللَّهِ ٱلإِسْلاَمُ﴾

इन्नद दीना इंदल लाहिल इस्लाम

وَانَا ٱلْعَبْدُ ٱلضَّعِيفُ ٱلْمُذْنِبُ

व अना अल अब्दु अल्द-दाई'फ़ू अल-मुज़'निबू

ٱلْعَاصِي ٱلْمُحْتَاجُ ٱلْحَقِيرُ

अल-आसी'अल मुह्ताजू अल-हक़ीरू

اشْهَدُ لِمُنْعِمِي وَخَاِلقِي

अश'हदू लिमुन'इमी व ख़ालीक़ी

وَرَازِقِي وَمُكْرِمِي

व राज़ीक़ी व मुक्रीमी

كَمَا شَهِدَ لِذَاتِهِ

कमा शहदा लिज़ा'तीही

وَشَهِدَتْ لَهُ ٱلْمَلائِكَةُ

व शहदत लहू'अल मला-इ-कतु

وَاولُوٱ ٱلْعِلْمِ مِنْ عِبَادِهِ

व उलू'अल इल्मी मिन इबादिही

بِانَّهُ لاَ إِلٰهَ إِلاَّ هُوَ

बी-अन'नहु ला इलाहा इल्ला हुवा

ذُو ٱلنِّعَمِ وَٱلإِحْسَانِ

ज़ु' अन'नि अमी वल-इह्सानी

وَٱلْكَرَمِ وَٱلاِمْتِنَانِ

वल क-रामी वल इत-मिनानी

قَادِرٌ ازَلِيٌّ

क़ादिरून अज़लियुन

عَالِمٌ ابَدِيٌّ

आलिमुन अबादियुन

حَيٌّ احَدِيٌّ

हय्युन अहदियुन

مَوْجُودٌ سَرْمَدِيٌّ

मौजूदुन सर'मदियुन

سَمِيعٌ بَصِيرٌ

समी'यून बसी'रुन

مُرِيدٌ كَارِهٌ

मुरी'अदुन कारिहून

مُدْرِكٌ صَمَدِيٌّ

मुद्रिकुन समद'दियुन

يَسْتَحِقُّ هٰذِهِ ٱلصِّفَاتُ

यस'त-हीक्क़ू  हाज़िही अल्स-सिफ़ाती

وَهُوَ عَلَىٰ مَا هُوَ عَلَيْهِ فِي عِزِّ صِفَاتِهِ

व हुवा अला मा हुवा अलय्ही फ़ि ईज़-ज़ी सीफ़ातीही

كَانَ قَوْيّاً قَبْلَ وُجُودِ ٱلْقُدْرَةِ وَٱلْقُوَّةِ

काना क़'वीयन क़बला वुजुदी अल-क़ुदरती वल क़ुव्वती 

وَكَانَ عَلِيماً قَبْلَ إِيجَادِ ٱلْعِلْمِ وَٱلْعِلَّةِ

व काना अलीमन क़बला इजादी अल-इल्मी वल-इल्लती

لَمْ يَزَلْ سُلْطَاناً إِذْ لاَ مَمْلَكَةَ وَلاَ مَالَ

लम यज़ल सुल्तानन ईज़-ला ममला'कता व ला माला

وَلَمْ يَزَلْ سُبْحَاناً عَلَىٰ جَمِيعِ ٱلاحْوَاِل

व लम यज़ल सुब'हानन अला जमी-अल अहवाली

وُجُودُهُ قَبْلَ ٱلْقَبْلِ فِي ازَلِ ٱلآزَاِل

वुजुदोहू क़बला अल-क़बली फ़ि अज़्ली अल-अज़ाली

وَبَقَاؤُهُ بَعْدَ ٱلْبَعْدِ مِنْ غَيْرِ ٱنتِقَالٍ وَلاَ زَوَالٍ

व बक़ा'उहू बा-दा अल्बा-दी मिन गैरी इनती-क़ालीन व ला ज़वालिन 

غَنِيٌّ فِي ٱلاوَّلِ وَٱلآخِرِ

ग़नियुन फ़ि-अल अव्वली वल-आख़िरी

مُسْتَغْنٍ فِي ٱلْبَاطِنِ وَٱلظَّاهِرِ

मुस्तग़-निन फ़ि अल-बातिनी वल-ज़ाहिरी

لاَ جَوْرَ فِي قَضِيَّتِهِ

ला जौरा फ़ि क़ाज़ी'यतेही 

وَلاَ مَيْلَ فِي مَشِيئَتِهِ

व ला मय्ला फ़ि मशी'यतेही

وَلاَ ظُلْمَ فِي تَقْدِيرِهِ

व ला ज़ुल्मा फ़ि तक़दीरेही

وَلاَ مَهْرَبَ مِنْ حُكُومَتِهِ

व ला महरबा मिन हुकुमतेही

وَلاَ مَلْجَا مِنْ سَطَوَاتِهِ

व ला मलजा'अ मिन सता'वतेही

وَلاَ مَنجىٰ مِنْ نَقِمَاتِهِ

व ला मन जन मिन नक़ेमतेही

سَبَقَتْ رَحْمَتُهُ غَضَبَهُ

सबक़त रहमतुहू गज़ाबहु

وَلاَ يَفُوتُهُ احَدٌ إِذَا طَلَبَهُ

व ला याफ़ूतोहु अहदुन ईज़ा तलाबोहू

ازَاحَ ٱلْعِلَلَ فِي ٱلتَّكْلِيفِ

अज़'अहा अल इलाला फ़ि अल'तक-लिफ़ी

وَسَوَّىٰ ٱلتَّوْفِيقَ بَيْنَ ٱلضَّعِيفِ وَٱلشَّرِيفِ

व सव-वा अल-ताव्फ़ीक़ा बयना अल'ज़-इफ़ो वल-शरीफ़

مَكَّنَ ادَاءَ ٱلْمَامُورِ

मक'काना अदा'अ अल मा'मूर

وَسَهَّلَ سَبِيلَ ٱجْتِنَابِ ٱلْمَحْظُورِ

व सह-हला सबीला इजतिनाबी अल-मह्ज़ूरी

لَمْ يُكَلِّفِ ٱلطَّاعَةَ إِلاَّ دُونَ ٱلْوُسْعِ وَٱلطَّاقَةِ

लम यु'कल्लीफ़ अत-ता'अता इल्ला दूना अल-वोसे-अ वल-ता-क़ते

سُبْحَانَهُ مَا ابْيَنَ كَرَمَهُ

सुभानोहू मा बयना करामहू

وَاعْلَىٰ شَانَهُ

व अ ला शा'नोहू

سُبْحَانَهُ مَا اجَلَّ نَيلَهُ

सुभानोहू मा अजल-ला नय'लोहू

وَاعْظَمَ إِحْسَانَهُ

व आ-ज़मा इह'सा-नोहू

بَعَثَ ٱلانْبِيَاءَ لِيُبَيِّنَ عَدْلَهُ

बा-असा अल अंबिया-अ ली'यु-बय्यिना अद'लोहू

وَنَصَبَ ٱلاوْصِيَاءَ لِيُظْهِرَ طَوْلَهُ وَفَضْلَهُ

व न्साबा अल-औसिया-अ ली-यूज़हीरा तौलोहू व फ़ज़'लोहू

وَجَعَلَنَا مِنْ امَّةِ سَيِّدِ ٱلانْبِيَاءِ

व जा'अल्ना मिन उम्मती सय्यादी अल-अंबिया'ई

وَخَيْرِ ٱلاوْلِيَاءِ

व खैरी अल औलिया'ई

وَافْضَلِ ٱلاصْفِيَاءِ

व अफ्ज़ली अल-असफिया'ई

وَاعْلىٰ ٱلازْكِيَاءِ

व आला अल-अज़्किया'ई

مُحَمَّدٍ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ

मोहम्मदीन सल-लल-लाहो अलैही व आलेही व सल्लामु

آمَنَّا بِهِ وَبِمَا دَعَانَا إِلَيْهِ

अमन'ना बेही व बीमा दा अना इलैही

وَبِٱلْقُرْآنِ ٱلَّذِي انْزَلَهُ عَلَيْهِ

व बिल क़ुर'आनी अल-लज़ी अनज़ल'अहू अलैही

وَبِوَصِيِّهِ ٱلَّذِي نَصَبَهُ يَوْمَ ٱلْغَدِيرِ

व बे वसी'एही अल-लज़ी नसबहू यौमा अल- ग़दीरी

وَاشَارَ إِلَيْهِ بِقَوْلِهِ: "هٰذَا عَلِيٌّ"

व अश'अरा इलैही बे-क़ौलेही हाज़ा अली'युन

وَاشْهَدُ انَّ ٱلائِمَّةَ ٱلابْرَارَ

व अश'हदों अन्ना अल-अ'इम्मता अल-अबरारा

وَٱلْخُلَفَاءَ ٱلاخْيَارَ

वल ख़ुलाफ़ा अल-अख़'यारा

بَعْدَ ٱلرَّسُولِ ٱلْمُخْتَارِ

बादा अर-रसूल अल-मुख्तारी

عَلِيٌّ قَامِعُ ٱلْكُفَّارِ

अली'युन क़मी'उ अल-कुफ्फ़ारी

وَمِنْ بَعْدِهِ سَيِّدُ اوْلاَدِهِ ٱلْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ

व मिन बा'देही सय्यादु औलादेही अल हसनू इब्ने अलीयिन

ثُمَّ اخُوهُ ٱلسِّبْطُ ٱلتَّابِعُ لِمَرْضَاةِ ٱللَّهِ ٱلْحُسَيْنُ

सुम्मा अखु'अहू अल्स'सिब्तो अल्त'ताबियो ले'मार्ज़ाते  अल-लाहे अल-हुस्सैनो

ثُمَّ ٱلْعَابِدُ عَلِيٌّ

सुम्मा अल-आबिदों अलीयुन 

ثُمَّ ٱلْبَاقِرُ مُحَمَّدٌ

सुम्मा अल बाक़िरो मोहम्मादुन

ثُمَّ ٱلصَّادِقُ جَعْفَرٌ

सुम्मा अल-सादीक़ो जा'फ़रुन

ثُمَّ ٱلْكَاظِمُ مُوسَىٰ

सुम्मा अल-काज़िमो मूसा

ثُمَّ ٱلرِّضَا عَلِيٌّ

सुम्मा अल-रिज़ा अलीयुन

ثُمَّ ٱلتَّقِيُّ مُحَمَّدٌ

सुम्मा अल-तक़ीयो मोहम्मदीन

ثُمَّ ٱلنَّقِيُّ عَلِّيٌّ

सुम्मा अल- नक़ीयो अलीयुन

ثُمَّ ٱلزَّكِيُّ ٱلْعَسْكَرِيُّ ٱلْحَسَنُ

सुम्मा अल-ज़कियो अल-अस्करीयो अल-हसन

ثُمَّ ٱلْحُجَّةُ ٱلْخَلَفُ ٱلْقَائِمُ

सुम्मा अल-हुज्जतो अल-ख़'लफ़ो अल-क़ा'इमो

ٱلْمُنْتَظَرُ ٱلْمَهْدِيُّ ٱلْمُرْجَىٰ

अल-मुन्ता'ज़रो अल-मह'दियो अल-मुर्जा

ٱلَّذِي بِبَقَائِهِ بَقِيَتِ ٱلدُّنْيَا

अल लज़ी बे'बक़ा'एही बाक़ी'अत अल'दुन्या

وَبِيُمْنِهِ رُزِقَ ٱلْوَرَىٰ

व बी'युम्निही रुज़िका अल-वरा

وَبِوُجُودِهِ ثَبَتَتِ ٱلارْضُ وَٱلسَّمَاءُ

व बे वुजुदेही सबा'क़त अल'आरज़ू व़स'समा'उ

وَبِهِ يَمْلَا ٱللَّهُ ٱلارْضَ قِسْطاً وَعَدْلاً

व बेहि यमला'उ अल-लाहू अल-अर्दा क़ीस्तन व अदलन

بَعْدَ مَا مُلِئَتْ ظُلْماً وَجَوْراً

ब दमा मुली'अत ज़ुलमन व जौरण

وَاشْهَدُ انَّ اقْوَالَهُمْ حُجَّةً

व अशहदों अन्ना अक़'वालोहुम हुज्जतन

وَٱمْتِثَالَهُمْ فَرِيضَةً

व इमतिहा'लहुम फ़री-दतून

وَطَاعَتَهُم مَفْرُوضَةً

व  ता-अतोहुम मफ़रू-दतून

وَمَوَدَّتَهُمْ لازِمَةً مَقْضِيَّةً

व मवद-दतोहुम लाज़ी'मतुन मक़-ज़ी-यतुन

وَٱلاِقْتِدَاءُ بِهِم مُنجِيَةً

वल ईक़ती'दा-अ बेहीम मुंजी'यतुन

وَمُخَالَفَتَهُم مُرْدِيَةً

व मुख़ाले'फ़तोहुम मुरदी'यतुन

وَهُمْ سَادَاتُ اهْلِ ٱلْجَنَّةِ اجْمَعِينَ

व हुम सादातु अहली अल-जन्नती अजमा'ईना

وَشُفَعَاءُ يَوْمِ ٱلدِّينِ

व शुफ़ा-अ'उ यौमिद-दीन

وَائِمَّةُ اهْلِ ٱلارْضِ عَلىٰ ٱلْيَقِينِ

व अ-इम्मतु अहली-अल अर्जी अला-अल यक़ीनी

وَافْضَلُ ٱلاوْصِيَاءِ ٱلْمَرْضِيِّينَ

व अफ़'ज़लू अल-औसिया'ई अल-मरज़ी-ईना

وَاشْهَدُ انَّ ٱلْمَوْتَ حَقٌّ

व अश-हदू अन्ना अल-मौता हक़'क़ुन

وَمُسَاءَلَةَ مُنْكَرٍ وَنَكِيرٍ فِي ٱلْقَبْرِ حَقٌّ

व मुसा-अ लता अल क़बरी हक़'क़ुन 

وَٱلْبَعْثَ حَقٌّ

वल बा'असा हक़'क़ुन 

وَٱلنُّشُورَ حَقٌّ

वल नशूरा हक़'क़ुन 

وَٱلصِّرَاطَ حَقٌّ

वल सिराता हक़'क़ुन

وَٱلْمِيزَانَ حَقٌّ

वल मिज़ाना हक़'क़ुन

وَٱلْحِسَابَ حَقٌّ

वल हिसाबा हक़'क़ुन

وَٱلْكِتَابَ حَقٌّ

वल किताबा हक़'क़ुन

وَٱلْجَنَّةَ حَقٌّ

वल जन'नता हक़'क़ुन

وَٱلنَّارَ حَقٌّ

वल नारा हक़'क़ुन 

وَانَّ ٱلسَّاعَةَ آتِيَةٌ لاَ رَيْبَ فِيهَا

व अन्ना अस'सा-अता आती'यतुन ल'रैबा फ़ीहा

وَانَّ ٱللَّهَ يَبْعَثُ مَنْ فِي ٱلْقُبُورِ

व अन्ना अल्लाहा यब'असू मन फ़ि अल-क़ुबूरी

اللَّهُمَّ فَضْلُكَ رَجَائِي

अल्लाहुम्मा फ़ज़-लुका रजा'ई

وَكَرَمُكَ وَرَحْمَتُكَ امَلِي

व करामुका व रह'मतूका अ'मली

لاَ عَمَلَ لِي اسْتَحِقُّ بِهِ ٱلْجَنَّةَ

ला अमला ली अस-तहीक्क़ू बेहि अल-जन्नता

وَلاَ طَاعَةَ لِي اسْتَوْجِبُ بِهَا ٱلرِّضْوَانَ

वला ता-अता ली अस्तौजिबू बिहा अल-रिज़वाना

إِلاَّ انِّي ٱعْتَقَدتُّ تَوْحِيدَكَ وَعَدْلَكَ

इल्ला अन्नी'ई तक़द'तू तौही'दका व अद्लका

وَٱرْتَجَيْتُ إِحْسَانَكَ وَفَضْلَكَ

व तर'जय-तू एह्सा'नका व फ़ज़'लका

وَتَشَفَّعْتُ إِلَيْكَ بِٱلنَّبِيِّ وَآلِهِ مِنْ احِبَّتِكَ

व तशा-फ़्फा-अतु इलैका बिल-नबिय्यी व आलिहि मिन अहिब'बतिका

وَانتَ اكْرَمُ ٱلاكْرَمِينَ

व अन्ता अकरमु अल-अकरामीना

وَارْحَمُ ٱلرَّاحِمِينَ

व अर'हमू अल-राहेमीना

وَصَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَىٰ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ

व सल-लल-लाहू अला नबी'य्यिना मुहम्मदीन

وَآلِهِ اجْمَعْينَ

व आलेही अजमा'ईना

ٱلطَّيِّبِينَ ٱلطَّاهِرِينَ

अल-तय्येबीना अल-ताहेरीना

وَسَلَّمَ تَسْلِيماً كَثِيراً كَثِيراً

व सल-लमा तस्लीमन कसीरण कसीरण

وَلاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِٱللَّهِ ٱلْعَلِيِّ ٱلْعَظِيمِ

व लाहौ'ला व ला क़ुवता इल्ला बिल्ला हिल अलियुल अज़ीम

اللَّهُمَّ يَا ارْحَمَ ٱلرَّاحِمِينَ

अल्लाहुम्मा या अर्हमर राहेमीन

إِنِّي اوْدَعْتُكَ يَقِينِي هٰذَا وَثَبَاتَ دِينِي

इन्नी औदा'तुका यक़ीनी हाज़ा व सबाता दिनी

وَانتَ خَيْرُ مُسْتَوْدَعٍ

व अन्ता खैरु मुस्तौदा'ईन

وَقَدْ امَرْتَنَا بِحِفْظِ ٱلْوَدَائِعِ

व क़द अमरतना बे'हीफ़ज़ी अल-वदा-ए-ई

فَرُدَّهُ عَلَيَّ وَقْتَ حُضُورِ مَوْتِي

फ़'रुद-दहु अलैय्या वक़ता हुज़ूरी मौती

وَعِنْدَ مُسَاءَلَةِ مُنْكَرٍ وَنَكِيرٍ

व इन्दा मुसा'अ-लती मुन्करिन व नकीरिन

بِرَحْمَتِكَ يَا ارْحَمَ ٱلرَّاحِمِينَ

बे रहमतिका या अर्हमर राहेमीन

 

कई प्रमाणित रिपोर्ट के अनुसार निम्नलिखित कथन को भी दुआ में शामिल किया है: 

 

اللَّهُمَّ إِنِّي اعُوذُ بِكَ مِنَ ٱلعَدِيلَةِ عِنْدَ ٱلْمَوْتِ

अल्लाहुम्मा इन्नी अ-उज़ो-बिका मिन-अल-अदिया'लती इंदल'मौत

ऐ माबूद! वक़ते मर्ग ईस अक़ीदे से हटने से मै तेरी पनाह तलब करता हूँ

 

अ'दीला मौत से मुराद, मौत के वक़्त हक़ से बातिल की तरफ़ फिर जाना है, यानी जाँ-कुनी (मौत) के वक़्त शैतान शक में डाल कर गुमराह कर देता है और यू इंसान ईमान छोड़ बैठता है!यही वजह है की दुआओं में ऐसे सूरते हाल से पनाह तलब की गयी है! फ़ख़रुल मोहक़'क़े'क़ीन ने फ़रमाया के जो मौत के वक़्त ईस ख़तरे से महफूज़ रहना चाहता है इसे ईमान और उसूले दीन की दलीलें ज़ेहन में रखना चाहिए और फिर इनको बतौर अमानत ख़ुदा की बारगाह में पेश कर देना चाहिए ताकि मौत की घड़ी में यह अमानत इसे वापस मिल जाए! ईस का तरीक़ा यह है की अक़ाएदे हक़'क़ा क़ो दोहराने के बाद कहें:

 

اللَّهُمَّ يَا ارْحَمَ ٱلرَّاحِمِينَ

अल्लाहुम्मा या अर्हमर राहेमीन

ऐ माबूद, ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले,

إِنِّي اوْدَعْتُكَ يَقِينِي هٰذَا وَثَبَاتَ دِينِي

इन्नी क़द अव्दातुका यक़ीनी हाज़ा व सबाता दिनी

बेशक मै अपना यह अक़ीदा और दीन में अपनी साबित क़दमी तेरे सुपुर्द करता हूँ;

وَانتَ خَيْرُ مُسْتَوْدَعٍ

व अन्ता खैरु मुस्तव्दा-ईन

और तू बेहतरीन इमानात्दार है.

وَقَدْ امَرْتَنَا بِحِفْظِ ٱلْوَدَائِعِ

व क़द अमरतना बी-हीफ़ज़ी अल-वदा-ई'ई

और तुने हमें अमानतों की हिफ़ाज़त का हुक्म दिया है;

فَرُدَّهُ عَلَيَّ وَقْتَ حُضُورِ مَوْتِي

फ़ा रुद'दाहु आ'लय्या वक़ता हुज़ूरी मौती

बस अपनी रहमत से मेरा यह अक़ीदा मरने के वक़्त मुझे याद दिला देना

बस ईन बुज़ुर्गवार के फ़रमान के मुताबिक़ ईस दुआए अदीला का पढ़ना और ईस के मतलबों क़ो मरने के वक़्त दिल में रखना, हक़ से फिर जाने के ख़तरे क़ो रोकता है! अब रही यह बात की यह दुआ मनक़ूल है या खुद उल्माए कराम ने इसे जमा किया है या बनाया है? ईस बारे में अर्ज़ है की इल्मे हदीस के माहिर और अखबारे अ'ईम्मा (अ:स) के जमा करने वाले अजल आलम, मोहद'दिस ना'क़द व बा-बसीरत और हमारे उस्ताद मोहददिस आज़म अलहाज मौलाना मिर्ज़ा हुसैन नूरी (ख़ुदा इनके मर'क़द क़ो रौशन करे) का फ़रमान है की मारूफ दुआए अदीला बाज़ उलमा की वज़ा करदा है! यह किसी ईमाम (अ:स) से नक़ल नहीं हुई है और न ही किसी हदीस की किताब में पाई जाती है

 

 

ऐसी ही एक दुआ हिफ्ज़े ईमान के लिये::-

वाज़े रहे की शेख़ तूसी (अ:र) ने मोहम्मद सुलेमान वेल्मी से रिवायत की है की मै ने ईमाम जाफ़र सादीक़ (अ:स) की ख़िदमत में अर्ज़ किया के बाज़ शिया भाइयों का कहना है की ईमान की दो किस्में हैं, यानी एक मोहकम व साबित और दोस्सरा आरजी व इमानती जो ज़ायेल हो सकता है, बस आप मुझे कोई ऐसी दुआ तालीम फ़रमायें के जिसके पढ़ने से मेरा ईमान क़ायेम व साबित रहे और ज़ायेल न होने पाए! ईस पर आप (अ:स) ने फ़रमाया की हर वाजिब नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ा करो

 

رَضِيتُ بِٱللَّهِ رَبّاً

रज़ीयतो बिल-लाहे रब'बन

मै राज़ी हूँ इसपर की अल्लाह मेरा रब

وَبِمُحَمَّدٍ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وآلِهِ نَبِيّاً

व बी मुहम'मदीन सल-लल लाहो अलय्ही व आलेही नबीयाँ

और हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) मेरे नबी हैं

وَبِٱلإِسْلاَمِ دِيناً

व बिल इस्लामी दीनन

और इस्लाम मेरा दीन है,

وَبِٱلْقُرْآنِ كِتَاباً

व बिल क़ुर-आंनी किताबन

और क़ुर'आन मेरी किताब है,

وَبِٱلْكَعْبَةِ قِبْلَةً

व बिल का'बते क़िब'लतों  

और काबा मेरा क़िबला है,

وَبِعَلِيٍّ وَلِيّاً وَإِمَاماً

व बे अलीयिन वलीयन व इमामन

और राज़ी हूँ इसपर की अली (अ:स) मेरे मौला और ईमाम हैं,

وَبِٱلْحَسَنِ وَٱلْحُسَيْنِ

व बिल हसनी व बिल हुसैन

फिर हसन (अ:स) व हुसैन (अ:स),

وَعَلِىٰ بْنِ ٱلْحُسَيْنِ وَمُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ

व अली-इब्निल हुसैन व मुहम्मद इब्ने अलीयिन 

अली (अ:स) इब्ने हुसैन (अ:स), मोहम्मद (अ:स) इब्ने अली (अ:स),

وَجَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ وَمُوسىٰ بْنِ جَعْفَرٍ

व जाफ़र इब्ने मुहम्मदीन व मूसा इब्ने जा'फ़रीन

जाफ़र (अ:स) इब्ने मोहम्मद, मूसा (अ:स) इब्ने जाफ़र (अ:स),

وَعَلِىٰ بْنِ مُوسَىٰ وَمُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ

व अली इब्ने मूसा, व मुहम्मद इब्ने अलीयिन

अली (अ:स) इब्ने मूसा, मोहम्मद (अ:स) इब्ने अली (अ:स),

وَعَلِىٰ بْنِ مُحَمَّدٍ وَٱلْحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ

व अली इब्ने मुहम्मदीन वल हसन इब्ने अलीयिन

व अली इब्ने मुहम्मदीन वल हसन इब्ने अलीयिन

وَٱلْحُجَّةِ بْنِ ٱلْحَسَنِ

वल हुज्जत इब्ने अल हसने

वल हुज्जत इब्ने अल हसने

صَلَوَاتُ ٱللَّهِ عَلَيْهِمْ ائمَّةً

सल्वातु अल्लाहि अलय्हीम अ-इम्मतन

की ईन पर अल्लाह की रहमतें हों, मेरे ईमाम हैं!

اَللَّهُمَّ إِنِّي رَضيتُ بِهِمْ ائِمَّةً

अल्लाहुम्मा इन्नी रज़ी'अतु बिहिम अ-इम्मतन

ऐ माबूद! मै राज़ी हूँ की वो मेरे ईमाम (अ:स) हैं;

فَارْضَنِي لَهُمْ

फ़ा अर'ज़नी'अ-लहुम

बस इन्हें मुझे से राज़ी फ़रमा दे

إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيء قَديرٌ

इन्नका अला कुल्ले शय'ईन क़दीरून

बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है!.


 

            

     

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