अल्लामा मजलिसी (र:अ:) ने ज़ाद-उल-मेयाद की आखरी जिल्द में माहे रमज़ान की रातों की नमाजें और दिन की दुआओं का ज़िक्र किया है! यहाँ हम इन्हीं बुज़ुर्गवार की ईस किताब से नक़ल कर रहे हैं!
 

पहली (1) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 15 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

दूसरी (2) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 20 बार सुराः क़द्र पढ़ें!

 

 

तीसरी (3) रात की नमाज़ - यह 10 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 50 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

चौथी (4) रात की नमाज़ - यह 8 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 20 बार सुराः क़द्र पढ़ें!

 

 

पांचवी (5) रात की नमाज़ - यह 2 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 50 बार सुराः तौहीद पढ़ें और फिर सलाम फेरने के बाद 100 बार सलवात पढ़ें!

 

 

छठी (6) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 1 बार सुराः मुल्क पढ़ें!

 

 

सातवीं (7) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 13 बार सुराः क़द्र पढ़ें! 

 

 

आठवीं (8) रात की नमाज़ - यह 2 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 10 बार सुराः तौहीद पढ़ें और सलाम के बाद 100 बार "सुभान अल्लाह" कहें!

 

 

नौवीं (9)रात की नमाज़ - यह मगरिब और ईशा की नमाज़ के दरम्यान 6 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 7 बार आयतल कुर्सी पढ़ें और सलाम फेरने के बाद 50 बार सलवात (अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मद वा आले मोहम्मद) पढ़ें!

 

 

दसवीं (10) रात की नमाज़ - यह 20 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 30 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

ग्यारहवीं (11) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 15 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

बारहवीं (12) रात की नमाज़ - यह 8 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 30 बार सुराः क़द्र पढ़ें!

 

 

तेरहवीं (13) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 25 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

चौदहवीं (14) रात की नमाज़ - यह 6 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 30 बार सुराः ज़िल्ज़ाल पढ़ें!

 

 

पंद्रहवीं (15) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, पहली 2 रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 100 बार सुराः तौहीद पढ़ें, और दूसरी 2 रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 50 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

सोलहवीं (16) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 12 बार सुराः तकासूर पढ़ें!

 

 

सत्रहवीं (17) रात की नमाज़ - यह 2 रक्'अत है, पहली रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद कोई एक सुराः और दूसरी रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 100 बार सुराः तौहीद पढ़ें और सलाम के बाद 100 मर्तबा "ला इलाहा इलल लाह" कहें!

 

 

अठारहवीं (18) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 25 बार सुराः कौसर पढ़ें!

 

 

उन्नीसवीं (19) रात की नमाज़ - यह 50 रक्'अत है, पूरी नमाज़ में सुराः अल-हम्द के बाद 50 बार सुराः ज़िल्ज़ाल पढ़ें! इससे मुराद यह है की हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 1 बार सुराः ज़िल्ज़ाल पढ़े, क्योंकि एक रात में 2500 बार सुराः ज़िल्ज़ाल पढ़ना बहुत मुश्किल है!

 

 

बीसवीं, इक्कीसवीं, बाईसवीं, तेईसवीं और चौबीसवीं (20 , 21 , 22, 23 , 24) रात की नमाज़ - ईन रातों में से हर एक में 8 रक्'अत नमाज़ है जिसकी हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द जो सुराः चाहे पढ़े!

 

 

पचीस्वीं (25) रात की नमाज़ - यह 8 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 100 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

छबीस्वीं (26) रात की नमाज़ - यह 8 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 10 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

सत्ताईसवीं (27) रात की नमाज़ - यह 4 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 1 बार सुराः मुल्क पढ़ें! अगर मुमकिन न हो तो सुराः मुल्क की जगह 25 मर्तबा सुराः तौहीद पढ़े!

 

 

अट्ठाईसवीं (28) रात की नमाज़ - यह 6 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 100 बार आयतल कुर्सी, 100 बार सुराः तौहीद और  100 बार सुराः कौसर पढ़ें, और नमाज़ के बाद 100 बार सलवात पढ़े!

            मो'अल्लिफ़ कहते हैं की अट्ठाईसवीं (28) रात की नमाज़ ६ रक्'अत है जिसकी हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 10 बार आयतल कुर्सी, 10 बार सुराः तौहीद और  10 बार सुराः कौसर पढ़ें और नमाज़ के बाद मोहम्मद (स:अ:व:व) और आले मोहम्मद (अ:स) पर सलवात भेजे!

 

 

उन्तीसवीं (29) रात की नमाज़ - यह 2 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 20 बार सुराः तौहीद पढ़ें!

 

 

तीसवीं (30) रात की नमाज़ - यह 12 रक्'अत है, हर रक्'अत में सुराः अल-हम्द के बाद 20 बार सुराः तौहीद पढ़ें, और नमाज़ के बाद 100 मर्तबा सलवात पढ़े! 

 

 
   

 

            

     

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