वो हदीसें जो हज़रत मासूमा (स:अ) से मनक़ूल हैं
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वो हदीसें जो हज़रत मासूमा (स:अ) से मनक़ूल हैं !
 

इस हदीस क़ो हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स:अ) इमाम सादीक़ (अ:स) की बेटी से नक़ल करती हैं! इस हदीस की सनद का सिलसिला हज़रत ज़हरा (स:अ) पर ख़तम होता है!

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स:अ) ने फ़रमाया : क्या तुमने फरामोश कर दिया रसूले ख़ुदा (स:अ:व:व) के इस कौल क़ो जिसे आप ने ग़दीर के दिन इरशाद फ़रमाया था के जिस का मै मौला हूँ इस के यह अली (अ:स) मौला हैं! 

और क्या तुमने रसूले ख़ुदा (स:अ:व:व) के इस कौल क़ो फरामोश कर दिया के आप (स:अ:व:व) ने अली (अ:स) के लिये फ़रमाया था की आप (अ:स) मेरे लिये ऐसे हैं जैसे मूसा (अ:स) के लिये हारुन (अ:स) थे (अवालिमुल-उलूम, जिल्द २१, पेज 353) 

हज़रत फातिमे मासूमा (स:अ) इस तरह एक और हदीस हज़रत इमाम सादीक़ (अ:स) की बेटी से नक़ल करती हैं और इस हदीस का सिलसिला-ए-सनद भी हज़रत ज़हरा (स:अ) पर ख़तम होता है!

हज़रत ज़हरा (स:अ) ने फ़रमाया के रसूले ख़ुदा (स:अ:व:व) फ़रमाते हैं : आगाह हो जाओ के जो अहलेबैत (स:अ) की मुहब्बत पर इस दुन्या से उठता है वो शहीद उठता है!

मरहूम अल्लामा मजलिसी शेख़ सुद्दुक़ से हज़रत मासूमा (स:अ) की ज़्यारत की फ़ज़ीलत के बारे में रिवायत नक़ल करते हुए फ़रमाते हैं : रावी कहता है के मैंने हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स:अ) के बारे में इमाम रज़ा (अ:स) से दरयाफ्त किया तो आप ने फ़रमाया के जो शख्स इनकी क़ब्रे अतहर की ज़्यारत करेगा इस पर जन्नत वाजिब हो जायेगी!   

 

 

अल्लाह हुम्मा सल्ले अला मुहम्मद व आले मुहम्मद                                         

            

     

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