दुआए नुदबा (रोना / विलाप करना / गिड़गिड़ाना)      

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गिड़गिड़ाहट के साथ सूरज उगने के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ  - जुमा के दिन या ख़ास मौकों पर

रावी कहते हैं की सय्यद इब्ने ता'उस (र:अ) ने मिस्बाह अल-ज़ायेर में अमाल सरदाब के बारे में एक फसल रक़म की है जिसमें इन्हों हज़रत साहेबुज़'ज़मान (अ:त:फ़) की छह ज़्यारतें दर्ज की है, और फ़रमाया है की इसी फसल से दुआए नुदबा जोड़ी जाती है और रोज़ाना नमाज़े फ़ज्र के बाद हज़रत (अ:स) के लिये पढ़ी जाने वाली    यह ज़्यारत सातवीं ज़्यारत गिनी जायेगीऔर दुसरे दुआए अहद भी इस फ़सल में शामिल की जा रही है, जिसे ग़ैबते इमाम (अ:स) में पढ़ने का हुक्म हुआ है और वो दुआ भी ज़िक्र हुई है जो हज़रत (अ:स) के हरम-ए-शरीफ़ से वापस जाते वक़्त पढ़ना चाहिए, इसके बाद इन्होंने यह चारों चीज़ें वहाँ ब्यान की हैं! इसी कारणवश हम इनकी पैरवी करते हुए इस जगह पर वोही चार उमूर नक़ल कर रहे हैं, इनमें से पहले दुआए नुदबा है जिसे चार चार ईदों यानी ईद-उल-फितरईद-उल-अज़्हा, ईदे ग़दीर और रोज़े जुमा पढ़ना मुस्तहब है, और वो दुआ इस प्रकार है :

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा रहमान और रहीम है

हमद है ख़ुदा के लिये जो जहानों का परवरदिगार है और ख़ुदा हमारे सरदार और अपने नबी मुहम्मद (स:अ:व:व) और इनकी आल (अ:स) पर रहमत करे और बहुत बहुत सलाम भेजे! ऐ माबूद हमद है तेरे लिये के जारी होगी तेरी क़ज़ा व क़द्र तेरे औलिया के बारे में जिन क़ो तुने अपने लिये और अपने दीन के लिये ख़ास किया, जब के इन्हें अपने यहाँ से वो नेमतें अता की हैं जो बाक़ी रहने वाली हैं, जो न खत्म होती हैं न कमज़ोर पड़ती हैं, इसके बाद के तुने इनपर इस दुन्या के ब हक़ीक़त मुनासिब झूटी शानो-शौकत और ज़ीनत से दूर रहना लाज़िम किया, बस इन्होने यह शर्त पूरी की, और इनकी वफ़ा क़ो तू जानता है, तुने इन्हें क़बूल किया, मुक़र्रिब बनायाइनके ज़िक्र क़ो बुलंद फ़रमायाऔर इनकी तारीफें ज़ाहिर की, तुने इनकी तरफ़ अपने फ़रिश्ते भेजेइनको वही से मुशर्रफ़ किया, इनको अपने उलूम से नवाज़ाऔर इनको वो ज़रिया क़रार दिया जो तुझ तक पहुंचाए और वो वसीला जो तेरी खुशनूदी तक ले जाए, बस इनमे किसी क़ो जन्नत में रखा, यहाँ तक की इस से बाहर भेजा, किसी क़ो अपनी किश्ती में सवार किया और बचा लिया और जो इनके साथ थे इन्हें मौत से बचायातुने अपनी रहमत के साथ, और किसी क़ो तुने अपना ख़लील बनाया फिर दुसरे सच्चे ज़बान वालों ने तुझ से सवाल किया जिसे तुने पूरा फ़रमाया, इसे बुलंद व बाला क़रार दिया, किसी के सतह तुने दरख़्त के ज़रिये कलाम किया और इसके भाई क़ो इसका मददगार बनाया, किसी क़ो तुने बिन बाप के पैदा फ़रमाया,  इसे बहुत से मो'अज्ज़ात दिए और रूहे क़ुद्स से इसे क़ुव्वत दीतुने इनमे से हर एक के लिये एक शरियत और रास्ता मुक़र्रर किया, इनके लिये औसिया चुने के तेरे दीन क़ो क़ायेम रखने के लिये एक के बाद दूसरा निगहबान आया जो तेरे बन्दों पर हुज्जत क़रार पायाताकि हक़ अपने मुक़ाम से न हतेऔर बातिल के हामी अहले हक़ पर ग़लबा न पाएं और कोई यह न कहे की काश तुने हमारी तरफ़ डराने वाला रसूल भेजा होता और हमारे लिये हिदायत का झंडा बुलंद किया होता, ताकि तेरे आयतों की पैरवी करते इससे पहले के ज़लील व रुसवा होंयहाँ तक की तुने अमरे हिदायत अपने हबीब और पाकीज़ा अस्ल मुहम्मद (स:अ:व:व) के सुपुर्द किया, बस वो ऐसे सरदार हुए जिनको तुने मख्लूक़ में से पसंद किया, बर्गुज़ेदों में से बर्गुज़ीदा बनाया, जिन क़ो चुना इनमे से अफज़ल बनाया, अपने ख़ास में से बुज़ुर्ग क़रार दिया, इन्हें नबियों के पेशवा बनाया, और इनको अपने बन्दों में से जिन्नों-ईन्स की तरफ़ भेजा, इनके लिये सारे मशरिको मगरिबों क़ो ज़ेर कर दिया, बुर्राक़ क़ो इनका मती' बनाया, और इनको जिस्मो जान के साथ आसमान पर बुलाया और तुने इन्हें साबका व आईन्दा बातों का ईल्म दिया, यहाँ तक की तेरी मल्ह्लूक ख़त्म हो जाए, फिर इनको दबदबा अता किया और इनके गिर्द जिब्र'इल (अ:स) मीका'ईल (अ:स) और निशान ज़दः फ़रिश्तों क़ो जमा फ़रमाया, इनसे वादा किया की आपका दीन तमाम अदयान पर ग़ालिब आयेगाअगर्चेह मशरिक दिल'तंग हों और यह इस वक़्त हुआ जब हिजरत के बाद तुने इनके ख़ानदान क़ो सच्चाई के मुक़ाम पर जगह दी और इनके और इनके साथियों के लिये क़िबला बनाया, पहला घर जो मका में बनाया गया, जो जहानों के लिये बरकत-ओ-हिदायत का मरकज़ है, इसमें वाज़े निशानियाँ और मुक़ामे इब्राहीम (अ:स) है, जो इस घर में दाख़िल हुआ इसे अमान मिल गयी, और तुने फ़रमाया ज़रूर ख़ुदा ने इरादा कर लिया है की तुमसे बुराई क़ो दूर कर दे ऐ अहलेबैत (अ:स) और तुम्हें पाक रखे जिस तरह पाक रखने का हक़ है, मुहम्मद (स:अ:व:व) और इनकी आल (स:अ) पर तेरी रहमतें हों, तुने क़ुरान में अहलेबैत (अ:स) की मुहब्बत क़ो इनका अजरे रिसालत क़रार दिया, बस तुने फ़रमाया कह दें की मै तुमसे अजरे रिसालत नहीं माँगता, मगर यह की मेरे अक़रबा से मुहब्बत करो और तुने कहा जो अजर मै ने तुम से माँगा है वो तुम्हारे फ़ायेदे में है, बस तुने फ़रमाया मैने तुमसे अजरे रिसालत नहीं माँगा सिवाए इसके की यह राह इसके लिये जो ख़ुदा तक पहुंचना चाहे, बस अहलेबैत तेरा मुक़र्रर किया हुआ रास्ता और तेरी खुशनूदी के हुसूल का ज़रिया हैं, हाँ जब मुहम्मद रसूल-अल्लाह (स:अ:व:व) का वक़्त पूरा हो गया तो इनकी जगह अली (अ:स) बिन अबी तालिब (अ:स) ने ले लिये. इन दोनों पर और इनकी आल (अ:स) पर तेरी रहमतें हों, अली (अ:स) रहबर हैं, जबकि मुहम्मद डराने वाले और हर कौम के लिये रहबर है, बस फ़रमाया, आप ने जमा'अत-ए-सहाबा से के जिसका मै (स:अ:व:व) मौला हूँ बस अली (अस:) भी इसके मौला हैं, ऐ माबूद मुहब्बत कर इस से जो इससे मुहब्बत करेदुश्मनी कर इस से जो इससे दुश्मनी करेमदद कर इसकी जो इसकी मदद करे, ख़्वार कर इसको जो इसको छोड़े, इसके बाद फ़रमाया की जिसका मै नबी (स:अ:व:व) हूँ अली (अ:स) उसका अमीर व हाकिम है और फ़रमाया मै (स:अ:व:व) और अली (अ:स) एक दरख़्त से हैं और दुसरे लोग मुखतलिफ़ दरख्तों से पैदा हुए हैं, और अली (अ:स) क़ो अपना जा'नशीन बनाया जैसे हारून (अ:स) मूसा (अ:स) के जा'नशीन हुए और फ़रमाया "ऐ अली (अ:स)  यूं मेरे नज़दीक वोही मुक़ाम रखते हो जो हारून (अ:स) क़ो मूसा (अ:स) की निस्बत था, मगर मेरे बाद कोई नबी नहीं, आप ने अली (अ:स) के निकाह अपनी बेटी सरदारे ज़िनान-ए-आलम (स:अ)  से मस्जिद में किया, इनके लिये वो अम्र हलाल रखा जो आप के लिये था और मस्जिद की तरफ़ से सभी दरवाज़े बंद कराये सिवाए अली (अ:स) के दरवाज़े के, फिर अपना ईल्म-ओ-हिकमत इनके सुपुर्द किया और फ़रमाया मै ईल्म का शहर हूँ और अली (अ:स) इस के दरवाज़े हैं, लिहाज़ा जो ईल्म -व हिकमत का तालिब है वो इसे दरे ईल्म पर आये उसके बाद यह कहा की ऐ अली (अ:स) तुम मेरे भाई जा'नशीन और वारिस हो, तुम्हारा गोश्त मेरा गोस्ततुम्हारा ख़ून मेरा ख़ून तुम्ह्हरी सुलह मेरी सुलह, तुम्हारी जंग मेरी जंग है और ईमान तुम्हारी रगों में शामिल है जैसे वो मेरी रगों में शामिल है, क़यामत में तुम हौज़े कौसर पर मेरे ख़लीफ़ा होगेतुम्ही मेरे क़र्ज़े चुकाओगे और मेरे वादे निभाओगे, तुम्हारे शिया जन्नत में चमकते चेहरों के साथ नूरानी तख्तों पर मेरे आस पास मेरे क़रीब होंगे और ऐ अली (अ:स)  अगर तुम न होते तो मेरे बाद मोमिनों की पहचान न हो पाती चुनान्चेह वो आप के बाद गुमराही से हिदायत में लाने वाले तारीकी से रौशनी में लाने वाले ख़ुदा का मज़बूत सिलसिला और इसका सीधा रास्ता हैं न क़राबत-ए-पैग़म्बर में कोई इनसे बढ़ा हुआ था न दीन में कोई इनसे आगे था इनके अलावा कोई भी औसाफ़ में रसूल के मानिंद न था, अली (अ:स)  व नबी (स:अ:व:व) और इनकी आल (अ:स) पर ख़ुदा की रहमत हो, अली (अ:स) ने तावीले क़ुरान पर इनकी जंग की और ख़ुदा के मामले में किसी मुलामात करने वाले की मुलामात की परवाह न की, अरब सरदारों क़ो हालाक किया, इनके बहादुरों क़ो क़त्ल किया और इनके पहलवानों क़ो पछाड़ा, बस अरबों के दिलों में कीना भर गया के बदर, खैबरहुनैन वगैरा में इनके लोग क़त्ल हो गए, बस वो अली (अ:स) की दुश्मनी में इकट्ठे हुए और इनकी मुखाल्फ़त पर आमादा हो गए चुनान्चेह आप (अ:स) ने बैय्यत तोड़ने वालों तफ्रका डालने वालों और हटधर्मी करने वालों क़ो क़त्ल किया, जब आपका वक़्त पूरा हुआ तो बाद वालों में से बद'बख्त तरीन ने आपको क़त्ल किया इसने पहले वाले शक़ी तरीन की पैरवी की रसूल-अल्लाह (स:अ:व:व) का फ़रमान पूरा न हुआ जबकि एक रहबर के बाद दूसरा रहबर आता रहा और उम्मत इस की दुश्मनी पर शिद्द्त से कमर्बस्ता होकर इस पर ज़ुल्म ढाती रही और इस की औलाद क़ो परेशान करती रही, मगर थोड़े से लोग वफादार थे और इनका हक़ पहचानते थे, बस इनमें से कुछ क़त्ल हो गए कुछ क़ैद में डाले गए और कुछ बे-वतन हुए ईन पर क़ज़ा (मौत) वारिद (नाज़िल) हो गयी जिस पर वो बेहतरीन अजर के उम्मीदवार हुए क्योंकि ज़मीन ख़ुदा की मिलकियत है, वो अपने बन्दों में से जिसे चाहे इसका वारिस बनाता है और अंजाम कार परहेज़गारों के लिये है और पाक है हमारा रब की हमारे रब का वादा पूरा होकर रहता है, हाँ ख़ुदा अपने वादे के ख़िलाफ नहीं करता और वो ज़बरदस्त हिकमत वाला है, बस हज़रत मुहम्मद (स:अ:व:व) और हज़रत अली (अ:स)  ईन दोनों पर ख़ुदा की रहमत हो इनके ख़ानदान पर इनपर रोने वालों क़ो रोना चाहिए चुनान्चेह ईन पर और ईन जैसों पर दहाड़ें मार कर रोना चाहिए बस इनके लिये आंसू बहाए जाएँ, रोने वाले चीख़ चीख़ कर रोयें नालह व फ़रयाद बुलंद करें और ऊंची आवाजों में रोकर कहें कहाँ हैं हसन (अ:स) कहाँ हैं हुसैन (अ:स), कहाँ गए फर्ज़ान्दाने हुसैन (अ:स) एक नेक किरदार के बाद दूसरा नेक किरदार, एक सच्चे के बाद दूसरा सच्चा, कहाँ गए जो एक के बाद एक राहे हक़ के रहबर थे, कहाँ गए जो अपने वक़्त में ख़ुदा के बर्गुज़ीदा थे, कहाँ गए वो चमकते सूरज, कहाँ गए वो दमकते चाँद, कहाँ गए वो झिलमिलाते सितारेकहाँ गए वो दीन के निशान और ईल्म के सतून, कहाँ है ख़ुदा का आखरी नुमाइंदा जो रहबरों के इस ख़ानदान से बाहर नहीं, कहाँ है वो जो जालिमों की जड़ें काटने के लिये आमादा है, कहाँ है वो जो इंतज़ार में है, के टेढ़े क़ो सीधा और ग़लत तो दुरुस्त करे, कहाँ है वो उम्मिदगाह  जो ज़ुल्मो सितम क़ो मिटाने वाला है, कहाँ है वो जो फरायेज़ और सुनन क़ो ज़िंदा करने वाला इमाम (अ:स) कहाँ है वो जो मिल्लत और शरियत क़ो रास्त करना वाला, कहाँ है वो जिसके ज़रिये क़ुरान और इसके अहकाम के ज़िंदा होने की तवक्का है कहाँ है वो जो दीन और अहले दीन के तरीक़े रौशन करने वाला, कहाँ है वो जो जालिमों का ज़ोर तोड़ने वाला कहाँ है वो जो शरीक और निफाक की बुन्याद ढाने वाला, कहाँ है वो जो बकारोंना'फरमानों और सरकशों क़ो तबाह करने वाला, कहाँ है वो जो गुमराही और तफ़रक़े की शाखें काटने वाला, कहाँ है वो जो कज'दिली व नफ्स'परस्ती के दाग़ मिटाने वाला, कहाँ है वो जो झूट और बोहतान की रगें काटने वाला, कहाँ है वो जो सरकशों और मगरूरों क़ो तबाह करने वाला कहाँ है वो जो  दुश्मनों क़ो ज़लील करने वाला, कहाँ है वो जो  सब क़ो तक़वा पर जमा करने वाला, कहाँ है वो जो ज़मीन व आसमान के पैवस्त रहने का वसीला, कहाँ है वो जो यौमे फतह का हुक्मरान और हिदायत का परचम लहराने वाला, कहाँ है वो जो नेकी और खुशनूदी का लिबास पहनने वाला, कहाँ है वो जो जो नबियों के ख़ून और नबियों के औलाद के ख़ून का दावेदार, कहाँ है वो जो कर्बला के मक़तूल हुसैन (अ:स) के ख़ून का मुद्दई, कहाँ है वो जो इस पर ग़ालिब है जिस ने ज्यादती की और झूट बाँधा और वो परेशान की जब दुआ मांगे तो क़बूल होती हैकहाँ है वो जो मख्लूक़ का हाकिम जो नेक और परहेजगार है, कहाँ है वो जो नबी मुस्तफा (स:अ:व:व) का फ़र्ज़न्द अली मुर्तज़ा (अ:स) का फ़र्ज़न्द ख़दीजा पाक (स:अ)क अफार्जंद और फ़ातिमा कुबरा (स:अ) का फ़र्ज़न्द मेहदी (अ:स०, कुर्बान आप पर मेरे माँ बाप और मेरी जान आप के लिये फ़िदा है, ऐ ख़ुदा के मुक़र्रिब सरदारों के फ़र्ज़न्द, ऐ पाक नसल बुजुर्गवारों के फ़र्ज़न्द, ऐ हिदायत याफ़ता रहबरों के फ़र्ज़न्द, ऐ बुर्गाजीदा और ख़ुश'इतवार बुज़ुर्गों के फ़र्ज़न्द, ऐ पाक नेहा  सरदारों के फ़र्ज़न्द, पाकबाजों पाक हुए लोगों के फ़र्ज़न्द,ऐ पाक निषाद सादात के फ़र्ज़न्द वासी-उल-क़ल्ब इज्ज़त्दारों के फ़र्ज़न्द रौशन चांदों के फ़र्ज़न्द, ऐ रौशन चिरागों के फ़र्ज़न्द, ऐ रौशन सय्यारों के फ़र्ज़न्द,ऐ चमकते सितारों के फ़र्ज़न्द,ऐ रौशन राहों के फ़र्ज़न्द,ऐ बुलंद मर्तबा वालों के फ़र्ज़न्द,ऐ हामेलीन-ए-उलूम के फ़र्ज़न्द, ऐ वाज़े'अ रविशों  के फ़र्ज़न्द,ऐ मजकूर अलामतों के फ़र्ज़न्द, ऐ मोजिज़ नुमाओं के फ़र्ज़न्द,ऐ ज़ाहिर दलाएल के फ़र्ज़न्द, सीधे रास्ते के फ़र्ज़न्द,ऐ अज़ीम ख़बर के फ़र्ज़न्द,ऐ रौशन सय्यारों के फ़र्ज़न्द, इस हस्ते के फ़र्ज़न्द जो ख़ुदा के यहाँ उम्मुल-किताब में अली और हकीम है, ऐ वाज़े' रौशन आयात के फ़र्ज़न्द,ऐ ज़ाहिर और दलायेल के फ़र्ज़न्द,ऐ वाज़े'अ व रौशनतर दल्लायेल के फ़र्ज़न्द,ऐ कामिल हुज्जतों के फ़र्ज़न्द,ऐ बेहतरीन नेमतों के फ़र्ज़न्द,ऐ ताहा और मोहकम आयतों के फ़र्ज़न्द,ऐ यासीन व ज़ारियात के फ़र्ज़न्द,ऐ टूर और आदियात के फ़र्ज़न्द,ऐ इस हस्ती के फ़र्ज़न्द जो नज़दीक हुए तो इससे मिल गए बस कमान के दोनों सिरों जितने या इस से भी नज़दीक हुए अली'आला के क़रीब हो गए, ऐ काश मै जानता की इस दूरी ने आपको कहाँ जा ठहराया और किस ज़मीन में और किस ख़ाक़ ने आपको उठा रखा है, आप मुक़ाम रिज़वा में है या किसी और पहाड़ पर हैं या वादिये तू'आ में यह मुझ पर गिरां है के मै मख्लूक़ क़ो देखूं और आपको न देख पाऊँ, न आपकी आहात सुनूं न आपकी सरगोशीमुझे रंज है के आप तन्हा सख्त़ी में पड़े हैं, मै आप के साथ नहीं हूँ की मेरी आहो ज़ारी आप तक पहुँच पाती,मेरी जान आप पर कुर्बान के आप गायेब हैं मगर हम से दूर नहीं, मै आप पर कुर्बान आप वतन से दूर हैं लेकिन हम से दूर नहीं, मै आप पर कुर्बान के आप हर मोहिब की आरज़ू और हर मोमिन और मोमिना की तमन्ना हैं जिस के लिये वो नाला करते हैं, मै कुर्बान के आप वो इज्ज़तदार हैं जिनका कोई सानी नहीं, मै कुर्बान के आप वो बुलंद मर्तबा हैं जिन के बराबर कोई नहीं, मै कुर्बान के आप वो क़दीमी नेमत हैं की जिस की कोई मिसाल नहीं, मै कुर्बान के आप जो शरफ़  रखते हैं वो किसी और क़ो नहीं मिल सकता कब तक हम आप के लिये बेचैन रहेंगे ऐ मेरे आक़ा और कण तक और किस तरह आप से ख़िताब करूँ और सरगोशी करूँ, यह मुझ पर गिरां है के सिवाए आपके किसी से जवाब पाऊँ या बातें सुनूं, मुझ पर गिरां है की मै आप के लिये रोऊँ और लोग आप क़ो छोड़ रहे हैं, मुझ पर गिरां है के लोगों की तरफ़ से आप पर गुज़रे जो गुज़रे तो क्या कोई साथी है जिसके साथ मिलकर आप के लिये गिरया व ज़ारी करूँ, क्या कोई बेताब है की जब वो तनहा हो तो इस के हमराह नाला करूँ या कोई आँख है जिसके साथ मिलकर मेरी आँख ग़म के आंसू बहाए , ऐ अह्मदे मुजतबा (स:अ:व:व) के फ़र्ज़न्द आप के पास आने का कोई रास्ता है, क्या हमारा आज का दिन आप के कल से मिल जाएगा की हम ख़ुश हों कब वो वक़्त आयेगा की हम आप्नके चश्मे से सैराब होंगे, कब हम आपके चश्मा-ए-शिरीन से प्यास बुझाएंगे अब तो प्यास तूलानी हो गयी कब हमारी सुबह व शाम आपके साथ गुज़रेगी की हमारी आंकें ठंडी होंगी, कब आप, मै और हम आपपको देखेंगे जबकि आपकी फ़तह का परचम लहराता होगा, हम आपके इर्द-गिर्द जमा होंगे और आप भी लोगों के इमाम होंगे तब ज़मीन आपके अदल व इंसाफ़ से पर होगी आप अपने दुश्मनों क़ो सख्ती व ज़िल्लत से हमकिनार करेंगेआप सरकशों और हक़ के मुन्किरों क़ो नाबूद करेंगे, मगरूरों का ज़ोर तोड़ देंगे और ज़ुल्म करने वालों की जड़ें काट देंगे इस वक़्त हम कहेंगे हम्द है ख़ुदा के लिये जो जहानों का रब है, ऐ माबूद तू दुखों और मुसीबतों क़ो दूर करने वाला है मै तेरे हुज़ूर शिकायत लाया हूँ के तू मदावा करता है और तू ही दुन्या व आख़ेरत का परवरदिगार है, बस मेरी फ़रयाद सुन ऐ फरयादियों की फ़रयाद सुनने वाले अपने इस हकीर और दुखी बन्दे क़ो इस आक़ा का दीदार करा दे ऐ ज़बरदस्त क़ुव्वत वाले इनके वास्ते से इसके रंज व ग़म क़ो दूर फ़रमा और इसकी प्यास बुझा दे ऐ वो ज़ात के जो अर्श पर हावी है की जिस की तरफ़ वापसी और आखरी ठिकाना है और ऐ माबूद हम है हैं हकीर बन्दे जो तेरे वली-ए-असर (अ:स) के मुश्ताक हैं जिनका ज़िक्र तुने और तेरे नबी ने किया, तुने इन्हें हमारी जाए पनाह बनाया हमारा सहारा क़रार दिया इनको हमारी ज़िन्दगी का ज़रिया और पनाहगाह बनाया और इनको हम में से मोमिनों का इमाम क़रार दिया बस इनको हमारा दरूद  सलाम पहुंचा और ऐ परवरदिगार इनके ज़रिये हमारी इज़्ज़त में इज़ाफा फ़रमा इनकी क़रारगाह क़ो हमारी क़रारगाह और ठिकाना बना दे हम पर इनकी इमामत के ज़रिये हमारे लिये अपनी नेमत पूरी फ़रमा यहाँ तक की वो हमें तेरी जन्नत में ईन शहीदों के पास ले जायेंगे जो मुक़र्रिब-ए-ख़ास हैं, ऐ माबूद! मुहम्मद (स:अ:व:व) व आले मुहम्मद (अ:स) पर रहमत नाज़िल फार्म और इमाम मेहदी (अ:स) के नाना मुहम्मद (स:अ:व:व) पर रहम फार्म जो तेरे रसूल और अज़ीम सरदार हैंऔर मेहदी (अ:स)  के वालिद पर रहमत कर, जो छोटे सरदार हैं  इनकी दादी सिद्दीक़ा-ए-कुबरा फ़ातिमा (स:अ) बिन्ते मुहम्मद (स:अ:व:व) पर रहमत फ़रमा, ईन सब पर रहमत फार्म जिनको तुने इनके नेक बुज़ुर्गों में चुना और अल'क़ायेम (अ:स) पर रहमत फ़रमा, बेहतरीन कामिल पूरी हमेशा हमेशा बहुत सी बहुत ज़्यादा जो रहमत की हो तुने अपने बरगुजीदों में से किसी और मख्लूक़ में से अपने पसंद किये हुए पर और उस पर दरूद भेज, वो दरूद जिस की गिनती न हो सके जिस का समय खत्म न हो और कभी खत्म न होने वाले असीमित दरूद हों! ऐ माबूद इनके द्वारा हक़ क़ो क़ायेम फ़रमा, इनके हाथों बातिल क़ो मिटा देइनके वजूद से अपने दोस्तों क़ो इज़्ज़त दे, इनके ज़रिया अपने दुश्मनों क़ो ज़िल्लत दे, और ऐ माबूद हमें और इनको इकट्ठे कर दे ऐसा इकट्ठा जो की हमें इनके पहले बुज़ुर्गों तक पहुंचाए और हमें इनमे क़रार दे जिन्हों ने इनका दामन पकड़ा है हमें इनका जेरे साया रख इनके हकूक अदा करने में हमारी मदद फ़रमाइनकी फमाबर्दारी में कोशान बना दे इनकी नाफ़रमानी से बचाए रख इनकी  खुशनूदी से हम पर एहसान कर और हमें इनकी मुहब्बत अता फ़रमा इनकी रहमत इनकी दुआ और इनकी बरकत अता फ़रमा जिसके ज़रिया हम तेरे वासी'अ रहमत और तेरे यहाँ कामयाबी हासिल करें इनके ज़रिये हमारी नमाज़ क़बूल फ़रमा इनके वसीले से हमार गुनाह बख्श दे इनके वास्ते से हमारी दुआ मंज़ूर फ़रमा और इनके ज़रिये से हमारी रोज़ियाँ फराख कर दे हमारी परेशानियां दूर फ़रमा इनके वसीले से हमारे हाजात क़ो पूरा फ़रमा, और तवज्जह कर हमारी तरफ़ अपनी ज़ात-ए-करीम के वास्ते से और क़बूल फ़रमा अपनी बारगाह में हमारी हाजरी हमारी तरफ़ नज़र कर मेहरबानी की नज़र की जिस से तेरी बारगाह में हमारी इज़्ज़त बढ़ जाए फिर अपने करम की वजह से वो नज़र हम से न हटा, हमें अल'क़ायेम (अ:स) के नाना के हौज़ से सैराब फ़रमा और इनकी आल (अ:स) पर ख़ुदा की रहमत हो, इनके जाम से इन्ही के हाथ से सिरो-सैराब कर, जिस में मज़ा आये और फिर प्यास न लगे, ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले 

 

अल्लाह हुम्मा सल्ले अला मुहम्मद व आले मुहम्मद

 

इसके बाद नमाज़''ज़्यारत पढ़े जिस का ज़िक्र पहले हो चूका है और फिर जो दुआ चाहे मांगे इंशा'अल्लाह वो क़बूल होगी!

 

 

हिंदी रूपांतरण

 

बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम

 

अल्लाह हुम्मा सल्ले अला मुहम्मद व आले मुहम्मद

 

अल'हम्दो लिल्लाहे रब्बिल आलामीना  सल'लाल्लाहो अला सय्येदेना मोहम्मदीन नबी'येही  आलेही  सल'लमा तस्लीमन अल्लाहुम्मा लकल हम्दो अला मा जरा 

बेहि क़ज़ा-ओका फ़ी औलिया 'एकल लज़िनस तख़'लस्तहुम ले'नफ्सेका व दीनेका एज़िख तरता लहुम जज़ीला मा इनदका मेनन ना'एमिल मो' क़ीमिल लज़ी ला 

ज़वाला लहू  लज़-मेहलाला बा'दा अन शर'अत्ता अले'हेमुज़ ज़ोह्दा फ़ी दराजाते हाज़ेहिद दुन्यद दानी'याते  ज़ुखरो'फ़ेहा व ज़िब्रे'जेहा फ़'शरातू लका ज़ालेका  

'अलिमता मिन'होमुल वफ़ा- बेहि फ़'क़ाबिल'तहुम  कर'रब्ताहुम   क़द'दमता ला'होमुज़  ज़िक्रल अलिय्या व़स सना-अल जलिय्या  अह्बत्ता अलय्हीम 

मला'एकताका  कर'रम्ताहुम बे'वहयेका  रफ़द'तहुम बे'इल्मेका  जा'अल्ताहोमुज़ ज़री-अता एलायका वल वसीलता एला रिज़्वानेका फ़-बा'ज़ुं अस्कन्ताहू 

जन'नताका  एला  अन  अख़'रज्ताहू  मिन्ह व बा'ज़ुंन हम'अल्ताहू फ़ी फुल्केका  नज'जैतहू  मन आमना -'हु मेनल हलाकते बेरहमतेका  बा'ज़ुंन ईत'तख़'

अज्तहू लेनफ्सेका ख़लीलन  'अलका लेसाना सिद्किन फ़िल आखेरीना फ़'अजब्ताहू व जा'अलता ज़ालेका  अलीयन   बा'ज़ुंन  कल'लम्ताहू मिन  शजा'रतीन

तक्लीमन  जा'अलता लहू मिन अखीहे रिद'अन  वज़ीरन  बा'ज़ुंन अव्लद'तहु मिन गैरे अबिन व आती'ताहुल बैयेनाते  अय्यद'तहु बे'रूहिल कुद'दुसे  कुल्लुन

शरा''लहू शरी'अतन  नह'अजता लहू मिन्हाजन वतक'हय्य'अरता लहू औसेया'अ मुस्तह'फेज़न बा'दा मुस्तह'फेज़ीन मिन मुद'दतिन एला मुद'दतिन ऐका'मतन 

ले'दीनेका  हुज'जतन अला 'बादेका  ले-अल्ला यज़ूलाल हक्क़ो अन मक़र'रेही  याग़'लेबल बातेलो अला अहलेही  ला यक़ूला अहदुन लौला अर्सलता एलैना 

रसूलन  मुन्ज़ेरण  अक़मता लाना 'लमन  हादेयन फानत'ताबे 'आयातेका मिन काबले अन नाज़िल्ला  नाख्ज़ा एला अनिन तह'यता बिल'अमरे एला हबी'बेक 

 नाजी'बेक मोहम्मदीन सल'लाल्लाहो अलैहे  आलेही फ़'काना कमान तजब'तहु सय्येदा मन खलक'तहु  सफ़'वता मानिस-'फै'तहु  अफ्ज़ला मनिज 

'बय'तहु   अकरमा मनेया'तमद'तहु क़द'दम्तहू अला अम्बेया'एका  बा'अस्तहू एलस'सक़लैने मिन एबादेका  'तातहु मशारेक़'अका  मग़रेब'अका 

 सख़'खरता लहुल बोरा'क़ा  अरजता बे रूहे-ही एला समा'एका  औदा'तहु इल्मा मा काना  मा यकुनो एलन  क़ेज़ा' खल्क़ेका सुम्मा  नासर्ताहू बीर रोअ'बे  

हफ़'अफ्तह बे-जिबरा'इला  मीकाइला वल मोसव्वे'मीना मिन मला'एकतेका  'अज़'तहु अन तुज़'हेरा दीनाहू 'लद देने कुल्लेही   लौ'करेहल मुशरेकूना  

ज़ालेका  बा'-दा अन बववा-तहु मोबव्वा- सिदकीं मिन अहलेही   जा'अलता  लहू  लहुम अव्वाला  बयतिन वोज़े-' लीं-नासे लल-लज़ी बे-बक्कता मोबारकन  

होदल'लील   आलामीना फ़ीहे आया-तुन बय्ये'नातुन मक़ामो इब्राहीमा  मनदाखालाहु काना आमेनन  कुल्ता इन्नमा योरीदुल'लाहो ले-युज़्हेबा 'न्कोमुर रिज्सा 

अहलुल बयते   योताह'हेराकुम तत'हीरा सुम्मा जा'अलता अजरा मोहम्मदीन सलावातोका अलैहे  आलेही मवद'दताहुम फ़ी केताबेका फ़'कुल्ता कुल ला 

अस'अलोकुम अलैहे अजरण इल्लल मवद'दता फ़िल क़ुर्बा कुल्ता मा -अल्तोकुम मिन अज्रिन फहोवा लकुम  कुल्ता मा असलोकुम अलय्हे मिन अजरिन 

इल्ला मन शा' अयन यत्ता'खेज़ा एला रब्बेही सबीलन फ़-कानू होमुस सबील एलायका वल मस्लका एला रिज़्वानेका फलम'मन क़ज़त अय्या'मोहू अकामावलीय'याहू 

अलीय'यबना अबी तालेबीन सलावातोका अलय्हेमा  आलेहेमा हादेयन ईज़ काना होवल मुन्ज़ेरा  ले-कुल्ले कौमिन हादीन फ़'काला वल माला- अमा'महू  मन 

कुन्तो मौलाहो फ़'अलिय्युन मौलाहो अल्लाहुम्मा वाले मन वालाहो  'आदी मन 'अदाहो वन'सुर मन नासरहू वाख'ज़ुल मन खज़ा'लहू  क़ाला मन कुन्तो अना 

नाबिय्या'हु फ़'अलिय्युन अमीरोहू  क़ाला अना  अलीयुन मिन शजा'रतीन वाहे'दतिन  सा-इरून नासो मिन शजा'रीन शत्ता व अहल्लाहू महल्ला हारूना मिन मूसा

फ़ क़ाला लहू अंत मिन्नी बे'मंज़ेलाते हारूना मिन मूसा इल्ला अन्नाहू ला नाबिय्या बा'दी  ज़व्वा'जहुब'नाताहू सय्येदता नेसा-ईल आलामीना  अहल्ला लहू मिन 

मस्जेदेही मा हल्ला लहू व सद'दल अब्वाबा इल्ला बाबहू सुम्मा औदा'अहू इल्महू  हिक्मताहू फ़'क़ाला अना मदीनतुल इल्मे व अलिय्युन बाबोहा फ़मन अरादल 

मदीनता वल हिकमता फ़'ल्यातेहा मिन बाबेहा सुम्मा क़ाला अंत अखी वासिय्यी व वारेसी लहमोका मिन लहमी व दमोका मिन दमी व सिल्मोका सिल्मी  हर्बोका 

हर्बी वल ईमानो मोख़ा'लेतुन लहमका व दमका कमा ख़ा'लता लहमी व दमी व अन्ता गदन 'लल हौज़े ख़ली'फती व अन्ता ताक़ज़ी दय्नी व तुन्जेज़ो 'दाती व शी-

अतोका अला मनाबेरा मिन नूरिन मुब'यज़'ज़तन वोजुहो'हम हौली फ़िल जन्नते व हम जीरानी  लौ'ला अन्ता या अलियों लम योअ'रफ़िल मो'मिनूना बा'दी व

काना बा'दाहू होदन मेनज़ ज़लाले व नूरन मेनल 'मा व हब्लल'लाहिल मतीना सेरा'तहुल मुस्ता'क़ीमा ला युस'बक़ो बे'क़रा'बतीन फ़ी राहेमिन व ला

बे'साबे'क़तींन फ़ी दीनिन व ला युल'हक़ों फ़ी मन'क़बा'तिन मिन मनाक़े'बेही यह्ज़ू हज़वररसूले सल्लल'लाहू अलय'हेमा व आले'हेमा व योक़ा'तेलों 'लत तावीले 

वला ता'खोज़ो'हु फ़िल'लाहे लौमतो ला एमिन क़द वातारा फ़ीहे सना'दीदल 'राबे व क़ताला अब'ताला'हुम व नावाशा ज़ो'अ-बाना'हुम फ़'औदा-अ' क़ोलू'बहुम 

अह्क़ा'दान बद्रीय्यातन व खै'बरिय्यातन व होने'निय्यातन व गैरा हुन्ना फ़-अज़ब'बत अला अदा'वतेही व अकब'बत अला मोनाबज़ातेही हत्ता क़तालन नाकेसीना वल

कासे'तीना वल मारे'क़ीना  लम'मा क़ज़ा नह्बहू  कता'लहू अश्क़ल आख़ेरीना यात्बा-ओ' अश्क़ल  अव्वा'लीना लम युम्तासल अमरो रसूलिल्लाहे  सल्लल्लाहो अलैहे 

 आलेही फ़िल हादीना बा'दल हादीना वल उम्मतो मोसिर'रतुन अला मकतेही मुज्तमे-अ'तुन अला क़ती'अते रहमेही  इक़सा- वुल्देही इल्लल क़लीला मिम्मन 

वफ़ा ले-रे-आ-यातील हक्क़े फीहीम फ़'क़ोतेला मन क़ोतेला  सोबेया मन सोबेया  उक़सेया मन उक़सेया  जरल क़ज़ा-ओ लहुम बेमा युर्जा लहू हुस्नुल  मसूबते ईज़

कानातील अरज़ो लिल्लाहे यूरेसोहा मन यशा-ओ मिन एबा'देहि वल आक़ेबतो लील-मुत्तक़ीना  सुभाना रब्बेना ईन काना वादों रब्बेना ला मफूलन  लेन  युख'

लेफल्लाहो 'दाहू  होवल अज़ीज़ुल हकीमो फ़-अलल अता'एबे मिन अह्लेबैते मोहम्मदीन  अलीयिन सल्लल्लाहो अलैहेमा  आलेहेमा फ़ल यब्किल बाकूना  

इय्याहुम  फ़ल-यांदोबिन नादेबूना  ले-मिस्लेहीम फ़ल-तुज़-रफिद दोमु-ओ' वल यस्रोखिस सारेखूना  याज़िज्जाज़ ज़ाज्जून  या-ई'जजाल आज्जून अय्नल हसनो 

अय्नल हुसय्नो अयना अब्ना-उल हुसय्ने सालेहून बा'दा सालेहीन  सादेकून बा'दा सादेकिन अय्नस सबीलो बा'दस सबीले अय्नल खेया'रतो बा'-दल खेया'रते अय्नाश 

शोमू'सूत ताले-ओ अय्नल अक्मारुल मोनीरातो अय्नल अन्जोमुज़ ज़ाहेरातो अयना 'लामुद देने  क़वा-इ'दुल 'लमे अयना बकिय्या'तुल्लाहिल लती ला तख़'लू 

मेनल इत्रातिल हादे'याते अय्नल मो-अ'ददो ले'क़त-इ' दाबेरिज़ ज़लामाते अय्नल मुन्ताज़रो ले-एकामतील अम्ते वल 'वजे अय्नल मुर्तजा ले-एज़ालातिल जौरे  वल 

'दवाने अय्नल मुद'दखरो ले'ताज्दीदिल फ़रा-एज़े व़स सोनाने अय्नल मोता'खै'यारो ले-इ-आदतिल मिल्लते वश शरी'अत अय्नल मो'अम्मालो ले'एहया-ईल केताबे 

 होदूदेही अयना मोह' म-अ'अलेमिद देने  अहलेही अयना क़ासेमो शौकतिल मोअ'तदीना ऐना हादेमो अबनी'य्यातिश शिर्क वन नेफ़ाके अयना मोबेदो अहलिल 

फ़ोसूक़े वल 'सयाने वत तुग़-याने अयना हासेदो फ़ुरू-ईल गैए वश शेक़ाके अयना तामेसों आसारिज़ जैगे वल अहवा-इ अयना क़ाते-ओ'हबा एलिल किज़्बे वल 

इफ्तेरा-इ अयना मोबीदुल 'ताते वल मरदाते अयना मुस्ता'सेलु अहलिल 'नादे वत ताज़्लीले वल इल्हादे अयना मो-इज्ज़ुल औलिया-इ  मोज़िल्लुल '-दा-इ 

अयना जामे'उल कलेमाते अलत तक़वा अयना बाबुल'लाहिल लज़ी मिन्हो यो'अता अयना वज्हुल'लाहिल लज़ी एलैहे यता'वज्जहुल औलिया-ओ अय्नस सबाबुल  मुतस'

सेलो बय्नल अरज़े व़स समा-ए अयना साहेबो यौमिल फ़तहे  नाशेरो रायातिल होदा अयना मो'अल्लेफ़ो शम्लिस सलाहे वर रेज़ा अय्नत तालेबो बे-ज़ोहूलिल अम्बेया-

  अब्ना-ईल अम्बेया-ए अय्नत तालेबो बे-दामिल मक्तूले बे-कर्बला-अ अय्नल मंसूरो अला मनेया'तदा अलय्हे वफ़-तरा अय्नल मुज़'तर्रुल लज़ी योजाबो एज़ा दा-

' अयना सदरुल ख़ला'एके ज़ुल बिर्रे वत तक़वा अय्नाब्नुं नबी'एनिल मुस्तफ़ा वब्नो अली'एनिल मुर्तज़ा वब्नो ख़'दीजतल ग़र्रा' वब्नो फ़ाते'मतल कुबरा बे'अब 

अन्ता  उम्मी  नफ़'सीलकल वेक़ा-ओ वल हेमा यब्नस सा'दतिल मोक़र'रबीना यब्नन नोजाबा ईल अक्रामीना यब्नल होदातिल महदी'ईना यब्नल खियारतिल मोहज़'

ज़बीना यब्नल ग़ता'रेफतिल अन्जाबीना यब्नल अता-एबिल मोतः'हरीना यब्नल ख़ज़ा'रेमतिल मुन्ताजाबीना यब्नल क़मा'केमतील अक्रामीना यब्नलबोदूरिल मोनीराते 

यब्नस सोरोजिल मोज़े-अते याब्नश शोहोबिस साक़े'बते यब्नल अन्जोमिज़ ज़ाहेराते यब्नस सोबोलिल वाज़िहते यब्नलआ'-लामिल ला-एहते यब्नल उलूमिल कामेलते 

यब्नस सोनानिल मशहूराते यब्नल म-अ'अलेमिल मासूराते यब्नल मोअ'-जेज़ातिल मौजूदते यब्नल दला-एलिल मश'हूदाते यब्नस सेरातिल मुस्तकीमे यब्नन नबा-

ईल 'ज़ीमे यबना मन होवा फ़ी उम्मिल केताबे लादाल्लाहे अलीयुन हकीमुन यब्नल आयाते वल बय्ये'नाते यब्नद दला'एलिज़ ज़ाहेराते यब्नल बरा'हीनिल वाज़े'हातील

बाहे'राते यब्नल होजाजिल बाले'ग़ातेयब्नन ने-अ'मिस साबे'ग़ाते यबना ताहा वल मोह्कमाते यबना यासीन वज़ ज़ारेयाते यब्नत तूरे वल आदेयाते यबना मन दाना 

फता'ज़ल्ला फ़'काना क़ाबा कौ'सैन  अदना ज़ोनु'ववन वक़'तेराबन मेनल अली'ईल 'ला लय्ता शेया'री अय्नस तक़र'रत बेकन नवा बल अय्यो अर्ज़ीं तो'क़िल'लोका 

 सरा अ-बे राज़्वा  गै'रेहा अम ज़ी तोवा अजीज़ुन अलय्या अन अरल ख़ल'क़ा  ला तोरा  ला अस्मा-ओ'लका  हसीसन  ला नजवा अजीजुन 'लाय्या अन

तोहीता बेका दूनायिल बलवा  ला यनालोका मिन्नी ज़जीजुन  ला शक्वा बे-नफ़सी अन्ता मिन मोगय्या'बिन लम यख़-लो मिन्ना बे-नफ़सी अन्ता मिन नाज़ेहीन 

मा नाज़हा 'नना बे'नफ़'सी अन्ता उमनी'य्यातो शा-एकिन यता'मनना मिन मोमिनीन  मोमिनातिन ज़िकरा फ़-हन्ना बे'नफ़'सी अन्ता मिन 'कीदे इज्ज़िन ला 

योसामा बे'नफ़'सी अन्ता मिन असीले मज्दीनला योजारा बे'नफ़'सी अन्ता मिन तेलादे ने-अ'मिन ला तोज़ा'हा बे'नफ़'सी अन्ता मिन नसी'फ़े शरा'फ़िंन ला योसावा एला

मता अ-हारो फ़ीका या मौलाया  एला मता  अय्या खेता'बिन असेफ़ो फ़ीका  अय्या नजवा 'जीज़ुं 'लाय्या अन ओजाबा दूनाका  ओना'ग़ा अज़ी'ज़ुं 'लाय्या

अन अबके'यका  यख़'ज़ोलाकल वरा अज़ी'जुन अलय्या अन यज'रिया अलयका दूनाहुम मा जरा हल मिन मो-ए'एनिन फ़-ओतिला म-अ'हुल 'वीला वल बोका-अ हल मिन जज़ो-ई' अ-ओसा-ए'दा जज़ा-अ'हु एज़ा ख़ला हल क़ा'ज़ेयत 'नून फ़सा-अ'दत-हा अयनी अलल क़ज़ा हल एलायका यबना अहमद सबीलुन फ़'तुलक़ा 

हल यत्ता'सेलो योमोना मिनका बे-ए'दतिन फ़-नह्ज़ा मता नरेदो'मना'हेलाकर रावियता फ़-नरवा मता नन्ता'क़े-ओ'मिन 'ज़्बे मा-एका फ़क़द तालस सदा मता 

नोग़'हादीका  नुरा-वेहोका फ़-नोकीर्रो अय्नन मता तराना  नराका  क़द नशार्ता लेवा-अन नसरे तोरा अ-तराना नहुफ़'फ़ो बेका  अन्ता त-उम्मुल माला-अवा 

क़द मला-तल अर्ज़ा अज़लान  'ज़क'ता '-दा-एका हवानन  'क़ाबन  अबर्तल 'ताता  जहद'अतल हक्क़े  कता'-ता दाबेरल मोताकब'बेरीना वज-

तसस्ता उसू'लज़ ज़ाले'मीना  नहनो नक़ूलो अल-हम्दो लिल्लाहे रब्बिल आला'मीना अल्लाहुम्मा अन्ता कश'शाफुल कुरबी वल बलवा  एलैका असता'-दी 

फ़-ई'न्दकल 'दवा  अन्ता रब्बुल आख़े'रते वद दुन्या फ़-अग़'हित या ग्या'सल मुस्तग'हीसीना ओबै'डकल मुब्तला  अरेही सय्ये'दहु या शादीदल क़ोवा वअज़िल 

'नहो बेहिल असा वल जवा  बर्रिद ग़ली'लहू या मन अलल अर्शीस-तवा  मन एलैहिर रुज-अ' वल मुन्तहा अल्लाहुम्मा  नहनो 'बीदोकत ता-एक़ूना एला 

वालियेकल मोज़क'केरे बेका  बे-नबियेका खलक'तहु लना इस्मतन  मला'ज़ा  अक़ा'मताहू लना क़ेवा'मन  म-आज़ं  जा-अ'ल्ताहू लील मोमिनीना मिन्ना 

इमामन फ़-बल्लिग़'हो मिन्ना तही'यतन  सलामन  ज़िदना बे ज़ालेका या रब्बे इक्रामन वज-अल मुस्ताक़र'रहू लना मुस्ताक़र'रन  मोक़ामन  अत्मिम नेया'

मतका बेताक़'दीमेका इयाहो अमा'मना हत्ता तूरे'दाना जेना'नका  मोरा'फ़क़'अतश शोहदाए मिन खोंलासा'एका अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन  आले मोहम्मदीन 

 सल्ले अला मोहम्मदीन जद'देहि  रसूलेकस सय्येदिल अकबरे  अला अबीहिस सय्येदिल असगरे  जद'दतेहिस सिददी'क़तील कुबरा फ़ातेमता बिन्ते मोहम्मदीन 

 अला मनिस तफ़यता मिन आबा-एहिल बरराते  अलैहे अफ्ज़ला  अक्मला  अतम्मा  अदवामा  अक्सरा  अव्फरा मा सल'लय्ताअला अहदीन मिन अस्फ़े'या-

एका  ख़ेयारते'का मिन ख़ल'क़ेका  सल्ले अलय्हे सलातन ला गायता ले-अदादेहा  ला नेहा'यता ले-मदादेहा  ला नफ़ा'अदा ले-अमादेहा अल्लाहुम्मा  अकिम 

बेहिल हक्क़ा  अधिज़ बेहिल बातेला  अदिल बेही औलिया-अका  अज़्लिल बेही '-दा-अका  सेलिल'लाहुम्मा बैनना  बैनाहु वुस'लतन तो-अद'दी एला 

मो'राफ़ा'कते  सला'फ़ेही वज'अल्ना मिम्मन या-खोज़ो बे-हुज'ज़ाते'हिम  यम्कोसो फ़ी ज़िल्ले'हिम  अ-इन्ना अला ता-देयाते होक़ू'क़ेही एलय्हे वल इज्तेहादे फ़ी ता-

अतेहि वज'तेनाबे मा'-सेयातेही वम-नून अलय्ना बे-रेज़ाहो  हब  लना रा-फ़ताहू  रहमताहू  दो-आ-अहू  खै'रहू मा ननालो बेही स-अतन मिन रहमतेका  

फौजां इनदका वज-अल सलातना बेही मक़'बूलातन  ज़ोनु'बना बेहि मग्फ़ू'रतन वज-अल अर्ज़ा'क़ना बेहि  मब्सूतातन  होमू'मना  बेहि मक'फियतन   हवाऐ'

जना बेहि मक़'ज़ियातनव अक़'बिल इलेना बे-वज'हेकल करीमे वक़'बल तक़र'रोबना एलायका वन-ज़ुर इलेना नज़'रतन रहीमतन नस्तक'मेलो  बेहल करा'माता 

इनदका सुम्मा ला तसरीफ'-हा अन्ना बे-जूदेका व़स-क़ेना मिन हौज़े जद'देही सल'लाल्लाहो अलय्हे  आलेही बेकासेही  बेयादेही रयान रावियन हनी-अन सा-ए'गन 

ला ज़मा-अ बा'दहु या अर्हमर राहेमीना

अल्लाह हुम्मा सल्ले अला मुहम्मद व आले मुहम्मद

 

इस बहुमूल्य दुआ के संबंध में दुआए नुदबा का उल्लेख किया गया है जो की ज़ादुल-माद[1] में छठे इमाम (अ:स) द्वारा रेकार्ड किया गया है! इस बात पर ज़ोर दिया गया है की इस दुआ क़ो जुमा, ईद-उल-फितर, ईद-उल-कुर्बान और ईदे ग़दीर पर ज़रूर पढ़ना चाहिए!

 

मज़ार बेहार[2] में यह कहा गया है की, सय्यद इब्ने तावूस फ़रमाते हैं की : मुहम्मद बिन अली बिन अबी कुर्रा कहते हैं : हमने दुआए नुदबा, मुहम्मद बिन हुसैन बिन सुफियान बा'ज़ुफ्री की किताब से लिया है और यह याद रखना चाहिए की यह दुआ वक़्त के इमाम (अ:स) के लिये है और इसको चार ईदों पर ज़रूर पढ़ना चाहिए!

 

और, महान विद्वान, मुहददिस नूरी ने इस दुआ क़ो किताब मिस्बाह-उज़ ज़ायेर[3]  के ताहि'यातुज़ ज़ायेर में उल्लेख किया है जो सय्यद इब्ने तावूस और मज़ार में मुहम्मद बिन मश-हदी जो लिया गया है मुहम्मद बिन अली बिन अबी क़ुर्र'अ से सो बा'ज़ुफारी पर अधिकृत है! इसी प्रकार नूरी (र:अ) ने भी मज़ार (पुरानी) में उल्लेख किया है और यह भी कहा है की इसको जुमा की शा में भी पढ़ना चाहिए


 

[1]        ज़ाद अल-माद पेज 491 -504

[2]        बेहारुल अनवार, वौल 102  पेज 104 -110

[3]        मिस्बाद अज़-ज़ायेर, पेज 230 -234

 

कॉपी करने लायक़ अरबी टेक्स्ट 

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ. الْحَمْدُ لِلَّهِ (الَّذِيْ لاَ اِلٰهَ اِلاَّ هُوَ وَ لَهُ الْحَمْدُ) رَبِّ الْعالَمِينَ وَ صَلَّى اللهُ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ نَبِيِّهِ وَ آلِهِ وَ سَلَّمَ تَسْلِيماً اَللّٰهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ عَلَى مَا جَرَى بِهٖ قَضَاؤُكَ فِي أَوْلِيَائِكَ الَّذِينَ اسْتَخْلَصْتَهُمْ لِنَفْسِكَ وَ دِينِكَ إِذِ اخْتَرْتَ لَهُمْ جَزِيلَ مَا عِنْدَكَ مِنَ النَّعِيمِ الْمُقِيمِ الَّذِي لَا زَوَالَ لَهٗ وَ لَا اضْمِحْلَالَ بَعْدَ أَنْ شَرَطْتَ عَلَيْهِمُ الزُّهْدَ فِي دَرَجَاتِ (زَخَارِفِ) هٰذِهِ الدُّنْيَا الدَّنِيَّةِ وَ زُخْرُفِهَا وَ زِبْرِجِهَا فَشَرَطُوا لَكَ ذٰلِكَ وَ عَلِمْتَ مِنْهُمُ الْوَفَاءَ بِهٖ فَقَبِلْتَهُمْ وَ قَرَّبْتَهُمْ وَ قَدَّمْتَ لَهُمُ الذِّكْرَ الْعَلِيَّ وَ الثَّنَاءَ الْجَلِيَّ وَ أَهْبَطْتَ عَلَيْهِمْ مَلَائِكَتَكَ وَ اَكْرَمْتَهُمْ كَرَّمْتَهُمْ بِوَحْيِكَ وَ رَفَدْتَهُمْ‏ بِعِلْمِكَ وَ جَعَلْتَهُمُ الذَّرِيْعَةَ (الذَّرَائِعَ) إِلَيْكَ وَ الْوَسِيلَةَ إِلَى رِضْوَانِكَ فَبَعْضٌ أَسْكَنْتَهُ جَنَّتَكَ إِلَى أَنْ أَخْرَجْتَهُ مِنْهَا وَ بَعْضُهُمْ حَمَلْتَهُ فِي فُلْكِكَ وَ نَجَّيْتَهُ وَ مَنْ آمَنَ مَعَهُ مِنَ الْهَلَكَةِ بِرَحْمَتِكَ وَ بَعْضٌ اتَّخَذْتَهُ لِنَفْسِكَ خَلِيلًا وَ سَأَلَكَ لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِيْنَ فَأَجَبْتَهُ وَ جَعَلْتَ ذٰلِكَ عَلِيّاً وَ بَعْضٌ كَلَّمْتَهُ مِنْ شَجَرَةٍ تَكْلِيماً وَ جَعَلْتَ لَهٗ مِنْ أَخِيهِ رِدْءاً وَ وَزِيراً وَ بَعْضٌ أَوْلَدْتَهُ مِنْ غَيْرِ أَبٍ وَ آتَيْتَهُ الْبَيِّنَاتِ وَ أَيَّدْتَهُ بِرُوحِ الْقُدُسِ وَ كُلًّا (كُلٌّ) شَرَعْتَ لَهٗ شَرِيعَةً وَ نَهَجْتَ لَهٗ مِنْهَاجاً وَ تَخَيَّرْتَ لَهٗ أَوْصِيَاءَ مُسْتَحْفِظاً بَعْدَ مُسْتَحْفِظٍ مِنْ مُدَّةٍ إِلَى مُدَّةٍ إِقَامَةً لِدِينِكَ وَ حُجَّةً عَلَى عِبَادِكَ يَزُولَ الْحَقُّ عَنْ مَقَرِّهِ وَ يَغْلِبَ الْبَاطِلُ عَلَى أَهْلِهِ وَ يَقُولَ أَحَدٌ لَوْ لا أَرْسَلْتَ إِلَيْنا رَسُولًا مُنْذِراً وَ أَقَمْتَ لَنَا عَلَماً هَادِياً فَنَتَّبِعَ آياتِكَ مِنْ قَبْلِ أَنْ نَذِلَّ وَ نَخْزى‏ إِلَى أَنِ انْتَهَيْتَ بِالْأَمْرِ إِلَى حَبِيبِكَ وَ نَجِيبِكَ مُحَمَّدٍ فَكَانَ كَمَا انْتَجَبْتَهُ سَيِّدَ مَنْ خَلَقْتَهُ وَ صَفْوَةَ مَنِ اصْطَفَيْتَهُ وَ أَفْضَلَ مَنِ اجْتَبَيْتَهُ وَ أَكْرَمَ مَنِ اعْتَمَدْتَهُ قَدَّمْتَهُ عَلَى أَنْبِيَائِكَ وَ بَعَثْتَهُ إِلَى الثَّقَلَيْنِ مِنْ عِبَادِكَ وَ أَوْطَأْتَهُ مَشَارِقَكَ وَ مَغَارِبَكَ وَ سَخَّرْتَ لَهُ الْبُرَاقَ وَ عَرَجْتَ بِهٖ إِلَى سَمَائِكَ وَ أَوْدَعْتَهُ (عِلْمَ مَا كَانَ وَ) مَا يَكُونُ إِلَى انْقِضَاءِ خَلْقِكَ ثُمَّ نَصَرْتَهُ بِالرُّعْبِ وَ حَفَفْتَهُ بِجَبْرَئِيلَ وَ مِيكَـائِيلَ وَ الْمُسَوِّمِينَ مِنْ مَلَائِكَتِكَ وَ وَعَدْتَهُ أَنْ تُظْهِرَ دِينَهُ عَلَى الدِّينِ كُلِّهِ وَ لَوْ كَرِهَ الْمُشْرِكُونَ وَ ذٰلِكَ بَعْدَ أَنْ بَوَّأْتَهُ مُبَوَّأَ صِدْقٍ مِنْ أَهْلِهِ وَ جَعَلْتَ لَهٗ وَ لَهُمْ أَوَّلَ بَيْتٍ وُضِعَ لِلنَّاسِ لَلَّذِي بِبَكَّةَ مُبارَكاً وَ هُدىً لِلْعالَمِينَ فِيهِ آياتٌ بَيِّناتٌ مَقامُ إِبْراهِيمَ وَ مَنْ دَخَلَهٗ كانَ آمِناً وَ قُلْتَ إِنَّما يُرِيدُ اللهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَ يُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيراً (ثُمَّ) جَعَلْتَ أَجْرَ مُحَمَّدٍ مَوَدَّتَهُمْ فِي كِتَابِكَ فَقُلْتَ قُلْ لا أَسْئَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْراً إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبى‏ وَ قُلْتَ ما سَأَلْتُكُمْ مِنْ أَجْرٍ فَهُوَ لَكُمْ وَ قُلْتَ ما أَسْئَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ إِلَّا مَنْ شاءَ أَنْ يَتَّخِذَ إِلى‏ رَبِّهٖ سَبِيلًا فَكَانُوا هُمُ السَّبِيلَ إِلَيْكَ وَ الْمَسْلَكَ إِلَى رِضْوَانِكَ فَلَمَّا انْقَضَتْ أَيَّامُهٗ أَقَامَ وَلِيَّهُ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ صَلَوَاتُ اللَّهِ عَلَيْهِمَا وَ عَلَى آلِهِمَا هَادِياً إِذْ كَانَ هُوَ الْمُنْذِرَ وَ لِكُلِّ قَوْمٍ هادٍ فَقَالَ وَ الْمَلَأُ أَمَامَهُ مَنْ كُنْتُ مَوْلَاهُ فَعَلِيٌّ مَوْلَاهُ اَللّٰهُمَّ وَالِ مَنْ وَالَاهُ وَ عَادِ مَنْ عَادَاهُ وَ انْصُرْ مَنْ نَصَرَهُ وَ اخْذُلْ مَنْ خَذَلَهٗ وَ قَالَ مَنْ كُنْتُ نَبِيَّهُ فَعَلِيٌّ أَمِيرُهٗ وَ قَالَ أَنَا وَ عَلِيٌّ مِنْ اَشْجَارٍ (شَجَرَةٍ) وَاحِدَةٍ وَ سَائِرُ النَّاسِ مِنْ شَجَرٍ شَتَّى وَ أَحَلَّهُ مَحَلَّ هَارُونَ مِنْ مُوسَى فَقَالَ أَنْتَ مِنِّي بِمَنْزِلَةِ هَارُونَ مِنْ مُوسَى إِلَّا أَنَّهُ لَا نَبِيَّ بَعْدِي وَ زَوَّجَهُ ابْنَتَهُ سَيِّدَةَ نِسَاءِ الْعَالَمِينَ وَ أَحَلَّ لَهٗ مِنْ مَسْجِدِهِ مَا حَلَّ لَهٗ وَ سَدَّ الْأَبْوَابَ إِلَّا بَابَهُ ثُمَّ أَوْدَعَهُ عِلْمَهُ وَ حِكْمَتَهُ فَقَالَ أَنَا مَدِينَةُ الْعِلْمِ وَ عَلِيٌّ بَابُهَا فَمَنْ أَرَادَ (الْمَدِيْنَةَ وَ) الْحِكْمَةَ فَلْيَأْتِهَا مِنْ بَابِهَا ثُمَّ قَالَ أَنْتَ أَخِي وَ وَصِيِّي وَ وَارِثِي لَحْمُكَ مِنْ لَحْمِي وَ دَمُكَ مِنْ دَمِي وَ سِلْمُكَ سِلْمِي وَ حَرْبُكَ حَرْبِي وَ الْإِيمَانُ مُخَالِطٌ لَحْمَكَ وَ دَمَكَ كَمَا خَالَطَ لَحْمِي وَ دَمِي وَ أَنْتَ غَداً عَلَى الْحَوْضِ (و َاَنْتَ غَدًا عَلَي الْحَوْضِ مَعِيْ وَ اَنْتَ) خَلِيفَتِي وَ أَنْتَ تَقْضِي دَيْنِي وَ تُنْجِزُ عِدَاتِي وَ شِيعَتُكَ عَلَى مَنَابِرَ مِنْ نُورٍ مُبْيَضَّةً وُجُوهُهُمْ حَوْلِي فِي الْجَنَّةِ وَ هُمْ جِيرَانِي وَ لَوْ لَا أَنْتَ يَا عَلِيُّ لَمْ يُعْرَفِ الْمُؤْمِنُونَ بَعْدِي وَ كَانَ بَعْدَهُ هُدًى مِنَ الضَّلَالِ (الضَّلاَلَةِ) وَ نُوراً مِنَ الْعَمَى وَ حَبْلَ اللَّهِ الْمَتِينَ وَ صِرَاطَهُ الْمُسْتَقِيمَ لَا يُسْبَقُ بِقَرَابَةٍ فِي رَحِمٍ وَ لَا بِسَابِقَةٍ فِي دِينٍ وَ لَا يُلْحَقُ فِي مَنْقَبَةٍ يَحْذُو حَذْوَ الرَّسُولِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِمَا وَ آلِهِمَا وَ يُقَاتِلُ عَلَى التَّأْوِيلِ وَ لَا تَأْخُذُهٗ فِي اللَّهِ لَوْمَةُ لَائِمٍ قَدْ وَتَرَ فِيهِ صَنَادِيدَ الْعَرَبِ وَ قَتَلَ أَبْطَالَهُمْ وَ نَاوَشَ ذُؤْبَانَهُمْ وَاَوْدَعَ (فَأَوْدَعَ) قُلُوبَهُمْ أَحْقَاداً بَدْرِيَّةً وَ خَيْبَرِيَّةً وَ حُنَيْنِيَّةً وَ غَيْرَهُنَّ فَأَضَبَّتْ عَلَى عَدَاوَتِهِ وَ أَكَبَّتْ عَلَى مُنَابَذَتِهِ حَتَّى قَتَلَ النَّاكِثِينَ وَ الْقَاسِطِينَ وَ الْمَارِقِينَ وَ لَمَّا قَضَى نَحْبَهُ وَ قَتَلَهٗ أَشْقَى (الْاَشْقِيَاءِ مِنَ الْاَوَّلِيْنَ وَ) الْآخِرِينَ يَتْبَعُ أَشْقَى الْأَوَّلِينَ لَمْ يُمْتَثَلْ أَمْرُ رَسُولِ اللَّهِ (الرَّسُوْلِ) فِي الْهَادِينَ بَعْدَ الْهَادِينَ وَ الْأُمَّةُ مُصِرَّةٌ عَلَى مَقْتِهِ مُجْتَمِعَةٌ عَلَى قَطِيعَةِ رَحِمِهِ وَ إِقْصَاءِ وُلْدِهِ إِلَّا الْقَلِيلَ مِمَّنْ وَفَى لِرِعَايَةِ الْحَقِّ فِيهِمْ فَقُتِلَ مَنْ قُتِلَ وَ سُبِيَ مَنْ سُبِيَ وَ أُقْصِيَ مَنْ أُقْصِيَ وَ جَرَى الْقَضَاءُ لَهُمْ بِمَا يُرْجَى لَهٗ حُسْنُ الْمَثُوبَةِ وَ كَانَتِ الْأَرْضُ لِلَّهِ يُورِثُها مَنْ يَشاءُ مِنْ عِبادِهِ وَ الْعاقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَ‏ وَ سُبْحانَ الله (رَبِّنا) إِنْ كانَ وَعْدُ رَبِّنا لَمَفْعُولًا وَ لَنْ يُخْلِفَ اللهُ وَعْدَهُ وَ هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ فَعَلَى الْأَطَائِبِ مِنْ أَهْلِ بَيْتِ مُحَمَّدٍ وَ عَلِيٍّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِمَا وَ آلِهِمَا فَلْيَبْكِ الْبَاكُونَ وَ إِيَّاهُمْ فَلْيَنْدُبِ النَّادِبُونَ وَ لِمِثْلِهِمْ فَلْتُذْرَفِهٖ الدُّمُوعُ وَ لْيَصْرُخِ الصَّارِخُونَ وَ يَضِجَّ الضَّاجُّوْنَ وَ يَعِجَّ الْعَاجُّونَ (الْجَازِعُوْنَ) أَيْنَ الْحَسَنُ أَيْنَ الْحُسَيْنُ أَيْنَ أَبْنَاءُ الْحُسَيْنِ صَالِحٌ بَعْدَ صَالِحٍ وَ صَادِقٌ بَعْدَ صَادِقٍ أَيْنَ السَّبِيلُ بَعْدَ السَّبِيلِ أَيْنَ الْخِيَرَةُ بَعْدَ الْخِيَرَةِ أَيْنَ الشُّمُوسُ الطَّالِعَةُ أَيْنَ الْأَقْمَارُ الْمُنِيرَةُ أَيْنَ الْأَنْجُمُ الزَّاهِرَةُ أَيْنَ أَعْلَامُ الدِّينِ وَ قَوَاعِدُ الْعِلْمِ أَيْنَ بَقِيَّةُ اللَّهِ الَّتِي لَا تَخْلُو مِنَ الْعِتْرَةِ الْهَادِيَةِ أَيْنَ الْمُعَدُّ لِقَطْعِ دَابِرِ الظَّلَمَةِ أَيْنَ الْمُنْتَظَرُ لِإِقَامَةِ الْأَمْتِ وَ الْعِوَجِ أَيْنَ الْمُرْتَجَى لِإِزَالَةِ الْجَوْرِ وَ الْعُدْوَانِ أَيْنَ الْمُدَّخَرُ لِتَجْدِيدِ الْفَرَائِضِ وَ السُّنَنِ أَيْنَ الْمُتَخَيَّرُ لِإِعَادَةِ الْمِلَّةِ وَ الشَّرِيعَةِ أَيْنَ الْمُؤَمَّلُ لِإِحْيَاءِ الْكِتَابِ وَ حُدُودِهِ أَيْنَ مُحْيِي مَعَالِمِ الدِّينِ وَ أَهْلِهِ أَيْنَ قَاصِمُ شَوْكَةِ الْمُعْتَدِينَ أَيْنَ هَادِمُ أَبْنِيَةِ الشِّرْكِ وَ النِّفَاقِ أَيْنَ مُبِيدُ أَهْلِ الْفُسُوقِ وَ الْعِصْيَانِ وَ الطُّغْيَانِ أَيْنَ حَاصِدُ فُرُوعِ الْغَيِّ وَ الشِّفَاقِ أَيْنَ طَامِسُ آثَارِ الزَّيْغِ وَ الْأَهْوَاءِ أَيْنَ قَاطِعُ حَبَائِلِ الْكَذِبِ وَ الِافْتِرَاءِ أَيْنَ مُبِيدُ (اَهلِ) الْعُتَاةِ وَ الْمَرَدَةِ أَيْنَ مُسْتَأْصِلُ أَهْلِ الْعِنَادِ وَ التَّضْلِيْلِ وَ الْإِلْحَادِ أَيْنَ مُعِزُّ الْأَوْلِيَاءِ وَ مُذِلُّ الْأَعْدَاءِ أَيْنَ جَامِعُ الْكَلِمَةِ عَلَى التَّقْوَى أَيْنَ بَابُ اللَّهِ الَّذِي مِنْهُ يُؤْتَى أَيْنَ وَجْهُ اللَّهِ إِلَيْهِ يَتَوَجَّهُ الْأَوْلِيَاءُ أَيْنَ السَّبَبُ الْمُتَّصِلُ بَيْنَ الْأَرْضِ وَ السَّمَاءِ أَيْنَ صَاحِبُ يَوْمِ الْفَتْحِ وَ نَاشِرُ رَايَاتِ (رَايَةِ) الْهُدَى أَيْنَ مُؤَلِّفُ شَمْلِ الصَّلَاحِ وَ الرِّضَا أَيْنَ الطَّالِبُ بِذُحُولِ الْأَنْبِيَاءِ وَ  اَبْنَاءِ أَيْنَ الْطَّالِبُ بِدَمِ الْمَقْتُوْلِ بِكَرْبَلَا أَيْنَ الْمَنْصُورُ عَلَى مَنِ اعْتَدَى عَلَيْهِ وَ افْتَرَى أَيْنَ الْمُضْطَرُّ الَّذِي يُجَابُ إِذَا دَعَا أَيْنَ صَدْرُ الْخَلَائِقِ ذُو الْبِرِّ وَ التَّقْوَى أَيْنَ ابْنُ النَّبِيِّ الْمُصْطَفَى وَ ابْنُ عَلِيٍّ الْمُرْتَضَى وَ ابْنُ خَدِيجَةَ الْغَرَّاءِ وَ ابْنُ فَاطِمَةَ الْكُبْرَى بِأَبِي أَنْتَ وَ أُمِّي وَ نَفْسِي لَكَ الْوِقَاءُ وَ الْحِمَى يَا بْنَ السَّادَةِ الْمُكَرَّمِينَ (المُقَرَّبِيْنَ) يَا بْنَ النُّجَبَاءِ الْأَكْرَمِينَ يَا بْنَ الْهُدَاةِ الْمَهْدِيِّينَ يَا بْنَ الْغَطَارِفَةِ الْأَنْجَبِينَ يَا بْنَ الْأَطَائِبِ الْمُطَهِّرِيْنَ يَا بْنَ الْخَضَارِمَةِ الْمُنْتَجَبِينَ يَا بْنَ الْقَمَاقِمَةِ الْأَكْرَمِيْنَ يَا بْنَ الْبُدُورِ الْمُنِيرَةِ يَا بْنَ السُّرُجِ الْمُضِيئَةِ يَا بْنَ الشُّهُبِ الثَّاقِبَةِ يَا بْنَ الْأَنْجُمِ الزَّاهِرَةِ يَا بْنَ السُّبُلِ الْوَاضِحَةِ يَا بْنَ الْأَعْلَامِ اللَّائِحَةِ يَا بْنَ الْعُلُومِ الْكَامِلَةِ يَا بْنَ السُّنَنِ الْمَشْهُورَةِ يَا بْنَ الْمَعَالِمِ الْمَأْثُورَةِ يَا بْنَ الْمُعْجِزَاتِ الْمَوْجُودَةِ (يَا بْنَ الدَّلَائِلِ الْمَشْهُودَةِ) يَا بْنَ الصِّرَاطِ الْمُسْتَقِيمِ (يَا بْنَ النَّبَإِ الْعَظِيمِ يَا بْنَ مَنْ هُوَ فِي أُمِّ الْكِتَابِ لَدَى اللَّهِ عَلِيٌّ حَكِيمٌ) يَا بْنَ الْآيَاتِ وَ الْبَيِّنَاتِ يَا بْنَ الدَّلَائِلِ الظَّاهِرَاتِ يَا بْنَ الْبَرَاهِينِ (الْوَاضِحَاتِ) الْبَاهِرَاتِ يَا بْنَ الْحُجَجِ الْبَالِغَاتِ (يَا بْنَ النِّعَمِ السَّابِغَاتِ) يَا بْنَ طٰهٰ وَ الْمُحْكَمَاتِ يَا بْنَ يٰسۤ وَ الذَّارِيَاتِ (يَا بْنَ الطُّورِ وَ الْعَادِيَاتِ) يَا بْنَ مَنْ دَنٰي فَتَدَلَّى فَكانَ قابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنى‏ دُنُوّاً وَ اقْتِرَاباً مِنَ الْعَلِيِّ الْأَعْلَى لَيْتَ شِعْرِي أَيْنَ اسْتَقَرَّتْ بِكَ النَّوَى بَلْ أَيُّ أَرْضٍ تُقِلُّكَ اَوِ الثَّرٰي أَ بِرَضْوَى أَمْ غَيْرِهَا أَمْ ذِي طُوًى عَزِيزٌ عَلَيَّ أَنْ أَرَى الْخَلْقَ وَ (اَنْتَ) لَا تُرَى وَ لَا أَسْمَعَ لَكَ حَسِيساً وَ لَا نَجْوَى عَزِيزٌ عَلَيَّ أَنْ تُحِيطَ بِكَ دُونِيَ الْبَلْوَى (عَزِيْرٌ عَلَيَّ اَنْ لاَ يُحِيْطَ بِكَ دُوْنَكَ الْبَلْوٰي) وَ لَا يَنَالَكَ مِنِّي ضَجِيجٌ وَ لَا شَكْوَى بِنَفْسِي أَنْتَ مِنْ مُغَيَّبٍ لَمْ يَخْلُ مِنَّا بِنَفْسِي أَنْتَ مِنْ نَازِحٍ مَا نَزَحَ عَنَّا بِنَفْسِي أَنْتَ أُمْنِيَّةُ شَائِقٍ يَتَمَنَّى مِنْ مُؤْمِنٍ وَ مُؤْمِنَةٍ ذَكَرَا فَحَنَّا بِنَفْسِي أَنْتَ مِنْ عَقِيدِ عِزٍّ لَا يُسَامَى بِنَفْسِي أَنْتَ مِنْ أَثِيلِ مَجْدٍ لَا يُجَارٰى بِنَفْسِي أَنْتَ مِنْ تِلَادِ (بِلاَدِ) نِعَمٍ لَا تُضَاهَى بِنَفْسِي أَنْتَ مِنْ نَصِيفِ شَرَفٍ لَا يُسَاوَى إِلَى مَتَى اَجَارُ (أَحَارُ) فِيكَ يَا مَوْلَايَ وَ إِلَى مَتَى وَ أَيَّ خِطَابٍ أَصِفُ فِيكَ وَ أَيَّ نَجْوَى عَزِيزٌ عَلَيَّ أَنْ أُجَابَ دُونَكَ وَ أُنَاغَى عَزِيزٌ عَلَيَّ أَنْ أَبْكِيَكَ وَ يَخْذُلَكَ الْوَرَى عَزِيزٌ عَلَيَّ أَنْ يَجْرِيَ عَلَيْكَ دُونَهُمْ مَا جَرَى هَلْ مِنْ مُعِينٍ فَأُطِيلَ مَعَهُ الْعَوِيلَ وَ الْبُكَاءَ هَلْ مِنْ جَزُوعٍ فَأُسَاعِدَ جَزَعَهُ إِذَا خَلَا هَلْ قُذِيَتْ عَيْنٌ فَسَاعَدَتْهَا عَيْنِي (فَتُسْعِدُهَا عَيْنِي) عَلَى الْقَذَى هَلْ إِلَيْكَ يَا بْنَ أَحْمَدَ سَبِيلٌ فَتُلْقَى (فَيُلْقٰي) هَلْ يَتَّصِلُ يَوْمُنَا مِنْكَ بِغَدِهِ فَنَحْظَى مَتَى نَرِدُ مَنَاهِلَكَ الرَّوِيَّةَ فَنَرْوَى مَتَى نَنْتَفِعُ‏ مِنْ عَذْبِ مَائِكَ فَقَدْ طَالَ الصَّدَى مَتَى نُغَادِيكَ وَ نُرَاوِحُكَ فَنُقِرَّ (فَنَفِرَّ) مِنْهَا عَيْناً (عُيُوْنُنَا) مَتٰى تَرَانَا وَ نَرَاكَ وَ قَدْ نَشَرْتَ لِوَاءَ النَّصْرِ تُرَى أَ تَرَانَا نَحُفُّ بِكَ وَ أَنْتَ تَؤُمُّ الْمَلَأَ وَ قَدْ مَلَأْتَ الْأَرْضَ عَدْلًا وَ أَذَقْتَ أَعْدَاءَكَ هَوَاناً وَ عِقَاباً وَ أَبَرْتَ الْعُتَاةَ وَ جَحَدَةَ الْحَقِّ وَ قَطَعْتَ دَابِرَ الْمُتَكَبِّرِينَ وَ اجْتَثَثْتَ أُصُولَ الظَّالِمِينَ وَ نَحْنُ نَقُولُ الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ اَللّٰهُمَّ أَنْتَ كَشَّافُ الْكُرَبِ وَ الْبَلْوَى وَ إِلَيْكَ أَسْتَعْدِي فَعِنْدَكَ الْعَدْوَى وَ أَنْتَ رَبُّ الْآخِرَةِ الدُّنْيَا (وَ الْأُولَى) فَأَغِثْ يَا غِيَاثَ الْمُسْتَغِيثِينَ عُبَيْدَكَ الْمُبْتَلَى وَ أَذِلْ عَنْهُ (بِهِ) الْأَسَى وَ الْجَوَى وَ بَرِّدْ غَلِيلَهٗ يَا مَنْ عَلَى الْعَرْشِ اسْتَوى‏ وَ مَنْ إِلَيْهِ الرُّجْعَى وَ الْمُنْتَهَى اَللّٰهُمَّ وَ نَحْنُ عَبِيدُكَ التَّائِقُونَ إِلَى وَلِيِّكَ الْمُذَكِّرِ بِكَ وَ بِنَبِيِّكَ (الَّذِيْ) خَلَقْتَهٗ لَنَا عِصْمَةً وَ مَلَاذاً وَ أَقَمْتَهُ لَنَا قِوَاماً وَ مَعَاذاً وَ جَعَلْتَهُ لِلْمُؤْمِنِينَ مِنَّا إِمَاماً فَبَلِّغْهُ مِنَّا (عَنَّا) تَحِيَّةً وَ سَلَاماً وَ زِدْهُ بِذٰلِكَ يَا رَبِّ إِكْرَاماً وَ اجْعَلْ مُسْتَقَرَّهُ (لَنَا) مُسْتَقَرّاً وَ مُقَاماً وَ أَتْمِمْ نِعْمَتَكَ بِتَقْدِيْمِكَ إِيَّاهُ أَمَامَنَا حَتَّى تُورِدَنَا جِنَانَكَ وَ مُرَافَقَةَ الشُّهَدَاءِ مِنْ خُلَصَائِكَ اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ وَ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ جَدِّهِ وَ رَسُولِكَ السَّيِّدِ الْأَكْبَرِ وَ عَلَى أَبِيهِ السَّيِّدِ الْأَصْغَرِ وَ جَدَّتِهِ الصِّدِّيقَةِ الْكُبْرَى فَاطِمَةَ بِنْتِ مُحَمَّدٍ (اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰي حُجَّتِكَ وَ وَلِيَّ  اَمْرِكَ وَ صَلِّ عَلٰي جَدِّهٖ مُحَمَّدٍ رَسُوْلِكَ السَّيِّدِ الْاَكْبَرِ وَ صَلَّ عَلٰي اَبِيْهِ السَّيِّدِ الْقَسْوَرِ وَ  حَامِلِ اللِّوَاءِ فِيْ الْمَحْشَرِ وَ سَاقِيْ اَوْلِيَاءِ مِنْ نَهْرِ الْكَوْثَرِ وَ الْاَمِيْرِ عَلٰي  سَائِرِ الْبَشَرِ الَّذِيْ مَنْ آمَنَ بِهٖ فَقَدْ ظَفَرَ وَ مَنْ لَمْ يُؤْمِنْ بِهٖ فَقَدْ خَطَرَ وَ كَفَرَ صَلَّي اللهُ عَلَيْهِ وَ  عَلٰي اَخِيْهِ نَجْعَلَهِمَا الْمَيَامِيْنَ الْغُرَرَ وَ مَا طَلَعَتْ شَمْشٌ وَ مَا اَضَاءَ قَمَرٌ وَ عَلٰي  جَدَّتِهِ الصِّدِّيْقَةِ الْكُبْرٰي فَاطِمَةَ الزَّهْرَاءِ بِنْتِ مُحَمَّدٍ الْمُصْطَفٰي ) وَ عَلَى مَنِ اصْطَفَيْتَ مِنْ آبَائِهِ الْبَرَرَةِ وَ عَلَيْهِ أَفْضَلَ وَ أَكْمَلَ وَ أَتَمَّ وَ أَدْوَمَ وَ اَكْثَرَ (وَ أَكْبَرَ) وَ أَوْفَرَ مَا صَلَّيْتَ عَلَى أَحَدٍ مِنْ أَصْفِيَائِكَ وَ خِيَرَتِكَ مِنْ خَلْقِكَ وَ صَلِّ عَلَيْهِ صَلَاةً لَا غَايَةَ لِعَدَدِهَا وَ لَا نِهَايَةَ لِمَدَدِهَا وَ لَا نَفَادَ لِأَمَدِهَا اَللّٰهُمَّ وَ أَقِمْ بِهِ الْحَقَّ وَ أَدْحِضْ بِهِ الْبَاطِلَ وَ أَدِلْ بِهٖ أَوْلِيَاءَكَ وَ أَذْلِلْ بِهٖ أَعْدَاءَكَ وَ صِلِ اَللّٰهُمَّ بَيْنَنَا وَ بَيْنَهُ وُصْلَةً تُؤَدِّي إِلَى مُرَافَقَةِ سَلَفِهِ وَ اجْعَلْنَا مِمَّنْ يَأْخُذُ بِحُجْزَتِهِمْ وَ يَمْكُثُ فِي ظِلِّهِمْ وَ أَعِنَّا عَلَى تَأْدِيَةِ حُقُوقِهِ إِلَيْهِ وَ الِاجْتِهَادِ فِي طَاعَتِهِ وَ الِاجْتِنَابِ عَنْ مَعْصِيَتِهِ وَ امْنُنْ عَلَيْنَا بِرِضَاهُ وَ هَبْ لَنَا رَأْفَتَهُ وَ رَحْمَتَهُ وَ دُعَائَهٗ وَ خَيْرَهُ مَا نَنَالُ‏ بِهٖ سَعَةً مِنْ رَحْمَتِكَ وَ فَوْزاً عِنْدَكَ وَ اجْعَلْ صَلَاتَنَا بِهٖ مَقْبُولَةً وَ ذُنُوبَنَا بِهٖ مَغْفُورَةً وَ دُعَاءَنَا بِهٖ مُسْتَجَاباً وَ اجْعَلْ أَرْزَاقَنَا بِهٖ مَبْسُوطَةً وَ هُمُومَنَا بِهٖ مَكْفِيَّةً وَ حَوَائِجَنَا بِهٖ مَقْضِيَّةً وَ أَقْبِلْ إِلَيْنَا بِوَجْهِكَ الْكَرِيمِ وَ اقْبَلْ تَقَرُّبَنَا إِلَيْكَ وَ انْظُرْ إِلَيْنَا نَظْرَةً رَحِيمَةً نَسْتَكْمِلُ بِهَا الْكَرَامَةَ عِنْدَكَ ثُمَّ لَا تَصْرِفْهَا عَنَّا بِجُودِكَ وَ اسْقِنَا مِنْ حَوْضِ جَدِّهِ بِكَأْسِهِ وَ بِيَدِهِ رَيّاً رَوِيّاً هَنِيئاً سَائِغاً لَا ظَمَأَ بَعْدَهُ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ.

 

 

            

     

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