क़ुरानी दुआ की किताब

अध्याय 1 -  ईमान क़ो पुखता करने की दुआ.

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दुआ # 1 सुरः फ़ातेहा - आयात # 1

1:1.  सारी तारीफ़ अल्लाह ही के लिये है जो तमाम क़ायनात का रब है।

दुआ # 2 सुरः बक़रा - आयत # 45 और 46.

2:45. और (मुसीबत के वक्त) सब्र और नमाज़ का सहारा पकड़ो और अलबत्ता नमाज़ दूभर तो है मगर उन ख़ाक़सारों पर (नहीं) जो बख़ूबी जानते हैं
2:46.
कि वह अपने परवरदिगार की बारगाह में हाज़िर होंगे और ज़रूर उसकी तरफ लौट जाएँगे.

दुआ # 3 सुरः बक़रा - आयत #  107.

2:107. क्या तुम नहीं जानते कि आसमान की सलतनत बेशुबहा ख़ास खुदा ही के लिए है और खुदा के सिवा तुम्हारा कोई सरपरस्त है मददगार?

दुआ # 4 सुरः बक़रा - आयत #  285.

2:285. हमारे पैग़म्बर (मोहम्मद) जो कुछ उनपर उनके परवरदिगार की तरफ से नाज़िल किया गया है उस पर ईमान लाए और उनके (साथ) मोमिनीन भी (सबके) सब ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान लाए (और कहते हैं कि) हम ख़ुदा के पैग़म्बरों में से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते और कहने लगे हमारे परवरदिगार हमने (तेरा इरशाद) सुना.

दुआ # 5 सुरः बक़रा - आयत #  156.

2:156. कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह (बेसाख्ता) बोल उठे हम तो ख़ुदा ही के हैं और हम उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं.

दुआ # 6 सुरः बक़रा - आयत #  201.

2:201. और बाज़ बन्दे ऐसे हैं कि जो दुआ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले मुझे दुनिया में नेअमत दे और आख़िरत में सवाब दे और दोज़ख़ की बाग से बचा.

दुआ # 7 सुरः आले इमरान - आयत #  53.

3:53. और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं.

दुआ # 8 सुरः आले इमरान - आयत # 8 और 9.

3:8. (और दुआ करते हैं) हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है !

3:9. हमारे परवरदिगार बेशक तू एक एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा (तो हम पर नज़रे इनायत रहे) बेशक ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ़ नहीं करता

दुआ # 8 सुरः अन'आम - आयत # 161 से 165.

6:161.( रसूल) तुम उनसे कहो कि मुझे तो मेरे परवरदिगार ने सीधी राह यानि एक मज़बूत दीन इबराहीम के मज़हब की हिदायत फरमाई है बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से थे!
6.162.
( रसूल) तुम उन लोगों से कह दो कि मेरी नमाज़ मेरी इबादत मेरा जीना मेरा मरना सब ख़ुदा ही के वास्ते है जो सारे जहाँ का परवरदिगार है;
6:163:
और उसका कोई शरीक़ नहीं और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है और मैं सबसे पहले इस्लाम लाने वाला हूँ
6:164: ( रसूल) तुम पूछो तो कि क्या मैं ख़ुदा के सिवा किसी और को परवरदिगार तलाश करुँ हालॉकि वह तमाम चीज़ो का मालिक है और जो शख्स कोई बुरा काम करता है उसका (वबाल) उसी पर है और कोई शख्स किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाने का फिर तुम सबको अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लौट कर जाना है तब तुम लोग जिन बातों में बाहम झगड़ते थे वह सब तुम्हें बता देगा.
6:165: और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने तुम्हें ज़मीन में (अपना) नायब बनाया और तुममें से बाज़ के बाज़ पर दर्जे   बुलन्द किये ताकि वो (नेअमत) तुम्हें दी है उसी पर तुम्हारा इमतेहान करे उसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बहुत जल्द अज़ाब करने वाला है और इसमें भी शक नहीं कि वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है.

दुआ # 10 सुरः रूम - आयत # 26

30:26. और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं.

दुआ # 11 सुरः यासीन (36)- आयत # 22 से 34.

36.22: और मुझे क्या (ख़ब्त) हुआ है कि जिसने मुझे पैदा किया है उसकी इबादत करूँ हालाँकि तुम सब के बस (आख़िर) उसी की तरफ लौटकर जाओगे;
36.23:
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ अगर खुदा मुझे कोई तकलीफ पहुँचाना चाहे तो उनकी सिफारिश ही मेरे कुछ काम आएगी और ये लोग मुझे (इस मुसीबत से) छुड़ा ही सकेंगें?
36.24:
अगर ऐसा करूँ) तो उस वक्त मैं यक़ीनी सरीही गुमराही में हूँ:

36.25 मैं तो तुम्हारे परवरदिगार पर ईमान ला चुका हूँ मेरी बात सुनो और मानो ;मगर उन लोगों ने उसे संगसार कर डाला.

36.26 तब उसे खुदा का हुक्म हुआ कि बेहिश्त में जा (उस वक्त भी उसको क़ौम का ख्याल आया तो कहा)

दुआ # 12 सुरः हा'मीम (42) - आयत # 30 से 32.

42:30. और जो मुसीबत तुम पर पड़ती है वह तुम्हारे अपने ही हाथों की करतूत से और (उस पर भी) वह बहुत कुछ माफ कर देता है.
42:31.
और तुम लोग ज़मीन में (रह कर) तो ख़ुदा को किसी तरह हरा नहीं सकते और ख़ुदा के सिवा तुम्हारा कोई दोस्त है और मददगार.

42:32. और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से समन्दर में (चलने वाले) (बादबानी जहाज़) है जो गोया पहाड़ हैं

दुआ # 13 सुरः हश्र (59) - आयत #  22 से 24

59.22: वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला वही बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
59.23:
वही वह ख़ुदा है जिसके सिवा कोई क़ाबिले इबादत नहीं (हक़ीक़ी) बादशाह, पाक ज़ात (हर ऐब से) बरी अमन देने वाला निगेहबान, ग़ालिब ज़बरदस्त बड़ाई वाला ये लोग जिसको (उसका) शरीक ठहराते हैं उससे पाक है.
59.24:
वही ख़ुदा (तमाम चीज़ों का ख़ालिक) मुजिद सूरतों का बनाने वाला उसी के अच्छे अच्छे नाम हैं जो चीज़े सारे आसमान ज़मीन में हैं सब उसी की तसबीह करती हैं, और वही ग़ालिब हिकमत वाला है.

दुआ # 14 सुरः मु'मिनुन (23)- आयत #  116

23.116: तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है.

दुआ # 15 सुरः लुक़मान (31)- आयत #  26

31.26: जो कुछ सारे आसमान और ज़मीन में है (सब) ख़ुदा ही का है बेशक ख़ुदा तो (हर चीज़ से) बेपरवा (और बहरहाल) क़ाबिले हम्दो सना है.

दुआ # 16 - सुरः काफ़ीरुन (109) - संपूर्ण

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान रहीम है।.
109.1:
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि, काफिरों !
109.2:
तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता,
109.3:
और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते:
109.4:
और जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहीं,
109.5:
और जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहीं:
109.6:
तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन.

दुआ # 17 सुरः अख़लास (112) - संपूर्ण

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान रहीम है।.
112.1:
( रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है.
112.2:
ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है.
112.3:
उसने किसी को जना उसको किसी ने जना.
112.4:
और उसका कोई हमसर नहीं.

अध्याय 2 –दुआ - आभार और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए.

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दुआ # 1 सुरः फ़ातेहा - आयात # 1 और 2.

1.1: तारीफ़ अल्लाह ही के लिये है जो तमाम क़ायनात का रब है.
1.2:
अल्लाह के नाम से जो रहमान रहीम है.

दुआ # 2 सुरः अल-आराफ़ – आयात # 206.

7.206: बेशक जो लोग (फरिशते बग़ैरह) तुम्हारे परवरदिगार के पास मुक़र्रिब हैं और वह उसकी इबादत से सर कशी नही करते और उनकी तसबीह करते हैं और उसका सजदा करते हैं (सजदा).

दुआ # 3a सुरः युनुस – आयात # 10.

10.10: उन बाग़ों में उन लोगों का बस ये कौल होगा ख़ुदा तू पाक पाकीज़ा है और उनमें उनकी बाहमी (आपसी) खैरसलाही (मुलाक़ात) सलाम से होगी और उनका आख़िरी क़ौल ये होगा कि सब तारीफ ख़ुदा ही को सज़ावार है जो सारे जहाँन का पालने वाला है.

दुआ # 3b सुरः बनी इसराइल– आयात # 108.

17.108: और कहते हैं कि हमारा परवरदिगार (हर ऐब से) पाक पाकीज़ा है बेशक हमारे परवरदिगार का वायदा पूरा होना ज़रुरी था.

दुआ # 4 – सुरः अन-नम्ल – आयात # 15.

27.15: और इसमें शक नहीं कि हमने दाऊद और सुलेमान को इल्म अता किया और दोनों ने (ख़ुश होकर) कहा ख़ुदा का शुक्र जिसने हमको अपने बहुतेरे ईमानदार बन्दों पर फज़ीलत दी.

दुआ # 5 – सुरः अन-नम्ल – आयात # 19.

27.19: तो सुलेमान इस बात से मुस्कुरा के हँस पड़ें और अर्ज क़ी परवरदिगार मुझे तौफीक़ अता फरमा कि जैसी जैसी नेअमतें तूने मुझ पर और मेरे वालदैन पर नाज़िल फरमाई हैं मै (उनका) शुक्रिया अदा करुँ और मैं ऐसे नेक काम करुँ जिसे तू पसन्द फरमाए और तू अपनी ख़ास मेहरबानी से मुझे (अपने) नेकोकार बन्दों में दाखिल कर.

दुआ # 6 – सुरः अन-नम्ल – आयात # 40.

27.40: इस पर अभी सुलेमान कुछ कहने पाए थे कि वह शख्स (आसिफ़ बिन बरख़िया) जिसके पास किताबे (ख़ुदा) का किस कदर इल्म था बोला कि मै आप की पलक झपकने से पहले तख्त को आप के पास हाज़िर किए देता हूँ (बस इतने ही में गया) तो जब सुलेमान ने उसे अपने पास मौजूद पाया तो कहने लगे ये महज़ मेरे परवरदिगार का फज़ल करम है ताकि वह मेरा इम्तेहान ले कि मै उसका शुक्र करता हूँ या नाशुक्री करता हूँ और जो कोई शुक्र करता है वह अपनी ही भलाई के लिए शुक्र करता है और जो शख्स ना शुक्री करता है तो (याद रखिए) मेरा परवरदिगार यक़ीनन बेपरवा और सख़ी है.

दुआ # 7 – सुरः फ़ातिर – आयात # 34.

35.34: और ये लोग (खुशी के लहजे में) कहेंगे खुदा का शुक्र जिसने हम से (हर क़िस्म का) रंज ग़म दूर कर दिया बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है,

दुआ # 8 – सुरः अल-जासिया   – आयत # 36 और 37.

45.36: पस सब तारीफ ख़ुदा ही के लिए सज़ावार है जो सारे आसमान का मालिक और ज़मीन का मालिक (ग़रज़) सारे जहॉन का मालिक है.
45.37:
और सारे आसमान ज़मीन में उसके लिए बड़ाई है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है.

अध्याय 3 – दुआ - रहम और परेशानी दूर होने के के लिए..

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दुआ # 1 – सुरः फ़ातेहा (1/5) – आयत # # 5.

1.5: हम तेरी ही इबादत करते हैं, और तुझ ही से मदद मांगते है.

दुआ # 2 – सुरः फ़ातेहा - संपूर्ण

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान रहीम है।.
1.1:
अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं.
1.2:
प्रशंसा अल्लाह ही के लिए हैं जो सारे संसार का रब हैं.
1.3:
बड़ा कृपालु, अत्यन्त दयावान हैं.
1.4:
बदला दिए जाने के दिन का मालिक हैं.
1.5:
हम तेरी बन्दगी करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं.
1.6:
हमें सीधे मार्ग पर चला.

1.7: उन लोगों के मार्ग पर जो तेरे कृपापात्र हुए, जो न प्रकोप के भागी हुए और न पथभ्रष्ट

दुआ # 3 – सुरः बक़रा(2/286) – आयात # 286.

2.286: और मान लिया परवरदिगार हमें तेरी ही मग़फ़िरत की (ख्वाहिश है) और तेरी ही तरफ़ लौट कर जाना है ख़ुदा किसी को उसकी ताक़त से ज्यादा तकलीफ़ नहीं देता उसने अच्छा काम किया तो अपने नफ़े के लिए और बुरा काम किया तो (उसका वबाल) उसी पर पडेग़ा हमारे परवरदिगार अगर हम भूल जाऐं या ग़लती करें तो हमारी गिरफ्त कर हमारे परवरदिगार हम पर वैसा बोझ डाल जैसा हमसे अगले लोगों पर बोझा डाला था, और हमारे परवरदिगार इतना बोझ जिसके उठाने की हमें ताक़त हो हमसे उठवा और हमारे कुसूरों से दरगुज़र कर और हमारे गुनाहों को बख्श दे और हम पर रहम फ़रमा तू ही हमारा मालिक है तू ही काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर.

दुआ # 4 – सुरः अल-आराफ़ ( 7/47) – आयात # 47.

7.47: और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अर्ज़ करेगें) हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी बनाना

दुआ # 5 – सुरः अल-आराफ़ (7/143) – आयात # 143.

7.143: और जब मूसा हमारा वायदा पूरा करते (कोहेतूर पर) आए और उनका परवरदिगार उनसे हम कलाम हुआ तो मूसा ने अर्ज़ किया कि ख़ुदाया तू मेझे अपनी एक झलक दिखला दे कि मैं तूझे देखँ ख़ुदा ने फरमाया तुम मुझे हरगिज़ नहीं देख सकते मगर हॉ उस पहाड़ की तरफ देखो (हम उस पर अपनी तजल्ली डालते हैं) पस अगर (पहाड़) अपनी जगह पर क़ायम रहे तो समझना कि अनक़रीब मुझे भी देख लोगे (वरना नहीं) फिर जब उनके परवरदिगार ने पहाड़ पर तजल्ली डाली तो उसको चकनाचूर कर दिया और मूसा बेहोश होकर गिर पड़े फिर जब होश में आए तो कहने लगे ख़ुदा वन्दा तू (देखने दिखाने से) पाक पाकीज़ा है-मैने तेरी बारगाह में तौबा की और मै सब से पहले तेरी अदम रवायत का यक़ीन करता हूँ.

दुआ # 6 – सुरः हूद – आयात # 47.

11.47: और अगर तु मुझे (मेरे कसूर बख्श देगा और मुझ पर रहम खाएगा तो मैं सख्त घाटा उठाने वालों में हो जाऊँगा (जब तूफान जाता रहा तो) हुक्म दिया गया नूह हमारी तरफ से सलामती और उन बरकतों के साथ कश्ती से उतरो.

दुआ # 7 – सुरः हूद – आयात # 90.

11.90: और अपने परवरदिगार से अपनी मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसी की बारगाह में तौबा करो बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा मोहब्बत वाला मेहरबान है.

दुआ # 8 – सुरः युसूफ – आयात # 53.

12.53: और (यूं तो) मै भी अपने नफ्स को गुनाहो से बे लौस नहीं कहता हूँ क्योंकि (मैं भी बशर हूँ और नफ्स बराबर बुराई की तरफ उभारता ही है मगर जिस पर मेरा परवरदिगार रहम फरमाए (और गुनाह से बचाए).

दुआ # 9 – सुरः अल-क़लम    or Nun – आयात # 29.

68.29: वह बोले हमारा परवरदिगार पाक है बेशक हमीं ही कुसूरवार हैं.

दुआ #10 – सुरः अल-अंबिया – आयात # 87.

21.87: और जुन्नून (यूनुस को याद करो) जबकि गुस्से में आकर चलते हुए और ये ख्याल किया कि हम उन पर रोज़ी तंग करेंगे (तो हमने उन्हें मछली के पेट में पहुँचा दिया) तो (घटाटोप) ऍंधेरे में (घबराकर) चिल्ला उठा कि (परवरदिगार) तेरे सिवा कोई माबूद नहीं तू (हर ऐब से) पाक पाकीज़ा है बेशक मैं कुसूरवार हूँ

दुआ #11 – सुरः अन-नम्ल – आयत # 62 से  64.

27.62: भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो दुआ क़ुबूल करता है और मुसीबत को दूर करता है और तुम लोगों को ज़मीन में (अपना) नायब बनाता है तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद है (हरगिज़ नहीं) उस पर भी तुम लोग बहुत कम नसीहत इबरत हासिल करते हो!
27.63:
भला वह कौन है जो तुम लोगों की ख़़ुश्की और तरी की तारिक़ियों में राह दिखाता है और कौन उसकी बाराने रहमत के आगे आगे (बारिश की) ख़ुशखबरी लेकर हवाओं को भेजता है-क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) ये लोग जिन चीज़ों को ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं ख़ुदा उससे बालातर है.
27.64:
भला वह कौन हैं जो ख़िलकत को नए सिरे से पैदा करता है फिर उसे दोबारा (मरने के बाद) पैदा करेगा और कौन है जो तुम लोगों को आसमान ज़मीन से रिज़क़ देता है- तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरग़िज़ नहीं) ( रसूल) तुम (इन मुशरेकीन से) कहा दो कि अगर तुम सच्चे हो तो अपनी दलील पेश करो.

दुआ # 12 – सुरः अल-क़सस  – आयात # 24.

28.24: तब मूसा ने उन की (बकरियों) के लिए (पानी खीच कर) पिला दिया फिर वहाँ से हट कर छांव में जा बैठे तो (चूँकि बहुत भूक थी) अर्ज क़ी परवरदिगार (उस वक्त) ज़ो नेअमत तू मेरे पास भेज दे मै उसका सख्त हाजत मन्द हूँ

दुआ # 13 – सुरः अल-अनकबूत  – आयत # 21 और 22.

29.21: जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे.
29.22:
और तो तुम ज़मीन ही में ख़ुदा को ज़ेर कर सकते हो और आसमान में और ख़ुदा के सिवा तो तुम्हारा कोई सरपरस्त है और मददगार.

दुआ # 14 – सुरः या'सीन – आयात # 58.

36.58: मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम का पैग़ाम आएगा.

दुआ # 15 – सुरः अस-साफफात – आयात # 75.

37.75: और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे

दुआ # 16 – सुरः अल-फ़तह  आयात # 1.

48.1: (ऐ रसूल) ये हुबैदिया की सुलह नहीं बल्कि हमने हक़ीक़तन तुमको खुल्लम खुल्ला फतेह अता की

दुआ # 17 – सुरःाद – आयत # 53 और 54.

38.53: (मोमिनों) ये वह चीज़ हैं जिनका हिसाब के दिन (क़यामत) के लिए तुमसे वायदा किया जाता है.
38.54:
बेशक ये हमारी (दी हुई) रोज़ी है जो कभी तमाम होगी;

दुआ # 18 – सुरः अल-मोमिन – आयत # 1 से  3.

40.1: हा मीम.
40.2:
(इस) किताब (कुरान) का नाज़िल करना (ख़ास बारगाहे) ख़ुदा से है जो (सबसे) ग़ालिब बड़ा वाक़िफ़कार है,
40.3:
गुनाहों का बख्शने वाला और तौबा का क़ुबूल करने वाला सख्त अज़ाब देने वाला साहिबे फज़ल करम है उसके सिवा कोई माबूद नहीं उसी की तरफ (सबको) लौट कर जाना है

दुआ # 19 – सुरः अल-फ़तह  – आयात # 4.

48.4: वह (वही) ख़ुदा तो है जिसने मोमिनीन के दिलों में तसल्ली नाज़िल फरमाई ताकि अपने (पहले) ईमान के साथ और ईमान को बढ़ाएँ और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर तो ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार हकीम है

दुआ # 20 – सुरः अल-हश्र  (59/10) – आयत # 10.

59.10: और उनका भी हिस्सा है और जो लोग उन (मोहाजेरीन) के बाद आए (और) दुआ करते हैं कि परवरदिगारा हमारी और उन लोगों की जो हमसे पहले ईमान ला चुके मग़फेरत कर और मोमिनों की तरफ से हमारे दिलों में किसी तरह का कीना आने दे परवरदिगार बेशक तू बड़ा यफीक़ निहायत रहम वाला है

दुआ # 21 – सुरः अल-मुम्तहीना – आयात 4 और 5.

60.4: (मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते तो इबराहीम और उनके साथियों (के क़ौल फेल का अच्छा नमूना मौजूद है) कि जब उन्होने अपनी क़ौम से कहा कि हम तुमसे और उन (बुतों) से जिन्हें तुम ख़ुदा के सिवा पूजते हो बेज़ार हैं हम तो तुम्हारे (दीन के) मुनकिर हैं और जब तक तुम यकता ख़ुदा पर ईमान लाओ हमारे तुम्हारे दरमियान खुल्लम खुल्ला अदावत दुशमनी क़ायम हो गयी मगर (हाँ) इबराहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप से ये (अलबत्ता) कहा कि मैं आपके लिए मग़फ़िरत की दुआ ज़रूर करूँगा और ख़ुदा के सामने तो मैं आपके वास्ते कुछ एख्तेयार नहीं रखता हमारे पालने वाले (ख़ुदा) हमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं:
60.5:
और तेरी तरफ हमें लौट कर जाना है हमारे पालने वाले तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है.

दुआ # 22 – सुरः अत-तागाबून – आयात # 13.

64.13: ख़ुदा (वह है कि) उसके सिवा कोई माबूद नहीं और मोमिनो को ख़ुदा ही पर भरोसा करना चाहिए.

दुआ # 23 – सुरःुसूफ – आयात # 87.

12.87: मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ और उसके भाई को (जिस तरह बने) ढूँढ के ले आओ और ख़ुदा की रहमत से ना उम्मीद हो क्योंकि ख़ुदा की रहमत से काफिर लोगो के सिवा और कोई ना उम्मीद नहीं हुआ करता.

दुआ # 24 – सुरः अर-रअद 13 – आयत # 27 और 28.

13.27: और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है.
13.28:
और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है (ये) वह लोग हैं जिन्होंने ईमान कुबूल किया और उनके दिलों को ख़ुदा की चाह से तसल्ली हुआ करती है.

दुआ # 25 – सुरः इब्राहीम 14 – आयात # 38.

14.38: और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है (ये) वह लोग हैं जिन्होंने ईमान कुबूल किया और उनके दिलों को ख़ुदा की चाह से तसल्ली हुआ करती है:

दुआ # 26 – सुरः अल-अंबिया (21/83) – आयात # 83.

21.83: (कि भाग जाएँ) और ( रसूल) अय्यूब (का क़िस्सा याद करो) जब उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (ख़ुदा वन्द) बीमारी तो मेरे पीछे लग गई है और तू तो सब रहम करने वालोंसे (बढ़ कर है मुझ पर तरस खा.

दुआ # 27 – सुरः अल-मोमिनून – आयत # 106 और 107.

23.106: वह जवाब देगें हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे:
23.107:
परवरदिगार हमको (अबकी दफा) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं.

दुआ # 28 – सुरः अल-मोमिनून – आयात # 109.

23.109: मेरे बन्दों में से एक गिरोह ऐसा भी था जो (बराबर) ये दुआ करता था कि हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है.

दुआ # 29 – सुरः अल-मोमिनून – आयात # 118.

23.118: और ( रसूल) तुम कह दो परवरदिगार तू (मेरी उम्मत को) बख्श दे और तरस खा और तू तो सब रहम करने वालों से बेहतर है.

अध्याय 4 – दुआ - मार्गदर्शन के लिए

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दुआ # 1 – सुरः फ़ातेहा (1/5 और 6) – आयत # 5 और 6.

1.5: हम तेरी बन्दगी करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं.
1.6:
हमें सीधे मार्ग पर चला .

दुआ # 2 – सुरः अल-बक़रा (2/32) – आयात # 32.

2.32: तब फ़रिश्तों ने (आजिज़ी से) अर्ज़ की तू (हर ऐब से) पाक पाकीज़ा है हम तो जो कुछ तूने बताया है उसके सिवा कुछ नहीं जानते तू बड़ा जानने वाला, मसलहतों का पहचानने वाला हैै.

दुआ # 3 – सुरः अल-अन'आम  (6/77) – आयात # 77.

6.77: फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे कि अगर (कहीं) मेरा (असली) परवरदिगार मेरी हिदायत करता तो मैं ज़रुर गुमराह लोगों में हो जाता.

दुआ # 4 – सुरः युनुस (10/109) – आयात # 109.

10.109: और ( रसूल) तुम्हारे पास जो 'वही' भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरमियान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है.

दुआ # 5 – सुरः अल-कहफ़ (18/24) – आयात # 24.

18.24: मगर इन्शा अल्लाह कह कर और अगर (इन्शा अल्लाह कहना) भूल जाओ तो (जब याद आए) अपने परवरदिगार को याद कर लो (इन्शा अल्लाह कह लो) और कहो कि उम्मीद है कि मेरा परवरदिगार मुझे ऐसी बात की हिदायत फरमाए जो रहनुमाई में उससे भी ज्यादा क़रीब हो.

दुआ # 6 – सुरः अल-अंबिया (21/4) – आयात # 4.

21.4: (तो उस पर) रसूल ने कहा कि मेरा परवरदिगार जितनी बातें आसमान और ज़मीन में होती हैं खूब जानता है (फिर क्यों कानाफूसी करते हो) और वह तो बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है

दुआ # 7 – सुरः अल-कहफ़ (18/10) – आयात # 10.

18.10: कि एक बारगी कुछ जवान ग़ार में पहुँचे और दुआ की- हमारे परवरदिगार हमें अपनी बारगाह से रहमत अता फरमा-और हमारे वास्ते हमारे काम में कामयाबी इनायत कर.

दुआ # 8 – सुरः अल-कहफ़ (18/17) – आयात # 17.

18.17: (ग़रज़ ये ठान कर ग़ार में जा पहुँचे) कि जब सूरज निकलता है तो देखेगा कि वह उनके ग़ार से दाहिनी तरफ झुक कर निकलता है और जब ग़ुरुब (डुबता) होता है तो उनसे बायीं तरफ कतरा जाता है और वह लोग (मजे से) ग़ार के अन्दर एक वसीइ (बड़ी) जगह में (लेटे) हैं ये ख़ुदा (की कुदरत) की निशानियों में से (एक निशानी) है जिसको हिदायत करे वही हिदायत याफ्ता है और जिस को गुमराह करे तो फिर उसका कोई सरपरस्त रहनुमा हरगिज़ पाओगे.

दुआ # 9 – सुरः अन-नम्ल (27/79) – आयात # 79.

27.79: तो ( रसूल) तुम खुदा पर भरोसा रखो बेशक तुम यक़ीनी सरीही हक़ पर हो.

दुआ # 10 – सुरः अत-तक्वीर    (81/29) – आयात # 29.

81.29: और तुम तो सारे जहॉन के पालने वाले ख़ुदा के चाहे बग़ैर कुछ भी चाह नहीं सकते.

दुआ # 11 – सुरः अल-फुर्क़ान (25/31) – आयात # 31.

25.31: और हमने (गोया ख़ुद) गुनाहगारों में से हर नबी के दुश्मन बना दिए हैं और तुम्हारा परवरदिगार हिदायत और मददगारी के लिए काफी है.

दुआ # 12 – सुरः अल-क़सस  (28) – आयात # 22.

28.22: और जब मदियन की तरफ रुख़ किया (और रास्ता मालूम था) तो आप ही आप बोले मुझे उम्मीद है कि मेरा परवरदिगार मुझे सीधे रास्ता दिखा दे.

दुआ # 13 – सुरः अल-अनकबूत  (29/26) – आयात # 26.

29.26: तब सिर्फ लूत इबराहीम पर ईमान लाए और इबराहीम ने कहा मै तो देस को छोड़कर अपने परवरदिगार की तरफ (जहाँ उसको मंज़ूर हो ) निकल जाऊँगा

दुआ # 14 – सुरः अस-साफफात (37/99) – आयात # 99.

37.99: तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ.

दुआ # 15 – सुरः अल-मआरिज (70/40 और 41) – आयत # 40 और 41.

70.40: तो मैं मशरिकों और मग़रिबों के परवरदिगार की क़सम खाता हूँ कि हम ज़रूर इस बात की कुदरत रखते हैं
70.41:
कि उनके बदले उनसे बेहतर लोग ला (बसाएँ) और हम आजिज़ नहीं हैं .

दुआ # 16 – सुरः अल-माइदा  (5/48) – आयात # 48.

5.48: और ( रसूल) हमने तुम पर भी बरहक़ किताब नाज़िल की जो किताब (उसके पहले से) उसके वक्त में मौजूद है उसकी तसदीक़ करती है और उसकी निगेहबान (भी) है जो कुछ तुम पर ख़ुदा ने नाज़िल किया है उसी के मुताबिक़ तुम भी हुक्म दो और जो हक़ बात ख़ुदा की तरफ़ से चुकी है उससे कतरा के उन लोगों की ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी करो और हमने तुम में हर एक के वास्ते (हस्बे मसलेहते वक्त) एक एक शरीयत और ख़ास तरीक़े पर मुक़र्रर कर दिया और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सब के सब को एक ही (शरीयत की) उम्मत बना देता मगर (मुख़तलिफ़ शरीयतों से) ख़ुदा का मतलब यह था कि जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें तुम्हारा इमतेहान करे बस तुम नेकी में लपक कर आगे बढ़ जाओ और (यक़ीन जानो कि) तुम सब को ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है;

दुआ # 17 – सुरः मरयम (19/76) – आयात # 76.

19.76: और जो लोग राहे रास्त पर हैं खुदा उनकी हिदायत और ज्यादा करता जाता है और बाक़ी रह जाने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब की राह से भी बेहतर है और अन्जाम के ऐतबार से (भी) बेहतर है.

दुआ # 18 – सुरः अश-शु'अरा (26/62) – आयात # 62.

26.62: कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है.

दुआ # 19 – सुरः अन-नम्ल (27/93) – आयात # 93.

27.93: Aऔर तुम कह दो कि अल्हमदोलिल्लाह वह अनक़रीब तुम्हें (अपनी क़ुदरत की) निशानियाँ दिखा देगा तो तुम उन्हें पहचान लोगे और जो कुछ तुम करते हो तुम्हारा परवरदिगार उससे ग़ाफिल नहीं है.

दुआ # 20 – सुरः अल-क़सस  (28/85) – आयात # 85.

28.85: ( रसूल) ख़ुदा जिसने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया ज़रुर ठिकाने तक पहुँचा देगा ( रसूल) तुम कह दो कि कौन राह पर आया और कौन सरीही गुमराही में पड़ा रहा.

दुआ # 21 – सुरः अज़-ज़ुखरुफ़ (43/27) – आयात # 27.

43.27: मगर उसकी इबादत करता हूँ, जिसने मुझे पैदा किया तो वही बहुत जल्द मेरी हिदायत करेगा

अध्याय 5 – दुआ - औलाद के लिए

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दुआ # 1 – सुरः बक़रा (2/117) – आयात # 117.

2.117: (वही) आसमान ज़मीन का मोजिद है और जब किसी काम का करना ठान लेता है तो उसकी निसबत सिर्फ कह देता है कि ''हो जा'' पस वह (खुद खुद) हो जाता है.

दुआ # 2 – सुरः हूद (11/123) – आयात # 123

11.123: और सारे आसमान ज़मीन की पोशीदा बातों का इल्म ख़ास ख़ुदा ही को है और उसी की तरफ हर काम हिर फिर कर लौटता है तुम उसी की इबादत करो और उसी पर भरोसा रखो और जो कुछ तुम लोग करते हो उससे ख़ुदा बेख़बर नहीं.

दुआ # 3 – सुरः अर-रअद (13/16) – आयात # 16.

13.16: ( रसूल) तुम पूछो कि (आख़िर) आसमान और ज़मीन का परवरदिगार कौन है (ये क्या जवाब देगें) तुम कह दो कि अल्लाह है (ये भी कह दो कि क्या तुमने उसके सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं जो अपने लिए आप तो नफे पर क़ाबू रखते हैं ज़रर (नुकसान) पर (ये भी तो) पूछो कि भला (कहीं) अन्धा और ऑंखों वाला बराबर हो सकता है (हरगिज़ नहीं) (या कहीं) अंधेरा और उजाला बराबर हो सकता है (हरगिज़ नहीं) इन लोगों ने ख़ुदा के कुछ शरीक़ ठहरा रखे हैं क्या उन्होनें ख़ुदा ही की सी मख़लूक़ पैदा कर रखी है जिनके सबब मख़लूकात उन पर मुशतबा हो गई है (और उनकी खुदाई के क़ायल हो गए) तुम कह दो कि ख़ुदा ही हर चीज़ का पैदा करने वाला और वही यकता और सिपर (सब पर) ग़ालिब है.

दुआ # 4 – सुरः अर-रूम (30/11) – आयात # 11.

30.11: ख़ुदा ही ने मख़लूकात को पहली बार पैदा किया फिर वही दुबारा (पैदा करेगा) फिर तुम सब लोग उसी की तरफ लौटाए जाओगे.

दुआ # 5 – सुरः अर-रूम (30/26 और 27) – आयात # 26 और 27.

30.26: और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं.
30.27:
और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तालिक़ है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करता है फिर दोबारा (क़यामत के दिन) पैदा करेगा और ये उस पर बहुत आसान है और सारे आसमान जमीन सबसे बालातर उसी की शान है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है.

दुआ # 6 – सुरः अल-अनकबूत  (29/19) – आयात # 19.

29.19: बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है.

दुआ # 7 – सुरः ताःहाः (20/50) – आयात # 50.

20.50: मूसा ने कहा हमारा परवरदिगार वह है जिसने हर चीज़ को उसके (मुनासिब) सूरत अता फरमाई.

दुआ # 8 – सुरः अल-अंबिया (21/89 – आयात # 89.

21.89: और ज़करिया (को याद करो) जब उन्होंने (मायूस की हालत में) अपने परवरदिगार से दुआ की मेरे पालने वाले मुझे तन्हा (बे औलाद) छोड़ और तू तो सब वारिसों से बेहतर है.

दुआ # 9 – सुरः अस-साफफात 37/100) – आयात # 100.

37.100: वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा.

अध्याय 6 – दुआ - शहर में शांती  के लिए

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दुआ # 1 – सुरः इब्राहीम (14/35) – आयात # 35.

14.35: याद करो जब इबराहीम ने कहा था, "मेरे रब! इस भूभाग (मक्का) को शान्तिमय बना दे और मुझे और मेरी सन्तान को इससे बचा कि हम मूर्तियों को पूजने लग जाए:

अध्याय 7 – दुआ - जंग में बचने, विपत्ति और दुश्मन के लिए

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दुआ # 1 – सुरः आले इमरान – आयात # 147.

3.147: उन्होंने कुछ नहीं कहा सिवाय इसके कि "ऐ हमारे रब! तू हमारे गुनाहों को और हमारे अपने मामले में जो ज़्यादती हमसे हो गई हो, उसे क्षमा कर दे और हमारे क़दम जमाए रख, और इनकार करनेवाले लोगों के मुक़ाबले में हमारी सहायता कर।"

दुआ # 2 – सुरः अल-मोमिनून – आयात # 28.

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