सफ़र का महीना

सफ़र के महीने की रोज़ाना की दुआ    PPT

7 सफ़र - विलादत ईमाम मूसा काजिम (अ:स)    ज़्यारत इमाम मूसा काजिम (अ:स)

4 सफ़र - शहादत हज़रत मासूम कुम (स:अ)   ज़्यारत मासूम कुम (स:अ)

13 सफ़र - शहादत बीबी सकीना बिन्त हुसैन (स:अ)  ज़्यारत बीबी सकीना (स:अ)

9 सफ़र - शहादत ईमाम रज़ा  (अ:स)  ।  ज़्यारत  ईमाम रज़ा  (अ:स)

28 सफ़र - शहादत ईमाम हसन अल मुज्तबा (अ:स) । ज़्यारत  ईमाम हसन (अ:स)

*** चेहलुम शोहदाए कर्बला" - अर'बईन का दिन ***
28 सफ़र - रहलत हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स:अ:व:व) ।  ज़्यारत  हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स:अ:व:व) ज़्यारत अर'बईन PDF ज़्यारत अर'बईन - अरबी को हिंदी में पढ़ें 
  हम अर'बईन क्यों मनाते हैं?

 

 

 

 

सफ़र - अमाल

सफ़र का महीना - मफ़ातॆह-उल-जिनान में

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सफ़र के महीने में इस दुआ को रोज़ाना 10 बार पढ़ने की ताकीद की गयी है ताकि किसी भी प्रकार की आफ़त और बद-किसमती से बचा जा सके! इस महीने में दान (सदक़ा) भी देने की बहुत ताकीद की गयी है!

 

ऐ ज़बरदस्त कुव्वतों वाले ऐ सख्त गिरफ्त करने वाले ऐ ग़ालिब, ऐ ग़ालिब , ऐ ग़ालिब  तेरी बड़ाई के आगे तेरी सारी

या शदीदल कुवा व या शदीदल मिह'आल या अ'ज़ीज़ु या अ'ज़ीज़ु या अ'ज़ीज़ ज़'अल्लत बी-अज़'अमतिका जमी-उ' ख़ल'क़िक

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मखलूक पस्त है, बस अपनी मखलूक के शर से बचाए रख! ऐ एहसान वाले ऐ नेकी वाले ऐ नेमत वाले ऐ फज़ल वाले ऐ की नहीं कोई माबूद सिवाए तेरे,

फक-फ़िनी शर्रा ख़ल'क़िका या मुह'सिनु या मुज्मिलू या मून-ई'मु या मुफ़'ज़िल या ला इलाहा इल्ला अन्ता सुभ'आनाका इन्नी ǘی ی ی ی ی ی ی 

तू पाक तर है बेशक मैं जालिमों में से हूँ पास हमने इसकी दुआ कबूल की और इसे और इसे निजात दे दी और हम मोमिनों को इसी तरह निजात देते हैं, खुदा

कुन्तु मिनज़ ज़ा'आलेमीन फस-ताजब्ना लहू व नज्जय'नाहू मिनल  ग़म'मी व क़ज़ा लिका नुन्जिल मू-मिनीन व सल्लल्लाहु ی ی ی ی ی  

रहमत नाजिल करे मोहम्मद (स:अव्व) और इनकी आल (आ:स) पर जो तैय्यब व ताहिर हैं!  

अ'ला मुह'अम्मदीन व आलिहित' त'अय्यिबीनत' ताहिरीन. ی یی Ǫی ۔

20 सफ़र का दिन 

20 सफ़र "अर'बईन का दिन / रोज़े  अर'बईन" कहलाता है, जो इमाम हुसैन की शहादत के 40वेँ दिन इमाम (अ:स) और उनके रिश्तेदारों और दोस्तों की शहादत का दिन के रूप में मनाया जाता है, जो कर्बला में 10 मुहर्रम को शहीद कर दिए गए थे!

इमाम हसन बिन अली अल-अस्करी (अ:स) के अनुसार, आज के रोज़ यह बेहतर है की :-

1. 51 रक्-अत नमाज़,अर'बईन के ईन 24 घंटों में पढ़ें (जिसमें 17 रक्-अत तो रोजाना की वाजिब नमाज़ों की है और बाक़ी की 34 रक्-अत नाफिला पढ़ें)

2. कोशिश यह करें की आप इमाम (अ:स) और दुसरे शहीदों की ज़्यारत के लिए कर्बला में रहें, परन्तु अगर यह संभव नहीं हो तो, इमाम हुसैन (अ:स) और दुसरे कर्बला के शहीदों की ज़्यारत पढ़ें!

3. अपने दाहिने हाथ में अंगूठी पहनें

4. अपना सजदा ज़मीन/ख़ाक पर करें (कर्बला को हमेशा तरजीह दें)

5. जब नमाज़ पढ़ें तो "बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम" साफ़ साफ़ और ज़ोर से कहें!

6. इमाम जाफर बिन मुहम्मद अल-सादिक़ (अ:स) ने अपने वफादारों को इस दिन "ज़्यारते अर'बईन"  पढ़ने की सलाह दी है !