﴾सफ़र के महीने की रोज़ाना की दुआ﴿
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सफ़र के महीने में इस दुआ को रोज़ाना 10 बार पढ़ने की ताकीद की गयी है ताकि किसी भी प्रकार की आफ़त और बद-किसमती से बचा जा सके! इस महीने में दान (सदक़ा) भी देने की बहुत ताकीद की गयी है!

मफ़ातीह अल मुहद'दिस अल फैज़ और दुसरे विद्वानों ने ब्यान किया है की अगर आप सफ़र महीने में नाकामयाबी और आफ़त और दुर्भाग्य से बचना   चाहते हैं तो इस दुआ को रोज़ाना 10 बार पढ़ें:

अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान और रहम वाला है बिस्मिलाहिर रहमानिर रहीम   بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
ऐ ज़बरदस्त कुव्वतों वाले ऐ सख्त गिरफ्त करने वाले ऐ ग़ालिब, ऐ ग़ालिब , ऐ ग़ालिब  तेरी बड़ाई के आगे तेरी सारी मखलूक पस्त है, बस अपनी मखलूक के शर से बचाए रख! ऐ एहसान वाले ऐ नेकी वाले ऐ नेमत वाले ऐ फज़ल वाले ऐ की नहीं कोई माबूद सिवाए तेरे, तू पाक तर है बेशक मैं जालिमों में से हूँ पास हमने इसकी दुआ कबूल की और इसे और इसे निजात दे दी और हम मोमिनों को इसी तरह निजात देते हैं, खुदा रहमत नाजिल करे मोहम्मद (स:अव्व) और इनकी आल (आ:स) पर जो तैय्यब व ताहिर हैं! या शदीदल कुवा व या शदीदल मिह'आल या अ'ज़ीज़ु या अ'ज़ीज़ु या अ'ज़ीज़ ज़'अल्लत बी-अज़'अमतिका जमी-उ' ख़ल'क़िका फक-फ़िनी शर्रा ख़ल'क़िका या मुह'सिनु या मुज्मिलू या मून-ई'मु या मुफ़'ज़िल या ला इलाहा इल्ला अन्ता सुभ'आनाका इन्नी कुन्तु मिनज़ ज़ा'आलेमीन फस-ताजब्ना लहू व नज्जय'नाहू मिनल  ग़म'मी व क़ज़ा लिका नुन्जिल मू-मिनीन व सल्लल्लाहु अ'ला मुह'अम्मदीन व आलिहित' त'अय्यिबीनत' ताहिरीन.

يَا شَدِيدَ ٱلْقِوَىٰ وَيَا شَدِيدَ ٱلْمِحَالِ يَا عَزِيزُ يَا عَزِيزُ يَا عَزِيزُ ذَلَّتْ بِعَظَمَتِكَ جَمِيعُ خَلْقِكَ فَاكْفِنِي شَرَّ خَلْقِكَ يَا مُحْسِنُ يَا مُجْمِلُ يَا مُنْعِمُ يَا مُفْضِلُ يَا لاَ إِلٰهَ إِلاَّ انْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ ٱلظَّالِمِينَ فَٱسْتَجَبْنَا لَهُ وَنَجّيْنَاهُ مِنَ ٱلْغَمِّ وَكَذلِكَ نُنْجِي ٱلْمُؤْمِنِينَ وَصَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِهِ ٱلطَّيِّبِينَ ٱلطَّاهِرِينَ

हर लाईन को इसके मानी के साथ पढ़ें 

 بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिलाहिर रहमानिर रहीम

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान और रहम वाला है 

يَا شَدِيدَ ٱلْقِوَىٰ

या शदीदल कुवा

ऐ ज़बरदस्त कुव्वतों वाले

وَيَا شَدِيدَ ٱلْمِحَالِ

व या शदीदल मिह'आल

ऐ सख्त गिरफ्त करने वाले

يَا عَزِيزُ يَا عَزِيزُ يَا عَزِيزُ

या अ'ज़ीज़ु या अ'ज़ीज़ु

ऐ ग़ालिब, ऐ ग़ालिब , ऐ ग़ालिब  

ذَلَّتْ بِعَظَمَتِكَ جَمِيعُ خَلْقِكَ

ज़'अल्लत बी-अज़'अमतिका जमी-उ' ख़ल'क़िका

तेरी बड़ाई के आगे तेरी सारी मखलूक पस्त है,

فَاكْفِنِي شَرَّ خَلْقِكَ

फक-फ़िनी शर्रा ख़ल'क़िका

बस अपनी मखलूक के शर से बचाए रख!

يَا مُحْسِنُ يَا مُجْمِلُ

या मुह'सिनु या मुज्मिलू

ऐ एहसान वाले ऐ नेकी वाले

يَا مُنْعِمُ يَا مُفْضِلُ

या मून-ई'मु या मुफ़'ज़िल

ऐ नेमत वाले ऐ फज़ल वाले

يَا لاَ إِلٰهَ إِلاَّ انْتَ سُبْحَانَكَ

या ला इलाहा इल्ला अन्ता सुभ'आनाका

ऐ की नहीं कोई माबूद सिवाए तेरे, तू पाक तर है

إِنِّي كُنْتُ مِنَ ٱلظَّالِمِينَ

इन्नी कुन्तु मिनज़ ज़ा'आलेमीन

बेशक मैं जालिमों में से हूँ

فَٱسْتَجَبْنَا لَهُ وَنَجّيْنَاهُ مِنَ ٱلْغَمِّ

फस-ताजब्ना लहू व नज्जय'नाहू मिनल ग़म'मी

पास हमने इसकी दुआ कबूल की और इसे और इसे निजात दे दी

وَكَذلِكَ نُنْجِي ٱلْمُؤْمِنِينَ

व क़ज़ा लिका नुन्जिल मू-मिनीन

और हम मोमिनों को इसी तरह निजात देते हैं,

وَصَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِهِ ٱلطَّيِّبِينَ ٱلطَّاهِرِينَ

व सल्लल्लाहु अ'ला मुह'अम्मदीन व आलिहित' त'अय्यिबीनत' ताहिरीन

खुदा रहमत नाजिल करे मोहम्मद (स:अव्व) और इनकी आल (आ:स) पर जो तैय्यब व ताहिर हैं

 

 
 

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