शनिवार का दिन﴿

ज़्यारत हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स:अ:व:)

बीबी फ़ातिमा (स:अ) की दुआ

नक़्श 

ईमाम अली (अ:स) की दुआ (सहीफ़ा  अलवियाः से)

दुआए ईमाम ज़ैन अल'आबेदीन (अ:स)

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शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ
 खुदा के नाम से शुरू जो पनाह चाहने वालों  का शुआर और बचाओ चाहहने वालों का विर्द है और मैं ज़ालिमों की सख़्ती 
हसद करने वालों का मकर और सितमगारों के सितम से ख़ुदा की पनाह लेता हूँ, और मैं हंद करने वालों से बढ़ कर इसकी हंद करता हूँ! ख़ुदाया तू वोह यकता है जिसका 
कोई शरीक नहीं और वोह बादशाह है जिसका कोई हिस्सेदार नहीं, तेरे हुक्म में तिज़ाद नहीं और तेरी सल्तनत में इख़्तलाफ़ नहीं, मैं तुझ से सवाल करता हूँ की अपने 
अब्द ख़ास और अपने रसूल मोहम्मद मुस्तफ़ा (स:अ:व:व) पर रहमत फ़रमा मुझे अपने नेमतों के शुक्र अदा करने की इस तरह तौफ़ीक़ दे की जिस से तेरी रज़ा की इन्तेहा हासिल कर सकूँ 
और मुझे अपनी फ़रमाँबरदारी करने, इबादत को ज़रूरी समझने और अपने फ़ज़लो करम से अपने अजरो सवाब का हक़दार बनने में  फ़रमा ताकी मैं तेरी नाफ़रमानियों 
से बच सकूँ, जब तक ज़िंदा रहूँ, और मुझे इसकी तौफ़ीक़ दे जो मेरे लिए मुफ़ीद है, जब तक बाक़ी हूँ अपनी किताब के ज़रिया मेरा सीना खोल दे 
और इसलि तिलावत के ज़रिये मेरे गुनाह कम कर दे, मेरी जान और मेरे दीन में सलामती अता फ़रमा और अहले अनस  को मुझ से ख़ाएफ़ न कर 
और मेरी बाक़ी ज़िंदगी में मुझ पर कामिल एहसान फ़रमा जैसी की मेरी गुज़री हुई ज़िंदगी में मुझ पर एहसान फ़रमाया है, ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले!

 

बिस्मिल्लाहे कलिमतील मु'तसीमीना व मक़ा'लतील मुताहर'रेज़ीना व अ'उज़ो बिल्लाहे त'आला मिन जौरी अल'जायेरीना
व का'इदे अल'हासेदीना, व बग़ी' अल्ज़' ज़ालेमीना व अह'मदोहू फ़ौक़ा हम'दी अल'हामेदीना, अल्लाहुम्मा आ'अन्ता अल'वाहेदो बिला 
शरीकिन वा अल'मालिको बिला तम'लिकिन ला तुज़ाद'दो फ़ी हूक'मीका व ला तुना'जा'ओ फ़ी मुल'किका, अस'अलोका अन'तु सल्ली अला मोहम्मदीन अब्दिका व रसूलिका, व अन तुज़े'अनी मिन शुक'रे नोअ'माका मा तब'लोग़ो बी ग़ा'यता 
रिज़ाका व अ'अन तुई'या'ननि अला ता'अतिका व लूज़ूमे इबादतेका व इस'तेह'काका मासू'बतेका बे'लुत्फ़े इना'यतेका
व तर'हमानी बे'सद-दी अन म-आ'सिका मा अह'यय-तनी व तुवाफ़'फ़े-क़नी लिमा यन'फ़ा-ऊनी मा अब'क़ै-तनी, व अन तश'रहा 
बे'किताबिका सदरी, व तहुत्ता बे'तिलावतेही विज़-री, व ताम'नहानी अस'सलामा फ़ी दीनी व नफ़्सी, व ला तु'हिशा बी 
अहला उन'सिवा-तुत्तम्मा इह्सानिका फ़ीमा बक़ीया मिन उमरी कमा अह'सन्ता फ़ीमा मज़ा मिन्हो, या अर'हमर राहेमीना
 

بِسْمِ اللهِ کَلِمَةِ الْمُعْتَصِمِینَ، وَمَقالَةِ الْمُتَحَرِّزِینَ، وَأَعُوذُ بِاللهِ تَعَالی مِنْ جَوْرِ الْجَائِرِینَ،

وَکَیْدِ الْحَاسِدِینَ، وَبَغیِ الظَّالِمِینَ، وَأَحْمَدُہُ فَوْقَ حَمْدِ الْحَامِدِینَ۔اَللّٰھُمَّ أَنْتَ الْواحِدُ بِلَا

شَرِیکٍ وَالْمَلِکُ بِلاَ تَمْلِیکٍ لاَ تُضَادُّ فِی حُکْمِکَ وَلاَ تُنَازَعُ فِی مُلْکِکَ، أَسْأَلُکَ

أَنْ تُصَلِّیَ عَلَی مُحَمَّدٍ عَبْدِکَ وَرَسُولِکَ، وَأَنْ تُوزِعَنِی مِن شُکْرِ نُعْمَاکَ مَا تَبْلُغُ بِی غَایَةَ 

رِضَاکَ، وَأَنْ تُعِینَنِی عَلَی طَاعَتِکَ وَلُزُومِ عِبَادَتِکَ وَاسْتِحْقَاقِ مَثُوبَتِکَ بِلُطْفِ عِنَایَتِکَ،

وَتَرْحَمَنِی بِصَدِّی عَنْ مَعَاصِیکَ مَا أَحْیَیْتَنِی وَتُوَفِّقَنِی لِمَا یَنْفَعُنِی مَا أَبْقَیْتَنِی، وَأَنْ تَشْرَحَ

بِکِتَابِکَ صَدْرِی،وَتَحُطَّ بِتِلاوَتِہِ وِزْرِی، وَتَمْنَحَنِی السَّلاَمَةَ فِی دِینِی وَنَفْسِی، وَلاَ تُوحِشَ بِی

أَھْلَ أُنْسِیوَتُتِمَّ إِحْسَانَکَ فِیَما بَقِیَ مِنْ عُمْرِی کَمَا أَحْسَنْتَ فِیَما مَضَی مِنْہُ، یَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِینَ۔

शनिवार के दिन का नक़श :
 

शनिवार शाम की नमाज़ -1 

हज़रात पैग़म्बर (स:अ:व:व) ने फ़रमाया : 

जो कोई भी 4 रक'अत नमाज़ शनिवार की शाम को पढ़े जिसकी हर रक'अत में सूरः हम्द के बाद 7 मर्तबा सूरः तौहीद पढ़े तो इसकी हर रक'अत के बदले 700 हसना का सवाब है और जन्नत में अल्लाह उसको एक शहर अता करेगा!

 

शनिवार शाम की - नमाज़ -2 

सैय्यद इब्न ताऊस, हज़रत ईमाम  अस्करी (अ:) से रिवायत करते हैं जो अपने जद से रिवायत करते हैं की जो भी शख्स शनिवार की शाम 4 रक'अत नमाज़ पढ़ेगा जिसकी हर रक'अत में सूरह हम्द के बाद सूरह तौहीद और उसके बाद आयत अल'कुर्सी पढ़ेगा, अल्लाह उसे एक नबी, शहीद और सिरात मुस्तक़ीम पर रहने वालों का दर्जा देगा, यानी वह शख्स जन्नत में इनके साथ होंगे और उस शख़्स के अच्छे दोस्तों में क़रार पाएँगे

 

शनिवार के शाम की नमाज़ - 3 

अल्लाह के रसूल (स:अ:व:व) ने फरमाया :

जो कोई  भी शनिवार शाम 4 रक'अत नमाज़ अदा करेगा, जिसकी हर रक'अत में सूरह हम्द के बाद 3 मर्तबा सूरह काफ़ेरून की तिलावत करेगा और  फेरने के बाद एक बार आयत अल'कुर्सी पढ़े तो अल्लाह उसे हर लफ्ज़ के बराबर एक शहीद का सिला देगा!    

नमाज़ के बाद की ताकीबात (दुआ) 

ताकीबात मुश्तरका  दुआ-नमाज़ फ़ज्र के बाद दुआ-नमाज़ ज़ोहर के बाद दुआ-नमाज़  असर के बाद दुआ-नमाज़  मग़रिब  के बाद दुआ-नमाज़ ईशा के बाद

रोज़ाना की दुआ व ज़यारत 

जुमा  सनीचर  ईतवार सोमवार  मंगल  बुध  जुमेरात 
 
 

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

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