दुआए अबू हम्ज़ा सुमाली﴿

ये मुनाजात "मुनाजाते मस्जिद-ए-कूफा" के नाम से भी जानी जाती है 

Commentary- Lecture1 ,  Lecture2 |  Reflections Dr. Shomali pdf Listen wma  उर्दू वीडियो

 

अबू हमज़ा सुमाली, इमाम सज्जाद (अ:स) के बहुत ख़ास अस्हाबियों में से थे! इनके अनुसार इमाम सज्जाद (अ:स)  रमज़ान के पवित्र महीनों की रातों का अधिकतर हिस्सा इबादत में इस तरह गुजारते थे के सुबह रोज़ा शुरू करने का वक़्त हो जाता था! रोज़ा शुरू करने के वक़्त इमाम सज्जाद (अ:स)  इस दुआ को पढ़ते थे. इस दुआ को मिस्बाह में भी पाया गया है!

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बिमिल्लाह हिर रहमानिर रहीम

بسم الله الرحمن الرحيم

इलाही ला तू-अददिब्नी बी-उ'कू'बतिका व ला तम्कुर बीफीह' ईला का मिन अयना लियल खैरु या रब्बी व ला यूजदु इल्ला मिन ईन'दीका व मिन अयना लियांन नजातु व ला तुस्तत'आ-उ' इल्ला बिका लाल्लाद'ई अह'सनस ताघ्ना अ'न औ'निका व रह'मतिका व लल लद'ई असा-अ वज्तारा-आ'लेका व लम युर्ज़"इका खारजा अ'न कुद्रतिका या रब्ब या रब्ब या रब्ब बिका अ'रफ्तुका व अन्ता दलाल्तनी अ'लेका वडा-औ'तानी इलाय्का व लव ला अन्ता लम अदरी मा अन्ता अलहम्दु लिल्लाहिल लज़ी अद-ओ'हु फ़ा-युजीबुनी व इन कुन्तु बत'यी-अन ह'इना यद्-ओ'ओनी व्ल्हम्दू लिल्लाहिल लज़ी अस-अलुहू फ़ा-युआ'-टी'ईनीवा इन कुन्तु बखीलन ह'इना यस्ताक्रिज़ उनी व्ल्हम्दू लिल्लाहिल लज़ी उनादीही कुल्लामा शिया'तू लिह'आजाती व अख्लूबिही ह'अय्त्हू शिया-तू लिसिर्री बिघय्री शफी-ई'न फ़ा-योज"ई लीह'आजाती अलह'अम्दु लिल्लाहिल लज़ी ला अदू गैराहू व लौ दा'अवतु गैराहू लम यस्ताजिब ली दुआ'आया व्ल्हम्दू लिल्लाहिल लज़ी ला आरजू गैराहू व लव राजौतू गैराहू ला अख्लाफा राजा-ई व्ल्हम्दू लिल्लाहिल लज़ी व कालानी इलैही-फ़ा-अक्रमानी व लम यकिल्नी इलान नासी फ़ा-युहीऊनी व्ल्हम्दू लिल्लाहिल लज़ी ताः'अब्बबा इल्या व हूवा गणीऊन अन्नी व्ल्हम्दू लिल्लाहिल लज़ी या'लुमु अन्नी हत्ता का-अन्नी ला जंब ली फराब्बी अह'मदु शैइन इंदी व आ हक्कू बिह अमदी अल्लाहुम्मा इन्नी अजीदु सुबुलल मत-अलीबी इलैका मुशरा-अतन व मनाहिलर रजा-ई इलय्का मुत्बा -अ'तनवाल इस्ति-अ'अनता बी-फाज़'लिका लीमन अम्मलाका मुबाह'अतन व अब्वाबद दू'आया-इ इलाय्का लिस'स'आरिखीना मफ्तूह'अत्तान्वा आ'-लमू अन्नाकाब लिर्राजी बी-मावज'ई-ई' इजाबतीं व लिल्म्हूफीना बिमर्स'अदि इगाहथातींन व अन्ना फिल लह्फी इला जूदिका वर रिज़ा बिक़ज़ा - इका ई'वज़"अन मिन मन - ई'ल बाखिलीना व मंदूह'अतन अ'ममा फ़ी अय्दिल मुस्ताज़ेरीना व अन्नर राह'इला इलैका क़रीबुल मसाफतिवा अनका ला ताः'ताजिबू अ'न खल्किका इल्ला अन ताः' जुबहुमुल आ'-मालू दूनाका व क़द कास'अद्तु इलैका बी-ता'लिबती व तावाज्जह्तु इलैका बी-हजजाती व जा-अ'ल्तुबिकास तिघाथाती व बी-दुआ'आ-ईका तावास्सुली मिन गैरिस तिह'काकीन लिस-तिमा-ई'का मिन्नी व लॉस – तीजाबिं ली-अफ्विका अन्नी बल लिथिक़ती बिकरामिका व सुकूनी इल्ला सिद्की वा'-जिका व लजा-ई इलल इ'इमानी मिन्नी अन ला रब्बा ली गैरुका व ला बितौहीदिका व यकीनी बी-मा '-रिफतिका इलाहा ली इल्ला अन्ता वह'दका ला शरीका लका अल्लाहुम्मा अंतल का - इलू व क़व्लुका हक्कुन व वा' – दूका सिद्कुन वस – अलुल्लाहा मिन फ़ज"लिही इन्नाल्लाहा काना बिकुम रहीम व लेसा मिन सिफातिका या सय्यिदी अन तामुरा बिस्सू आली व तमना'अल अतियता व अंतल मनानुल'ल अतिय्याती अला अहली माम्लाकतिका वल अ'अ'इदु अ'लैहीम ताः'अन्नुनी राफतिका इलाही रब्बी तानी फ़ी नि-अमिका व इह्सानिका सघीरण व नव्वाह्ता बिस्मी कबीरण फाई मन रब्बानी फिद- दुन्या बी - इह्सानिही व ताफज्ज़ुलिही व नि - अमिही व आशारा ली फिल आखिरती इल्ला अफ्विही व करामिही मा'रिफती या मव्लाया दलीली अ 'लयका व हुबबी लका शफ़ी-इ इलय्का व अना वासिकुन मिन दलीली बिदालालातिका व साकिनुं मिन शफ़ी-ए इला शफा - अतिका अज़-उका या सय्यिदी बी - लिसानिंन क़द अख्रासहुद'अन्बुहू रब्बी उनाजीका बी-क़ल्बिंन क़द अव्बक़हू जुर्मुहू अद-उका या रब्ब राहिबन रागिबन राजी-अन ख़ा-इफांन ईद-आ-र– आयतु मव्लाया जुनूबी फाज़ीअतू व इदा रा-यातु –करमका तामिया – तू फ़ा'इन आ'फौता फखाय्रू राहेमीन व इन अद-दबता फ़ा-गैरू ज़ालेमीन हुज्जते या अल्लाहु फ़ी जुर'अती अला मस-आलातिका मा-ऐ-इत्तिनी मा तक्रहू जूदुका व कार्मुका व उद-दती फ़ी शिद-दते मा आ-किल्लाती हय्या-ई राफातुकवा रहमतुका व क़द राजौतू अन ला ताखीबा बयना जेनी व जेनी मुन्याती फ़ा-हक्कीक राजा-ई वसमा-दू-आ–ई या खैरा मन दा-आहू दा'इन व अफ्ज़ला मन राजाहू राज्जिन आजुमा या सय्येदी अमाली व सा-अ अमाली फ़ा-आ-तीनी मिन अफ्विनका बी–मिक्दारी अमाली व ला तू-आखिज़'नी बी-अस्वा-ई अ'माली फ़ा-इन्ना करमका यजिल्लू अ'न मुजाजातिल मुद'निबीना व हिल्माका यक्बुरुअन मुकाफातिल मुक़स'स-इरीना व अना या सय्यिदी आ-इदयुं बी फज्लिका हारिबुन मिनका इलैका मुतानाज्जिज़ुन मिनका इलैका मुतानाज्जिज़ुन मा व-अ-दता मिनस मिनस-सफ्हिम्मन अहसना बिका ज़न्नन व मा अना या रब्बी व मा ख़त-अरी हब्नी बी फज्लिका व तसददुक अ-लैय्या - अफ्विका ए रब्बी जल्लिल्नी बी – सत्रिका वा'-फु अन ताव्बीखी बिकरामी वज्हिका फलावित्त-तला अल यौमा अला जंबी गैरूका मा फ़ा-अल्तुहू व लौ खिखिफ्तू ताजीलाल उकूबती लजतन अब्तुहू ला ली–अन्नका अहवानुन नाज़रीन व अखाफ्फुल मुत'तली-ईना अलय्या बल ली–अन्नका या रब्बी खैरूस सातिरीना व अह्कमुल हाकिमीना व अकरामुल अकरामीना सत्तारुल उ'यूबगफ्फारुज़' जुनूबी अल्लामुल गुयूब तस्तुरुद' ज़ानबा बिकरामिका व तू–अख्खिरुल उकूबता बी-हिल्मिका फलाकल हम्दु अला हिल्मिका बा'-दा इल्मिका व अला अफ्विका बा'-दा कुद्रतिका व यह'मिलनी व युजर्री–उनी अ'ला मा'-स'इयातिका ह'ल्मुका अ'नी व यद् - ओ'ओनी इला किल्लातिल ह'या–इ सित्रुका अ'लाय्यावा युसर - उ'नी इलात्तावास्सुबी अ'ला माह'आरिमिका मा'रिफती बीस-अ'टी रह'मतिका व अजीमी अफ्विका या हलीमु या करीमु या हायु या कय्यूम या गाफिराज़'जंबी या क़बिलात्ताव्बी या अजीमल मनन या क़दीमलाह'सांन ऐना सतरुकल जमीलु ऐना अफ्वुकल जलीलू ऐना फराजुकल क़रीबू ऐना गियासु कस्सरी -उ'ऐनल रह'मतुकल वासी-अतू ऐना अतायाकल फाज़िलातु-ऐना मवाहिबुकल हनी–अतु ऐना सना-ई- उकास सनिय्यातु ऐना फ़ज्लुकल अजीमु ऐना मंनुकल जसीमु ऐना इह्सानुकल क्दीमु ऐना करामुका या करीमु बिही व बी-मुहम्मदीन व आले मुहम्मद फस्त अन्कीदनी व बिरहमतिका फखाल्लिस्नी या मुह्सिनू उआ मुजामिलू या मुनीमु या मुफज्ज़िल्लो लस्तु अत्ताकिलू फिन नजाती मिन इकाबिका अला आमालीना बलबी फज्लिका आलैना ली अन्नका तक़वा व अह्लुल मागफि-रती तुब्ज़ी-उ बिल इह्सानी ने'अमान व ताफू आनिज़-ज़नाबी करामन फ़मा नदरी मा नश्कुरू अज्मीला मा तन्शुरु अम क़बीहा मा तस्तुरु अम अजीमा मा अब्लैता व औलैता अम कसीरा मा मिन्हु नाज्जयता व आफय्ता या हबीबा मन ताः'अब्बबा इलैका व या क़ुर्रता ऐनी मन ला ज़ाबिका वान्क़ता-अ-'इलय्का अंतल मुहसिनु व नहनुल मुसी–ऊना फताजावाज़ या रब्बी अन क़बीही मा इन्दाना बी - जमीली मा इनदका व अय्यु जहलिन या रब्बी ला यस - उहू जूदुका औ अय्यु ज़मानिं अत'वलु मिन अनातिका व मा कद्रू आ'–मालिना फ़ी जंबी नि-अमिका व कय्फा नस्ताक्थिरू आ'-मालन नुकाबिलू बिहा करमका बल कैफा याजीकू अलल मुज़'निबीना मा वसी-अ'हम मिन रह'मतिका या वासी -अ'ल मागफिरती या बासित'अल यदैनी बीर रह'मती फवा - ई'ज्ज़तिका या सय्यिदी लौ नह्र्तनी मा बरिह'तू मिन बाबिका व ला कफफ्तु अन तमाल्लुकिका लिमंताहा इल्या मिनल मारिफती बी -जूदिका व करामिका व अंतल फा-इलू लीमा तशा–उ तू -अदद'इबु मन तशा-उ बिमा तशा - उ कैफा तशा-उ व तरह'अमु मन तशा - उ बीमा तशा - उ कैफा तशा - उ ला तुस - अलु 'न फिया' - लिका व ला तुनाज़ा - उ'फ़ी मुल्किका व ला तुशाराकू फ़ी अमरीका व ला तुज" आअद्दु फी हुक्मिका व ला या'-तरिज़ "उ'-अ'लयका अहादुन फी तदबीरिका लकल ख़लकु वल अमरु तबाराकल्लाहू रब्बुल आलमीन या रब्बी हाजा मकामु मन ला जाबिका वास्ताजारा बिकरामिका व अलिफा इह्सानका व नि-अमका व अंतल जवादुल लज़ी ला याजीकु अफ्वुका व ला यान्कुसू फ़जलुका व ला ताकिल्लू रह'मतूका व क़द तावासक्ना मिनका बीससफ्हिल क़दीमी वल फजलिल अजीमी वर रह'मतिल वासी -अती अफातुराका या रब्बी तुख्लिफु ज़ुनूनाना औ तुखाय्यिबू आमालना कल्ला या करीमु फलय्सा हाज़ा ज़न्नुना बिका व ला हाज़ा फीका त'अम - उ'ना या रब्बी इन्ना लाना फीका अमलां त'अवीलन कसीरन इन्ना लना फीका रजा – अन अ'ज़ीमन अस' अय्नाका व नह'नु नर्जू अन तस्तुरा अलैना व दा-औनका व नह'नु नर्जू अन तस्ताजीबा लना फः'अक्किक राजा – अना मव्लाना फकाद आलिमना मा नस्ताव्जिबू बी-आ'–मालिना वालाकिन इल्मुका फीना व इल्मुना बी-अन्नका ला तस'रिफुना अ'नका व इन कुन्ना ग़ैरा मुस्ताव्जिबीना लिरह'मतिका फ़ा–अन्ता अहलूंन अन ताजूदा अलैना व अलल मुद'निबीना बी-फज्लिसा -अतिका फम्नुन अ'लेना बिमा अन्ता अहलुहू वजूद अलैना फ़ा–इन्ना मुह'ताजूना इला नय्लिका या गफ्फारु बिनूरी कह्तादय्ना व बिफज़"लिक्स ताग्नय्ना व बी-निया'मतिका अस'बह'ना व अम्सय्ना ज़ुनूबुना बयना यदैका नस्ताग्फिरुका अल्लाहुम्मा मिन्हा व नातूबू इलैका ततः'अब्बाबू इलेना बिन नि-अ'मिवा नु - अ'अरिज"उका बिज़' ज़'उनूबी खाय्रुका इलेना नाज़िलूं व शर्रुना इलय्का सा - इदुन वलं याज़ल व ला याजालू मलकुं करीम यातीका अन्ना बी-अमली क़बीह'इन फ़ा ला यमन उ'का जालिका मिन अन ताः'वूत'अना बी-नि-आमिका व तताफज़" ज़ला अलय्ना बी - आला – ईका फ़ा - सुभ'आनाका मा मुब्दी - अन अह'लामका व आ'-ज़'अमका व अक्रमाका व मु - इ'इदं ताक़द्दसत अस्मा – उका व जल्ला सना–उका व करुमा स'अना-ई- उ'कावा फी-अ'अलुका अन्ता इलाही औसा -उ; फ़ज"लन व आ'ज़मु हिलमन मिन अन तुकाय्सिनी बी- फिया'–ली व खतीए-अती फल अफ्वल अफ्वल अफवा अक्रमाका व मुइ'एदंन तकाद दसत अस्मा–उका व जल्ला सना–उका व करुमा सना-ई-उ'कावा फी-आलुका अन्ता इलाही औसा-उ'फज्लन व अजामू हिलमन मिन अन तुकायासिनी बी-फिया'ली व खतीए-अती फल अफ्वल अफ्वल अफवा सय्यिदी सय्यिदी सय्यिदी अल्लाहुम्माश गलना बी-ज़िक्रिका व अ-ईद'ना मिन सखातिका व अजिरना मिन अदाबिका वर ज़ुक्ना मिन मवाहिबिका व अन-इमा'लेना मिन फज्लिका वार्ज़ुक्ना हज्ज बय्तिका व जियारत काबरी नाबिय्यिका सलावातुका व रहमातुका व मग्फिरातुका व रिज्वानुका अलैहि व अला अहलिल्बैती इन्नका क़रीबुन मुजीबुन वार्ज़ुक्ना अमलांन बिता-अतिका व तौअफ्फना अला मिल्लातिका व सुन्नती नाबिय्यिका सल्लल्लाहु अलैहि व आलीही वली वालिदय्या वरः'अम्हुम्मा कमा रब्बा यअनी सगीरा इज्ज़िहिमा बिल-इह'सानी इह'सानंन व बिस्सय्यी–आती गुफ्राना अल्लाहुम्माग्फिर लील-मू-मिनीना व मू-मिनातिल अह'या – इ मिन्हुम वल अम्वातिवा तबिया' - बय्नाना व बय्नाहुम बिल खाय्राती अल्लाहुम्माग्फिर लिह'अय्यिना व माय्यितिना व शाहिदिना व गाइबीना ज़किरना व उन्थाना सगीरिना व कबीरिना हुर्रिना व माम्लूकिना कदिबल आदिलूना बिल्लाहि व ज़'अल्लू ज़लालन बइदंन व खसरू खुस्रानन मुबीना अल्लाहुम्मा सल्ली-अला मुहम्मदीन व आले मुहम्मदीन वाख्तिम ली बैनाहुम खाल्लाय्तनी अव ला – अल्लाका लम तुहिब्बा अन्तास्मा - आज़ू- आ'आअ-ई फबा अज़्तनी औ ला अल्लाका बिजुर्मे व जरीरते काफैतनी औ ला - अल्लाका बिकिल्लाती हया–मिनका जाज़ितनी फ़ा–इन अ'फौ या रब्बी फत'आला मा अ'फौता अ'निल मुज़'निबीना काबली ली-अन्ना करमका ए रब्बी यजिल्लू अ'न मुकाफातिल मुक़स'इरीना व अना आ-ईद'उन बी-फ़ज्लिका हारिबुन मिनका इलैका मुतानाज्जिज़ुन मावा-अद्ता मिनस' सफ्ह'ई अ'ममन अहसना बिका ज़ा'अन्ना इलाही अन्ता औसा-उ'फज्लन व आ'-ज़'अमु ह'इल्मान मिन अन तुकायिसनी बी-अमाली औ अन तस्ताज़िल्लानी बिखतीए–अती व मा अना या सय्यिदी व मा खातरी हब्नी बी-फ़ज्लिका सय्यिदी व तसददुक आल्या बी-अफ्विका व जल्लिल्नी बी-सित्रिका वा'फु अन ताव्बीखी बी-कर्मी वज्हिका सय्यिदी अनस' स'अगीरुल लज़ी रब्बय्ताहू व अनल जाहिलुल लज़ी अल्ला म्ताहू व अनाज" ज़ाल्लुल लज़ी हदय्ताहू व अनल वज़"ई-उल लज़ी रफा-उल लाजे ख़ा-इफुल लज़ी आमन्ताहू वल जाई-उल लज़ी अश्बा'–तहुवल अ-त-शानुल लज़ी अरवैताहू वल आरिल लज़ी कसव्ताहू वल फजीरुल लज़ी अग्ना य्ताहू वज़:ज़"अ-इ'एफुल लज़ी क़व्वैताहू वद'दलीलुल लज़ी आ'-ज़ज्ताहू वस सकीमुल लज़ी शाफैताहू वस सा-इलुल लज़ी आ'-त'अय्ताहुवल मुद'निबुल लज़ी सतार्ताहू वल खात'ई-उल लज़ी अक़ल्ताहू व अनल क़लीलुल लज़ी कथ्थार्ताहू वल मुस्तज़-अ'फुल लज़ी नस'अर्ताहू व अनत'त'अरीदुल लज़ी आवाय्ताहू अना या रब्बिल लज़ी लम असतः'यिका फिल खाला – इ व लम उराकिबका फिल माला - ई अना स'आह'इबुद दवाहिल उ'ज़'मा अनल लज़ी अ'ला सय्यीदीहिज्तारा अनल लज़ी अ'स'आयतु जब्बारस समा–इ अनल लज़ी आ'-त'अय्तुआ'ला मा-अ'अस'ईल जलीलिर रुषा अनल लज़ी ह'इना बुश्शिर्तु बिहा खराज्तु इलाय्हा अस-अ'अ अनल लज़ी अम्हाल्तनी फमर अ'वैतु व सतर्ता अ'लाय्या फमस ताः'यय्तुवा अ'मिल्तु बिल मा-अ'अस'ई फता-अद दैतु व अस्क़त'तनी मिन अ'य्निका फ़मा बालाय्तु फबिः'इल्मिका अम्हाल्तनी व बिसित्रिका सतर्तनी ह'अत्ता का–अनका अग्फल्तनी व मिन उ'कूबातिल मा-अ'अस'ई जन्न्ब्ताने ह'अत्ता का–अन्नाकास ताः'यय्तनी इलाही लम आ'स'ईका हा'इना आ'सैतुका व अना बिरुबूबी य्यातिका जाह'इदुन व ला बी- अम्रीका मुस्ताखिफुन व ला ली-उ'कूबतिका मुता-अ'र्रिज़"उन व ला लिवा-इ'एदिका मुताहाविनुन लाकिन ख़त'यी–आतून अ'रज़"अत व सव्वालत ली नफ्सी व गलाबनी हवाय व अ-अ'अनानी अ 'लय्हा शिकवती व गर्रनी सित्रुकल मूर्खा अ'लाय्या फकाद अ'स'अय्तुका व खालाफ्तुका बिजुह्दी फल–आना मिन अ'दाबिका मन यस्तान्किद'उनी व मिन अय्दिल खुस'अमा–ई गदन मन युखाल्लिस' उनी व बी-ह'अबली मन अतस'स'इलू इन अन्ता क़त'आ'-ता ह'अब्लाका अ'ननी फ़ा-वा-सव–अता अ'ला मा अह'स'आ किताबुका मिन अ'मलिल लज़ी लव ला-मा आरजू मिन करामिका वसा-अ'ती रहमतिका व नहयीका इय्याया अ:निल क़ुनूत'इ लाक़नत' ई'नदा मा अतद'अक्कारुहा या ख्यरा मन दा-अ'अहू दा-ई'न व अफज़"अला मन राजाहू राजिन अल्लाहुम्मा बिड'इम्मतिल इस्लामी अतावास्सालू इलय्का व बिह'उर्मतिल कुरानी आ'-तमिदु इलय्का व बिह'उब्बिन नाबिय्यल उ'म्मिय्यल कुराशिय्यल हाशिमिय्यल अ'रबिय्यत तिहामिय्यल मक्किय्यल मदनिय्य अर्जुज़ ज़ुल्फाता लादयका फला तुव्ह'इशिस–तीनासा इ'इमानी व ला ताज-अ'ल सवाबी सवाबा मन अ'बदा सिवाका फ़ा-इन्ना क़व्मन आमनू बी–अल्सिनातिहीम लियाः'कीनू बिही दिमा–अहम फ़ा-अद्रकू मा अम्मालू व इन्नाअ आमन्नाबिका बी-अल्सिनातिना व कुलूबिना लिता'–फुवा अ'नना फ़ा-अद्रिकना मा अम्मलना व सब्बित राजा-aka फी स'उदूरिना व ला तुज़िग कुलूबना बा'-दा ईद'हद्य्तना व हब लना मिन लादुनका रह'मतन इन्नका अन्तल वह्हाबू फवा-ई'ज्ज़तिका लिवन तहर्तनी मा बिरह'तू मिन बाबिका व ला कफफ्तु अ'न तमाल्लुकिका लीमा उल्हिमा क़ल्बी मिनल मा'–रिफाती बिकरामिका वसा-अ'ती रहमतिका इला मन याज्हबुल अब्दु इल्ला इला माव्लाहू व इला मन याल्ताजी–उल मख्लूकु इल्ला इला खालिकिही इलाही लौ क़रन्तनी बिल अस'फादी व मना'-तनी सय्बक मिन बय्निल अश्हादी व दलालता अला फ़ज़ा-इही उयूनल इबादी व अमरता बी इलन नारी व हलता बेनी व बय्नल अब्रारी मा कत'आ'–तू राजा-ई मिनका व मा स'अरफ्तु तामीली लीला'फ्वी अनका व ला खारजा हुब्बुका मिन क़ल्बी अना ला अन्सा अयादियाका इंदी व सतर्क आल्या फी दारिद दुन्या सय्यिदी अख्रिज हुब्बाद दुन्या मिन क़लबे वज-मा'-बयनी व बय्नल मुस'ताफा व आलिहि खियारातिका मिन खल्किका व खातामिन नाबिय्यीना मुह'अम्मदीन स'अल्लाल्लाहू अ'लेही व आलिहि वान्कुल्नी इला दराजतित ताव्बतीलायका व अ-ई'ननी बिल बुका-ई अ'ला नफ्सी फकाद अफ्नाय्तु बित्तास्वीफी वल अमाली उमरी व क़द नाज़लतू मंज़िलातल आयिसीना मिन खेरी फ़मन यकूनू अस्वा-अ ह'आलन मिन्नी इन अना नुकिलतू अला मितली हाली इला काबरी लम उम्हहिधु लिराक्दाती व लम अफ्रुश्हू बिल अ'मालिस' स'आलिह'इ लिज़"अज-अ'ती व मा ले ला अबकी व ला अद्री इला मा यकूनू मस'ईरी व अरा नफ्सी तुखादी-उ'नी व अय्यामी तुखातिलुनी व क़द खाफकात ई'नदा रासी अज्निः'अतुल मौती फ़मा ली ला अबकी अबकी लिखुरूजी नफ्सी अबकी लिज़'उल्मती काबरी अबकी लिज़"इकी लज़ी अबकी लिसू-आली मुनकरिन व नकीरिन इय्याया अबकी लिखुरूजी मिन काबरी उर्यानन दलीलन हामिलन सीक्ली अला ज़हरी अन्जुरु मर्रतन अन यामिनी व उखरा अन शिमाली ईद'ईल खला-इकु फी शानिन गैरी शानी लिकुल्ली अमरी-इन मिन्हुम युमा-ईद'इन शानुन युग्नीही वुजूहून यौमा-ईद'इन मुस्फिरातुन ज़ाह'इकातुन मुस्ताब्शिरातुन व विज्जूहून युमा-ईद'इन अलैहा गैबारतुन तर्हकुहा क़तारातुन व ज़िल्लातुन सय्यिदी अलैका मु-अव्वली व मुआ'-तमाज़ी व राजा-ई व ता वक्कुली व बी- रहमतिका ता-अल्लुक़ी तुसीबू बिरहमतिका मन तशा-उ व तहजी बिकरामतिका मन तुहिब्बू फलाकल हम्दु अला मा नाक्क़िता मीनाश शिरकी क़ल्बी व लकल हम्दु अला बस्ती लिसानी अफाबी-लिसानी हा'ज़ल काल्ली अश्कुरुका अम बिगायाती जहदी फी अमाली उर्ज़ीका व मा क़द्रू लिसानी या रब्बी फी जन्बी शुक्रिका व मा क़द्रू अमाली फी जन्बी नि-आमिका व इह्सानिका इल्या इलाही इन्नाअ जूदाका बसत'अ अमाली व शुक्रका क़बिला अमाली सय्यिदी इलैका राग्बती व इलय्का रह्बती व इलय्का तामीली व क़द साक़नी इलय्का अमाली व अलयका या वाहिदी अकाफत हिम्मती व फीमा इनदाकन-बसत'अत रगबती व लका खालिसुर रजा-ई व खौफी व बिका अनिसत महब-बती व इलय्का अल्कैतु बी-यादी व बिह'अब्लित'आ-अतिका मदद्तु रह्बती या मौलाया बिद'इक्रिका अ'अशा क़ल्बी व बी–मुनाजातिका बर-राद्तू अलमल खौफी अन-नी फ़ा-या मौलाया व या मू-अम्मली व या मुन्तहा सूली फर्रिक बयनी व बयना ज़ंबियल मानी-ई'ली मिन लुजूमि त'आ-अ'टिका फ़ा-इन्नमा अस–अलुका लि'क़दीमीर रजा–इ फीका व अ'ईमित' त'अम-ई' मिन्कल लज़ी औजब्ताहू अ'ला नफ्सिका मिनर राफाती फल-अमरु लका वह'दका ला शरीका लका वल खल्कु कुल्लुहुम ई'यालुका व फीकब्ज़:" अतिका व कुल्लू शय-इन खाज"ई-उ'न लका तबाराकता व ता- अ'अलायता या रब्बल अ'अलामीन इलाहिर-ह'अमनी ईद'अन-क़त'-अत हुज्जती व कल्ला अन जवाबिका लिसानी व त-आशा इन्दा सू– आलिका इय्याया लुब्बी फया अज़'इमा राजा-ई-ला तुखाय्याब्नी ईद'अश-तद्दत फाक़ती व ला तरुद्दनी लिजहली व ला तमना'–नी लिकिल्लाती स'अबरी आ'-त'इनी लिफक्री व अर्हम्नी लिज़"आ' – फी सय्यिदी अलयका मुआ'-तमादी व मु-अव्वली व रजा-ई व ताव्क्कुली व बिरहमतिका ता'अल्लुक़ी व बि-फिनाईका अह'उत'त'उ रह'ली व बिजूदिका अक्स'इदु तालिबती व बिकरामिका ए रब्बी अस्ताफ्तिः'उ दुआ'आ-ई व लादयका अर्जूफाक़ती व बिगिनाका अज्बुरु अ'य्लती व ताः'त जिल्ली अफ्विका कियामी व इला जूदिका व करामिका अरफा-उ' बस'अरी व इला मा'-रूफिका उदीमु नज़'अरी फला तुह'रिक्नी बिन्नारी व अन्ता मावज''ई-उ' अमाली व ला तुस्किन्निल हावियता फ़ा-इन्नका कुर्रतु अ'यनी या सय्यिदी ला तुकज़'ज़िब ज़'अन्नी बी-इह'सानिका व मा'-रूफिका फ़ा-इन्नक ज़िक़ती व ला ताः'रिम्नी सवाबका फ़ा-इन्नाकल अ'अरिफु बिफक्री इलाही इन काना क़द दाना अजली व लम युक़र्रिब्नी मिनका अ'माली फकाद जा-अ'ल्तुल इया'-तिराफा इलय्का बिज़'अंबी वसा-इला ई'लाली इलाही इन अ'फावता फ़मन अवला मिनका बिल अ'फ्वी व इन अ'द'द'अबता फ़मन आ'-दलु मिनका फिल ह'उक्मिर-ह'अम फी हाद'इहिद दुन्या गुर्बती व ईनदा मौती कुर्बती व फिल क़ब्री वह'दती व फिल लज़ी वहशती व इज़'आ नुशिर्तु लील हिसाबी बयना यदायका जुल्ला मौकिफी वग़'फिरली मा खफिया अलल आदमिय्यीना मिन अमाली व अज़ीम ली मा बिही सतर्तनी वर-हमनी सारी-अयन अलल फिराशी तुक़ल्लिबुनी अय्दी अह'इब्बती व ताफाज़''ज़''अल अ'लाय्या माम्दूदन
अ'लल मुग्तासल त्य्क़ल्लिबुनी सालीह'उ जीरती व ताः'अन्नान अ'लाय्या माह'मूलं क़द तानावालाल अक्रिबा-उ अत'राफा जिनाज़ती वजूद अ'लाय्या मंकूलन क़द नाज़लतू बिका वहीदन फी हुफ्रती वरहम फी ज़ालीकल बय्तिल जदीदी गुर्बती हत्ता ला अस्तानिसा बिगय्रिका या सय्यिदी इनवाकल्तनी इला नफ्सी ह'अलकतु सय्यिदी फबिमन अस्तागीत्हू इन लम तुकिल्नी अथ्रती फ़ा-इला मन अफज़ा-उ' इन फक़ज्तु ई'नायाताका फी ज़''अज-अ'ती व इला मन अल्ताजी-उ इन लम तुनफफिस कुर्बती सय्यिदी मन ली व यारह'अमुनी इन लम त'रह'अमनी व फ़ज''ला मन उ-अम्मिलू इन अ'ज़िम्तु फ़ज''लका यौन फाक़ती व इला मनिल फिरारु मीनाद' जुनूबी इज़'अन-क़ज़''आ अज़ली सय्यिदी ला तू-अ'ज़'ज़िब्नी व अना अर्जूका इलाही हक्कीक रजा-ई व आमीन खौफ़ी फ़ा-इन्ना कतराता जुनूबी अरजू फीहा लहा इल्ला अ'फ्वाका सय्यिदी अना अस-अलुका मा ला असतः'इक्कू व अन्ता अह'लूत तक़वा व अहलुल मग्फिरती फग्फिर्ली व अल्बिस्नी मिन नज़ अरिका सुबान उगत'त'ई व ताग्फिरू-हा ली व ला उत'आलबू बिहा इन्नका द'उ-मननीं क़दीमिन व स'अफ्ह'इन अ'ज़ 'ईमिन व ताजावुज़ीं करीमिन इलाही अन्तल लज़ी तफीज़'उ सय्बका अ'ला मन यस-अलुका व अ'लल जाह'इदीना बिरुबूबिय्यातिका फकय्फा सय्यिदी बिमान सा-अलका व अय्काना अन्नल कल्क़ा लका वल अम्र इलय्का तबाराकता व त-अ'अलायता या रब्बल अ'अलामीना सय्यिदी अ'ब्दुका बिबाबिका अकामत-हल खास'आस'अतु बयना यदायका यकर-उ' बाबा इह'सानिका बिदुआ'आ-इही फला तुआ'-रिज़'' बिवाज्ह'इकल करीमी अ'ननी वक्बल मिन्नी मा अक्वूलू फ़क़द ज़ा-अ'वतु बिहाद'अद दू-अ'आ-ई व अना अरजू अन ला तुराददानी मा'-रिफतन मिन्नी बिराफतिका व रह'मतिका इलाही अन्तल लज़ी ला यूह'फीका सा-इलुन व ला यांकुस'उका ना-इलुन अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका स'अबरन जमीलन व फरजन करीबन व कोलन स'आदिकान व अर्जन अ'ज़'इमान अस-अलुका या रब्बी मिनल खैरी कुल्लिही मा अ'लिम्तु मिन्हु व मा लम आ'-लमू अस-अलुकल-लाहुम्मा मिन खैरी मा सा-अलुका मिन्हु ई'बादुकास' स'आलिह 'ऊना या खैरा मन सु-इला व अज्वादा मन आ'-त'आ आ'-त'इनी सू-ली फी नफ्सी व अहली व वालिदिय्या व वल्दी व अहली ह'उजानाती व इख्वानी फीका व अर्गिद अ'यशी का अज़'हीर मुरुव्वाती व अस'लिह'जमी-अ' अह'वाली वज-अ'लनी मिम्मान अत'अलता उ'मरहू व ह'अस्संता अ'मलहू व अत्ममता अ'लेही निया'-मटका व रज़''ईता अ'न्हु व अह'यय्ताहू ह'आयातन त'अय्यिबतन फी अदवामिस सूरूरी व अस्बागिल करामाती व अताम्मिल अ'यशी इन्नका तफ-अ'लू मा तशा-उ व ला यफ-अ'लू मा यशा-उ गैरुका अल्लाहुम्मा खुस'स'अनी मिनका बिखास'स'अति ज़िक्रिका वला ताज-अ'ल शय-अन मिम्मा अताक़र्राबू बिही फी अना-ईल लयली व अत'राफिन नहारी रिया-अन व ला सुम-अ'तन व ला अशरण व ला बत'अरण वज-अ'लनी लका मिनल खाशी-इ'इन अल्लाहुम्मा आ'-त'इनिस सा-अ'त फिर्रिज्की वल अमन फिल वत'अणि व कुर्रतल अ'यनी फिल अहली वल माली वल वालादी वल मुकाम फी नि-अ'मिका ई'नदी वस'स'इह'ह'अत फिल जिस्मी वल कुव्वत फिल बदानी वस सलामत फिददीनी वास्ता'-मिलनी बीत'आ-अ'तिका व त'आ-अ'ती रसूलिका मुह'अम्मदीन स'अल्लाल्लाहू अ'लेही व आलिहि अबादान मा इस्ता'-मर्तनी वज-अ'लनी मिन अव्फारी ई'बादिका ई'इन्दाका नस'इबन फी कुल्ली खायरिन अन्ज़ल्ताहू व तुन्ज़िलुहू फी शहरी रमज़''आना फी लाय्लातिल कादरी व मा अन्ता मंज़िलुहू फी कुल्ली सनातिन मिन रह'मतीन तन्शुरुहा व अ'अफियातिन तुल्बिसुहा व बलिय्यातींन तदफा-उ'हा व ह'असनातीं ताताक़ब्बलुहा व सय्यी-आतिन ताताजावाजु अ'नहा वार्ज़ुक्नी हज्ज बय्तिकल हरामी फी आमिना हाज़ा व फी कुल्ली आमीन वार्ज़ुक्नी रिज्क़ं वासी-अन मिन फाजलिकल वासी-ई'वस'रीफ अन्नी या सय्यिदिल अस्वा-अ वक्ज़''ई अ'निद दय्ना वज़'ज़ुलामाती हत्ता ला अत-अज़'ज़ा बिषय-इन मिन्हु व खुद'अन्नी बी-अस्मा-ई'व अब्सारी आ-ज़ा-ई व ह'उस्सादी वल बाघीना अ'लाय्या व अन्सुरनी अलैहिम व अकिर्रा ऐनी व फर्रिः'कालबी वज-अल ली मिन हम्मी व कर्बी फरजन व मख्राजन वज-अलमन अरादानी बिसू-इन मिन जमी-ई' खल्किका तह'ता क़दम्या वक्फिनी शर्राश शैतानी व शर्रस सुल्तानी व सय्यी-आती अ'माली व तःहिरनी मीनाद जुनूबी कुल्लिहा व अजिरनी मिनन नारी बी-अफ्विका व अद्खिल्निल जन्नता बिरहमतिका व ज़व्विज्नी मिनल हूरिल इनी बिफज्लिका व अल्हिक्नी बी औलिया-इकस सालिहीना मुहम्मदीन व आलिहिल अब्रारित तय्यिबीनत ताहिरीनल अख्यारी सलावातुका अलय्हीम व अला अज्सादिहीम व अर्वाहिहीम व रहमातुल्लाही व बरकातुह इलाही व सय्यिदी व इज्ज़तिका व जलालिका ला-इन तालाब्तनी बिज़ुनूबी ला उतालिबन्नाका बी अफ्विका व ला-इन तालाब्तनी बिलू-मी ला-उत'आलिबन्नाका बिकरामिका व ला-इन अद्खाल्तानिं नारा ला-उख्बिरान्ना अहलन नारी बी-हुबबी लका इलाही व सय्यिदी इन कुन्ता ला ताग्फिरू इल्ला ली-अवलिया-ईका व अहली त'आ-अ'तिका फ़ा-इला मन याफ्ज़ा-उ'ल मुज़'निबूना व इन कुन्ता ला तुक्रिमु इल्ला अहलाल वफा-ई बिका फबिमन यस्तागीथुल मुसी-उना इलाही इन अद्खाल्तानिन नारा फाफी जालिका सुरूरू अदूव्विका व इन अद्खाल्तानिल जन्नता फाफी जालिका सुरूरू नाबिय्यिका व अना वाल्लाही आ'-लमू अन्ना सुरूरा नाबिय्यिका अह'अब्बू इलय्का मिन सुर्रोरी अदुव्विका अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका अन तम्ला-अ कालबी हुब्बन लका व खाश्यतन मिनका व तस्दीकान बिकिताबिका व ईमानन बिका व फराक़ंन मिनका व शाव्कान इलय्का या ज़ल्जलाली वल इक्रामी ह'अब्बिब इल्या लिक़ा-अsक़ा व अह'बिब लिक़ा-ईकर राह'अता वल फरजा वल करामात अल्लाहुम्मा अलह'इकनी बी-स'आलिह'ई मन मज''आ वज-अ'लनी मिन स'आलिह'इ मन बकिया व खुद'बी सबीलास'स'आलिह'इना व अ-ई'ननी अ'ला नफ्सी बिमा तू-इ'एनु बिहिस'स'आलिह'इना अ'ला अन्फुसिहीम वाख्तिम अ'माली बी-अह'सनिही वज-अ'ल सवाबी मिन्हुल जन्नता बिरह'मतिका व अ-ई'ननी अ'ला स'आलिहि'ई मा आ'-त'अय्तनी व सब्बितनी या रब्बी व ला तरुद'दनी फी सोऊ-इस-तन्क़द्तनी मिन्हु या रब्बल आलमीन अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका ईमानन ला अजला लहू दूना लिक़ा-ईका अह'यिनी मा अह'यय्तनी अ'लेही व तावाफ्फानी इज़ा तावाफ्फय्तनी अलय्ही वाब-अ'थनी इज़ा ब-अ'थ्तनी अलय्ही व अबरी-क़ल्बी मिनार रिया-ई वाश्शाक्की वास्सुम-अ'ती फी दीनिका हत्ता यकूना अमाली खालिसन लका अल्लाहुम्मा आ'-त'इनी बस'ईरातन फी दीनिका व फह्मन फी ह'उक्मिका व फिक्हन फी ई'ल्मिका वाकिफ्लाय्नी मिन रहमतिका व वारा-अन यह'जुज़ुनी अन मा-अ'अस'इका व बय्यिज़" वजही बिनूरिका वज-अल रगबती फीमा इन्दाका व तावाफ्फानी फी सबीलिका व अला मिलाती रसूलिका सल्लल्लाहु अलय्ही व आलीही अल्लाहुम्मा इन्नी अ-उ'-ज़ुबिका मिनल कसली वल फशाली वल हम्मी वज जुबिन वल बुख्ली वल गफलती वल क़स्वती वल मस्कनती वल फकरी वल फाकाती व कुल्ली बलिय्यातीं वल फ़वाह'इशी मा ज़'अहारा मिन्हा व मा बत'अना व अ-उ'-ज़ुबिका मिन नफ्सिंन ला तकना-उ'व बत'नीं ला यश्बा-उ' व क़ल्बिं ला याख्षा-उ'व दू-अ'आ-ई युस्मा-उ'वा'मलिन ला फंया-उ' व-अ-उ'-ज़ुबिका या रब्बी अला नफ्सी व दीनी व माली व a'ला जमी-इमा राज़कतनी मीनाश शैतानिर राजीम इन्नका अंतस समी-उल-अलीम अल्लाहुम्मा इन्नाहु ला युजीरुनी मिनका अहादुन व ला अजिदु मिन दूनिका मूलतः'अदन फला तज-अल नफ्सी फी शैइन मिन अज़ाबिका व ला तरुददानी बिहालाकतींन व ला तरुद-दनी बी-अजाबिंन अलीम अल्लाहुम्मा ताक़ब्बल मिन्नी व आ'-लिज़'ज़िकरी वार्फा'-दराजाती व हत्ता विज्री व ला ताज्कुरनी बिखत'ई-अती वज-अल-सवाबा मजलिसी व सवाबा मंतिकी व सवाबा दुआ-आ-ई रिज़"आका वन अल जन्नता व आ'-तिनी या रब्बी जमी-अ मा सा-अल्तुका व ज़िदनी मिन फज्लिका इन्नी इलय्का रागिबुन या रब्बल आलमीन अल्लाहुम्मा इन्नका अन्ज़लता फी किताबिका अन ना'-फुवा अम्मान ज़लामाना व क़द ज़लामना अन्फुसना फा'-फु अ'नना फ़ा-इन्नका अवला बिज़ालिका मिन्ना व अमर्तना अन ला नरूद'दा सा-इलन अन अब्वाबिना व कज्जी-तुका सा-इलन फला तरुज़नी इला बि'क़ज़ा-ई ह'आजाती व अमर्तना बी इह्सानी इला मा मलाकत अय्मानुना व नह'नु अरिक्का-उका फ़ा-आ'-तिक रिकाबना मिनन नार या मफ्ज़ा-ई इन्दा कुर्बती व या गव्सी इन्दा शिद-दती इलय्का फ़ज़ा'-तुवा बिकस-तागास्तु व लुज्तु ला आलूद'उ बिसिवाका व ला अत्लुबुल फरजा इल्ला मिनका फ़ा-अगिस्नी व फर्रिज अन्नी या मन याफुक्कुल असीर व या-फू अ'निल कह्तीरी इक्बल मिनिल यासीर वा'-फु अ'निल कसीरा इन्नका अंतर रहीमुल गफूर अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका ईमानन तबाशिरू बिही क़ल्बी व यकीनन सादिकान हत्ता आ-लमू अन्नाहू लन युसीबनी इल्ला मा कताब्ता ली व रज़"ज़"इनी मिनल यशी बिमा कासमत ली या अर्ह'अमर राहिमीन.

अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन वा आले मोहम्मद

 

إِلٰهِي لاَ تُؤَدِّبْنِي بِعُقُوبَتِكَ

وَلاَ تَمْكُرْ بِي فِي حِيلَتِكَ

مِنْ ايْنَ لِيَ ٱلْخَيْرُ يَا رَبِّ

وَلاَ يُوجَدُ إِلاَّ مِنْ عِنْدِكَ

وَمِنْ ايْنَ لِيَ ٱلنَّجَاةُ

وَلاَ تُسْتَطَاعُ إِلاَّ بِكَ

لاَ ٱلَّذِي احْسَنَ ٱسْتَغْنَىٰ عَنْ عَوْنِكَ وَرَحْمَتِكَ

وَلاَ ٱلَّذِي اسَاءَ وَٱجْتَرَا عَلَيْكَ

وَلَمْ يُرْضِكَ خَرَجَ عَنْ قُدْرَتِكَ

फिर एक सांस में जितनी मर्तबा कह सकते हैं कहे

يَا رَبِّ …

फिर कहे

بِكَ عَرَفْتُكَ

وَانْتَ دَلَلْتَنِي عَلَيْكَ

وَدَعَوْتَنِي إِلَيْكَ

وَلَوْلا انْتَ لَمْ ادْرِ مَا انْتَ

الْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي ادْعُوهُ فَيُجِيبُنِي

وَإِنْ كُنْتُ بَطِيئاً حِينَ يَدْعُونِي

وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي اسْالُهُ فَيُعْطِينِي

وَإِنْ كُنْتُ بَخِيلاً حِينَ يَسْتَقْرِضُنِي

direction: rtl; unicode-bidi: embed;"> وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي انَادِيهِ كُلَّمَا شِئْتُ لِحَاجَتِي

وَاخْلُو بِهِ حَيْثُ شِئْتُ لِسِرِّي بِغَيْرِ شَفِيعٍ

فَيَقْضِي لِي حَاجَتِي

الْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي لاَ ادْعُو غَيْرَهُ

وَلَوْ دَعَوْتُ غَيْرَهُ لَمْ يَسْتَجِبْ لِي دُعَائِي

وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي لاَ ارْجُو غَيْرَهُ

وَلَوْ رَجَوْتُ غَيْرَهُ َلاخْلَفَ رَجَائِي

وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي وَكَلَنِي إِلَيْهِ فَاكْرَمَنِي

وَلَمْ يَكِلْنِي إِلَىٰ ٱلنَّاسِ فَيُهِينُونِي

وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي تَحَبَّبَ إِلَيَّ

وَهُوَ غَنِيٌّ عَنِّي

وَالْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي يَحْلُمُ عَنِّي

حَتَّىٰ كَانِّي لاَ ذَنْبَ لِي

 فَرَبِّي احْمَدُ شَيْءٍ عِنْدِي

وَاحَقُّ بِحَمْدِي

اَللَّهُمَّ إِنِّي اجِدُ سُبُلَ ٱلْمَطَالِبِ إِلَيْكَ مُشْرَعَةً

وَمَنَاهِلَ ٱلرَّجَاءِ لَدَيْكَ مُتْرَعَةً

وَٱلاِسْتِعَانَةَ بِفَضْلِكَ لِمَنْ امَّلَكَ مُبَاحَةً

وَابْوَابَ ٱلدُّعَاءِ إِلَيْكَ لِلصَّارِخِينَ مَفْتُوحَةً

وَاعْلَمُ انَّكَ لِلرَّاجِين بِمَوْضِعِ إِجَابَةٍ

وَلِلْمَلْهُوفِينَ بِمَرْصَدِ إِغَاثَةٍ

وَانَّ فِي ٱللَّهْفِ إِلَىٰ جُودِكَ

وَٱلرِّضَا بِقَضَائِكَ

عِوَضاً مِنْ مَنْعِ ٱلْبَاخِلِينَ

وَمَنْدُوحَةً عَمَّا فِي ايْدِي ٱلْمُسْتَاثِرِينَ

وَانِّ ٱلرَّاحِـلَ إِلَيْكَ قَرِيبُ ٱلْمَسَافَةِ

وَانَّكَ لاَ تَحْتَجِبُ عَنْ خَلْقِكَ

إِلاَّ انْ تَحْجُبَهُمُ ٱلاعْمَالُ دُونَكَ

وَقَدْ قَصَدْتُ إِلَيْكَ بِطَلِبَتِي

وَتَوَجَّهْتُ إِلَيْكَ بِحَاجَتِي

وَجَعَلْتُ بِكَ ٱسْتِغَاثَتِي

وَبِدُعَائِكَ تَوَسُّلِي

مِنْ غَيْرِ ٱسْتِحْقَاقٍ لاﹾِسْتِمَاعِكَ مِنِّي

وَلاَ ٱسْتِيجَابٍ لِعَفْوِكَ عَنِّي

بَلْ لِثِقَتِي بِكَرَمِكَ

وَسُكُونِي إِلَىٰ صِدْقِ وَعْدِكَ

وَلَجَائِي إِلَىٰ ٱلإِيـمَانِ بِتَوْحِيدِكَ

وَيَقِينِي بِمَعْرِفَتِكَ مِنِّي

انْ لاَ رَبَّ لِي غَيْرُكَ

وَلاَ إِلٰهَ إِلاَّ انْتَ

وَحْدَكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ

اَللَّهُمَّ انْتَ ٱلْقَائِلُ وَقَوْلُكَ حَقٌّ

وَوَعْدُكَ صِدْقٌ:

”وَٱسْالُوٱ ٱللَّهَ مِنْ فَضْلِهِ

إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيماً“

وَلَيْسَ مِنْ صِفَاتِكَ يَا سَيِّدِي

انْ تَامُرَ بِٱلسُّؤَالِ وَتَمْنَعَ ٱلْعَطِيَّةَ

وَانْتَ ٱلْمَنَّانُ بِٱلْعَطِيَّاتِ عَلَىٰ اهْلِ مَمْلَكَتِكَ

وَٱلْعَائِدُ عَلَيْهِمْ بِتَحَنُّنِ رَافَتِكَ

إِلٰهِي رَبَّيْتَنِي فِي نِعَمِكَ وَإِحْسَانِكَ صَغِيراً

وَنَوَّهْتَ بِٱسْمِي كَبِيراً

 فَيَا مَنْ رَبَّانِي فِي ٱلدُّنْيَا بِإِحْسَانِهِ

وَتَفَضُّلِهِ وَنِعَمِهِ

وَاشَارَ لِي فِي ٱلآخِرَةِ إِلَىٰ عَفْوِهِ وَكَرَمِهِ

مَعْرِفَتِي يَا مَوْلاَيَ دَلِيلِي عَلَيْكَ

وَحُبِّي لَكَ شَفِيعِي إِلَيْكَ

وَانَا وَاثِقٌ مِنْ دَلِيلِي بِدَلاَلَتِكَ

وَسَاكِنٌ مِنْ شَفِيعِي إِلَىٰ شَفَاعَتِكَ

ادْعُوكَ يَا سَيِّدِي بِلِسَانٍ قَدْ اخْرَسَهُ ذَنْبُهُ

رَبِّ انَاجِيكَ بِقَلْبٍ قَدْ اوْبَقَهُ جُرْمُهُ

ادْعُوكَ يَا رَبِّ رَاهِباً رَاغِباً

رَاجِياً خَائِفاً

إِذَا رَايْتُ مَوْلاَيَ ذُنُوبِي فَزِعْتُ

وَإِذَا رَايْتُ كَرَمَكَ طَمِعْتُ

فَإِنْ عَفَوْتَ فَخَيْرُ رَاحِمٍ

وَإِنْ عَذَّبْتَ فَغَيْرُ ظَالِمٍ

حُجَّتِي يَا اللَّهُ فِي جُرْاتِي عَلَىٰ مَسْالَتِكَ

مَعَ إِتْيَانِي مَا تَكْرَهُ جُودُكَ وَكَرَمُكَ

وَعُدَّتِي فِي شِدَّتِي مَعَ قِلَّةِ حَيَائِي رَافَتُكَ وَرَحْمَتُكَ

وَقَدْ رَجَوْتُ انْ لاَ تَخِيبَ بَيْنَ ذَيْنِ وَذَيْنِ مُنْيَتِي

فَحَقِّقْ رَجَائِي

وَٱسْمَعْ دُعَائِي

يَا خَيْرَ مَنْ دَعَاهُ دَاعٍ

وَافْضَلَ مَنْ رَجَاهُ رَاجٍ

عَظُمَ يَا سَيِّدِي امَلِي وَسَاءَ عَمَلِي

فَاعْطِنِي مِنْ عَفْوِكَ بِمِقْدَارِ امَلِي

وَلاَ تُؤَاخِذْنِي بِاسْوَءِ عَمَلِي

فَإِنَّ كَرَمَكَ يَجِلُّ عَنْ مُجَازَاةِ ٱلْمُذْنِبِينَ

وَحِلْمَكَ يَكْبُرُ عَنْ مُكَافَاةِ ٱلْمُقَصِّرِينَ

وَانَا يَا سَيِّدِي عَائِذٌ بِفَضْلِكَ

هَارِبٌ مِنْكَ إِلَيْكَ

مُتَنَجِّزٌ مَا وَعَدْتَ مِنَ ٱلصَّفْحِ عَمَّنْ احْسَنَ بِكَ ظَنّاً

وَمَا انَا يَا رَبِّ وَمَا خَطَرِي

هَبْنِي بِفَضْلِكَ

وَتَصَدَّقْ عَلَيَّ بِعَفْوِكَ

ايْ رَبِّ جَلِّلْنِي بِسِتْرِكَ

وَٱعْفُ عَنْ تَوْبِيخِي بِكَرَمِ وَجْهِكَ

فَلَوِ ٱطَّلَعَ ٱلْيَوْمَ عَلَىٰ ذَنْبِي غَيْرُكَ مَا فَعَلْتُهُ

وَلَوْ خِفْتُ تَعْجِيلَ ٱلْعُقُوبَةِ لاﹾجْتَنَبْتُهُ

لاَ لانَّكَ اهْوَنُ ٱلنَّاظِرِينَ إِلَيَّ

وَاخَفُّ ٱلْمُطَّلِعِينَ عَلَيَّ

بَلْ لانَّكَ يَا رَبِّ خَيْرُ ٱلسَّاتِرِينَ

وَاحْكَمُ ٱلْحَاكِمِينَ

وَاكْرَمُ ٱلاكْرَمِينَ

سَتَّارُ ٱلْعُيُوبِ

غَفَّارُ ٱلذُّنُوبِ

عَلاَّمُ ٱلْغُيُوبِ

تَسْتُرُ ٱلذَّنْبَ بِكَرَمِكَ

وَتُؤَخِّرُ ٱلْعُقُوبَةَ بِحِلْمِكَ

فَلَكَ ٱلْحَمْدُ عَلَىٰ حِلْمِكَ بَعْدَ عِلْمِكَ

وَعَلَىٰ عَفْوِكَ بَعْدَ قُدْرَتِكَ

وَيَحْمِلُنِي وَيُجَرِّئُنِي عَلَىٰ مَعْصِيَتِكَ حِلْمُكَ عَنِّي

وَيَدْعُونِي إِلَىٰ قِلَّةِ ٱلْحَيَاءِ سِتْرُكَ عَلَيَّ

وَيُسْرِعُنِي إِلَىٰ ٱلتَوَثُّبِ عَلَىٰ مَحَارِمِكَ مَعْرِفَتِي بِسَعَةِ رَحْمَتِكَ وَعَظِيمِ عَفْوِكَ

يَا حَلِيمُ يَا كَرِيمُ

يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ

يَا غَافِرَ ٱلذَّنْبِ

يَا قَابِلَ ٱلتَّوْبِ

يَا عَظِيمَ ٱلْمَنِّ

يَا قَدِيمَ ٱلإِحْسَانِ

ايْنَ سِتْرُكَ ٱلْجَمِيلُ

ايْنَ عَفْوُكَ ٱلْجَلِيلُ

ايْنَ فَرَجُكَ ٱلْقَرِيبُ

ايْنَ غِيَاثُكَ ٱلسَّرِيعُ

ايْنَ رَحْمَتُكَ ٱلْوَاسِعَةُ

ايْنَ عَطَايَاكَ ٱلْفَاضِلَةُ

ايْنَ مَوَاهِبُكَ ٱلْهَنِيئَةُ

ايْنَ صَنَائِعُكَ ٱلسَّنِيَّةُ

ايْنَ فَضْلُكَ ٱلْعَظِيمُ

ايْنَ مَنُّكَ ٱلْجَسِيمُ

ايْنَ إِحْسَانُكَ ٱلْقَدِيمُ

ايْنَ كَرَمُكَ يَا كَرِيمُ

بِهِ وَبِمُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ فَٱسْتَنْقِذْنِي

وَبِرَحْمَتِكَ فَخَلِّصْنِي

يَا مُحْسِنُ

يَا مُجْمِلُ

يَا مُنْعِمُ يَا مُفْضِلُ

لَسْتُ اتَّكِلُ فِي ٱلنَّجَاةِ مِنْ عِقَابِكَ عَلَىٰ اعْمَالِنَا

بَلْ بِفَضْلِكَ عَلَيْنَا

لاِنَّكَ اهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَاهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ

تُبْدِئُ بِٱلإِحْسَانِ نِعَماً

وَتَعْفُو عَنِ ٱلذَّنْبِ كَرَماً

 فَمَا نَدْرِي مَا نَشْكُرُ

اجَمِيلَ مَا تَنْشُرُ امْ قَبِيحَ مَا تَسْتُرُ

امْ عَظِيمَ مَا ابْلَيْتَ وَاوْلَيْتَ

امْ كَثِيرَ مَا مِنْهُ نَجَّيْتَ وَعَافَيْتَ

يَا حَبِيبَ مَنْ تَحَبَّبَ إِلَيْكَ

وَيَا قُرَّةَ عَيْنِ مَنْ لاَذَ بِكَ وَٱنْقَطَعَ إِلَيْكَ

انْتَ ٱلْمُحْسِنُ وَنَحْنُ ٱلْمُسِيئُونَ

فَتَجَاوَزْ يَا رَبِّ عَنْ قَبِيحِ مَا عِنْدَنَا بِجَمِيلِ مَا عِنْدَكَ

وَايُّ جَهْلٍ يَا رَبِّ لاَ يَسَعُهُ جُودُكَ

اوْ ايُّ زَمَانٍ اطْوَلُ مِنْ انَاتِكَ

وَمَا قَدْرُ اعْمَالِنَا فِي جَنْبِ نِعَمِكَ

وَكَيْفَ نَسْتَكْثِرُ اعْمَالاً نُقَابِلُ بِهَا كَرَمَكَ

بَلْ كَيْفَ يَضِيقُ عَلَىٰ ٱلْمُذْنِبِينَ مَا وَسِعَهُمْ مِنْ رَحْمَتِكَ

يَا وَاسِعَ ٱلْمَغْفِرَةِ

يَا بَاسِطَ ٱلْيَدَيْنِ بِٱلرَّحْمَةِ

فَوَعِزَّتِكَ يَا سَيِّدِي

لَوْ نَهَرْتَنِي مَا بَرِحْتُ مِنْ بَابِكَ

وَلاَ كَفَفْتُ عَنْ تَمَلُّقِكَ

لِمَا ٱنْتَهَىٰ إِلَيَّ مِنَ ٱلْمَعْرِفَةِ بِجُودِكَ وَكَرَمِكَ

وَانْتَ ٱلْفَاعِلُ لِمَا تَشَاءُ

تُعَذِّبُ مَنْ تَشَاءُ بِمَا تَشَاءُ كَيْفَ تَشَاءُ

وَتَرْحَمُ مَنْ تَشَاءُ بِمَا تشَاءُ كَيْفَ تَشَاءُ

لاَ تُسْالُ عَنْ فِعْلِكَ

وَلاَ تُنَازَعُ فِي مُلْكِكَ

وَلاَ تُشَارَكُ فِي امْرِكَ

وَلاَ تُضَادُّ فِي حُكْمِكَ

وَلاَ يَعْتَرِضُ عَلَيْكَ احَدٌ فِي تَدْبِيرِكَ

 لَكَ ٱلْخَلْقُ وَٱلامْرُ

تَبَارَكَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَالَمِينَ

يَا رَبِّ هٰذَا مَقَامُ مَنْ لاَذَ بِكَ

وَٱسْتَجَارَ بِكَرَمِكَ

وَالِفَ إِحْسَانَكَ وَنِعَمَكَ

وَانْتَ ٱلْجَوَادُ ٱلَّذِي لاَ يَضِيقُ عَفْوُكَ

وَلاَ يَنْقُصُ فَضْلُكَ

وَلاَ تَقِلُّ رَحْمَتُكَ

وَقَدْ تَوَثَّقْنَا مِنْكَ بِٱلصَّفْحِ ٱلْقَدِيمِ

وَٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ وَٱلرَّحْمَةِ ٱلْوَاسِعَةِ

افَتُرَاكَ يَا رَبِّ تُخْلِفُ ظُنُونَنَا اوْ تُخَيِّبُ آمَالَنَا

كَلاَّ يَا كَرِيمُ فَلَيْسَ هٰذَا ظَنُّنَا بِكَ

وَلاَ هٰذَا فِيكَ طَمَعُنَا

يَا رَبِّ إِنَّ لَنَا فِيكَ امَلاً طَوِيلاً كَثِيراً

إِنَّ لَنَا فِيكَ رَجَاءً عَظِيماً

عَصَيْنَاكَ وَنَحْنُ نَرْجُو انْ تَسْتُرَ عَلَيْنَا

وَدَعَوْنَاكَ وَنَحْنُ نَرْجُو انْ تَسْتَجِيبَ لَنَا

فَحَقِّقْ رَجَاءَنَا مَوْلانَا

 فَقَدْ عَلِمْنَا مَا نَسْتَوْجِبُ بِاعْمَالِنَا

وَلكِنْ عِلْمُكَ فِينَا وَعِلْمُنَا بِانَّكَ لاَ تَصْرِفُنَا عَنْكَ

حَثَّنَا عَلَىٰ ٱلرَّغْبَةِ إِلَيْكَ

وَإِنْ كُنَّا غَيْرَ مُسْتَوْجِبِينَ لِرَحْمَتِكَ

فَانْتَ اهْلٌ انْ تَجُودَ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ ٱلْمُذْنِبِينَ بِفَضْلِ سَعَتِكَ

 فَٱمْنُنْ عَلَيْنَا بِمَا انْتَ اهْلُهُ

وَجُدْ عَلَيْنَا فَإِنَّا مُحْتَاجُونَ إِلَىٰ نَيْلِكَ

يَا غَفَّارُ بِنُورِكَ ٱهْتَدَيْنَا

وَبِفَضْلِكَ ٱسْتَغْنَيْنَا

وَبِنِعْمَتِكَ اصْبَحْنَا وَامْسَيْنَا

ذُنُوبُنَا بَيْنَ يَدَيْكَ

نَسْتَغْفِرُكَ ٱللَّهُمَّ مِنْهَا وَنَتُوبُ إِلَيْكَ

تَتَحَبَّبُ إِلَيْنَا بِٱلنِّعَمِ وَنُعَارِضُكَ بِٱلذُّنُوبِ

 خَيْرُكَ إِلَيْنَا نَازِلٌ

وَشَرُّنَا إِلَيْكَ صَاعِدٌ

وَلَمْ يَزَلْ وَلاَ يَزَالُ مَلَكٌ كَرِيمٌ يَاتِيكَ عَنَّا بِعَمَلٍ قَبِيحٍ

فَلاَ يَمْنَعُكَ ذٰلِكَ مِنْ انْ تَحُوطَنَا بِنِعَمِكَ

وتَتَفَضَّلَ عَلَيْنَا بِآلاَئِكَ

فَسُبْحَانَكَ مَا احْلَمَكَ وَاعْظَمَكَ

وَاكْرَمَكَ مُبْدِئاً وَمُعِيداً

تَقَدَّسَتْ اسْمَاؤُكَ

وَجَلَّ ثَنَاؤُكَ

وَكَرُمَ صَنَائِعُكَ وَفِعَالُكَ

انْتَ إِلٰهِي اوْسَعُ فَضْلاً وَاعْظَمُ حِلْماً

مِنْ انْ تُقَايِسَنِي بِفِعْلِي وَخَطِيئَتِي

 فَٱلْعَفْوَ ٱلْعَفْوَ ٱلْعَفْوَ

سَيِّدِي سَيِّدِي سَيِّدِي

اَللَّهُمَّ اشْغَلْنَا بِذِكْرِكَ

وَاعِذْنَا مِنْ سَخَطِكَ

وَاجِرْنَا مِنْ عَذَابِكَ

وَٱرْزُقْنَا مِنْ مَوَاهِبِكَ

وَانْعِمْ عَلَيْنَا مِنْ فَضْلِكَ

وَٱرْزُقْنَا حَجَّ بَيْتِكَ

وَزِيَارَةَ قَبْرِ نَبِيِّكَ

صَلَوَاتُكَ وَرَحْمَتُكَ

وَمَغْفِرَتُكَ وَرِضْوَانُكَ عَلَيْهِ وَعَلَىٰ اهْلِ بَيْتِهِ

إِنَّكَ قَرِيبٌ مُجِيبٌ

وَٱرْزُقْنَا عَمَلاً بِطَاعَتِكَ

وَتَوَفَّنَا عَلَىٰ مِلَّتِكَ وَسُنَّةِ نَبِيِّكَ

صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَعَلَىٰ آلِهِ

اَللَّهُمَّ ٱغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ

وَٱرْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيراً

إِجْزِهِمَا بِٱلإِحْسَانِ إِحْسَاناً

وَبِٱلسَّيِّئَاتِ غُفْرَاناً

اَللَّهُمَّ ٱغْفِرْ لِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَاتِ

ٱلاحْيَاءِ مِنْهُمْ وَٱلامْوَاتِ

وَتَابِعْ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمْ بِٱلْخَيْرَاتِ

اَللَّهُمَّ ٱغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا

وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا

ذَكَرِنَا وَانْثَانَا

صَغِيرِنَا وَكَبِيرِنَا

حُرِّنَا وَمَمْلُوكِنَا

كَذَبَ ٱلْعَادِلُونَ بِٱللَّهِ

وَضَلُّوٱ ضَلاَلاً بَعِيداً

وَخَسِرُوٱ خُسْرَاناً مُبِيناً

اَللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ

وَٱخْتِمْ لِي بِخَيْرٍ

وَٱكْفِنِي مَا اهَمَّنِي مِنْ امْرِ دُنْيَايَ وَآخِرَتِي

وَلاَ تُسَلِّطْ عَلَيَّ مَنْ لاَ يَرْحَمُنِي

وَٱجْعَلْ عَلَيَّ مِنْكَ وَاقِيَةً بَاقِيَةً

وَلاَ تَسْلُبْنِي صَالِحَ مَا انْعَمْتَ بِهِ عَلَيَّ

وَٱرْزُقْنِي مِنْ فَضْلِكَ رِزْقاً وَاسِعاً حَلاَلاً طَيِّباً

اَللَّهُمَّ ٱحْرُسْنِي بِحَرَاسَتِكَ

وَٱحْفَظْنِي بِحِفْظِكَ

وَٱكْلَانِي بِكَلاَءَتِكَ

وَٱرْزُقْنِي حَجَّ بَيْتِكَ ٱلْحَرَامِ

فِي عَامِنَا هٰذَا وَفِي كُلِّ عَامٍ

وَزِيَارَةَ قَبْرِ نَبِيِّكَ وَٱلائِمَّةِ عَلَيْهِمُ ٱلسَّلامُ

وَلاَ تُخْلِنِي يَا رَبِّ مِنْ تِلْكَ ٱلْمَشَاهِدِ ٱلشَّرِيفَةِ

وَٱلْمَوَاقِفِ ٱلْكَرِيمَةِ

اَللَّهُمَّ تُبْ عَلَيَّ حَتَّىٰ لاَ اعْصِيَكَ

وَالْهِمْنِي ٱلْخَيْرَ وَٱلْعَمَلَ بِهِ

وَخَشْيَتَكَ بِٱللَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ مَا ابْقَيْتَنِي

يَا رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ

اَللَّهُمَّ إِنِّي كُلَّمَا قُلْتُ قَدْ تَهَيَّاتُ وَتَعَبَّاتُ

وَقُمْتُ لِلصَّلاَةِ بَيْنَ يَدَيْكَ وَنَاجَيْتُكَ

 الْقَيْتَ عَلَيَّ نُعَاساً إِذَا انَا صَلَّيْتُ

وَسَلَبْتَنِي مُنَاجَاتَكَ إِذَا انَا نَاجَيْتُ

مَالِي كُلَّمَا قُلْتُ قَدْ صَلُحَتْ سَرِيرَتِي

وَقَرُبَ مِنْ مَجَالِسِ ٱلتَّوَّابِينَ مَجْلِسِي

عَرَضَتْ لِي بَلِيَّةٌ ازَالَتْ قَدَمِي وَحَالَتْ بَيْنِي وَبَيْنَ خِدْمَتِكَ

سَيِّدِي لَعَلَّكَ عَنْ بَابِكَ طَرَدْتَنِي

وَعَنْ خِدْمَتِكَ نَحَّيْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ رَايْتَنِي مُسْتَخِفّاً بِحَقِّكَ فَاقْصَيْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ رَايْتَنِي مُعْرِضاً عَنْكَ فَقَلَيْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ وَجَدْتَنِي فِي مَقَامِ ٱلْكَاذِبِينَ فَرَفَضْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ رَايْتَنِي غَيْرَ شَاكِرٍ لِنَعْمَائِكَ فَحَرَمْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ فَقَدْتَنِي مِنْ مَجَالِسِ ٱلْعُلَمَاءِ فَخَذَلْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ رَايْتَنِي فِي ٱلْغَافِلِينَ فَمِنْ رَحْمَتِكَ آيَسْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ رَايْتَنِي آلِفَ مَجَالِسِ ٱلْبَطَّالِينَ فَبَيْنِي وَبَيْنَهُمْ خَلَّيْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ لَمْ تُحِبَّ انْ تَسْمَعَ دُعَائِي فَبَاعَدْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ بِجُرْمِي وَجَرِيرَتِي كَافَيْتَنِي

اوْ لَعَلَّكَ بِقِلَّةِ حَيَائِي مِنْكَ جَازَيْتَنِي

فَإِنْ عَفَوْتَ يَا رَبِّ فَطَالَمَا عَفَوْتَ عَنِ ٱلْمُذْنِبِينَ قَبْلِي

لاِنَّ كَرَمَكَ ايْ رَبِّ يَجِلُّ عَنْ مُكَافَاةِ ٱلْمُقَصِّرِينَ

وَانَا عَائِذٌ بِفَضْلِكَ هَارِبٌ مِنْكَ إِلَيْكَ

مُتَنَجِّزٌ مَا وَعَدْتَ مِنَ ٱلصَّفْحِ عَمَّنْ احْسَنَ بِكَ ظَنّاً

إِلٰهِي انْتَ اوْسَعُ فَضْلاً

وَاعْظَمُ حِلْماً مِنْ انْ تُقَايِسَنِي بِعَمَلِي

اوْ انْ تَسْتَزِلَّنِي بِخَطِيئَتِي

وَمَا انَا يَا سَيِّدِي وَمَا خَطَرِي

هَبْنِي بِفَضْلِكَ سَيِّدِي

وَتَصَدَّقْ عَلَيَّ بِعَفْوِكَ

وَجَلِّلْنِي بِسِتْرِكَ

وَٱعْفُ عَنْ تَوْبِيخِي بِكَرَمِ وَجْهِكَ

سَيِّدِي انَا ٱلصَّغِيرُ ٱلَّذِي رَبَّيْتَهُ

وَانَا ٱلْجَاهِلُ ٱلَّذِي عَلَّمْتَهُ

وَانَا ٱلضَّالُّ ٱلَّذِي هَدَيْتَهُ

وَانَا ٱلْوَضِيعُ ٱلَّذِي رَفَعْتَهُ

وَانَا ٱلْخَائِفُ ٱلَّذِي آمَنْتَهُ

وَٱلْجَائِعُ ٱلَّذِي اشْبَعْتَهُ

وَٱلْعَطْشَانُ ٱلَّذِي ارْوَيْتَهُ

وَٱلْعَارِي ٱلَّذِي كَسَوْتَهُ

وَٱلْفَقِيرُ ٱلَّذِي اغْنَيْتَهُ

وَٱلضَّعِيفُ ٱلَّذِي قَوَّيْتَهُ

وَٱلذَّلِيلُ ٱلَّذِي اعْزَزْتَهُ

وَٱلسَّقِيمُ ٱلَّذِي شَفَيْتَهُ

وَٱلسَّائِلُ ٱلَّذِي اعْطَيْتَهُ

وَٱلْمُذْنِبُ ٱلَّذِي سَتَرْتَهُ

وَٱلْخَاطِئُ ٱلَّذِي اقَلْتَهُ

وَانَا ٱلْقَلِيلُ ٱلَّذِي كَثَّرْتَهُ

وَٱلْمُسْتَضْعَفُ ٱلَّذِي نَصَرْتَهُ

وَانَا ٱلطَّرِيدُ ٱلَّذِي آوَيْتَهُ

انَا يَا رَبِّ ٱلَّذِي لَمْ اسْتَحْيِكَ فِي ٱلْخَلاَءِ

وَلَمْ ارَاقِبْكَ فِي ٱلْمَلاَءِ

انَا صَاحِبُ ٱلدَّوَاهِي ٱلْعُظْمَىٰ

انَا ٱلَّذِي عَلَىٰ سَيِّدِهِ ٱجْتَرا

انَا ٱلَّذِي عَصَيْتُ جَبَّارَ ٱلسَّمَاءِ

انَا ٱلَّذِي اعْطَيْتُ عَلَىٰ مَعَاصِي ٱلْجَلِيلِ ٱلرِّشَىٰ

انَا ٱلَّذِي حِينَ بُشِّرْتُ بِهَا خَرَجْتُ إِلَيْهَا اسْعَىٰ

انَا ٱلَّذِي امْهَلْتَنِي فَمَا ٱرْعَوَيْتُ

وَسَتَرْتَ عَلَيَّ فَمَا ٱسْتَحْيَيْتُ

وَعَمِلْتُ بِٱلْمَعَاصِي فَتَعَدَّيْتُ

وَاسْقَطْتَنِي مِنْ عَيْنِكَ فَمَا بَالَيْتُ

فَبِحِلْمِكَ امْهَلْتَنِي

وَبِسِتْرِكَ سَتَرْتَنِي حَتَّىٰ كَانَّكَ اغْفَلْتَنِي

وَمِنْ عُقُوبَاتِ ٱلْمَعَاصِي جَنَّبْتَنِي حَتَّىٰ كَانَّكَ ٱسْتَحْيَيْتَنِي

إِلٰهِي لَمْ اعْصِكَ حِينَ عَصَيْتُكَ وَانَا بِرُبُوبِيَّتِكَ جَاحِدٌ

وَلاَ بِامْرِكَ مُسْتَخِفٌّ

وَلاَ لِعُقُوبَتِكَ مُتَعَرِّضٌ

وَلاَ لِوَعِيدِكَ مُتَهَاوِنٌ

لَكِنْ خَطِيئَةٌ عَرَضَتْ وَسَوَّلَتْ لِي نَفْسِي

وَغَلَبَنِي هَوَايَ

وَاعَانَنِي عَلَيْهَا شِقْوَتِي

وَغَرَّنِي سِتْرُكَ ٱلْمُرْخَىٰ عَلَيَّ

فَقَدْ عَصَيْتُكَ وَخَالَفْتُكَ بِجُهْدِي

فَٱلآنَ مِنْ عَذَابِكَ مَنْ يَسْتَنْقِذُنِي

وَمِنْ ايْدِي ٱلْخُصَمَاءِ غَداً مَنْ يُخَلِّصُنِي

وَبِحَبْلِ مَنْ اتَّصِلُ إِنْ انْتَ قَطَعْتَ حَبْلَكَ عَنِّي

فَوَاسَوْاتَا عَلَىٰ مَا احْصَىٰ كِتَابُكَ مِنْ عَمَلِي

ٱلَّذِي لَوْلاَ مَا ارْجُو مِنْ كَرَمِكَ وَسَعَةِ رَحْمَتِكَ

وَنَهْيِكَ إِيَّايَ عَنِ ٱلَّذِي لْقُنُوطِ لَقَنَطْتُ عِنْدَمَا اتَذَكَّرُهَا

يَا خَيْرَ مَنْ دَعَاهُ دَاعٍ

وَافْضَلَ مَنْ رَجَاهُ رَاجٍ

اَللَّهُمَّ بِذِمَّةِ ٱلإِسْلاَمِ اتَوَسَّلُ إِلَيْكَ

وَبِحُرْمَةِ ٱلْقُرْآنِ اعْتَمِدُ عَلَيْكَ

وَبِحُبِّي ٱلنَّبِيَّ ٱلامِّيَّ

ٱلْقُرَشِيَّ ٱلْهَاشِمِيَّ

ٱلْعَرَبِيَّ ٱلتُّهَامِيَّ

ٱلْمَكِّيَّ ٱلْمَدَنِيَّ

ارْجُو ٱلزُّلْفَةَ لَدَيْكَ

فَلاَ تُوحِشِ ٱسْتِينَاسَ إِيـمَانِي

وَلاَ تَجْعَلْ ثَوَابِي ثَوَابَ مَنْ عَبَدَ سِوَاكَ

فَإِنَّ قَوْماً آمَنُوٱ بِالْسِنَتِهِمْ لِيَحْقِنُوٱ بِهِ دِمَاءَهُمْ

فَادْرَكُوٱ مَا امَّلُوٱ

وَإِنَّا آمَنَّا بِكَ بِالْسِنَتِنَا وَقُلُوبِنَا لِتَعْفُوَ عَنَّا

فَادْرِكْنَا مَا امَّلْنَا

وَثَبِّتْ رَجَاءَكَ فِي صُدُورِنَا

وَلاَ تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا

وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً

إِنَّكَ انْتَ ٱلْوَهَّابُ

فَوَعِزَّتِكَ لَوِ ٱنْتَهَرْتَنِي مَا بَرِحْتُ مِنْ بَابِكَ

وَلاَ كَفَفْتُ عَنْ تَمَلُّقِكَ

لِمَا الْهِمَ قَلْبِي مِنَ ٱلْمَعْرِفَةِ بِكَرَمِكَ وَسَعَةِ رَحْمَتِكَ

إِلَىٰ مَنْ يَذْهَبُ ٱلْعَبْدُ إِلاَّ إِلَىٰ مَوْلاهُ

وَإِلَىٰ مَنْ يَلْتَجِئُ ٱلْمَخْلُوقُ إِلاَّ إِلَىٰ خَالِقِهِ

إِلٰهِي لَوْ قَرَنْتَنِي بِٱلاصْفَادِ

وَمَنَعْتَنِي سَيْبَكَ مِنْ بَيْنِ ٱلاشْهَادِ

وَدَلَلْتَ عَلَىٰ فَضَائِحِي عُيُونَ ٱلْعِبَادِ

وَامَرْتَ بِي إِلَىٰ ٱلنَّارِ

وَحُلْتَ بَيْنِي وَبَيْنَ ٱلابْرَارِ

مَا قَطَعْتُ رَجَائِي مِنْكَ

وَمَا صَرَفْتُ تَامِيلِي لِلْعَفْوِ عَنْكَ

وَلاَ خَرَجَ حُبُّكَ مِنْ قَلْبِي

انَا لاَ انْسَىٰ ايَادِيَكَ عِنْدِي

وَسِتْرَكَ عَلَيَّ فِي دَارِ ٱلدُّنْيَا

سَيِّدِي اخْرِجْ حُبَّ ٱلدُّنْيَا مِنْ قَلْبِي

وَٱجْمَعْ بَيْنِي وَبَيْنَ ٱلْمُصْطَفَىٰ وَآلِهِ

خِيَرَتِكَ مِنْ خَلْقِكَ وَخَاتَمِ ٱلنَّبِيِّينَ

مُحَمَّدٍ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَعَلَىٰ آلِهِ

وَٱنْقُلْنِي إِلَىٰ دَرَجَةِ ٱلتَّوْبَةِ إِلَيْكَ

وَاعِنِّي بِٱلْبُكَاءِ عَلَىٰ نَفْسِي فَقَدْ افْنَيْتُ عُمْرِي

وَقَدْ نَزَلْتُ مَنْزِلَةَ ٱلآيِسِينَ مِنْ خَيْرِي

فَمَنْ يَكُونُ اسْوَا حَالاً مِنِّي

إِنْ انَا نُقِلْتُ عَلَىٰ مِثْلِ حَالِي

إِلَىٰ قَبْرٍ لَمْ امَهِّدْهُ لِرَقْدَتِي

وَلَمْ افْرُشْهُ بِٱلْعَمَلِ ٱلصَّالِحِ لِضَجْعَتِي

وَمَا لِي لاَ ابْكِي

وَلاَ ادْرِي إِلَىٰ مَا يَكُونُ مَصِيرِي

وَارَىٰ نَفْسِي تُخَادِعُنِي

وَايَّامِي تُخَاتِلُنِي

وَقَدْ خَفَقَتْ عِنْدَ رَاسِي اجْنِحَةُ ٱلْمَوْتِ

فَمَا لِي لاَ ابْكِي

ابْكِي لِخُرُوجِ نَفْسِي

ابْكِي لِظُلْمَةِ قَبْرِي

ابْكِي لِضِيقِ لَحْدِي

ابْكِي لِسُؤَالِ مُنْكَرٍ وَنَكِيرٍ إِيَّايَ

ابْكِي لِخُرُوجِي مِنْ قَبْرِي عُرْيَاناً ذَلِيلاً

حَامِلاً ثِقْلِي عَلَىٰ ظَهْرِي

 انْظُرُ مَرَّةً عَنْ يَمِينِي وَاخْرَىٰ عَنْ شِمَالِي

إِذِ ٱلْخَلائِقُ فِي شَانٍ غَيْرِ شَانِي

”لِكُلِّ ٱمْرِئٍ مِنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَانٌ يُغْنِيهِ“

”وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُسْفِرَةٌ ضَاحِكَةٌ مُسْتَبْشِرَةٌ

وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌ تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ“ وَذِلَّةٌ

سَيِّدِي عَلَيْكَ مُعَوَّلِي وَمُعْتَمَدِي

وَرَجَائِي وَتَوَكُّلِي

وَبِرَحْمَتِكَ تَعَلُّقِي

تُصِيبُ بِرَحْمَتِكَ مَنْ تَشَاءُ

وَتَهْدِي بِكَرَامَتِكَ مَنْ تُحِبُّ

فَلَكَ ٱلْحَمْدُ عَلَىٰ مَا نَقَّيْتَ مِنَ ٱلشِّرْكِ قَلْبِي

وَلَكَ ٱلْحَمْدُ عَلَىٰ بَسْطِ لِسَانِي

افَبِلِسَانِي هٰذَا ٱلْكَالِّ اشْكُرُكَ

امْ بِغَايَةِ جُهْدِي فِي عَمَلِي ارْضِيكَ

وَمَا قَدْرُ لِسَانِي يَا رَبِّ فِي جَنْبِ شُكْرِكَ

وَمَا قَدْرُ عَمَلِي فِي جَنْبِ نِعَمِكَ وَإِحْسَانِكَ

إِلٰهِي إِنَّ جُودَكَ بَسَطَ امَلِي

وَشُكْرَكَ قَبِلَ عَمَلِي

سَيِّدِي إِلَيْكَ رَغْبَتِي

وَإِلَيْكَ رَهْبَتِي

وَإِلَيْكَ تَامِيلِي

وَقَدْ سَاقَنِي إِلَيْكَ امَلِي

وَعَلَيْكَ يَا وَاحِدِي عَكَفَتْ هِمَّتِي

وَفِيمَا عِنْدَكَ ٱنْبَسَطَتْ رَغْبَتِي

وَلَكَ خَالِصُ رَجَائِي وَخَوْفِي

وَبِكَ انِسَتْ مَحَبَّتِي

وَإِلَيْكَ الْقَيْتُ بِيَدِي

وَبِحَبْلِ طَاعَتِكَ مَدَدْتُ رَهْبَتِي

يَا مَوْلايَ بِذِكْرِكَ عَاشَ قَلْبِي

وَبِمُنَاجَاتِكَ بَرَّدْتُ الَمَ ٱلْخَوْفِ عَنِّي

فَيَا مَوْلايَ وَيَا مُؤَمَّلِي وَيَا مُنْتَهَىٰ سُؤْلِي

فَرِّقْ بَيْنِي وَبَيْنَ ذَنْبِيَ ٱلْمَانِعِ لِي مِنْ لُزُومِ طَاعَتِكَ

فَإِنَّمَا اسْالُكَ لِقَدِيمِ ٱلرَّجَاءِ فِيكَ

وَعَظِيمِ ٱلطَّمَعِ مِنْكَ

ٱلَّذِي اوْجَبْتَهُ عَلَىٰ نَفْسِكَ مِنَ ٱلرَّافَةِ وَٱلرَّحْمَةِ

فَٱلامْرُ لَكَ وَحْدَكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ

وَٱلْخَلْقُ كُلُّهُمْ عِيَالُكَ وَفِي قَبْضَتِكَ

وَكُلُّ شَيْءٍ خَاضِعٌ لَكَ

تَبَارَكْتَ يَا رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ

إِلٰهِي ٱرْحَمْنِي إِذَا ٱنْقَطَعَتْ حُجَّتِي

وَكَلَّ عَنْ جَوَابِكَ لِسَانِي

وَطَاشَ عِنْدَ سُؤَالِكَ إِيَّايَ لُبِّي

فَيَا عَظِيمَ رَجَائِي لاَ تُخَيِّبْنِي إِذَا ٱشْتَدَّتْ فَاقَتِي

وَلاَ تَرُدَّنِي لِجَهْلِي

وَلاَ تَمْنَعْنِي لِقِلَّةِ صَبْرِي

اعْطِنِي لِفَقْرِي

وَٱرْحَمْنِي لِضَعْفِي

سَيِّدِي عَلَيْكَ مُعْتَمَدِي وَمُعَوَّلِي

وَرَجَائِي وَتَوَكُّلِي

وَبِرَحْمَتِكَ تَعَلُّقِي

وَبِفِنَائِكَ احُطُّ رَحْلِي

وَبِجُودِكَ اقْصِدُ طَلِبَتِي

وَبِكَرَمِكَ ايْ رَبِّ اسْتَفْتِحُ دُعَائِي

وَلَدَيْكَ ارْجُو فَاقَتِي

وَبِغِنَاكَ اجْبُرُ عَيْلَتِي

وَتَحْتَ ظِلِّ عَفْوِكَ قِيَامِي

وَإِلَىٰ جُودِكَ وَكَرَمِكَ ارْفَعُ بَصَرِي

وَإِلَىٰ مَعْرُوفِكَ ادِيمُ نَظَرِي

فَلاَ تُحْرِقْنِي بِٱلنَّارِ وَانْتَ مَوْضِعُ امَلِي

وَلاَ تُسْكِنِّي ٱلْهَاوِيَةَ فَإِنَّكَ قُرَّةُ عَيْنِي

يَا سَيِّدِي لاَ تُكَذِّبْ ظَنِّي بِإِحْسَانِكَ وَمَعْرُوفِكَ

فَإِنَّكَ ثِقَتِي

وَلاَ تَحْرِمْنِي ثَوَابَكَ

فَإِنَّكَ ٱلْعَارِفُ بِفَقْرِي

إِلٰهِي إِنْ كَانَ قَدْ دَنَا اجَلِي وَلَمْ يُقَرِّبْنِي مِنْكَ عَمَلِي

فَقَدْ جَعَلْتُ ٱلإِعْتِرَافَ إِلَيْكَ بِذَنْبِي وَسَائِلَ عِلَلِي

إِلٰهِي إِنْ عَفَوْتَ فَمَنْ اوْلَىٰ مِنْكَ بِٱلْعَفْوِ

وَإِنْ عَذَّبْتَ فَمَنْ اعْدَلُ مِنْكَ فِي ٱلْحُكْمِ

ٱرْحَمْ فِي هٰذِهِ ٱلدُّنْيَا غُرْبَتِي

وَعِنْدَ ٱلْمَوْتِ كُرْبَتِي

وَفِي ٱلْقَبْرِ وَحْدَتِي

وَفِي ٱللَّحْدِ وَحْشَتِي

وَإِذَا نُشِرْتُ لِلْحِسَابِ بَيْنَ يَدَيْكَ ذُلَّ مَوْقِفِي

وَٱغْفِرْ لِي مَا خَفِيَ عَلَىٰ ٱلآدَمِيِّينَ مِنْ عَمَلِي

وَادِمْ لِي مَا بِهِ سَتَرْتَنِي

وَٱرْحَمْنِي صَرِيعاً عَلَىٰ ٱلْفِرَاشِ تُقَلِّبُنِي ايْدِي احِبَّتِي

وَتَفَضَّلْ عَلَيَّ مَمْدُوداً عَلَىٰ ٱلْمُغْتَسَلِ يُقَلِّبُنِي صَالِحُ جِيرَتِي

وَتَحَنَّنْ عَلَيَّ مَحْمُولاً قَدْ تَنَاوَلَ ٱلاقْرِبَاءُ اطْرَافَ جِنَازَتِي

وَجُدْ عَلَيَّ مَنْقُولاً قَدْ نَزَلْتُ بِكَ وَحِيداً فِي حُفْرَتِي

وَٱرْحَمْ فِي ذٰلِكَ  ٱلْبَيْتِ ٱلْجَدِيدِ غُرْبَتِي حَتَّىٰ لاَ اسْتَانِسَ بِغَيْرِكَ

يَا سَيِّدِي إِنْ وَكَلْتَنِي إِلَىٰ نَفْسِي هَلَكْتُ

سَيِّدِي فَبِمَنْ اسْتَغِيثُ إِنْ لَمْ تُقِلْنِي عَثْرَتِي

فَإِلَىٰ مَنْ افْزَعُ إِنْ فَقَدْتُ عِنَايَتَكَ فِي ضَجْعَتِي

وَإِلَىٰ مَنْ الْتَجِئُ إِنْ لَمْ تُنَفِّسْ كُرْبَتِي

سَيِّدِي مَنْ لِي

وَمَنْ يَرْحَمُنِي إِنْ لَمْ تَرْحَمْنِي

وَفَضْلَ مَنْ اؤَمِّلُ إِنْ عَدِمْتُ فَضْلَكَ يَوْمَ فَاقَتِي

وَإِلَىٰ مَنِ ٱلْفِرَارُ مِنَ ٱلذُّنُوبِ إِذَا ٱنْقَضَىٰ اجَلِي

سَيِّدِي لاَ تُعَذِّبْنِي وَانَا ارْجُوكَ

إِلٰهِي حَقِّقْ رَجَائِي

وَآمِنْ خَوْفِي

فَإِنَّ كَثْرَةَ ذُنُوبِي لاَ ارْجُو فِيهَا إِلاَّ عَفْوَكَ

سَيِّدِي انَا اسْالُكَ مَا لاَ اسْتَحِقُّ

وَانْتَ اهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَاهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ

فَٱغْفِرْ لِي وَالْبِسْنِي مِنْ نَظَرِكَ ثَوْباً يُغَطِّي عَلَيَّ ٱلتَّبِعَاتِ

وَتَغْفِرُهَا لِي وَلاَ اطَالَبُ بِهَا

إِنَّكَ ذُو مَنٍّ قَدِيمٍ

وَصَفْحٍ عَظِيمٍ

وَتَجَاوُزٍ كَرِيمٍ

إِلٰهِي انْتَ ٱلَّذِي تُفِيضُ سَيْبَكَ عَلَىٰ مَنْ لاَ يَسْالُكَ

وَعَلَىٰ ٱلْجَاحِدِينَ بِرُبُوْبِيَّتِكَ

فَكَيْفَ سَيِّدِي بِمَنْ سَالَكَ وَايْقَنَ انَّ ٱلْخَلْقَ لَكَ وَٱلامْرَ إِلَيْكَ

تَبَارَكْتَ وَتَعَالَيْتَ يَا رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ

سَيِّدِي عَبْدُكَ بِبَابِكَ اقَامَتْهُ ٱلْخَصَاصَةُ بَيْنَ يَدَيْكَ

يَقْرَعُ بَابَ إِحْسَانِكَ بِدُعَائِهِ

فَلاَ تُعْرِضْ بِوَجْهِكَ ٱلْكَرِيمِ عَنِّي

وَٱقْبَلْ مِنِّي مَا اقُولُ فَقَدْ دَعَوْتُ بِهٰذَا ٱلدُّعَاءِ

وَانَا ارْجُو انْ لاَ تَرُدَّنِي مَعْرِفَةً مِنِّي بِرَافَتِكَ وَرَحْمَتِكَ

إِلٰهِي انْتَ ٱلَّذِي لاَ يُحْفِيكَ سَائِلٌ

وَلاَ يَنْقُصُكَ نَائِلٌ

انْتَ كَمَا تَقُولُ وَفَوْقَ مَا نَقُولُ

اَللَّهُمَّ إِنِّي اسْالُكَ صَبْراً جَمِيلاً

وَفَرَجاً قَرِيباً

وَقَوْلاً صَادِقاً

وَاجْراً عَظِيماً

اسْالُكَ يَا رَبِّ مِنَ ٱلْخَيْرِ كُلِّهِ

مَا عَلِمْتُ مِنْهُ وَمَا لَمْ اعْلَمْ

اسْالُكَ ٱللَّهُمَّ مِنْ خَيْرِ مَا سَالَكَ مِنْهُ عِبَادُكَ ٱلصَّالِحُونَ

يَا خَيْرَ مَنْ سُئِلَ

وَاجْوَدَ مَنْ اعْطَىٰ

اعْطِنِي سُؤْلِي فِي نَفْسِي وَاهْلِي

وَوَالِدَيَّ وَوُلْدِي

وَاهْلِ حُزَانَتِي وَإِخْوَانِي فِيكَ

وَارْغِدْ عَيْشِي

وَاظْهِرْ مُرُوَّتِي

وَاصْلِحْ جَمِيعَ احْوَالِي

وَٱجْعَلْنِي مِمَّنْ اطَلْتَ عُمْرَهُ

وَحَسَّنْتَ عَمَلَهُ

وَاتْمَمْتَ عَلَيْهِ نِعْمَتَكَ وَرَضِيتَ عَنْهُ

وَاحْيَيْتَهُ حَيَاةً طَيِّبَةً فِي ادْوَمِ ٱلسُّرُورِ

وَاسْبَغِ ٱلْكَرَامَةِ وَاتَمِّ ٱلْعَيْشِ

إِنَّكَ تَفْعَلُ مَا تَشَاءُ

وَلاَ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ غَيْرُكَ

اَللَّهُمَّ خُصَّنِي مِنْكَ بِخَاصَّةِ ذِكْرِكَ

وَلاَ تَجْعَلْ شَيْئاً مِمَّا اتَقَرَّبُ بِهِ

فِي آنَاءِ ٱللَّيْلِ وَاطْرَافِ ٱلنَّهَارِ

رِيَاءً وَلاَ سُمْعَةً

وَلاَ اشَراً وَلاَ بَطَراً

وَٱجْعَلْنِي لَكَ مِنَ ٱلْخَاشِعِينَ

اَللَّهُمَّ اعْطِنِي ٱلسَّعَةَ فِي ٱلرِّزْقِ

وَٱلامْنَ فِي ٱلْوَطَنِ

وَقُرَّةَ ٱلْعَيْنِ فِي ٱلاهْلِ وَٱلْمَالِ وَٱلْوَلَدِ

وَٱلْمُقَامَ فِي نِعَمِكَ عِنْدِي

وَٱلصِّحَّةَ فِي ٱلْجِسْمِ

وَٱلْقُوَّةَ فِي ٱلْبَدَنِ

وَٱلسَّلاَمَةَ فِي ٱلدِّينِ

وَٱسْتَعْمِلْنِي بِطَاعَتِكَ وَطَاعَةِ رَسُولِكَ

مُحَمَّدٍ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَعَلَىٰ آلِهِ ابَداً مَا ٱسْتَعْمَرْتَنِي

وَٱجْعَلْنِي مِنْ اوْفَرِ عِبَادِكَ عِنْدَكَ نَصِيباً

فِي كُلِّ خَيْرٍ انْزَلْتَهُ وَتُنْزِلُهُ فِي شَهْرِ رَمَضَانَ

فِي لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ

وَمَا انْتَ مُنْزِلُهُ فِي كُلِّ سَنَةٍ مِنْ رَحْمَةٍ تَنْشُرُهَا

وَعَافِيَةٍ تُلْبِسُهَا

وَبَلِيَّةٍ تَدْفَعُهَا

وَحَسَنَاتٍ تَتَقَبَّلُهَا

وَسَيِّئَاتٍ تَتَجَاوَزُ عَنْهَا

وَٱرْزُقْنِي حَجَّ بَيْتِكَ ٱلْحَرَامِ فِي عَامِنَا هٰذَا وَفِي كُلِّ عَامٍ

وَٱرْزُقْنِي رِزْقاً وَاسِعاً مِنْ فَضْلِكَ ٱلْوَاسِعِ

وَٱصْرِفْ عَنِّي يَا سَيِّدِي ٱلاسْوَاءَ

وَٱقْضِ عَنِّي ٱلدَّيْنَ وَٱلظًُّلاَمَاتِ حَتَّىٰ لاَ اتَاذَّىٰ بِشَيْءٍ مِنْهُ

وَخُذْ عَنِّي بِاسْمَاعِ وَابْصَارِ اعْدَائِي وَحُسَّادِي وَٱلْبَاغِينَ عَلَيَّ

وَٱنْصُرْنِي عَلَيْهِمْ

وَاقِرَّ عَيْنِي وَفَرِّحْ قَلْبِي

وَٱجْعَلْ لِي مِنْ هَمِّي وَكَرْبِي فَرَجاً وَمَخْرَجاً

وَٱجْعَلْ مَنْ ارَادَنِي بِسُوءٍ مِنْ جَمِيعِ خَلْقِكَ تَحْتَ قَدَمَيَّ

وَٱكْفِنِي شَرَّ ٱلشَّيْطَانِ

وَشَرَّ ٱلسُّلْطَانِ

وَسَيِّئَاتِ عَمَلِي

وَطَهِّرْنِي مِنَ ٱلذُّنُوبِ كُلِّهَا

وَاجِرْنِي مِنَ ٱلنَّارِ بِعَفْوِكَ

وَادْخِلْنِي ٱلْجَنَّةَ بِرَحْمَتِكَ

وَزَوِّجْنِي مِنَ ٱلْحُورِ ٱلْعِينِ بِفَضْلِكَ

وَالْحِقْنِي بِاوْلِيَائِكَ ٱلصَّالِحِينَ مُحَمَّدٍ وَآلِهِ

ٱلابْرَارِ ٱلطَّيِّبِينَ ٱلطَّاهِرِينَ ٱلاخْيَارِ

صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِمْ وَعَلَىٰ اجْسَادِهِمْ وَارْوَاحِهِمْ وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ

إِلٰهِي وَسَيِّدِي وَعِزَّتِكَ وَجَلالِكَ

لَئِنْ طَالَبْتَنِي بِذُنُوبِي لَاطَالِبَنَّكَ بِعَفْوِكَ

وَلَئِنْ طَالَبْتَنِي بِلُؤْمِي لَاطَالِبَنَّكَ بِكَرَمِكَ

وَلَئِنْ ادْخَلْتَنِي ٱلنَّارَ َلاخْبِرَنَّ اهْلَ ٱلنَّارِ بِحُبِّي لَكَ

إِلٰهِي وَسَيِّدِي إِنْ كُنْتَ لاَ تَغْفِرُ إِلاَّ لاوْلِيَائِكَ وَاهْلِ طَاعَتِكَ

فَإِلَىٰ مَنْ يَفْزَعُ ٱلْمُذْنِبُونَ

وَإِنْ كُنْتَ لاَ تُكْرِمُ إِلاَّ اهْلَ ٱلْوَفَاءِ بِكَ

فَبِمَنْ يَسْتَغِيثُ ٱلْمُسِيئُونَ

إِلٰهِي إِنْ ادْخَلْتَنِي ٱلنَّارَ فَفِي ذٰلِكَ سُرُورُ عَدُوِّكَ

وَإِنْ ادْخَلْتَنِي ٱلْجَنَّةَ فَفِي ذٰلِكَ سُرُورُ نَبِيِّكَ

وَانَا وَٱللَّهِ اعْلَمُ انَّ سُرُورَ نَبِيِّكَ احَبُّ إِلَيْكَ مِنْ سُرُورِ عَدُوِّكَ

اَللَّهُمَّ إِنِّي اسْالُكَ انْ تَمْلا قَلْبِي حُبّاً لَكَ

وَخَشْيَةً مِنْكَ

وَتَصْدِيقاً بِكِتَابِكَ

وَإِيـمَاناً بِكَ

وَفَرَقاً مِنْكَ

وَشَوْقاً إِلَيْكَ

يَا ذَا ٱلْجَلالِ وَٱلإِكْرَامِ حَبِّبْ إِلَيَّ لِقَاءَكَ

وَاحْبِبْ لِقَائِي

وَٱجْعَلْ لِي فِي لِقَائِكَ ٱلرَّاحَةَ وَٱلْفَرَجَ وَٱلْكَرَامَةَ

اَللَّهُمَّ الْحِقْنِي بِصَالِحِ مَنْ مَضَىٰ

وَٱجْعَلْنِي مِنْ صَالِحِ مَنْ بَقِيَ وَخُذْ بِي سَبِيلَ ٱلصَّالِحِينَ

وَاعِنِّي عَلَىٰ نَفْسِي بِمَا تُعِينُ بِهِ ٱلصَّالِحِينَ عَلَىٰ انْفُسِهِمْ

وَٱخْتِمْ عَمَلِي بِاحْسَنِهِ

وَٱجْعَلْ ثَوَابِي مِنْهُ ٱلْجَنَّةَ بِرَحْمَتِكَ

وَاعِنِّي عَلَىٰ صَالِحِ مَا اعْطَيْتَنِي

وَثَبِّتْنِي يَا رَبِّ وَلاَ تَرُدَّنِي فِي سُوءٍ ٱسْتَنْقَذْتَنِي مِنْهُ

يَا رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ

اَللَّهُمَّ إِنِّي اسْالُكَ إِيـمَاناً لاَ اجَلَ لَهُ دُونَ لِقَائِكَ

احْيِنِي مَا احْيَيْتَنِي عَلَيْهِ

وَتَوَفَّنِي إِذَا تَوَفَّيْتَنِي عَلَيْهِ

وَٱبْعَثْنِي إِذَا بَعَثْتَنِي عَلَيْهِ

وَابْرِئْ قَلْبِي مِنَ ٱلرِّيَاءِ وَٱلشَّكِّ وَٱلسُّمْعَةِ فِي دِينِكَ

حَتَّىٰ يَكُونَ عَمَلِي خَالِصاً لَكَ

اَللَّهُمَّ اعْطِنِي بَصِيرَةً فِي دِينِكَ

وَفَهْماً فِي حُكْمِكَ

وَفِقْهاً فِي عِلْمِكَ

وَكِفْلَيْنِ مِنْ رَحْمَتِكَ

وَوَرَعاً يَحْجُزُنِي عَنْ مَعَاصِيكَ

وَبَيِّضْ وَجْهِي بِنُورِكَ

وَٱجْعَلْ رَغْبَتِي فِيمَا عِنْدَكَ

وَتَوَفَّنِي فِي سَبِيلِكَ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِكَ

صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَعَلَىٰ آلِهِ

اَللَّهُمَّ إِنِّي اعُوذُ بِكَ مِنَ ٱلْكَسَلِ وَٱلْفَشَلِ

وَٱلْهَمِّ وَٱلْجُبْنِ وَٱلْبُخْلِ

وَٱلْغَفْلَةِ وَٱلْقَسْوَةِ وَٱلْمَسْكَنَةِ

وَٱلْفَقْرِ وَٱلْفَاقَةِ

وَكُلِّ بَلِيَّةٍ وَٱلْفَوَاحِشِ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ

وَاعُوذُ بِكَ مِنْ نَفْسٍ لاَ تَقْنَعُ

وَبَطْنٍ لاَ يَشْبَعُ

وَقَلْبٍ لاَ يَخْشَعُ

وَدُعَاءٍ لاَ يُسْمَعُ

وَعَمَلٍ لاَ يَنْفَعُ

وَاعُوذُ بِكَ يَا رَبِّ عَلَىٰ نَفْسِي وَدِينِي وَمَالِي

وَعَلَىٰ جَمِيعِ مَا رَزَقْتَنِي مِنَ ٱلشَّيْطَانِ ٱلرَّجِيمِ

إِنَّكَ انْتَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ

اَللَّهُمَّ إِنَّهُ لاَ يُجِيرُنِي مِنْكَ احَدٌ

وَلاَ اجِدُ مِنْ دُونِكَ مُلْتَحَداً

فَلاَ تَجْعَلْ نَفْسِي فِي شَيْءٍ مِنْ عَذَابِكَ

وَلاَ تَرُدَّنِي بِهَلَكَةٍ

وَلاَ تَرُدَّنِي بِعَذَابٍ الِيمٍ

اَللَّهُمَّ تَقَبَّلْ مِنِّي

وَاعْلِ ذِكْرِي

وَٱرْفَعْ دَرَجَتِي

وَحُطَّ وِزْرِي

وَلاَ تَذْكُرْنِي بِخَطِيئَتِي

وَٱجْعَلْ ثَوَابَ مَجْلِسِي

وَثَوَابَ مَنْطِقِي

وَثَوَابَ دُعَائِي رِضَاكَ وَٱلْجَنَّةَ

وَاعْطِنِي يَا رَبِّ جَمِيعَ مَا سَالْتُكَ وَزِدْنِي مِنْ فَضْلِكَ

إِنِّي إِلَيْكَ رَاغِبٌ يَا رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ

اَللَّهُمَّ إِنَّكَ انْزَلْتَ فِي كِتَابِكَ انْ نَعْفُوَ عَمَّنْ ظَلَمَنَا

وَقَدْ ظَلَمْنَا انْفُسَنَا فَٱعْفُ عَنَّا فَإِنَّكَ اوْلَىٰ بِذٰلِكَ مِنَّا

وَامَرْتَنَا انْ لاَ نَرُدَّ سَائِلاً عَنْ ابْوَابِنَا

وَقَدْ جِئْتُكَ سَائِلاً فَلاَ تَرُدَّنِي إِلاَّ بِقَضَاءِ حَاجَتِي

وَامَرْتَنَا بِٱلإِحْسَانِ إِلَىٰ مَا مَلَكَتْ ايْمَانُنَا

وَنَحْنُ ارِقَّاؤُكَ فَاعْتِقْ رِقَابَنَا مِنَ ٱلنَّارِ

يَا مَفْزَعِي عِنْدَ كُرْبَتِي

وَيَا غَوْثِي عِنْدَ شِدَّتِي

إِلَيْكَ فَزِعْتُ

وَبِكَ ٱسْتَغَثْتُ وَلُذْتُ

لاَ الُوذُ بِسِوَاكَ

وَلاَ اطْلُبُ ٱلْفَرَجَ إِلاَّ مِنْكَ

فَاغِثْنِي وَفَرِّجْ عَنِّي

يَا مَنْ يَقْبَلُ ٱلْيَسِيرَ وَيَعْفُو عَنِ ٱلْكَثِيرِ

ٱقْبَلْ مِنِّيَ ٱلْيَسِيرَ وَٱعْفُ عَنِّيَ ٱلْكَثِيرَ

إِنَّكَ انْتَ ٱلرَّحِيمُ ٱلْغَفُورُ

اَللَّهُمَّ إِنِّي اسْالُكَ إِيـمَاناً تُبَاشِرُ بِهِ قَلْبِي

وَيَقِيناً صَادِقاً حَتَّىٰ اعْلَمَ انَّهُ لَنْ يُصِيبَنِي إِلاَّ مَا كَتَبْتَ لِي

وَرَضِّنِي مِنَ ٱلْعَيْشِ بِمَا قَسَمْتَ لِي

يَا ارْحَمَ ٱلرَّاحِمِينَ

हिंदी अनुवाद

http://www.youtube.com/watch?v=qoh86UsF_aI 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान और रहम वाला है 

अल्ला हुम्मा  सल्ली अला मोहम्मद व आले मोहम्मद 

मेरे अल्लाह मुझे अपने अज़ाब में गिरफ्तार न कर और मुझे अपनी कुदरत के साथ ना आज़मा, मुझे कहाँ से भलाई हासिल हो सकरी है मेरे पालने वाले,  जबकि वो तेरे सिवा कहीं और मौजूद नहीं की जहां से निजात मिल सकेगी जबकि इस पर तेरे सिवा किसी को कुदरत नहीं, ना ही क्योंकि करने में तेरी मदद  और रहमत से बे-नियाज़ है और ना ही कोई बुराई करने वाला, तेरे सामने जुर्रत करने वाला  और तेरी रज़ाजोई ना करने वाला तेरे काबू से बाहर है, ऐ पालने वालेऐ पालने वालेऐ पालने वाले,   मैंने तेरे ही ज़रिये तुझे पहचाना, तूने अपनी तरफ मेरी रहनुमाई की, और मुझे अपनी तरफ बुलाया है, और अगर तू मुझे ना बुलाता तो मैं समझ ही नहीं सकता था की तू कौन है, हम्द है इस खुदा के लिए जिसे मै पुकारता हूँ तो जवाब देता है अगर्चेह जब वोह मुझे पुकारता है तो मै सुस्ती करता हूँ, हम्द है इस अल्लाह के लिए के  जिस से माँगता हूँ तो मुझे अता करता है, अगर्चेह वोह मुझ से क़र्ज़ का तालिब हो  तो कंजूसी करता हूँ, हम्द है इस अल्लाह के लिए के जब चाहूँ इसे आपनी हाजत के लिए पुकारता हूँ और जब चाहूँ तन्हाई में बगैर किसी सिफारिश के इस से राज़ व नियाज़ करता हूँ तो वोह मेरी हाजत पूरी करता है,  हम्द है इस अल्लाह के लिए की जिस के सिवा मै किसी को नहीं पुकारता और अगर इस के गैर से दुआ करूँ तो वो मेरी दुआ कबूल नहीं करेगा,  हम्द है इस अल्लाह के लिए जिस के गैर से मै  उम्मीद नहीं रखता और अगर उम्मीद रखूं भी तो वो मेरी उम्मीद पूरी न करेगा,  हम्द है इस अल्लाह के लिए जिस ने अपनी सुपुर्दगी में लेकर मुझे इज्ज़त दी और मुझे लोगों के सुपुर्द न किया की मुझे ज़लील करते,  हम्द है इस अल्लाह के लिए जो मुझे से मुहब्बत करता है अगर्चेह वो मुझ से बे-नियाज़ है,  हम्द है इस अल्लाह के लिए जो मुझ से इतनी नरमी करता है जैसे मै ने कोई गुनाह ना किया हो, बस मेरा रब मेरे नज़दीक हर शै से ज्यादा तारीफ के काबिल है और वो मेरी हम्द का ज्यादा हक़दार है,  ऐ माबूद! मई अपने मकासिद की राहें तेरी तरफ खुली हुई पाता हूँ, और उम्मीदों के चश्मे तेरे यहाँ भरे पड़े हैं, हर उम्मीदवार के लिए तेरे फज़ल से मदद चाहने की आजादी है और फरयाद करने वालों की दुआओं के लिए तेरे दरवाज़े खुले हैं, और मैं जानता हूँ की तू उम्मीदवारों की जाए क़बूलियत है, तू मुसीबत ज़दों के लिए फरयाद रसी  की जगह है, मै जानता की तेरी सखावत की पनाह लेना और तेरे फैसले पर राज़ी रहना कंजूसों की रोक टोक से बचने और खुदगर्ज़ मालदारों से महफूज़ रहने का ज़रिया है, नीज़ यह की तेरी तरफ आने वाले की मंजिल करीब है और तू अपनी मखलूक से ओझल नहीं है मगर इनके बुरे अमाल ने ही इन्हें तुझ से दूर कर रखा है  , मै अपनी तलब लेकर तेरी बारगाह में आया और अपनी हाजत के साथ तेरी तरफ मुतावाज्जः हुआ हूँ, मेरी फरयाद तेरे हुज़ूर में है, मेरी दुआ का वसीला तेरी ही ज़ात है, जबकि मई इसका हक़दार नहीं के तू मेरी सुने, और न ही इस काबिल हूँ की तू मुझे माफ़ करे, अलबत्ता मुझे तेरे करम पर भरोसा और तेरे सच्चे वादे पर ऐतेमाद है! तेरी तौहीद पर ईमान मेरी पक्की सच्ची पनाह है, और तेरे बारे में मुझे अपनी मग्फेरत पर यकीन है, तेरे सिवा मेरा कोई पालने वाला नहीं और तू ही सिर्फ यगाना है, तेरे कोई शरीक  नहीं,  ऐ माबूद यह तेरा फरमान है और तेरा कहना दुरुस्त और तेरा वादा सच्चा है की अल्लाह से इस का फज़ल मांगो, बेशक अल्लाह तुम पर बड़ा मेहरबान है, और ऐ मेरे सरदार यह बात तेरी शान से ब 'ईद है की तू मांगने का हुक्म दे और तू अता न फरमाए,  तू अपनी ममलेकत के बाशिंदों को बहुत बहुत अता करने वाला है और अपनी मेहरबानी व नरमी से इनकी तरफ मुतावाज्जः है, ऐ अल्लाह! जब मै बछा था तूने मुझे अपनी नेमत और एहसान के साथ पाला और जब मै बड़ा हुआ तो तूने शोहरत अता की, बस ऐ वो ज़ात जिस ने दुन्या में मुझे अपने एह्साने नेमत और अता से पाला और आखेरत में मुझे अपने अफु व करम का इशारा दिया है, ऐ मेरे मौला! मेरी मग्फेरत ही तेरी तरफ मेरी रहनुमा है और मेरी तुझ से मुहब्बत तेरे सामने मेरी सिफारिश है, और मुझे तेरी तरफ ले जाने वाले अपने इस रहबर पर भरोसा और तेरे हुज़ूर शिफा'अत करने वाले अपने शफ़ी पर इत्मीनान है, ऐ मेरे सरदार! मई तुझे इस ज़बान से पुकारता हूँ जो ब'वजह गुनाह के लुक्नत करती है , पालने वाले मै इस दिल से राज़ गोई करता हूँ जिसे इसके जुर्म ने तबाह कर दिया, ऐ पालने वाले ! मै तुझे पुकारता हूँ लेकिन सहमा हुआ, डरा हुआ, चाहता हुआ, उम्मीद रखता हुआ, ऐ मेरे मौला! जब मै अपने गुनाहों को देखता हूँ तो घबराता हूँ, और तेरे करम पर निगाह डालता हूँ तो आरज़ू बढती है, बस अगर तू मुझे माफ़ करे, तू  बेहतरीन रहम करने वाला है अज़ाब दे तो भो ज़ुल्म करने वाला नहीं, ऐ अल्लाह! जो काम तुझे नापसंद हैं वो अंजाम देने का बा-वजूद तुझ से सवाल करने की जुर्रत में तारा जुदो करम ही मेरी हुज्जत है, और हया की कमी के बा-वजूद सख्ती के वक़्त में मेरा सहारा तेरी ही मेहरबानी व नर्म रवी है, और मै उम्मीद रखता हूँ की ऐसी वैसी बातों के होते हुए भी तू मुझे मायूस न करेगा, बस मेरी उम्मीद बर ला और मेरी दुआ सुन ले, ऐ पुकारे जाने वालों में सबसे बेहतर! और जिन से उम्मीद की जाती है इनमे सबसे बुलंदतर, ऐ मेरे आका मेरी आरज़ू बड़ी और मेरा अमल बुरा है, बस अपने अफू से काम ले कर मेरी आरज़ू पूरी फरमा, और बुरे अमल पर मेरी गिरफ्त ना कर क्योंकि तेरा करम गुनाहगारों की सज़ाओं से बहुत बुलंद व बाला है और तेरा हलम कोताही करने वालों की सज़ाओं से अजीमतर है, और ऐ मेरे सरदार! मै तेरे खौफ से भाग कर तेरे फज़ल की पनाह लेता हूँ मै चाहता हूँ की जिस ने तुझ से अच्छा गुमान रखा है इस से दर गुज़र का वादा पूरा फरमा, ऐ मेरे परवरदिगार! मै क्या और मेरी औकात क्या, तुही अपने फज़ल से मुझे बख्श दे और अपने अफु से मुझ पर इनायत फरमा, ऐ मेरे रब! मुझे अपनी परदापोशी से ढांप और अपने ख़ास करम से मेरी सरज़निश टाल दे, अगर आज तेरे सिवा कोई दूसरा मेरे गुनाह को जान लेता तो मै यह कभी ना करता और अगर मुझे जल्द सज़ा मिलने का खौफ होता तो ज़रूर गुनाह से दूर रहता लेकिन इसकी वजह यह नहीं की तू देखने वालों में कमतर और जानने वालों में कम रूतबा है, बल्कि इसकी वजह यह है ऐ परवरदिगार की तू बेहतरीन परदापोश, सबसे बड़ा हाकिम, और सबसे ज़्यादा करम करने वाला। ऐबों को ढापने वाला गुनाहों को माफ़ करने वाला छुपी बातों का जान्ने वाला है, तू अपने करम से गुनाह को ढांपता और अपनी नरम खुई से सज़ा में ताखीर करता है, बस हम्द है तेरे लिए की जानते हुए नरमी से काम लेता है, तेरी हमद है की तू तवाना होते हुए माफ़ करता है और वो मेरे साथ तेरी नर्म रवी है जिस ने मुझे तेरी ना-फ़रमानी पर आमादा किया है तेरा मेरी परदापोशी करना मुझ में हया की कमी की मोवजिब बना है, और तेरी वसी रहमत और अज़ीम अफु के मग्फेरत के बैस मै तेरे हराम किये हुए कामों की तरफ जल्दी करता हूँ, ऐ नर्म खू , ऐ मेहरबान, ऐ ज़िंदा, ऐ निगहबान, ऐ गुनाह माफ़ करने वाले, ऐ तौबा कबूल करने वाले, ऐ अज़ीम अता वाले, ऐ क़दीम एहसान वाले, कहाँ है तेरी बेहतरीन परदापोशी कहाँ है तेरा बुलंद टार अफू, कहाँ है तेरी करीबतर कशाइश, कहाँ है तेरी फौरी फरयाद रसी,  कहाँ है तेरी वसी टार रहमत,  कहाँ है तेरी बेहतरीन अताएँ  कहाँ है तेरी खुशगवार बखशिशें  कहाँ है तेरे शानदार इनामात,  कहाँ है तेरा बा-अजमत फज़ल,  कहाँ है तेरी अज़ीम बख्शीश,  कहाँ है तेरा क़दीम एहसान,  कहाँ है तेरी मेहरबानी, ऐ मेहरबान अपनी मेहरबानी से, मोहम्मद (स:अ:वव) व आले मोहम्मद (अ:स) के सदके में मुझे अज़ाब से निकाल और अपनी रहमत से मुझे इससे रिहाई दे, ऐ नेकोकार, ऐ खुश सिफात, ऐ नेमत देने वाले, ऐ बुलंदी देने वाले, तेरी सज़ा से बचने में मुझे अपने अमाल पर कुछ भी भरोसा नहीं बल्कि तेरे फज़ल का सहारा है जो हम पर है क्योंकि तू गुनाह से बचा लेने वाला और बख्श देने वाला है तू एहसान के साथ नेमतों का आगाज़ करता है और मेहरबानी करते हुए गुनाहों की माफ़ी देता है बस हम नहीं जानते की किस बात पर शुक्र करें आया तेरी नेकी ज़ाहिर करने पर, या बुराई की परदापोशी पर या बहुत बड़ी गम ख्वारी और अताये नेमत पर शुक्र करें या बहुत चीज़ों से तेरे निजात अता करने और अमन देने पर शुक्र करें ऐ इसके दोस्त जो तुझ से दोस्ती करें और ऐ इसका नूरे चश्म जो तेरी पनाह ले सुर सबसे कट कर तेरा ही हो जाए, तू भलाई करने वाला और हम बुराई करने वाले हैं बस औ पालने वाले अपनी भलाई से काम लेते हुए हमारी बुराई से दर गुज़र फरमा ऐ पालने वाले वो कौन सी नादानी है जिस पर तेरा करम वुस'अत ना रखता हो या वो कौन सा ज़माना है जो तेरी मोहलत से दराज़ हो और तेरी नेमतों के सामने हमारे अमाल की क्या वक'अत है किस तरह से हम अपने अमाल में इजाफा करें की इन्हें तेरे करम के सामने ला सकें बल्कि तेरी वो रहमत गुनाहगारों पर कैसे तंग हो जाएगी जो इन पर छाई हुई है ऐ वसी बख्शीश वाले ऐ मेहरबानी से बहुत ज्यादा देने वाले बस तेरी इज्ज़त की क़सम ऐ मेरे आक़ा! तू धुत्कारे तब भी मै तेरे दरवाज़े से न हटूंगा चिंकी मुझे तेरे जूदो करम की मग्फेरत है इसलिए मै अपनी ज़बान को तेरी तारीफ व तौसीफ से ना रोकूंगा, तू जो चाहे कर गुज़रता है जिसे चाहे, जिस चीज़ से चाहे और जैसे चाहे अज़ाब देता है और जिस पर चाहे जिस चीज़ से चाहे और जैसे चाहे रहम करता है, तेरे फज़ल पर पूछ गुछ नहीं की जा सकती, तेरी सल्तनत पर झगडा नहीं हो सकता और तेरे काम में कोई शरीक नहीं, तेरे हुक्म में कोई ज़िददियत नहीं, और तेरी तदबीर में कोई एहतियात नहीं कर सकता, तेरे ही लिए पैदा करना और हुक्म फरमाना बा-बरकत है वो अल्लाह जो जहानों का पालने वाला है, ऐ परवरदिगार! यह है इस स्शाख्स का मुकाम जिसने तेरी पनाह ली, तेरे सायाए करम में आया, और तेरे ही एहसान और नेमतों का ख्वाहाँ हुआ है, और तू ऐसा सखी है की तेरा दामान अफू और तंग नहीं होता, तेरे फज़ल में कमी नहीं आती, और तेरी रहमत में कमी नहीं पड़ती, हम ने एतेमाद किया है तुझ पर, तेरी दरीना दर गुज़र अज़ीम तर फज़ल व करम और तेरी कुशादा तर रहमत के साथ, तू ऐ मेरे पालने वाले! क्या तू हमारे अच्छे गुमान के खिलाफ करेगा या हमारी कोशिश नाकाम बनाएगा! नहीं, ऐ मेहरबान! तुझ से हम यह गुमान नहीं रखते और ना तुझ से हमारी यह ख्वाहिश थी! ऐ पालने वाले! बेशक तेरी बारगाह से हमारी बहुत सी लम्बी उम्मीदें हैं, बेशक हम तेरी बारगाह से बड़ी बड़ी आरजूएं रखते हैं, हम तेरी ना फ़रमानी करते हैं तो भी हमें आस है तू हमारी परदापोशी करेगा और हम तुझ से दुआ मांगते हैं तो उम्मीद करते हैं की तू हमारी दुआ कबूल करेगा, बस ऐ हमारे मौला हमारी उम्मीदें पूरी फरमा अगर्चेह हम जानते हैं की हमारे अमाल की सज़ा क्या है लेकिन तेरा इल्म हमारे बारे में है और हमें इसका इल्म है की तू हमें अपने यहाँ से पलटायेगा नहीं, चाहे हम तेरी रहमत के हक़दार ना भी हुए, बस तू इसका अहल है की हम पर और दुसरे गुनाहगारों पर अपने वसी तर फज़ल से दाद व दहश करे, बस हम पर ऐसा एहसान फरमा की जिस का तू अहल है, और सखावत कर क्योंकि हम तेरे इनाम के मोहताज हैं, ऐ बख्शने वाले तेरे ही नूर से हमें हिदायत मिली, तेरे फज़ल से हम मालामाल हुए और तेरी नेमत के साथ हम सुबह व शाम करते हैं, हमारे गुनाह तेरे सामने हैं, ऐ अल्लाह! हम तुझ से इनकी बख्शीश चाहते हैं, और तेरे हुज़ूर तौबा करते हैं, तू नेमतों के ज़रिये हम से मोहब्बत करता है, और इसके मुकाबिल हम तेरी ना फ़रमानी करते हैं, तेरी भलाई हमारी तरफ आ रही है, और हमारी बुराई तेरी तरफ जा रही है, तू हमेशा हमेशा के लिए इज्ज़त वाला बादशाह है, तेरे पास हमारे बुरे अमाल जाते हैं तो भी तुझे हम पर अपनी नेमतों के बारिश से रोक नहीं सकते, और तू हम पर अपनी अताएँ बढाता रहता है, बस तो पाक तर है, कैसा बुर्दबार है कितना अज़ीम है कितना मो'अजज़ीज़ है, इब्तदाई करने और पलटाने में तेरे नाम पाक तर हैं हमें तेरी सनाई बरतर है और तेरी नेमतें और तेरे काम बुलंद तर  हैं, ऐ माबूद! तू फज़ल में वुस'अत वाला और बुर्दबारी में अजीमतर है इस से की तू मेरे फेल और खता के बारे में कयास करे, बस माफ़ी देमाफ़ी दे माफ़ी दे  मेरे सरदारमेरे सरदारमेरे सरदार! ऐ अल्लाह! हमें अपने ज़िक्र में मशगूल रख, हमें अपनी नाराज़गी से पनाह दे, हमें अपने अज़ाब से अमां दे, हमें अपनी अताओं से रिजक दे, हमें अपने फज़ल से इनाम दे,  हमें अपने घर (काबा) का हज नसीब फरमा, और हमें अपने नबी (स:अ:व:व) के रौज़े की ज्यारत करा, तेरा दरूद, तेरी रहमत, तेरी बख्शीश और तेरी राजा हो तेरे नबी (स:अ:व:व) के लिए और इनके अहलेबैत (अ:स) के लिए, बेशक तू नज़दीक तर कबूल करने वाला है! और हमें अपनी इबादत बजा लाने की तौफीक दे, हमें अपनी मिल्लत और ओने नबी  (स:अ:व:व) की सुन्नत पर मौत दे, इनपर (स:अ:व:व) और इनकी आल (अ:स) पर खुदा त'आला की रहमत हो, ऐ माबूद मुझे बल्ह्श दे और मेरे माँ बाप को भी और दोनों पर रहम कर जैसा इन्होने बचपन में मुझे पाला है, ऐ अल्लाह! इन्हें एहसान का बदला एहसान और गुनाहों के बदले बख्शीश अता फरमा! ऐ माबूद! बख्श दे मोमिन मर्दों और मोमिना औरतों को जो इनमें ज़िंदा और मुर्दा हैं, सभी को बख्श दे, और इनके और हमारे दरम्यान नेकियों के ज़रिये ता'अल्लुक़ बना दे,! ऐ माबूद! बख्श दे हमारे ज़िंदा, मुर्दा, हाज़िर, गायब, और मर्द व औरत, खुर्द व बुज़ुर्ग, और हमारे आज़ाद और गुलाम सभी को बख्श दे!खुदा से फिर जाने वाले झूठे हैं, वो गुमराह गुमराही में दूर निकल गए हैं और वो नुकसान उठाने वाले हैं, खुला नुकसान! ऐ माबूद! हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) और आले मोहम्मद (अ:स) पर रहमत नाजिल फरमा और मेरा खात्मा बखैर फरमा! और दुन्या व आखेरत में मेरे अहम् कामों में मेरी हिमायत फरमा और मुझ पर इसे मुसल्लत न कर जो मुझ पर रहम ना करे और मेरे लिए अपनी तरफ से बाक़ी रहने वाला निगहबान करार दे, अपनी दी हुई अच्छी नेमतें मुझ से छीन न ले और मुझे अपने फज़ल से रोज़ी अता कर जो कुशादा हलाल और पाक हो! ऐ माबूद! मुझे अपनी पासदारी में ज़ेरे निगाह रख और अपनी हिफाज़त में महफूज़ फरमा, अपनी हिमायत में मुझे अमान  दे, और मुझे हमारे इस साल और आइन्दा सालों में भी अपने बैत'अल-हराम काबा का हज नसीब फरमा और अपने नबी (स:अ:व:व) व अ'इम्मा (अ:स) की ज्यारत नसीब फरमा, की इन सब पर सलाम हो! ऐ परवरदिगार! इन बुलंद मर्तबा बारगाहों और इन बा-बरकत मुकामात से मुझे बर-किनार ना रख! ऐ माबूद! मुझे ऐसी तौबा की तौफीक दे के फिर तेरी ना-फ़रमानी ना करूँ! मेरे दिल में नेकी व अमल का जज्बा बहा दे और जब तक मुझे ज़िंदा रखे दिन रात अपना खौफ मेरे कलब में डाले रख ऐ जहानों के पालने वाले! ऐ माबूद! जब भी मई कहता हूँ की मई आमादा व तैयार हूँ और तेरे हुज़ूर नमाज़ गुज़ारने को खडा होता हूँ और तुझ से मुनाजात करता हूँ तो मुझे ऊंघ आ लेती है जबकि मै नमाज़ में होता हूँ और जब मई तुझ से राज़ व नयाज़ करने लगूँ तो इस हाल में बरक़रार नहीं रहता, मुझे क्या हो गया मै कहता हूँ की मेरा बातिन साफ़ है मई तौबा करने वालों की सोहबत में बैठता हूँ ऐसे में कोई आफत आ पड़ती है जिससे मेरे क़दम डगमगा जाते हैं और मेरे और तेरे हुजूरी के दरम्यान कोई चीज़ आड़ बन जाती है! मेरे सरदार! शायद की तूने मुझे अपनी बारगाह से हटा दिया है, और अपनी खिदमत से दूर कर दिया है, या शायद के तू यह देखता है की मैं तेरे हक को सुबुक समझता हूँ बस, मुझे एक तरफ कर दिया या शायद तूने देखा की मैं तुझ से रो'गरदा हूँ  तूने मुझे बुरा समझ लिया या शायद तूने देखा की मैं झूटों में से हूँ तो मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया या शायद तू देखता है की में तेरी नेमतों का शुक्र अदा नहीं करता तो मुझे महरूम कर दिया या शायद की तूने मुझे इल्माई की मजालिस में नहीं पाया तो इस बिना पर मुझे ज़लील कर दिया है या शायद तूने मुझे गाफिल देखा तो इस पर मुझे अपनी रहमत से मायूस कर दिया है, या शायद तूने मुझे बेकार बातें करने वालों में देखा तो मुझे इन्हीं में रहने दिया या शाययद तू मेरी दुआ को सुनना पसंद नहीं किया तो मुझे दूर कर दिया या शायद तूने मुझे मेरे जुर्म और गुनाह का बदला दिया है या शायद मैं ने तुझ से हया करने में कमी की तो मुझे यह सज़ा मिली है, बस ऐ परवरदिगार! मुझे माफ़ कर दे की मुझ से पहले तूने बहुत से गुनाहगारों को माफ़ फरमाया है इसलिए के ऐ पालने वाले तेरी बख्शीश कोताही करने वालों से बुज़ुर्गतर है, और मैं तेरे फज़ल की पनाह ले रहा हूँ, और तुझ से तेरी ही तरफ भागा हूँ, तेरे वादे की वफ़ा चाहता हूँ की जो तुझ से अच्छा गुमान रखता है इसे माफ़ कर दे, मेरे माबूद! तेरा फज़ल वसी तर  और तेरी बुर्दबारी अजीम्तर है इस से की तू मुझे मेरे अमल के साथ तौले या मेरे गुनाह के बाईस मुझे गिरा दे, और ऐ मेरे आक़ा! मैं क्या और मेरी औकात क्या! मुझे अपने फज़ल से बख्श दे मेरे सरदार और अपने अफु के सदके में मुझे अपने परदे में लेले और अपने ख़ास करम से मुझे सरज़निश से माफ़ रख, मेरे सरदार! मैं वोही बच्चा हूँ जिसे तूने पाला मैं वोही कोरा हूँ जिसे तूने इल्म दिया, मैं वोही गुमराह हूँ जिसे तूने राह दिखाई, मैं वो पस्त हूँ जिसे तूने बुलंद किया, मैं वो खौफ्ज़दाह हूँ जिसे तूने अमन दिया, मैं वोह भूका हूँ जिसे तूने सेर किया, और वो प्यासा हूँ जिसे तूने सैराब किया, मैं वो उरयाँ हूँ जिसे तूने लिबास दिया, मैं वो मोहताज हूँ जिसे तूने गनी बनाया, मैं वो कमज़ोर हूँ जिसे तूने कुव्वत बख्शी, मैं वो पस्त हूँ जिसे तूने इज्ज़त अता फरमाई, मैं वो बीमार हूँ जिसे तूने सेहत अता फरमाई, मैं वो सायेल हूँ जिसे तूने बहुत कुछ अता किया, मैं वो गुनाहगार हूँ जिसे तूने ढांप लिया, मैं वो खताकार हूँ जिसे तूने माफ़ किया, मैं वो कमतर हूँ जिसे तूने बढ़ा दिया है, मैं वो कमज़ोर हूँ जिस की तूने मदद की, और मैं वो निकाला हुआ हूँ जिसे तूने पनाह दी! ऐ परवरदिगार! मैं वोही हूँ जिस ने खिलवत में तुझ से हया नहीं की और जलूत में तेरा लिहाज़ नहीं रखा, मैं बहुत भारी मुसीबतों वाला हूँ, मैं वो हूँ जिसने अपने सरदार पर जुर्रत की, मैं वो हूँ जिस ने इसकी ना'फ़रमानी की जो आसमानों पर मुसल्लत हैमैं वो हूँ जिस ने रब्बे जलील की ना'फ़रमानी के लिए रिश्वत दीमैं वो हूँ जब मुझे इसकी खुशखबरी मिली तो मैं दौड़ता हुआ इसकी तरफ गया! मैं वो हूँ जिसे तूने ढील दी तो होश में ना आया और तूने मेरी परदापोशी की तो मैंने हया से काम ना लिया और गुनाहगारों में हद से गुज़र गया! तूने मुझे नज़रों से गिराया तो मैंने कुछ परवाह नहीं की बस तूने अपनी नरमी से मुझे ढील दी और अपने हिजाब से मेरी परदापोशी की, जैसा की तू मेरी तरफ से बे'खबर है! तूने मुझे ना'फरमानियों की सज़ाओं से ब़र'किनार रखा गोया तू मुझ से शर्म खाता है! मेरे माबूद! जब मैंने तेरी नं'फ़रमानी की तो वो इस लिए नहीं की के मैं तेरी पर्वार्दिगारी से इनकारी था या तेरे हुक्म को सुबुक समझ दिया था या खुद को तेरे अज़ाब के तरफ खींच रहा था या तेरे डरावे को कमतर समझता था, बल्कि हकीकत यह थी की ख़ता यूँ उभरी की मेरे नफस ने मेरे लिए माज़ेन कर दिया था, मेरी ख्वाहिश मुझ पर ग़ालिब आ गयी थी, मेरी बद'बख्ती ने इसपर मेरा साथ दिया, तेरी परदापोशी ने मुझे मगरूर कर दिया यूं मैं तेरी ना'फ़रमानी और तेरे हुक्म की मुखालिफत में कोशां हुआ, बस अब मुझे तेरे अज़ाब से कौन रिहाई देगा, कल को मुझे दुश्मनों के हाथों से कौन छुड़ाएगा और अगर तूने अपनी रस्सी मुझ से काट दी तो फिर मैं किस की रस्सी को थामुंगा, हाय अफ़सोस के तेरी किताब में मेरे ऐसे ऐसे अमाल दर्ज हो गए की अगर मैं तेरे फज़ल व करम और तेरी वासी रहमत का उम्मीदवार न होता और ना'उम्मीदी से तेरी मुमानेअत को ना जानता तो जब मैं अपने अमाल को याद करता तो ज़रूर ना'उम्मीद हो जाता, ऐ पुकारे जाने वालों में बेहतरीन और उम्मीद किये जाने वालों में बरतर, ऐ माबूद! मैं इस्लाम की पनाह में तुझ को अपना वसीला बनाता हूँ, एहतराम कुरान के साथ मुझे तुझ पर भरोसा है, और मैं तेरे नबी (स:अ:व:व) उम्मी कुरैशी हाशमी अरबी, तहामी, मक्की, मदनी से मोहब्बत के वास्ते से तेरे तक़र्रुब का उम्मीदवार हूँ, बस मेरी इस इमानी उन्सियत को वहशत में ना डाल और मेरे सवाब को अपने गैर के इबादत गुज़ार का सवाब ना करार दे क्योंकि एक गिरोह ज़बानी कलामी मोमिन है ताकि इस के ज़रिये इनका खून महफूज़ रहे तो इन्होंने अपना मकसद पा लिया, लेकिन हम जो तुझ पर अपनी ज़बानों और दिलों से ईमान लाये हैं ताकि तू हमें माफ़ का दे, बस हमारी उम्मीद पूरी फरमा और अपनी आरज़ू हमारे सीनों में बसा दे! और हमारे दिलों को टेढा ना फरमा इसके बाद की जब तूने हमें हिदायत दी है और अपनी तरफ से हम पर रहमत फरमा की बेशक तू बहुत देने वाला है! बस क़सम है तेरी इज्ज़त की के अगर तू मुझे झिड़क दे तो भी मई तेरी बारगाह से ना हटूँगा, और तेरी तौसीफ करने से ज़बान ना रोकूंगा क्योंकि मेरा दिल तेरे फज़ल व करम और तेरी वसी रहमत की मग्फेरत से भरा हुआ है, तो गुलाम अपने मौला व आका के सिवा किस की तरफ जा सकता है और मखलूक को अपने खालिक के इलावा कहाँ पनाह मिल सकती है, मेरे अल्लाह! अगर तूने मुझे जंजीरों में जकड दिया और देखती आँखों मुझ से अपना फैज़ रोक दिया और लोगों के सामने  मेरी रुस्वाइयां अयाँ कर दी और मेरे जहन्नुम का हुक्म सादिर कर दिया और तू मेरे और नेक लोगों के दरम्यान हायेल हो जाए तो भी मैं तुझ से उम्मीद ना तोडूंगा, तुझ से अफु व दरगुज़र की उम्मीद रखने से बाज़ ना आऊँगा और मेरे दिल से तेरी मोहब्बत ख़तम ना होगी, मैं दुन्या में दी गयी तेरी नेमतों और गुनाहों पर तेरी परदापोशी को हरगिज़ नहीं भूल सकता मेरे आका! मेरे दिल से दुन्या की मोहब्बत निकाल दे, और मुझे अपनी मखलूक में सबसे बेहतर नबियों के खातिम मोहम्मद मुस्तफा (स:अ:व:व) और इनकी आल (अ:स) के कुर्ब में जगह इनायत फरमा और मुझे अपने हुज़ूर तौबा के मुकाम की तरफ पलटा दे और मुझे खुद अपने आप पर रोने की तौफीक दे क्योंकि मैं ने अपनी उम्र ताल मटोल और झूटी आरजूओं में गंवा दी! और अब मैं अपनी बहबूदी से मायूस हो जाने को हूँ तो मुझ से बुरा हाल और किस का हिगा! अगर मैं इस हाल के साथ ही अपनी कब्र में उतार दिया जाऊं जबकि मैंने कब्र के लिए कुछ सामान नहीं किया और नेक अमाल का बिस्तर नहीं बिछाया के आराम पाऊँ, ऐसे में क्यों ज़ारी ना करूँ के मुझे नहीं मालूम मेरा अंजाम क्या होगा, मैं देखता हूँ की नफस मुझे धोका देता है और हालात मुझे फरेब देते हैं और अब मौत ने मेरे सर पर अपने पर फैलाए हैं तो कैसे गिरया ना करूँ, मैं जान के निकल जाने पर गिरया करता हूँ, कब्र की तारीकी और इसके पहलू की तंगी पर गिरया करता हूँ, मुनकीर नकीर के सवालात के डर से गिरया करता हूँ, ख़ास कर इसलिए गिरया करता हूँ के मुझे कब्र से उठना है की उरयानी व ख्वारी के साथ अपने गुनाहों का बार लिए हुए दायें बाएं देखूंगा जब दुसरे लोग ऐसे हाल में होंगे जो मेरे हाल से मुख्तलिफ होगा, इनमें से हर शख्स दूसरों से बेखबर अपने हाल में मगन होगा! इस रोज़ बाज़ के चेहरे कुशादा खन्दां और खुश होंगे और बाज़ चेहरे ऐसे होंगे जिन पर गर्द व गुबार और तंगी व ज़िल्लत का गलबा होगा, मेरे सरदार! तू ही मेरा सहारा है तुही मेरी टेक है तुही मेरी उम्मीदगाह है, तुझी पर मुझे भरोसा है और तेरी रहमत से तअल्लुक है, तू जिसे चाहे रहमत से नवाजता है और जिसे तू पसंद  करे इसको अपनी मेहरबानी की राह दिखाता है, बस हमद तेरे ही लिए है की तूने मेरे दिल को शिर्क से पाक किया!  तेरे ही लिए हमद है की तूने मेरी ज़बान को गोया किया, आया मैं इस कज-ज़बान से तेरा शुक्र अदा कर सकता हूँ या अमल में कोशिश करके तुझे राज़ी कर सकता हूँ, ऐ परवरदिगार तेरी हमद के बराबर मेरी ज़बान की क्या हैसियत है और तेरी नेमतों और एहसानों के सामने मेरे अमल का क्या वजन है! मरे माबूद! तेरी सखावत ने मेरी आरज़ू को बढाया और तेरी कद्रदानी ने मेरे अमल को कबूल फरमाया है, मेरे सरदार मेरी रगबत तेरी तरफ, उम्मीद तेरी ज़ात से है और खौफ भी तुझी से है, और यह मुझे तेरे हुज़ूर खींच लायी है, ऐ खुदाए यकता मेरी हिम्मत तेरे हुज़ूर पहुँच के ख़तम हो गयी और मेरी रगबत तेरे खजाने के गिर्द घूम रही है, मेरी उम्मीद और मेरा खौफ ख़ास तेरे लिए है, मेरी मोहब्बत तेरे साथ लगी हुई है मेरे हाथ ने तेरा दामन थाम रखा है, मेरे खौफ ने मुझे तेरी इता'अत की तरफ बढ़ाया है, ऐ मेरे आका! मेरा दिल तेरे ज़िक्र से ज़िंदा है और तेरी मुनाजात के ज़रिये मैंने अपना खौफ दूर किया है, बस औ मेरे मौला! और मेरी उम्मीद्गाह, ऐ मेरे सवाल की इन्तेहा मुझे अपनी इता'अत में लगा कर मुझे गुनाह से रोक दे और मेरे गुनाह के दरम्यान जुदाई डाल दे, बस मैं तुझ से अजली उम्मीद और बड़ी ख्वाहिश रखते हुए सवाल करता हूँ, इस मेहरबानी और इनायत का जो तूने अपनी ज़ात पर वाजिब की हुई है, बस हुक्म तेरा ही है, तू यकता है, तेरा कोई सानी नहीं है और साड़ी मखलूक तेरा कुनबा है जो तेरे अख्त्यार में है और हर चीज़ तेरे सामने झुकी हुई है, तू बा-बरकत है ऐ जहानों के पालने वाले! मेरे अल्लाह! मुझ पर रहम फरमा जब मेरे पास उज़्र्र ना रहे, तेरे हुज़ूर बोलने में मेरी ज़बान गुंग हो जाए और तेरे सवाल पर मेरी अक्ल गूम हो जाए, बस मेरी सबसे बड़ीउम्मीदगाह  मुझे इस वक़्त ना-उम्मीद ना कर जब मेरी हाजत सख्त हो मुझे नादानी पर दूर ना फरमा, मेरी कम सबरी पपर महरूम ना रख मेरी हाजत में मुताबिक अता कर और मेरी कमजोरी पर रहम फरमा! मेरे सरदार! तुही मेरा आसरा है, तुझ पर भरोसा है तुझी से उम्मीद है, तुझी पर तवक्कुल और तेरी रहमत से त'अल्लुक़ है, तेरी ड्योढ़ी पर डेरा डाले हुए हूँ तेरी सखावत से अपनी हाजत बर'आरी चाहता हूँ! ऐ मेरे रब! तेरे करम से अपनी दुआ की इब्तेदा करता हूँ, तुझ से तंगी दूर करने की उम्मीद करता हूँ तेरे खजाने से अपनी उसरत दूर कराना चाहता हूँ, तेरी अफु के साए में आया खडा हूँ, मेरी निगाहें तेरी अता व सखावत की तरफ उठती हैं और हमेशा तेरे एहसान की तरफ नज़र जमाये रखता हूँ! बस मुझे जहन्नुम में ना जलाना की तू मेरी उम्मीद का मरकज़ है और मुझी हावियाह दोज़ख में ना ठहराना क्योंकि तू मेरी आँखों की ठंडक है, ऐ मेरे आका! तेरे एहसान और भलाई से मुझे जो गुमान है इसको ना झुटला क्योंकि तुही मेरी जाए एतमाद है और मुझे अपनी तरफ के सवाब से महरूम ना फरमा तो मेरी मोहताजी से वाकिफ है! मेरे अल्लाह! अगर मेरी मौत करीब आ गयी है  और मेरे अमल ने तुझे मेरे नज़दीक नहीं किया तो मैं अपने गुनाहों के इकरार को तेरे हुज़ूर अपने गुनाहों का उज़र करार देता हूँ, मेरे माबूद! अगर तू माफ़ कर दे तो कौन तुझ से ज़्यादा माफ़ करने वाला है, और अगर तू अज़ाब दे तो कौन है जो फैसला करने में तुझ से ज़्यादा आदिल है , इस दुन्या में मेरी बेकसी पर रहम फरमा, और मौत के वाकत मेरी तकलीफ पर और काबे में मेरी तन्हाई और पहलूए कब्र में मेरी खौफ्ज़दगी पर रहम फरमा, जब मैं हिसाब के लिए उठाया जाऊं तो अपने हुज़ूर मेरे ब्यान को नरम फरमा, मेरे अमाल में से जो लोगों से मख्फी हैं इनपर माफ़ी फरमा, मेरी जो परदापोशी की है इसे दायमी कर दे, और इस वक़्त रहम फरमा जब मेरे दोस्त बिस्तर पर मेरे पहलू बदल रहे होंगे इस वक़्त रहम फरमा जब मेरे नेक हमसाये तख्ता-इ-गुसल पर मुझे इधर से उधर करते होंगे, इस वक़्त मेहरबानी फरमा जब मेरे रिश्तेदार मेरा जनाज़ा चारो तरफ से उठाये हुए ले जायेंगे, और मुझ पर इस वक़्त बख्शीश कर जब तेरे हुज़ूर आऊँगा और कब्र में तनहा हूंगा, और इस नए घर में मेरी बे कासी पर रहम व करम फरमा यहाँ तक की तेरे सिवा किसी और से ना लगाव हो! ऐ मेरे आका! अगर तूने मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया तो मैं तबाह हो जाऊंगा। मेरे सरदार! अगर तूने खता ना माफ़ की तो किस से मदद मांगूं, अगर इस मुसीबत में मुझ पर तेरी इनायत न हुई तो किस्से फरयाद करूँ और अगर मेरी तंगी दूर न करे तो किसे अपना हाल सुनाऊं! मेरे सरदार! अगर तू मुझ पर रहम न करे तो फिर मेरा कौन है जो मुझ पर रहम करेगा! अगर इस ज़रुरत के दिन मुझ पर तेरा करम न हो तो किस से इस की उम्मीद करूँ, जब मेरा वक़्त ख़तम हो जाए तो गुनाहों से भाग कर किस के पास जाऊं! मेरे सरदार! मुझे अज़ाब न देना की मैं उम्मीद ले कर आया हूँ! मेरे अल्लाह! मेरी उम्मीद पूरी फरमा और खौफ से अमां दे, बस गुनाहों की कसरत में तेरे अफु के सिवा मुझे किसी से उम्मीद नहीं! मेरे आका! मैं तुझ से वो कुछ माँगता हूँ जिस का हक़दार नहीं हूँ और तू ढांपने वाला और बख्शने वाला है, बस मुझे बख्श दे तू अपने नज़रे करम से मुझे ऐसा लिबास दे की जो मेरी खताओं को छुपा ले, तू  वो खताएं माफ़ कर दे की इनपर बाज़-पुर्स न हो, बेशक तू क़दीमी नेमत वाला, बड़ा दर-गुज़र करने वाला, और मेहरबान माफ़ी देने वाला है! मेरे अल्लाह! तू वो है जो सवाल न करने वालों और अपने रुबूबियत के मुकिर लोगों को भी अपने फैज़ व करम से नवाजता है तो मेरे सरदार! क्योंकर वो महरूम रहेगा जो तुझ से माँगता है और यकीन रखता है की पैदा करना और हुक्म देना ख़ास तेरे ही लिए है, बा-बरकत और बुलन्द्तर है तू ऐ जहानों के पालने वाले, ऐ मेरे आका ! तेरा बन्दा हाज़िर है जिसे इसकी नेकी ने तेरे दरवाज़े पर ला खडा किया है वो अपनी दुआ के जरिया तेरे एहसान का दरवाज़ा खटखटा रहा है, बस अपनी ज़ात के वास्ते मुझे अपनी तवज्जह से महरूम न फरमा और मेरी अर्ज़ कबूल करले, मैंने इस दुआ के ज़रिये तुझे पुकारा है और उम्मीद रखता हूँ की तू इसे रेड न करेगा क्योंकि मुझे मेहरबानी और रहमत के मग्फेरत है, मेरे माबूद! तू वो है जिस से सायेल को इसरार नहीं करना पड़ता और अता करने से तुझ में कमी नहीं आती, तू ऐसा है जैसा तू बताता है और इस से बुलंद है जैसा हम कहते हैं, ऐ माबूद! मैं माँगता हूँ तुझ से बेहतरीन सब्र जल्द्तर कशाइश, सच बोलने की तौफीक, और बेशतर सवाब की अताय्गी! ऐ परवरदिगार! मैं तुझ से हर भलाई का सवाली हूँ जिसे तुन जानता है और मैं नहीं जानता! ऐ अल्लाह! मैं तुझ से वो चीज़ माँगता हूँ जो तेरे नेक बन्दे तुझ से मांगते हैं, ऐ बेहतरीन मसूल और अता करने वालों में बेहतरीन, मैं अपने लिए अपने कुनबे, अपने वालदैन के लिए, अपनी औलाद, 'अल्लुक्दारों और दीनी भाइयों के लिए जो चाहता हूँ अता फरमा और मेरी ज़िन्दगी बेहतरीन मेरी अच्छाई ज़ाहिर और मेरे तमाम हालात को सुधार दे! और मुझे उन लोगों में करार दे जिन को तूने लम्बी उम्र दी, इनके अमल को नेक गर्दाना इनको अपनी बहुत से नामतें अता की, और तू इनसे राज़ी हो गया और इनको पाकीज़ा ज़िन्दगी बख्शी जिसमें वो सदा खुश रहे इनको इज्ज़तदार बनाया, और रोज़गार को मुकम्मल फरमा, क्योंकि खुद तू जो चाहे करता है और जो तेरा गैर चाहे तू वो हो नहीं सकता, वक्तों और दिन के गोशों में जिस अमल से तेरा तक़र्रुब चाहता हूँ इसमें मेरी तरफ से रिया और तारीफ की ख्वाहिश खुद्सताई और बड़ाई का एहसास न आने दे और मुझे इनमें करार दे जो तुझ से डरते हैं! ऐ माबूद! मुझे रोज़ी में कशाइश वतन में अमन और मेरे रिश्तेदारों और मेरी औलाद के बारे में खुनकी चश्म फरमा और अपनी नेमतों में मुझे खुसूसी हिस्सा, बदन में सेहत व तंदरुस्ती व तवानाई दे और दीं माँ सलामती इनायत फरमा, और मुझे ऐसे अमल की तौफीक दे के मैं तेरी बंदगी और तेरे रसूल हज़रत मोहम्मद (स:अव:व) की फरमाबरदारी में रहूँ जब तक तू मुझे ज़िंदा रखे, मुझे अपने बन्दों में करार दे जिनका हिस्सा तेरे यहाँ इन भलाइयों में बहुत ज्यादा है जो तूने नाजिल की और नाजिल करता है। माह रमजान में, शब् कद्र में, और जो तू हर साल के दौरान नाजिल करता है यानी वोह रहमत जिसे तू फैलाता है, वोह आराम जो तू देता है, वो सख्ती जिसे तू दूर करता है, वो नेकियाँ जो तू कबूल करता है, और वो गुनाह जो तू माफ़ फरमाता है, और मुझे बैतूल हराम काबा का हज इस साल और आइन्दा सालों में भी नसीब फरमा और मुझ को अपने वुस'अत वाले फज़ल से कुशादा रिजक दे, और ऐ मेरे सरदार बुरी चीज़ों  को मुझ से दूर रख मेरे क़र्ज़ और नाहक ली हुई चीज़ों को मेरे तरफ से लौटा दे, हत्ता की मुझ पर ईज़ा न रहे और मेरे दुश्मनों, हासिदों और मुखालिफों के काना और आँखें मेरी तरफ से बंद कर दे,  और इनके मुकाबिल मेरी मदद फरमा, मेरी आँखें ठंडी कर और मेरे दिल को फरहत दे, मेरी तकलीफ और परेशानी के दूर हो जाने का ज़रिया पैदा कर दे, तेरी सारी मख्लूकात में से जो जो मेरे लिए बुरा इरादा रखता है इसे मेरे पांव तले दाल दे, और शैतान व सुलतान के शर और बुरे माल से बचने में मेरी मदद फरमा और मुझे सब गुनाहों से पाक साफ़ कर दे! अपनी दर-गुज़र के साथ मुझे जहन्नुम से पनाह दे अपनी रहमत से मुझे जन्नत में दाखिल कर, अपने फज़ल व करम से हुर्रुल-ऐन को मेरी बीवी बना दे, और मुझे अपने प्यारों और नेकोकारों के साथ जगह दे जो हज़रत मुहम्मद (स:अ:अ:व:) और इनकी खुश'इतवार आल (अ:स) हैं और पाकीज़ा शफ्फाफ और पाक दिल हैनं, इनपर, इनके जिस्मों पर और इनकी रूहों पर रहमत फरमा और इनपर (अ:स) रहमते खुदा और इसकी बरकतें हों, मेरे अल्लाह! मेरे आका! तेरी इज्ज्ज़त व जलाल की क़सम की अगर तू मेरे गुनाहों की बाज़-पुरस करेगा तो मैं तेरे अफु की ख्वाहिश करूंगा, अगर तूने मेरे पस्ती पर पूछ गुच्छ की तो मई तेरी मेहरबानी की तमन्ना करूँगा, अगर तू मुझे दोज़ख में डालेगा तो मैं वहाँ के लोगों को बताऊंगा की मैं तुझ से मोहब्बत करता रहा हूँ! मेरे माबूद! मेरे सरदार! अगर तू ने अपने प्यारों और फरमा'बारदारों के सिवा किसी तो माफ़ी न दी तो गुनाहगार लोग किस से फरयाद कर सकेंगे अगर तू सिर्फ अपने वफादारों को इज्ज़त अता फरमाएगा तो खताकार लोग किस से दाद फरयाद करेंगे, और क़सम-ब-खुदा की मैं यह जानता हूँ की तुझे अपने दुश्मन की ख़ुशी की निस्बत अपने नबी (स:अ:व:व) की ख़ुशी मंज़ूर है, मेरे माबूद अगर तू मुझे जहन्नुम में डालेगा तो इसमें तेरे दुश्मनों को ही ख़ुशी होगी और अगर तूने मुझे जन्नत में दाखिल किया तो इस में तेरे नबी (स:अ:व:व) को मुसर्रत होगी! ऐ अल्लाह! मैं सवाली हूँ तुझ से की मेरे दिल को अपनी मोहब्बत से ओने रोब से, और पानी किताब की तस्दीक से भर दे, नीज मेरे दिल को ईमान खौफ और शौक़ से पुर कर दे, ऐ बुज्रुर्गी और इज्ज़त के मालिक! मेरे लिए अपनी हुजूरी महबूब बना और मुझ से मुलाक़ात को महबूब रख, और मेरे लिए अपनी मुलाक़ात को खुश कुशादगी और फख्र व इज्ज़त का ज़रिया बना, ऐ माबूद मुझे गुज़रे हुए नेक लोगों से मुल्हाक फरमा दे और मौजूदा नेक लोगों में शामिल कर दे, मेरे लिए नेकोकारों का रास्ता मुक़र्रर कर दे, और मेरे नफस के बारे में मेरी मदद कर जैसे तू अपने नेक बन्दों की इनके नफ्सों पर मदद फरमाता है,  मेरे अमल का अंजाम खैर के साथ कर, और अपनी रहमत से इसके सवाब में मुझे जन्नत अता फरमा और जो नेक अमल तूने मुझे अता किया है इसपर मुझ को साबित क़दम रख! ऐ पालने वाले! और जिस बुराई से मुझे निकाला है इसकी तरफ न पलटा, ऐ जहानों के परवरदिगार, ऐ माबूद मैं तुझ से वो ईमान माँगता हूँ जो तेरे हुज़ूर मेरी पेशी से पहले ख़तम न हो, मुझे ज़िंदा रखता है तो इसपर ज़िंदा रख और मौत देनी है तो इसी पर मौत दे, जब मुझे उठाये तो इसी पर उठा खडा कर और मेरे दिल को दीन में दिखा दे, शक और सताइश तलबी से पाक रख, यहाँ तक की मेरा अमल तेरे लिए ख़ास हो जाए, ऐ माबूद, मुझे अपने दीन की पहचान अपने हुक्म की समझ और अपने इल्म की सूझ बूझ इनायत फरमा और मुझे अपनी रहमत के दोनों हिस्से दे  और ऐसी परहेज़गारी दे जो मुझे तेरी नाफ़रमानी से रोके और मेरे चेहरे को अपने नूर से रौशन फरमा, मेरी चाहत इसमें करार दे जो तेरे पास है, और मुझे अपनी राह में और अपने रसूल साल-अल्लाहो अलैहि व आलिहि! ऐ माबूद! मैं सुस्ती, बाद-दिली, परेशानीबुजदिली, कंजूसी, गफलत, संगदिली, ख्वारी और फ़िक्र व फाका से तेरी पनाह लेता हूँ और तमाम सख्तियों और बे-हयाई के के ज़ाहिर और पोशीदा कामों से तेरी पनाह लेता हूँ, और तेरी पनाह लेता हूँ सैर न होने वाले नफस पर न होने वाले शिकं पर, न डरने वाले दिल, सुनी न जाने वाली दुआ, और फायेदा न देने वाले काम से, उअर तेरी पनाह लेता हूँ ऐ पालने वाले अपने नफस, अपने दीं, अपने माल, और जो तूने मुझे दिया है इसमें रांदे  हुए शैतान से, बेशक तो सुनने जाने वाला है, ऐ माबूद ! सच तो यह है की तुझ से मुझे कोई पनाह नहीं दे सकता न ही तेरे सिवा कोई पनाहगाह पाता हूँ बस मेरे नफस को अपनी तरफ के किसी अज़ाब में न दाल, और न मुझे किसी तबाही की तरफ पलटा , और न मुझे दर्दनाक अज़ाब की तरफ रवाना कर! ऐ माबूद! मेरा अमल कबूल फरमा, मेरे ज़िक्र को बुलंद कर, मेरे मोकाम को ऊंचा कर और मेरे गुनाह मिटा दे, मुझे मेरे गुनाहों के साथ याद न फरमा! और मेरे बैठने का सवाब, मेरी गुफ्तगू का सवाब, मेरी दुआ का सवाब अपनी खुशनूदी व जन्नत के शक्ल में दे, और ऐ पालने वाले! वो सब कुछ दे जो मैंने माँगा है और अपने फज़ल से इसमें इज़ाफा कर दे, बेशक मई तेरी चाहत रखता हूँ ऐ जहानों के पालने वाले! ऐ माबूद! बेशक तूने अपनी किताब में यह हुक्म नाजिल किया है की जो हम पर ज़ुल्म करें इसे माफ़ कर दें ज़रूर हमने अपने नफ्सों पर ज़ुल्म किया तो हमें माफ़ फरमा, यकीनन तू हम से ज्यादा इसका अहल है, तूने हमें हुक्म दिया की हम सवाली को ओने दरवाजों से न हटायें और मैं तेरे हुज़ूर सवाली बन के आया हूँ बस मुझे दूर न कर मगर जब मेरी हाजत पूरी कर दे! तूने हमें हुक्म दिया की जो अफराद हमारे गुलाम हैं हम इनपर एहसान करें! और हम तेरे गुलाम हैं बस हमारी गर्दनें आग से आज़ाद फरमा! ऐ वक्ते मुसीबत मेरी पनाहगाह, ऐ सख्ती के हंगाम, मेरे फरयाद रस तुझ से फरयाद करता हूँ और तुझ से दाद ख्वाह  हूँ मैं पनाह चाहता हूँ तेरी, न किसी और की और सिवाए तेरे किसी से कशाइश का तालिब नहीं हूँ, बस मेरी फरयाद सुन और रिहाई दे ऐ वो जो कैदी को छुड़ाता है और बहुत सारे गुनाह माफ़ करता है, मेरे थोड़े अमल को कबूल फरमा और मेरे बहुत सारे गुनाह माफ़ कर दे, बेशक तू बहुत रहम करने वाला बहुत बख्शने वाला है! ऐ माबूद! मैं तुझ से ऐसा ईमान व यकीन माँगता हूँ जो मेरे दिल में जमा रहे यहाँ तक की मैं समझूं की मुझे कोई चीज़ नहीं पहुँचती सिवाए इसके जो तूने मेरे लिए लिखी है और मुझे इस जिंदगी पर शाद रख जो तूने मेरे लिए करार दी, ऐ सब से ज्यादा रहम करने वाले!

अल्ला हुम्मा  सल्ली अला मोहम्मद व आले मोहम्मद

 

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