मंगल का दिन﴿

मंगल - हज़रत अली (अ:स) की मुनाजात         |         मंगल - हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अ:स) की दुआ  
मंगल -ईमाम ज़ैनुल आबेदीन, मोहम्मद बाक़र और जाफ़र सादीक (अ:स) की ज़यारत      |     मंगल की रात में - दुआ तवस्सुल    

ऑन लाइन सुनें       |      Mp3    |     PDF   | Mp3 -1 |Mp3 -2 |  Video  | Video Abtv 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन  आले मोहम्मद.

सब तारीफ़ अल्लाह के लिये है और वही तारीफ़ का हक़दार और वही इसका मुस्तहेक़ है। ऐसी तारीफ़ जोकसीर व फ़रावां हो और मैं अपने ज़मीर की बुराई से उसके दामन में पनाह मांगता हूं और बेशक नफ़्स बहुत ज़्यादा बुराई पर उभारने वाला है मगर यह के मेरा परवरदिगार रहम करे और मैं अल्लाह ही के ज़रिये इस शैतान के शर व फ़साद से पनाह चाहता हूं जो मेरे लिये गुनाह पर गुनाह बढ़ाता जा रहा है और मैं हर सरकश, बदकार और ज़ालिम बादशाह और चीरादस्त दुश्मन से उसके दामने हिमायत में पनाह गुज़ीन हूं। बारे इलाहा! मुझे अपने लश्कर में क़रार दे क्योंके तेरा लश्कर ही ग़ालिब व फ़तेहमन्द है और मुझे अपने गिरोह में क़रार दे क्योंके तेरा गिरोह ही हर लेहाज़ से बेहतरी पाने वाला है और मुझे अपने दोस्तों में से क़रार दे क्योंके तेरे दोस्तों को न कोई अन्देशा होता है और न वह अफ़सर्दा व ग़मगीन होते हैं। ऐ अल्लाह! मेरे लिये मेरे दीन को आरास्ता कर दे इसलिये के वह मेरे हर मामले में हिफ़ाज़त का ज़रिया है और मेरी आख़ेरत को भी संवार दे क्योंके वह मेरी मुस्तक़िल मन्ज़िल और दिनी व फ़रोमाया लोगों से (पीछा छुड़ाकर) निकल भागने की जगह है और मेरी ज़िन्दगी को हर नेकी में इज़ाफ़े का बाएस और मेरी मौत को हर रन्ज व तकलीफ़ से राहत व सुकून का ज़रिया क़रार दे। ऐ अल्लाह! मोहम्मद (स0) जो नबीयों (अ0) के ख़ातम और पैग़म्बरों के सिलसिले के फ़र्दे आखि़र हैं उन पर और उनकी पाक व पाकीज़ा आल (अ0) और बरगुज़ीदा असहाब पर रहमत नाज़िल फरमा और मुझे इस रोज़े सेशम्बाा में तीन चीज़ें अता फ़रमा। वह यह के मेरे किसी गुनाह को बाक़ी न रहने दे मगर यह के उसे बख़्श दे, और न किसी ग़म को मगर यह के उसे बरतरफ़ कर दे और न किसी दुश्मन को मगर यह के उसे दूर कर दे। बिस्मिल्लाह के वास्ते से जो (अल्लाह तआला के) तमाम नामों में से बेहतर नाम (पर मुश्तमिल) है और अल्लाह तआला के नाम के वास्ते से जो ज़मीन व आसमान का परवरदिगार है, मैं तमाम नापसन्दीदा चीज़ों का दफ़िया चाहता हूं। जिनमें अव्वल दर्जे पर उसकी नाराज़गी है और तमाम पसन्दीदा चीज़ों को समेट लेना चाहता हूं। जिनमें सबसे मुक़द्दम उसकी रज़ामन्दी है ऐ फ़ज़्ल व एहसान के मालिक तू अपनी जानिब से मेरा ख़ातेमा बख़्शिश व मग़फ़ेरत पर फ़रमा।

अलहम्दो लिल्लाहे व अलहम्दो हक़क़ा'हु कमा यस'ता हिक'क़ोहु हम्दन कसीरन, व अ'ऊज़ो बेहि मिन शर्रा नफ़सी इन्ना अल'नफ़्सा 

लम्मा'रतो बे'अलसूए इल्ला मा रहेमा रब्बा, व अ'उज़ो बेहि मिन शर्रा अश'शैताने अल'लज़ी यज़ीदोनी ज़ंबन इला ज़ुंबी 

व अह'तर्ज़ो बेहि मिन कुल्ला जब्बारिन फ़ाजिर व सुल्तानिन जायरिन व अदुवन क़ाहेरिन अल्लाहुम्मा आज'अलनी मिन जुंदेका फ़'इन्ना 

जुन्दाका हुम'अल ग़ालेबुना व आज'अलनी मिन हीज़'बका हुम'अल मुफ़लेहुना व आज'अलनी मिन

औलिआ'एका फ़'इन्ना औलिया'अका ला ख़ौफ़ो अलैहिम व ला हुम यह'ज़नून, अल्लाहुम्मा अस्लेह ली दीनी फ़'इन्नहु इस्मता 

अमरी, व अस्लेह ली आख़िरती फ'इन्नहा दारो मुक़र'री , व इलैहा मं मुजावराते अल'लायमे मफ़र'री, व अज'अल 

अल'हयाता ज़या'दतन ली फ़ी कुल्ला ख़ैरिन, व अल'वफ़ातन रा'हतन ली मिन कुल्ला शर्रेन, अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन ख़ातेमीन 

अल'नबिय्येना व तमामे ईद-दते अल' मुर्सलीना अला आलेही अल'तय्येबीना अल' ताहेरीना असहाबेही अल'मुन्ता'जबीना हब   

ली फ़ी अ;'सलासाए सलासन ला तदा'अ ली ज़ंबन इल्ला ग़फ़र'तहु व ला गम्मन इल्ला अज़'हबतोहू व ला अदुवन इल्ला दफ़'अतोहु बे'बिस्मिल्लाहे 

ख़ैर अल'अस्माए, बिस्मिल्लाहे रब्बा अल'अर्ज़े व अल'समाए अस'तद-फ़ेओ कुल्ला मकरूहीन अव्वालोहु सख़'तोहू 

व अस्तज-लेबो कुल्ला महबूबीन अव्वालोहु रज़ाहो फ़'अख़-तेमो ली मिन्का बिल'गुफराने या वलिय्या अल'एहसान   

اَلْحَمْدُ لِلّٰہِ وَالْحَمْدُ حَقُّہُ کَمَا یَسْتَحِقُّہُ حَمْداً کَثِیراً، وَأَعُوذُ بِہِ مِنْ شَرِّ نَفْسِی إِنَّ النَّفْسَ

لاَمَّارَةٌ بِالسُّوءِ إِلاَّ مَا رَحِمَ رَبِّی، وَأَعُوذُ بِہِ مِنْ شَرِّ الشَّیْطَانِ الَّذِی یَزِیدُنِی ذَ نْباً إِلَی ذَ نْبِی،

وَأَحْتَرِزُ بِہِ مِنْ کُلِّ جَبَّارٍ فَاجِرٍ، وَسُلْطَانٍ جَائِرٍ، وَعَدُوٍّ قَاھِرٍ اَللّٰھُمَّ اجْعَلْنِی مِنْ جُنْدِکَ فَإِنَّ

جُنْدَکَ ھُمُ الْغَالِبُونَ وَاجْعَلْنِی مِنْ حِزْبِکَ فَإِنَّ حِزْبَکَ ھُمُ الْمُفْلِحُونَ، وَاجْعَلْنِی مِنْ

أَولِیَائِکَ فَإِنَّ أَوْ لِیائَکَ لاَ خَوْفٌ عَلَیْھِمْ وَلاَ ھُمْ یَحْزَنُونَ، اَللّٰھُمَّ أَصْلِحْ لِی دِینِی فَإِنَّہُ عِصْمَةُ 

أَمْرِی، وَأَصْلِحْ لِی آخِرَتِی فَإِنَّہا دَارُ مَقَرِّی، وَ إِلَیْھَا مِنْ مُجا وَ رَةِ اللِّئَامِ مَفَرِّی، وَاجْعَلِ

الْحَیَاةَ زِیادَةً لِی فِی کُلِّ خَیْرٍ، و َالْوَ فَاةَ رَاحَةً لِی مِنْ کُلِّ شَرٍّ، اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی مُحَمَّدٍ خاتَمِ

النَّبِیِّینَ،وَتَمَامِ عِدَّةِ الْمُرْسَلِینَ، وَعَلَی آلِہِ الطَّیِّبِینَ الطَّاھِرِینَ، وَأَصْحَابِہِ الْمُنْتَجَبِینَ،وَھَبْ 

لِی فِی الثُّلاثَاءِ ثَلاَثاً لاَتَدَعْ لِی ذنْباً إِلاَّ غَفَرْتَہُ وَلاَ غَمّاً إِلاّ أَذْھَبْتَہُ، وَلاَ عَدُوّاً إِلاَّ دَفَعْتَہُ، بِبِسْمِ 

اللهِ خَیْرِ الاَسْمَاءِ، بِسْمِ اللهِ رَبِّ الْاَرْضِ وَالسَّماءِ، أَسْتَدْفِعُ کُلَّ مَکْرُوہٍ أَوَّلُہُ سَخَطُہُ،

وَأَسْتَجْلِبُ کُلَّ مَحْبُوبٍ أَوَّلُہُ رِضَاہُ، فَاخْتِمْ لِی مِنْکَ بِالْغُفْرانِ یَا وَ لِیَّ الْاِحْسَانِ ۔

अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन  आले मोहम्मद.

मंगल की शाम के अमाल 

इस शाम के अमाल में 2 रक्'अत नमाज़ है जिसकी पहली रक्'अत में सुराः हम्द के बाद एक बार सुराः क़द्र और फिर दूसरी रक्'अत में सुराः हम्द के बाद सुराः तौहीद की 7 बार तिलावत करें, और फिर सलाम फेर लें!   

मंगल की शाम का पहला अमाल 

इस शाम के अमाल में 2 रक्'अत नमाज़ है दोनों रक्'अतों में सुराः हम्द के बाद 3-3 बार सुराः तौहीद और सुराः फ़लक़ फिर 1 बार सुराः  नास की तिलावत करें 

मंगल की शाम का दूसरा अमाल 

यह अमाल रसूल ख़ुदा (स:अ:व:व) से भी रिवायत किया गया है के जो शख्स मंगल के दिन 6 रक्'अत नमाज़ बजा लाये जिसके हर रक्'अत में सुराः हम्द और फिर सुराः बक़रा की आयत 285 से 286 तक पढ़े और फिर सुराः ज़िल्ज़ाल (सुराः-99) की तिलावत करे तो अल्लाह उसके सारे गुनाहों को माफ़ कर देगा और उसको हर बुराइयों से ऐसा पाक कर देगा जैसे वो अभी पैदा हुआ हो!

नमाज़ के बाद की ताकीबात (दुआ) 

ताकीबात मुश्तरका  दुआ-नमाज़ फ़ज्र के बाद दुआ-नमाज़ ज़ोहर के बाद दुआ-नमाज़  असर के बाद दुआ-नमाज़  मग़रिब  के बाद दुआ-नमाज़ ईशा के बाद

रोज़ाना की दुआ व ज़यारत 

जुमा  सनीचर  ईतवार सोमवार  मंगल  बुध  जुमेरात 
 
 

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

कृपया अपना सुझाव  भेजें

ये साईट कॉपी राईट नहीं है !