दुआए रोज़े चहारशम्बा - बुध का दिन﴿

बुध - हज़रत अली (अ:स) की मुनाजात     |     बुध - हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अ:स) की दुआ  
बुध - ईमाम काज़ीम, ईमाम रज़ा, ईमाम तक़ी, और ईमाम नक़ी (अ:स) की ज़यारत  

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शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन  आले मोहम्मद.

तमाम तारीफ़ उस तआला के लिये है जिसने रात को पर्दा बनाया और नीन्द को आराम व राहत का ज़रिया और दिन को हरकत व अमल के लिये क़रार दिया। तमाम तारीफ़ तेरे ही लिये है के तूने मुझे मेरी ख़्वाबगाह से ज़िन्दा और सलामत उठाया। और अगर तू चाहता तो उसे दाएमी ख़्वाबगाह बना देता। ऐसी हम्द जो हमेशा हमेशा रहे, जिसका सिलसिला क़ता न हो और न मख़लूक़ उसकी गिनती का शुमार कर सके। बारे इलाहा! तमाम तारीफ़ तेरे ही लिये है के तूने पैदा किया, तो हर लेहाज़ से दुरूस्त पैदा किया। अन्दाज़ा मुक़र्रर किया और हुक्म नाफ़ि़ज़ किया, मौत दी और ज़िन्दा किया। बीमार डाला और शिफ़ा भी बख़्शी, आफ़ियत दी और मुब्तिला भी किया अैर तू अर्श पर मुतमकिन हुआ और मुल्क पर छा गया। मैं तुझसे दुआ मांगने में उस शख़्स का सा तर्ज़े अमल इख़्तियार करता हूं जिसका वसीला कमज़ोर, चाराए कार ख़त्म और मौत का हंगाम नज़दीक हो। दुनिया में उसकी उम्मीदों का दामन सिमट चुका हो और तेरी रहमत की जानिब उसकी एहतियाज शदीद हो और अपनी कोताहियों की वजह से उसे बड़ी हसरत और उसकी लग्ज़िशों और ख़ताओं की कसरत हो और तेरी बारगाह में सिद्क़े नीयत से उसकी तौबा हो चुकी हो तो अब ख़ातेमुल अम्बियाा मोहम्मद (स0) और उनकी पाक व पाकीज़ा आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और मुझे मोहम्मद (स0) सल्लल्लाहो अलैह व आलेही वसल्लम की शिफ़ाअत नसीब कर और मुझे उनकी हमनशीनी से महरूम न कर। इसलिये के तू तमाम रहम करने वालों से ज़्यादा रहम करने वाला है। बारे इलाहा! इस रोज़े चहारशम्बा मेंमेरी चार हाजतें पूरी कर दे। यह के इत्मीनान हो तो तेरी फ़रमाबरदारी में, सुरूर हो तो तेरी इबादत में, ख़्वाहिश हो तो तेरे सवाब की जानिब, और किनाराकशी हो तो उन चीज़ों से जो तेरे दर्दनाक अज़ाब का बाएस हैं। बेशक तू जिस चीज़ के लिये चाहे अपने लुत्फ़ को कार फ़रमा करता है।

अलहम्दो लिल्लाहे अल'लज़ी जा'अला अल'लैला लिबासन
व अल'नौमा सुबातन 
व जा'अला अल'नहारा नोशूरन 
लका अल'हम्दो अन' ब-अस-तनियी मिन मर'क़दी 
व लौ शे'अता जा'अल्तोहु सर्मदन 
हमदान दायमन ला यन'क़ते-ओ अबादन 
व ला यूह'सी लहू अल'ख़ला'एक़ो अदा'दन 
अल्लाहुम्मा लका अलहम्दो अन ख़ल्क़'ता फ़'सव-वैता 
व क़द-दर'ता व क़'ज़ैता व अमत-ता व अह'य्यता 
व अमरज़'ता व शफ़ै'ता   
व आफ़ियता व अब्लैता 
व अला अल'अर्शे अस्तवैता 
व अला अल'मुल्के अख़'ता-वैता 
अद'उका दुआ-अ मन ज़ाउ'फ़त वसी'लातोहू 
व अन'क़ता'अत हीलातोहु 
व अक़'तराबा अजालोहु 
व तदानीं'अ फ़ी अल'दुन्या अमालोहु 
व अश'तद-दत इला रहमतिका फ़'अक़्तोहु 
व अज़मत ले'तफ़री'तेहि हसर'तोहू 
व कसरत ज़ल'लातोहु व अश'रातोहु 
व ख़लु'सत ले'वजहेका तौ'बतोहु 
'सल्ले अला मोहम्मदीन
ख़ातेमीन नबीएना 
व आला अहलेबैतेही अल'तैय्येबीना अल' ताहेरीना 
व अर-ज़ुक़नी शफ़ा'अता मोहम्मदीन 
सल्ले अल्लाहो अलैहे व आलेही 
व तह'रिमनी सोह'बतोहू 
इन्नका अन्ता आर'हमर राहेमीना 
अल्लाहुम्मा उक़ज़ ली फ़ी अल'अर्बा'आए अर-ब-अन

इज'अल क़ुव्वती फ़ी ता'अतेका 

व नशा'ती'ई फ़ी इबा'दतेका 

व रग़बति फ़ी सवाबेका 

व ज़ुहदी'ई फ़ीमा यूजेबो ली अलीमा इक़ाबिका 

इन्नका लतीफ़ों लेमा तशाओ     

 

 

الْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي جَعَلَ ٱللَّيلَ لِبَاساً

وَٱلنَّوْمَ سُبَاتاً

وَجَعَلَ ٱلنَّهَارَ نُشُوراً

لَكَ ٱلْحَمْدُ انْ بَعَثْتَنِي مِنْ مَرْقَدِي

وَلَوْ شِئْتَ جَعَلْتَهُ سَرْمَداً

حَمْداً دَائِماً لاَ يَنْقَطِعُ اَبَداً

وَلاَ يُحْصِي لَهُ ٱلخَلائِقُ عَدَداً

اَللَّهُمَّ لَكَ ٱلْحَمْدُ انْ خَلَقْتَ فَسَوَّيْتَ

وَقَدَّرْتَ وَقَضَيْتَ

وَ امَتَّ وَ احْيَيْتَ

وَ امْرَضْتَ وَشَفَيْتَ

وَعَافَيْتَ وَ ابْلَيْتَ

وَعَلَىٰ ٱلْعَرْشِ ٱسْتَوَيْتَ

وَعَلَىٰ ٱلْمُلْكِ ٱحْتَوَيْتَ

ادْعُوكَ دُعَاءَ مَنْ ضَعُفَتْ وَسِيلَتُهُ

وَٱنْقَطَعَتْ حِيلَتُهُ

وَٱقْتَرَبَ اجَلُهُ

وَتَدَانَىٰ فِي ٱلدُّنْيَا امَلُهُ

وَٱشْتَدَّتْ إِلَىٰ رَحْمَتِكَ فَاقَتُهُ

وَعَظُمَتْ لِتَفْرِيطِهِ حَسْرَتُهُ

وَكَثُرَتْ زَلَّتُهُ وَعَثْرَتُهُ

وَخَلُصَتْ لِوَجْهِكَ تَوْبَتُهُ

فَصَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ

خَاتَمِ النَّبِيّينَ

وَعَلَىٰ اهْلِ بَيْتِهِ ٱلطَّيِّبِينَ ٱلطَّاهِرِينَ

وَٱرْزُقْنِي شَفَاعَةَ مُحَمَّدٍ

صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ

وَلاَ تَحْرِمْنِي صُحْبَتَهُ

إِنَّكَ انْتَ ارْحَمُ ٱلرَّاحِمِينَ

اَللَّهُمَّ ٱقْضِ لِي فِي ٱلارْبِعَاءِ اَرْبَعاً

إِجْعَلْ قُوَّتِي فِي طَاعَتِكَ

وَنَشَاطِي فِي عِبَادَتِكَ

وَرَغْبَتِي فِي ثَوَابِكَ

وَزُهْدِي فِيمَا يُوجِبُ لِي الِيمَ عِقَابِكَ

إِنَّكَ لَطِيفٌ لِمَا تَشَاءُ

अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन  आले मोहम्मद.

बुध की शाम के अमाल 

इस शाम के अमाल में 2 रक्'अत नमाज़ है जिसकी दोनों रक्'अत में सुराः हम्द के बाद 1-1 बार आयत अल'कुर्सी, सुराः क़द्र, सुराः नसर  और इसके बाद सुराः तौहीद की 3 बार तिलावत करें, और फिर सलाम फेर लें! इंशाअल्लाह अल्लाह त'आला इस शख़स के सारे गुनाहों को माफ़ कर देगा!    

 

बुध की शाम का पहला अमाल 
इस शाम के अमाल में 2 रक्'अत नमाज़ है दोनों रक्'अतों में सुराः हम्द के बाद एक मरतबा सुराःज़िल्ज़ाल और फिर बार सुराः तौहीद की तिलावत करें! जो भ इस नमाज़ को पढ़ेगा, अल्लाह उसके क़ब्र में क़यामत तक रौशनी कर देगा! 

बुध की शाम का दूसरा अमाल 

यह अमाल रसूल ख़ुदा (स:अ:व:व) से भी रिवायत किया गया है के जो शख्स बुध के दिन 4 रक्'अत नमाज़ बजा लाये जिसके हर रक्'अत में सुराः हम्द और इसके बाद सुराः तौहीद और सुराः क़द्र की तिलावत करे तो अल्लाह उसकी तौबा क़बूल करेगा, उसके सारे गुनाहों को माफ़ कर देगा और जन्नत की हूरों से उसकी शादी करेगा!

नमाज़ के बाद की ताकीबात (दुआ) 

ताकीबात मुश्तरका  दुआ-नमाज़ फ़ज्र के बाद दुआ-नमाज़ ज़ोहर के बाद दुआ-नमाज़  असर के बाद दुआ-नमाज़  मग़रिब  के बाद दुआ-नमाज़ ईशा के बाद

रोज़ाना की दुआ व ज़यारत 

जुमा  सनीचर  ईतवार सोमवार  मंगल  बुध  जुमेरात 
 
 

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
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