ज़ीक़ाद के हर त्वार की नमाज़﴿

कुरान में जिन महीनों को हुरमत वाले महीने क़रार दिया गया है, यह इनमें से पहले महीना है! सैय्यद इब्ने ताऊस रावी हैं की ज़ीक़ाद  में तंगी दूर होने की दुआ क़बूल हो जाती है!

इस माह में ईत्वार के दिन की एक नमाज़ है, जो बड़ी फ़ज़ीलत रखती है

हज़रात रसूल अल्लाह (:स:अ:व:व) का फ़रमान है की जो शख्स इस नमाज़ को बजा लाए इसकी तौबा क़बूल होती है, गुनाह बख्शे जाते हैं, क़यामत में दुश्मन इस से राज़ी हो जायेंगे, इसकी मौत ईमान पर होगी और इसका दीन सलामत रहेगा! इसकी क़ब्र बड़ी और रौशन होगी, इसके वालदैन इस से राज़ी होंगे, इसके वालदैन और औलाद को मग़फ़ेरत हासिल होगी, इसके रिज़्क़ में बढ़ावा होगा, मालिकुल मौत इसकी रूह को नरमी से क़ब्ज़ करेगा और इसकी मौत आसान होगी!

इस  तरीका यह की ईत्वार के दिन ग़ुस्ल और वुज़ू करके 4 रक'अत नमाज़ (2-2 रक'अत करके) पढ़े जिसकी हर रक'अत में सूरह अल'हम्द के बाद 3 मर्तबा सूरह तौहीद और 1-1 मर्तबा सूरह फ़लक और सूरह नास की तिलावत करे ! नमाज़ का सलाम फेरने के बाद 

70 मर्तबा अस्ग़फ़ार पढ़े

ख़ुदा से बख्शीश चाहता  हुज़ूर तौबा  करता हूँ 

अस्तग़'फ़िर अल्लाहे रब्बी व आतुबो इलैहि

أَسْتَغْفِرُ اللّهَ رَبِّي وَأَتُوبُ إلَيْهِ.

फिर यह दुआ पढ़े

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ
नहीं ताक़त व क़ुव्वत मगर वही जो बुलंद व बरतर ख़ुदा से मिलती है 

ला'हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलियुल अज़ीम 

لَاْ حَوْلَ وَلَاْ قُوَّةَ اِلَّا بِاللهِ اْلعَلِیِ الْعَظِیْمِ
 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

ऐ ग़ालिब, ऐ बहुत बख्शने वाले बख्श दे मेरे गुनाह  तमाम मोमिन मर्दों और मोमिना औरतों के गुनाह क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों का बख्शने वाला नहीं है 

या अज़ीज़ो या ग़फ़्फ़ारो ईग़ फ़िरली ज़ोनूबी व ज़ोनुबे जमी'इल मोमिनीना व अल'मोमिनाते फ़'इन्नाहु ला यग़'फ़िरो ज़ुनुबा इल्ला अन्ता  

یَا عَزِیْزُ یَا غَفَّارُ اِغْفِرْلِیْ ذُنُوبِیْ وَذُنُوِبِ جَمِیعِ اِلمُوْٴمِنِیْنَ وَالْمُوٴمِنَاتِ فَاِنَّہ لَا یَغْفِرُ الذُنُوْبَ اِلَّا اَنْتَ

यह मालूम होता है की यह इस्तग़फ़ार और दुआ नमाज़ के बाद है, लिहाज़ा इनको नमाज़ की क़िर'अत में पढ़ें! मालूम रहे की जैसा की रिवायत में है की  शख़्स हुरमत वाले महीनों में से किसी एक महीने में 3 दिन यानी जुमेरात, जुमा और सनीचर को लगातार रोज़े रखेगा तो इसके लिए साल की इबादत का सवाब लिखा जाएगा! शेख़ अजल अली बिन इब्राहीम क़ुम्मी ने फरमाया की 3 हुरमत वाले महीनों में जैसे कई गुना ज़्यादा शुमार होती है वैसे ही गुनाह भी कई ज़्यादा करके लिखे जाते हैं!

सूरह अल'हम्द

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम {1} अल'हम्दो लिल्लाहि रब्बिल आलमीन {2} अर'रहमानिर रहीम {3} मालिकी यौमिद'दींन {4} इय्या का न बुदो व इय्या का नस' तइन {5} इह दिनस सिरातल मुस्तक़ीम {6} सिरातल लज़ीना अन'अमता इलैहिम ग़ैरिल मग़ज़ूबे इलैहिम वलज़' ज़ाआ लीन {7} 

सूरह तौहीद

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम - क़ुल हुवल लाहो अहद {1} अल्लाहुस् समद {2} लम यलिद वलम यूलद {3} वलम याकुल लहू कुफ़ुवन अहद {4}

सूरह फ़लक

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम - क़ुल आ'उज़ो बी'रब्बिल फ़लक़ {1} मिन शर्रा मा ख़लक़ {2} व मिन शर्रा ग़ासी-क़िन ईज़ा वक़ब {3} व मिन शर्रा नफ़्फ़ा'साति फ़िल'उक़द {4} व मिन शर्रा हासिदिन ईज़ा हसद  {5}

सूरह नास

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम - क़ुल अ'उज़ो बे रब्बिन नास {1} मालिकिन नास {2} इलाहिन नास {3} मिन शररील वस्वासिल खन्नास {4} अल'लज़ी यु'वसविसो फ़ीसो दुरिन नास {5} मीनल जिन्नते वन'नास {6}

नमाज़ के बाद की ताकीबात (दुआ) 

ताकीबात मुश्तरका  दुआ-नमाज़ फ़ज्र के बाद दुआ-नमाज़ ज़ोहर के बाद दुआ-नमाज़  असर के बाद दुआ-नमाज़  मग़रिब  के बाद दुआ-नमाज़ ईशा के बाद

रोज़ाना की दुआ व ज़यारत 

जुमा  सनीचर  ईतवार सोमवार  मंगल  बुध  जुमेरात 
 

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
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